सनातन धर्म से संबंधित प्रश्न और उत्तर

भगवान कृष्ण सात दिनों तक अन्न का एक भी दाना खाए बिना रहे। माना जाता है कि वह हर दिन औसतन आठ सर्विंग्स खाता था। अपना आभार व्यक्त करने के लिए , वृन्दावन के लोगों ने 56 व्यंजन (8 व्यंजन x 7 दिन) तैयार किए और सातवें दिन के समापन पर उन्हें प्रस्तुत किया।

जन्माष्टमी के दिन व्रत-उपवास जरूर करना चाहिए। देवकी, वासुदेव, बलदेव, नन्द, यशोदा और लक्ष्मी जी सभी का पूजन इस दिन करना चाहिए। यह व्रत रात में बारह बजे के बाद ही खोला जाता है, तब तक आप फलाहार कर सकते हैं। इसके बाद 12 बजे भगवान कृष्ण का जन्म कराया जाता है।

जन्माष्टमी वाले दिन सुबह जल्दी उठकर नहा-धोकर साफ कपड़े पहनें और घर के मंदिर में दीप जलाएं और सभी देवी-देवताओं की पूजा करें। इसके बाद लड्डू गोपाल का जलाभिषेक करें और भोग लगाएं और धूप-दीप जलाएं। फिर रात में पूजा की तैयारी करें।

नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की, कहकर भगवान कृष्ण को झूला झुलाकर घी के दीपक और धूपबत्ती से आरती उतारें। अंत में प्रसाद वितरण व ग्रहण करें और रातभर उनके मंगल भजन-कीर्तन करते हुए रतजगा करें।

दामोदर, संस्कृत के शब्द 'दम' (रज्जु) और 'उधर' (पेट) से लिया गया है, और यह उस रस्सी का प्रतीक है जिसे भगवान कृष्ण की मां ने उनकी कमर पर तब बांधा था जब वे छोटे थे।