रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र और अर्थ
जटा टवी गलज्जलप्रवाह पावितस्थले गलेऽव लम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंग मालिकाम्।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं चकारचण्डताण्डवं तनोतु नः शिव: शिवम् ॥१॥
उनके बालों से बहने वाले जल से उनका कंठ पवित्र है,
और उनके गले में सांप है जो हार की तरह लटका है,
और डमरू से डमट् डमट् डमट् की ध्वनि निकल रही है,
भगवान शिव शुभ तांडव नृत्य कर रहे हैं, वे हम सबको संपन्नता प्रदान करें।
जटाकटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि।
धगद्धगद्धगज्ज्वल ल्ललाटपट्टपावके किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम: ॥२॥
मेरी शिव में गहरी रुचि है,
जिनका सिर अलौकिक गंगा नदी की बहती लहरों की धाराओं से सुशोभित है,
जो उनकी बालों की उलझी जटाओं की गहराई में उमड़ रही हैं?
जिनके मस्तक की सतह पर चमकदार अग्नि प्रज्वलित है,
और जो अपने सिर पर अर्ध-चंद्र का आभूषण पहने हैं।
धराधरेंद्रनंदिनी विलासबन्धुबन्धुर स्फुरद्दिगंतसंतति प्रमोद मानमानसे।
कृपाकटाक्षधोरणी निरुद्धदुर्धरापदि क्वचिद्विगम्बरे मनोविनोदमेतु वस्तुनि ॥३॥
मेरा मन भगवान शिव में अपनी खुशी खोजे,
अद्भुत ब्रह्माण्ड के सारे प्राणी जिनके मन में मौजूद हैं,
जिनकी अर्धांगिनी पर्वतराज की पुत्री पार्वती हैं,
जो अपनी करुणा दृष्टि से असाधारण आपदा को नियंत्रित करते हैं, जो सर्वत्र व्याप्त है,
और जो दिव्य लोकों को अपनी पोशाक की तरह धारण करते हैं।
जटाभुजंगपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा कदंबकुंकुमद्रव प्रलिप्तदिग्व धूमुखे।
मदांधसिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे मनोविनोदद्भुतं बिंभर्तुभूत भर्तरि ॥४॥
मुझे भगवान शिव में अनोखा सुख मिले, जो सारे जीवन के रक्षक हैं,
उनके रेंगते हुए सांप का फन लाल-भूरा है और मणि चमक रही है,
ये दिशाओं की देवियों के सुंदर चेहरों पर विभिन्न रंग बिखेर रहा है,
जो विशाल मदमस्त हाथी की खाल से बने जगमगाते दुशाले से ढंका है।
सहस्रलोचन प्रभृत्यशेषलेखशेखर प्रसूनधूलिधोरणी विधूसरां घ्रिपीठभूः।
भुजंगराजमालया निबद्धजाटजूटकः श्रियैचिरायजायतां चकोरबंधुशेखरः ॥५॥
भगवान शिव हमें संपन्नता दें,
जिनका मुकुट चंद्रमा है,
जिनके बाल लाल नाग के हार से बंधे हैं,
जिनका पायदान फूलों की धूल के बहने से गहरे रंग का हो गया है,
जो इंद्र, विष्णु और अन्य देवताओं के सिर से गिरती है।
ललाटचत्वरज्वल द्धनंजयस्फुलिंगभा निपीतपंच सायकंनम न्निलिंपनायकम्।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं महाकपालिसंपदे शिरोजटालमस्तुनः ॥६॥
शिव के बालों की उलझी जटाओं से हम सिद्धि की दौलत प्राप्त करें,
जिन्होंने कामदेव को अपने मस्तक पर जलने वाली अग्नि की चिनगारी से नष्ट किया था,
जो सारे देवलोकों के स्वामियों द्वारा आदरणीय हैं,
जो अर्ध-चंद्र से सुशोभित हैं।
करालभालपट्टिका धगद्धगद्धगज्ज्वल द्धनंजया धरीकृतप्रचंड पंचसायके।
धराधरेंद्रनंदिनी कुचाग्रचित्रपत्र कप्रकल्पनैकशिल्पिनी त्रिलोचनेरतिर्मम ॥७॥
मेरी रुचि भगवान शिव में है, जिनके तीन नेत्र हैं,
जिन्होंने शक्तिशाली कामदेव को अग्नि को अर्पित कर दिया,
उनके भीषण मस्तक की सतह डगद् डगद्... की घ्वनि से जलती है,
वे ही एकमात्र कलाकार है जो पर्वतराज की पुत्री पार्वती के स्तन की नोक पर,
सजावटी रेखाएं खींचने में निपुण हैं।
नवीनमेघमंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर त्कुहुनिशीथनीतमः प्रबद्धबद्धकन्धरः।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिंधुरः कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥८॥
भगवान शिव हमें संपन्नता दें,
वे ही पूरे संसार का भार उठाते हैं,
जिनकी शोभा चंद्रमा है,
जिनके पास अलौकिक गंगा नदी है,
जिनकी गर्दन गला बादलों की पर्तों से ढंकी अमावस्या की अर्धरात्रि की तरह काली है।
प्रफुल्लनीलपंकज प्रपंचकालिमप्रभा विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्।
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥९॥
मैं भगवान शिव की प्रार्थना करता हूं, जिनका कंठ मंदिरों की चमक से बंधा है,
पूरे खिले नीले कमल के फूलों की गरिमा से लटकता हुआ,
जो ब्रह्माण्ड की कालिमा सा दिखता है।
जो कामदेव को मारने वाले हैं, जिन्होंने त्रिपुर का अंत किया,
जिन्होंने सांसारिक जीवन के बंधनों को नष्ट किया, जिन्होंने बलि का अंत किया,
जिन्होंने अंधक दैत्य का विनाश किया, जो हाथियों को मारने वाले हैं,
और जिन्होंने मृत्यु के देवता यम को पराजित किया।
अखर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्।
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥१०॥
मैं भगवान शिव की प्रार्थना करता हूं, जिनके चारों ओर मधुमक्खियां उड़ती रहती हैं
शुभ कदंब के फूलों के सुंदर गुच्छे से आने वाली शहद की मधुर सुगंध के कारण,
जो कामदेव को मारने वाले हैं, जिन्होंने त्रिपुर का अंत किया,
जिन्होंने सांसारिक जीवन के बंधनों को नष्ट किया, जिन्होंने बलि का अंत किया,
जिन्होंने अंधक दैत्य का विनाश किया, जो हाथियों को मारने वाले हैं,
और जिन्होंने मृत्यु के देवता यम को पराजित किया।
जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुरद्ध गद्धगद्विनिर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्।
धिमिद्धिमिद्धि मिध्वनन्मृदंग तुंगमंगलध्वनिक्रमप्रवर्तित: प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥११॥
शिव, जिनका तांडव नृत्य नगाड़े की ढिमिड ढिमिड
तेज आवाज श्रंखला के साथ लय में है,
जिनके महान मस्तक पर अग्नि है, वो अग्नि फैल रही है नाग की सांस के कारण,
गरिमामय आकाश में गोल-गोल घूमती हुई।
दृषद्विचित्रतल्पयो र्भुजंगमौक्तिकमस्र जोर्गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥१२॥
मैं भगवान सदाशिव की पूजा कब कर सकूंगा, शाश्वत शुभ देवता,
जो रखते हैं सम्राटों और लोगों के प्रति समभाव दृष्टि,
घास के तिनके और कमल के प्रति, मित्रों और शत्रुओं के प्रति,
सर्वाधिक मूल्यवान रत्न और धूल के ढेर के प्रति,
सांप और हार के प्रति और विश्व में विभिन्न रूपों के प्रति?
कदा निलिंपनिर्झरी निकुंजकोटरे वसन् विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ॥१३॥
मैं कब प्रसन्न हो सकता हूं, अलौकिक नदी गंगा के निकट गुफा में रहते हुए,
अपने हाथों को हर समय बांधकर अपने सिर पर रखे हुए,
अपने दूषित विचारों को धोकर दूर करके, शिव मंत्र को बोलते हुए,
महान मस्तक और जीवंत नेत्रों वाले भगवान को समर्पित?
इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं पठन्स्मरन् ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथागतिं विमोहनं हि देहिनां सुशंकरस्य चिंतनम् ॥१६॥
इस स्तोत्र को, जो भी पढ़ता है, याद करता है और सुनाता है,
वह सदैव के लिए पवित्र हो जाता है और महान गुरु शिव की भक्ति पाता है।
इस भक्ति के लिए कोई दूसरा मार्ग या उपाय नहीं है।
बस शिव का विचार ही भ्रम को दूर कर देता है।
अन्य संबंधित पोस्ट और लेख
षटतिला एकादशी: भगवान विष्णु की कृपा का अद्भुत व्रत
षटतिला एकादशी एक हिन्दू पर्व है जो हिन्दी पंचांग के अनुसार माघ महीने के कृष्ण पक्ष (वड़ी) में मनाया जाता है। इस एकादशी का विशेष महत्व है, और इसका आयोजन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के साथ किया जाता...
जया एकादशी: भगवान विष्णु की कृपा के साथ अपने मन को शुद्ध करें
जया एकादशी, हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण एकादशी व्रत है जो फाल्गुण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस व्रत का मुख्य उद्देश्य भगवान विष्णु की पूजा करना है और भक्ति में लगकर मोक्ष...
कैलाश पर्वत एक अनसुलझा रहस्य, कैलाश पर्वत के इन रहस्यों से नासा भी हो चुका है हैरान!
कैलाश पर्वत, यह एतिहासिक पर्वत को आज तक हम सनातनी भारतीय लोग 'शिव का निवास स्थान' मानते हैं। शास्त्रों में भी यही लिखा है कि कैलाश पर शिव का वास है। किन्तु वही नासा जैसी वैज्ञानिक संस्था के लिए कैलाश...
श्रीराम चालीसा का प्रतिदिन करें पाठ, खुश होंगे हनुमान जी
| | श्री राम चालीसा | | श्री रघुबीर भक्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी। निशि दिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहीं होई।। ध्यान धरें शिवजी मन मांही। ब्रह्मा, इन्द्र पार नहीं पाहीं।। दूत तुम्हार...
कार्तिक मास की कथा
कार्तिक मास की कथा एक नगर में एक ब्राह्मण और ब्राह्मणी रहते थे। वे रोजाना सात कोस दूर गंगा,यमुना स्नान करने जाते थे। इतनी दूर आने-जाने से ब्राह्मणी थक जाती थी तब ब्राह्मणी कहती थी कि हमारे एक बेटा...
श्री मन नारायण नारायण नारायण। भजन
श्री मन नारायण नारायण नारायण। भजन भजमन नारायण नारायण नारायण।। श्री मन नारायण नारायण नारायण ,ॐ नारायण नारायण नारायण। लक्ष्मी नारायण नारायण नारायण,ॐ नारायण नारायण नारायण।। गज और...
दिवाली 2023
दिवाली, रोशनी का हिंदू त्योहार, भारत का सबसे प्रतीक्षित और सभी त्योहारों में सबसे उज्ज्वल है। दिवाली मूल शब्द "दीपावली" का संक्षिप्त रूप है, जो "दीपा" शब्द से बना है, जो दीपक या लालटेन को दर्शाता है,...
दुर्गा सप्तमी - मां कालरात्रि
शुक्रवार, 8 अप्रैल, चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन है। दुर्गा सप्तमी नवरात्रि पर्व का सातवां दिन है। इस दिन मां कालरात्रि की पूजन का विधान है । धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कालरात्रि दुष्टों...
सभी कष्टों एवं दुखो के निवारण हेतु सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड पाठ
सुन्दर काण्ड श्लोक : * शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्। रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं वन्देऽहं करुणाकरं...
आध्यात्मिक साक्षात्कार: कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत
कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है जो भगवान शिव को समर्पित है। प्रदोष व्रत का आयोजन कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी तिथि को किया जाता है, जो चंद्रमा के ग्रहण के समय का होता है।...
नवदुर्गा: माँ दुर्गा के 9 रूप ।
। । या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: । । देवी माँ या निर्मल चेतना स्वयं को सभी रूपों में प्रत्यक्ष करती है,और सभी नाम ग्रहण करती है। माँ दुर्गा के...
निर्जला एकादशी
निर्जला एकादशी बुधवार, 31 मई 2023 एकादशी तिथि प्रारंभ : 30 मई 2023 को दोपहर 01:07 बजे एकादशी तिथि समाप्त : 31 मई 2023 को दोपहर 01 बजकर 45 मिनट पर एकादशी का व्रत हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ज्येष्ठ मास...
श्री गणेश जी की आरती, पूजा और स्तुति मंत्र
श्री गणेश जी की आरती जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥ एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥ जय गणेश,...
द लेजेंड ऑफ पंडित श्रीधर
वैष्णो देवी से जुड़ी और भी कई किंवदंतियां हैं। उनमें से एक का संबंध है कि पांडवों ने पवित्र गुफा का दौरा किया और वहां एक मंदिर का निर्माण किया। उसके बाद, भयानक राक्षस राजा हिरण्यकशिपु के पुत्र...
रविवार व्रत कथा, पूजा विधि, आरती, मंत्र और महत्व,
रविवार व्रत कथा प्राचीन काल की बात किसी नगर में एक बुढ़िया रहती थी। वह हर रविवार को नियमित रूप से व्रत करती थी। इसके लिए रविवार के दिन वह सूर्योदय से पहले जागती और स्नानादि से निवृत्त होकर आंगन की...
शनिवार को शनिवार व्रत करें साढ़े साती से मिलेगी मुक्ति
शनिवार को शनिवार व्रत करें साढ़े साती से मिलेगी मुक्ति शनि देव की पूजा विधि - इस व्रत को रखने के लिए सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले स्नान कर लें - इसके बाद साफ कपड़े पहनकर पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं...
गौरी तपो व्रत
गौरी तपो व्रत हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी पार्वती ने सबसे पहले भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए यह व्रत रखा था। वर्षों की 'तपो' के बाद अंततः उसे उसकी इच्छाएँ पूरी हुईं। तब से, उनके...
बजरंग बाण
दोहा-निश्चय प्रेम प्रतीति ते बिनय करै सनमान तेहि के कारज सकल शुभ सिद्ध करै हनुमान जय हनुमन्त सन्त हितकारी सुनि लीजै प्रभु विनय हमारी जन के काज विलम्ब न कीजै आतुर दौरि महा सुख दीजै जैसे कूदि...
संकटमोचन हनुमान अष्टक
बाल समय रवि भक्षी लियो तब तीनहुं लोक भयो अंधियारों ताहि सों त्रास भयो जग को यह संकट काहु सों जात न टारो देवन आनि करी बिनती तब छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम...
महागौरी की कथा, मंत्र, ध्यान मंत्र, बीज मंत्र, स्तोत्र और आरती
शिवपुराण के अनुसार, महागौरी को आठ साल की उम्र में ही अपने पूर्व जन्म की घटनाओं का आभास होने लग गया था। उन्होंने इसी उम्र से ही भगवान शिव को अपना पति मान लिया था और शिव को पति रूप में पाने के लिए तपस्या...
मौनी अमावस्या की पौराणिक व्रत कथा एवं पूजा विधि:
मौनी अमावस्या के साथ कोई विशिष्ट "मौनी व्रत" नहीं जुड़ा है, लेकिन व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक प्रथाओं के हिस्से के रूप में इस दिन उपवास करना या कुछ पूजा विधियों में शामिल होना चुन सकते हैं। यदि आप मौनी...
कौवे की गरूड़ से दोस्ती
कौवे की गरुड़ से दोस्ती कहानी महाभारत (महाभारत) और भागवत गीता (भागवत गीता) की है। कई लोक कथाओं में भी इस कहानी (कहानी) का उल्लेख मिलता है। एक कौवे की गरुड़ से दोस्ती हो गई। दोनों काफी समय तक साथ रहे।...
देव दिवाली 2023
देव दिवाली देव दिवाली राक्षस त्रिपुरासुर पर भगवान शिव की जीत के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन त्रिपुरासुर को हराया था। इस जीत का...
भगवान शिव की कृपा: मासिक शिवरात्रि के पर्व का आध्यात्मिक दृष्टिकोण
मासिक शिवरात्रि, हिन्दू धर्म में हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली एक विशेष शिवरात्रि है। इसे मासिक शिवरात्रि कहा जाता है, क्योंकि इसे हर माह मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की...
मेरे मालिक के दरबार में लिरिक्स
मेरे मालिक के दरबार में, सब का खाता, जो कोई जैसी करनी करता, वैसा ही फल पाता, क्या साधू क्या संत गृहस्थी, क्या राजा क्या रानी, प्रभू की पुस्तक में लिक्खी है, सबकी कर्म कहानी, अन्तर्यामी अन्दर...
मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार को करें ये सिद्ध वैभव लक्ष्मी व्रत, धन- दौलत में होगी अपार बढ़ोतरी
मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार को करें ये सिद्ध वैभव लक्ष्मी व्रत, धन- दौलत में होगी अपार बढ़ोतरी वैभव लक्ष्मी के व्रत का पालन करने के नियम [1] व्रत प्रक्रिया का पालन करने वाली विवाहित...
मासिक शिवरात्रि नियम, क्या नहीं करनी चाहिए, क्या करना चाहिए और लाभ
मासिक शिवरात्रि नियम मासिक शिवरात्रि के दिन व्रत रखने के लिए कुछ नियम और आचार्य किए जाते हैं। ये नियम भक्तों को शिव पूजा के दौरान और व्रत के दिनों में अनुसरण करने के लिए होते हैं। निम्नलिखित कुछ...
बड़े मंगल की तिथियां , महत्व और पूजा विधि
मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित है। ज्येष्ठ माह में सभी मंगलवार को 'बड़ा मंगल' के रूप में जाना जाता है और हम इस दिन भगवान हनुमान की पूजा करते हैं।इस माह के सभी मंगलो में प्रत्येक मंगलवार...
हनुमान चालीसा के सभी दोहों और चौपाइयों का अर्थ हिंदी में ?
दोहा श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि । बरनउ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार । बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार॥ अर्थ : इन पंक्तियों...
छठ पूजा 2023
छठ पूजा की महत्वपूर्ण तिथियां छठ पूजा भारत के सबसे पुराने त्योहारों में से एक है। “छठ” शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द “षष्ठी” से हुई है, जिसका अर्थ छठा दिन है, जो दर्शाता है कि यह त्योहार दिवाली...
सोमवती अमावस्या
13 नवंबर को सोमवती अमावस्या है। सोमवती अमावस्या के दिन स्नान दान और पूजा पाठ का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान के बाद दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती 13 नवंबर...
तुलसी विवाह :2023
तुलसी विवाह :2023 हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को तुलसी विवाह मनाया जाता है। तुलसी को एक पवित्र पौधे के रूप में जाना जाता है। इस वर्ष तुलसी विवाह 23 नवंबर को किया जाएगा। तुलसी को...
मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कन्यापूजन की विधि और आरती
मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि इस दिन मां की पूजा अर्चना करने के लिए विशेष हवन किया जाता है. यह नवरात्रि का आखिरी दिन है तो इस दिन मां की पूजा अर्चना करने के बाद अन्य देवताओं की भी पूजा की जाती है....
गोवर्धन पूजा
पुरे भारत देश में सभी त्योहारों को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। वेदो के अनुसार गोवर्धन पूजा का हिन्दू धर्म में काफी महत्व है। यह त्यौहार कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया...
रवि प्रदोष व्रत
दिसंबर माह में भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रदोष व्रत रखा जाता है दोनों प्रदोष व्रत रविवार को होने के कारण रवि प्रदोष व्रत होंगे दिसंबर को पहला प्रदोष व्रत 10 दिसंबर, रविवार और दूसरा...
दीपावली उत्सव
दिवाली रोशनी का त्योहार है. दिवाली के दिन सभी लोग अपने घरों में दीपक जलाते हैं। लोग अपने घरों को फूलों, दीयों, रंगोली और रोशनी से सजाते हैं। दिवाली एक त्यौहार है जिसे भारत में हिंदू मनाते हैं। यह...
महालक्ष्मी व्रत: व्रत उद्यापन और पूजा विधि
महालक्ष्मी व्रत: व्रत उद्यापन और पूजा विधि महालक्ष्मी व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को शुरू होता है और आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को समाप्त होता है। यह व्रत कुल 16 दिनों तक चलता...
पांडव निर्जला एकादशी की कथा
पांडव निर्जला एकादशी की कथा दिशानिर्देश और नियामक एक बार महाराजा युधिष्ठिर के छोटे भाई भीमसेन ने पांडवों के दादा, महान ऋषि श्री व्यासदेव से पूछा कि क्या एकादशी व्रत के सभी नियमों और विनियमों...
धनतेरस का पर्व
धनतेरस से दीपावली के त्योहार का आरंभ माना जाता है। दिवाली या दीपावली रोशनी का त्योहार है। यह हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। हर किसी को इस महापर्व का साल भर इंतजार रहता है। दीपोत्सव...
देवउठनी एकादशी की पूजा का शुभ मुहूर्त
सनातन परंपरा में जिस कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की देवोत्थान या फिर कहें देवउठनी एकादशी पर श्रीहरि अपनी योगनिद्रा से जागते हैं और उसमें शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है, उसकी तारीख,...
हरे कृष्ण गोविन्द मोहन मुरारी भजन लिरिक्स
हरे कृष्ण गोविन्द मोहन मुरारी भजन लिरिक्स जो किस्मत जगत की बनावे हैं सारे तो क्यू ना चले हम उन्ही को पुकारे यही मंत्र जपते हैं ऋषि सन्त सारे यही मंत्र जपते हैं ऋषि सन्त सारे हरे कृष्ण गोविन्द...
सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कहानी
सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कहानी सूर्यवंशी कुल के राजा हरिश्चंद्र अयोध्या नगरी के एक प्रतापी राजा थे. राजा हरिश्चंद्र का जीवनकाल सतयुग से सम्बन्धित था. राजा हरिश्चंद्र की पत्नी रानी तारामती...
परिणय सूत्र में बंधे थे श्री राम-जानकी, विवाह पंचमी 2023
2023: हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार विवाह पंचमी 2023 के शुभ अवसर पर भगवान श्री राम तथा माता सीता का विवाह हुआ था| विवाह पंचमी 2023 का त्यौहार मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता...
शुक्ल प्रदोष व्रत: भगवान शिव को समर्पित महत्वपूर्ण हिन्दू व्रत
शुक्ल प्रदोष व्रत, हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण एक व्रत है जो भगवान शिव को समर्पित है। इस व्रत को शुक्ल पक्ष के प्रदोष तिथि को मनाया जाता है, जो हिन्दू पंचांग के अनुसार हर मास के दूसरे तिथि होता है।...
मकर संक्रांति दीप्तिमान आनंदोत्सव 2024
संक्रांति का अर्थ प्रत्येक महीने के अंतिम दिन को संक्रांति के रूप में जाना जाता है जो एक महीने के बढ़ने या ख़त्म होने और दूसरे की शुरुआत का प्रतीक है। यह सूर्य-देवता की पूजा है जो पृथ्वी पर जीवन...
उत्पन्ना एकादशी
उत्पन्ना एकादशी उत्पन्ना एकादशी या 'उत्तरपट्टी एकादशी' जैसा कि इसे भी जाना जाता है, हिंदू कैलेंडर के 'मार्गशीर्ष' महीने के दौरान कृष्ण पक्ष (चंद्रमा के घटते चरण) के 'एकादशी' (11वें दिन) को मनाई जाती...
आइये जाने हिन्दू संवत्सर के बारे में
क्या होता है संवत्सर ? संवत्सर मूल रूप से वर्ष ही है भारतीय प्रणाली में वर्ष को संवत्सर कहा जाता है हिंदू धर्म बौद्ध धर्म और जैन धर्म के अनुसार कई प्रकार के संवत्सर प्रचलित हैं जैसे विक्रमी संवत...
बुधवार के उपाय
बुधवार के उपाय धार्मिक मान्यता के मुताबिक बुधवार के दिन खास तौर पर शिवजी और माता पार्वती के पुत्र भगवान गणेश जी की पूजा-अर्चना का विधान है। श्री गणेशजी को विघ्नहर्ता कहा जाता है। मान्यता है कि...
मां कालरात्रि के पूजन मुहूर्त, मंत्र, पूजा विधि और आरती
शारदीय नवरात्रि का 21 अक्टूबर 2023, शनिवार को सातवां दिन है। यह दिन मां कालरात्रि को समर्पित है। मां कालरात्रि का शरीर अंधकार की तरह काला है। मां की श्वास से आग निकलती है। मां के बाल बड़े और बिखरे हुए...
काल भैरव जयंती 2023
मार्गशीर्ष माह 28 नवंबर 2023 से शुरू हो रहा है. शिव भक्तों के लिए काल भैरव जयंती बहुत खास होती है, क्योंकि इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप कालभैरव की पूजा की जाती है. ऐसी मान्यता है कि काल भैरव की पूजा करने...
