देव दिवाली 2023

देव दिवाली 2023

देव दिवाली

देव दिवाली राक्षस त्रिपुरासुर पर भगवान शिव की जीत के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन त्रिपुरासुर को हराया था। इस जीत का जश्न मनाने के लिए, देवी-देवता वाराणसी में उतरे और शहर को लाखों दीपों से जगमगा दिया। यही कारण है कि देव दिवाली को "रोशनी का त्योहार" भी कहा जाता है।

यह त्योहार तीन राक्षसों- विद्युन्माली, तारकाक्ष और वीर्यवान, जिन्हें त्रिपुरासुर के नाम से जाना जाता है, पर भगवान शिव की जीत का सम्मान करता है। त्रिपुरारी के रूप में भगवान शिव ने उन्हें एक ही बाण से मारकर खुशियां वापस ला दीं। कुछ लोग देव दिवाली को युद्ध के देवता भगवान कार्तिक की जयंती के रूप में भी मनाते हैं, और वह दिन जब भगवान विष्णु ने "मत्स्य" के रूप में अपना पहला अवतार लिया था। अपने धार्मिक महत्व के अलावा, वाराणसी में देव दिवाली देशभक्तिपूर्ण है। यह देश के लिए लड़ने वाले भारतीय सशस्त्र बलों के शहीदों को याद करता है। उत्सव गंगा किनारे घाटों पर होता है।

1. घाटों को रोशन किया गया: वाराणसी में गंगा नदी के किनारे, रविदास घाट से राजघाट तक की सीढ़ियाँ, देवी गंगा के सम्मान में लाखों दीयों से ढकी हुई हैं।
2. सजाए गए घर: वाराणसी में लोग अपने घरों को दीयों और रंगोलियों से सजाते हैं। सड़कों पर देवताओं के साथ जुलूस निकलते हैं, और नदी पर दीपक जलाए जाते हैं।
3. पारंपरिक अनुष्ठान: कार्तिक स्नान के दौरान भक्त गंगा में पवित्र डुबकी लगाते हैं। शाम को नदी में तेल के दीपक अर्पित कर दीपदान करते हैं।
4. पर्यटक आकर्षण: देव दिवाली के दौरान वाराणसी एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन जाता है। घाटों पर हजारों दीपक जलाते और नदी में तैरते हुए देखना एक मनमोहक अनुभव है।
5. गंगा आरती: देव दिवाली की शाम को प्रसिद्ध गंगा आरती होती है। 21 ब्राह्मण पंडितों और 24 युवा महिलाओं द्वारा किए गए समारोह को देखने के लिए देश भर से लोग इकट्ठा होते हैं। अनुष्ठानों में ढोल बजाना, भजन कीर्तन करना और शंख बजाना शामिल है।
6. जादुई नाव की सवारी: शाम की नाव की सवारी लोकप्रिय है, जो रोशनी वाले घाटों और आरती समारोह का अद्भुत दृश्य पेश करती है। पानी से यह एक मनमोहक दृश्य है।

देव दिवाली क्यों मनाई जाती है?

नरकासुर का वध कर उन्होंने देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कराया था. त्रिपुरासुर के आतंक से मुक्त होने की खुशी में सभी देवताओं ने काशी में अनेकों दीप भी जलाकर उत्सव मनाए थे. इसलिए हर साल इसी तिथि में यानी कार्तिक पूर्णिमा और दिवाली के 15 दिन बाद देव दीपावली मनाई जाती है

ऐसा माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव त्रिपुरासुर नामक राक्षस पर विजयी हुए थे और इसलिए इस त्योहार को त्रिपुरा उत्सव के नाम से भी जाना जाता है। देव दिवाली पर पड़ने वाले अन्य त्योहार गुरु नानक जयंती और जैन प्रकाश उत्सव हैं। धार्मिक महत्व के अलावा यह दिन देशभक्ति के महत्व से भी जुड़ा है। इस दिन भारतीय सेना के उन सभी बहादुर सैनिकों को याद किया जाता है जो भारत के लिए लड़ते हुए शहीद हो गए और उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। वाराणसी में शहीदों को श्रद्धांजलि स्वरूप पुष्पांजलि अर्पित की गई। यह आयोजन गंगा सेवा निधि द्वारा भव्य स्तर पर आयोजित किया जाता है। देशभक्ति के गीत गाए जाते हैं और तीन भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा अंतिम पोस्ट के साथ कार्यक्रम का समापन किया जाता है।

देव दिवाली कब है?

देव दीपावली, जैसा कि इसे भी कहा जाता है, दिवाली के 15 दिन बाद कार्तिक के चंद्र-सौर महीने में पूर्णिमा की रात को आती है। इस दिन को कार्तिक पूर्णिमा के नाम से भी जाना और मनाया जाता है। देव दीपावली का पर्व कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार इस साल 26 नवंबर को कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि है, इसलिए देव दीपावली का पर्व इस साल 26 नवंबर को मनाया जाएगा।

देव दिवाली पर क्या करें?

इस त्योहार पर, भक्त गंगा में पवित्र स्नान करते हैं जिसे कार्तिक स्नान के रूप में जाना जाता है। इसके बाद दीप दान किया जाता है, यानी देवी गंगा के प्रति श्रद्धा के प्रतीक के रूप में तेल के दीपक चढ़ाए जाते हैं। गंगा आरती इस धार्मिक उत्सव का एक प्रमुख आकर्षण है जिसे 24 पुजारियों और 24 युवा लड़कियों द्वारा अत्यंत पवित्रता और भक्ति के साथ किया जाता है।

देव दिवाली कैसे मनाई जाती है?

बनारस या वाराणसी में देव दिवाली एक उत्सव है जो अपनी भव्यता और भव्यता के लिए जाना जाता है। इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने के लिए हजारों श्रद्धालु पवित्र शहर में आते हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देव दीपावली के दिन दीप दान करने का विशेष महत्व माना गया है इस दिन दीपदान करने से भगवान प्रसन्न होते हैं मान्यता है कि देव दीपावली के दिन नदी के किनारे जाकर दीप दान करना चाहिए. ऐसा करने से जीवन की परेशानियां समाप्त होती हैं

यह त्यौहार वाराणसी और गुजरात के कुछ हिस्सों में बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों को रंगोली से सजाते हैं और हर कोने में तेल के दीपक जलाते हैं। कुछ घरों में अखंड रामायण का पाठ भी किया जाता है और उसके बाद भोग वितरित किया जाता है।

देव दीपावली महोत्सव की मुख्य परंपरा चंद्रमा के दर्शन पर मनाई जाती है। गंगा नदी के सबसे दक्षिणी तट यानी रवि घाट से लेकर राज घाट तक फैले गंगा नदी के पूरे घाट की सीढ़ियाँ गंगा नदी और अवतरित देवी-देवताओं को सम्मान देने के लिए छोटे-छोटे दीयों (मिट्टी के दीपक) से खूबसूरती से रोशन की जाती हैं।

अन्य संबंधित पोस्ट और लेख

#

जानिए क्यों ? गोस्वामी तुलसीदास ने कारावास में 'लिखी हनुमान चालीसा' !

एक बार अकबर ने गोस्वामी जी को अपने दरबार में बुलाया और उनसे कहा कि मुझे भगवान श्रीराम से मिलवाओ। तब तुलसीदास जी ने कहा कि भगवान श्री राम सिर्फ अपने भक्तों को ही दर्शन देते हैं। यह सुनते ही अकबर ने...

#

शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा, व्रत विधि और उद्यापन आरती

कथा एक बुढ़िया थी जिसके सात बेटे थे। उनमे से छह कमाते थे और एक न कमाने वाला था। वह बुढ़िया उन छ: को अच्छी रसोई बनाकर बड़े प्रेम से खिलाती पर सातवें को बचा-खुचा झूठन खिलाती थी। परन्तु वह भोला...

#

मौनी अमावस्या की पौराणिक व्रत कथा एवं पूजा विधि:

मौनी अमावस्या के साथ कोई विशिष्ट "मौनी व्रत" नहीं जुड़ा है, लेकिन व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक प्रथाओं के हिस्से के रूप में इस दिन उपवास करना या कुछ पूजा विधियों में शामिल होना चुन सकते हैं। यदि आप मौनी...

#

श्री मन नारायण नारायण नारायण। भजन

श्री मन नारायण नारायण नारायण। भजन भजमन नारायण नारायण नारायण।। श्री मन नारायण नारायण नारायण ,ॐ नारायण नारायण नारायण। लक्ष्मी नारायण नारायण नारायण,ॐ नारायण नारायण नारायण।। गज और...

#

हरे कृष्ण गोविन्द मोहन मुरारी भजन लिरिक्स

हरे कृष्ण गोविन्द मोहन मुरारी भजन लिरिक्स जो किस्मत जगत की बनावे हैं सारे तो क्यू ना चले हम उन्ही को पुकारे यही मंत्र जपते हैं ऋषि सन्त सारे यही मंत्र जपते हैं ऋषि सन्त सारे हरे कृष्ण गोविन्द...

#

बड़े मंगल की तिथियां , महत्व और पूजा विधि

मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित है। ज्येष्ठ माह में सभी मंगलवार को 'बड़ा मंगल' के रूप में जाना जाता है और हम इस दिन भगवान हनुमान की पूजा करते हैं।इस माह के सभी मंगलो में प्रत्येक मंगलवार...

#

सत्यनारायण व्रत कथा

सत्यनारायण व्रत कथा का पहला अध्याय एक समय की बात है नैषिरण्य तीर्थ में शौनिकादि, 88,000 ऋषियों ने श्री सूतजी से पूछा हे प्रभु! इस कलियुग में वेद विद्या रहित मनुष्यों को प्रभु भक्ति किस प्रकार मिल सकती...

#

मां महागौरी की चालीसा

मां महागौरी की चालीसा मन मंदिर मेरे आन बसो, आरम्भ करूं गुणगान, गौरी माँ मातेश्वरी, दो चरणों का ध्यान। पूजन विधी न जानती, पर श्रद्धा है आपर, प्रणाम मेरा स्विकारिये, हे माँ प्राण आधार। नमो नमो हे...

#

आध्यात्मिक साक्षात्कार: कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत

कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है जो भगवान शिव को समर्पित है। प्रदोष व्रत का आयोजन कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी तिथि को किया जाता है, जो चंद्रमा के ग्रहण के समय का होता है।...

#

बजरंग बाण

दोहा-निश्चय प्रेम प्रतीति ते बिनय करै सनमान तेहि के कारज सकल शुभ सिद्ध करै हनुमान जय हनुमन्त सन्त हितकारी सुनि लीजै प्रभु विनय हमारी जन के काज विलम्ब न कीजै आतुर दौरि महा सुख दीजै जैसे कूदि...

#

आइये जाने हिन्दू संवत्सर के बारे में

क्या होता है संवत्सर ? संवत्सर मूल रूप से वर्ष ही है भारतीय प्रणाली में वर्ष को संवत्सर कहा जाता है हिंदू धर्म बौद्ध धर्म और जैन धर्म के अनुसार कई प्रकार के संवत्सर प्रचलित हैं जैसे विक्रमी संवत...

#

पशुपति व्रत, विधि, नियम, कथा, पूजन सामग्री, मंत्र, उद्यापन और फायदे

पशुपति व्रत कैसे करते हैं ,विधि? यदि आप पशुपति व्रत का पालन करने का इरादा रखते हैं, तो ऐसा करने का उचित तरीका जानना महत्वपूर्ण है। आपकी सहायता के लिए यहां कुछ दिशानिर्देश दिए गए हैं। पशुपति का...

#

वीर हनुमाना अति बलवाना राम नाम रसियो रे,प्रभु मन बसियो रे भजन हिंदी लिरिक्स

वीर हनुमाना अति बलवाना राम नाम रसियो रे,प्रभु मन बसियो रे भजन हिंदी लिरिक्स भक्ति भजन गीत विवरण गीत: - वीर हनुमान अति बलवाना, गायक: - नरिश नरशी, गीत: - नरिश नरशी वीर हनुमाना अति बलवाना, राम नाम रसियो...

#

गौरी तपो व्रत

गौरी तपो व्रत हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी पार्वती ने सबसे पहले भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए यह व्रत रखा था। वर्षों की 'तपो' के बाद अंततः उसे उसकी इच्छाएँ पूरी हुईं। तब से, उनके...

#

शुक्राचार्य द्वारा भगवान शंकर के १०८ नामों का जप

शुक्राचार्य द्वारा भगवान शंकर के १०८ नामों का जप ॐ १. जो देवताओं के स्वामी, २. सुर-असुर द्वारा वन्दित, ३. भूत और भविष्य के महान देवता, ४. हरे और पीले नेत्रों से युक्त, ५. महाबली, ६. बुद्धिस्वरूप, ७....

#

गणेश चतुर्थी संपूर्ण व्रत कथा

एक समय की बात है कि प्रसेनजित उस मणि को पहने हुए ही कृष्णजी के साथ वन में आखेट के लिए गए। अशुचिता के कारण अश्वारूढ़ प्रसेनजित को एक शेर ने मार डाला। उस सिंह को रत्न लेकर जाते देखकर जाम्बवान ने मार...

#

भाई दूज 2023

भाई दूज दिवाली के बाद दूसरे दिन मनाया जाता है। भाई दूज का अर्थ नाम में ही दर्शाया गया है, क्योंकि यह एक भाई और एक बहन के बीच प्यार के रिश्ते को दर्शाता है। इस दिन एक बहन अपने भाई की सफलता और समृद्धि...

#

शुक्ल प्रदोष व्रत: भगवान शिव को समर्पित महत्वपूर्ण हिन्दू व्रत

शुक्ल प्रदोष व्रत, हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण एक व्रत है जो भगवान शिव को समर्पित है। इस व्रत को शुक्ल पक्ष के प्रदोष तिथि को मनाया जाता है, जो हिन्दू पंचांग के अनुसार हर मास के दूसरे तिथि होता है।...

#

दीपावली उत्सव

दिवाली रोशनी का त्योहार है. दिवाली के दिन सभी लोग अपने घरों में दीपक जलाते हैं। लोग अपने घरों को फूलों, दीयों, रंगोली और रोशनी से सजाते हैं। दिवाली एक त्यौहार है जिसे भारत में हिंदू मनाते हैं। यह...

#

गणेश चतुर्थी 2023: विनायक चतुर्दशी पूजा की तिथि, समय और मुहूर्त

गणेश चतुर्थी 2023: विनायक चतुर्दशी की तिथि, समय और मुहूर्त हिंदू कैलेंडर के अनुसार, विनायक चतुर्दशी 2023 सोमवार, 18 सितंबर को दोपहर 12:39 बजे शुरू होगी और मंगलवार, 19 सितंबर को रात 8:43 बजे समाप्त होगी। इसके अलावा,...

#

धनतेरस का पर्व

धनतेरस से दीपावली के त्‍योहार का आरंभ माना जाता है। दिवाली या दीपावली रोशनी का त्योहार है। यह हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। हर किसी को इस महापर्व का साल भर इंतजार रहता है। दीपोत्सव...

#

माँ काली चालीसा

॥दोहा॥ जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार । महिष मर्दिनी कालिका, देहु अभय अपार ॥ ॥ चौपाई ॥ अरि मद मान मिटावन हारी । मुण्डमाल गल सोहत प्यारी ॥ अष्टभुजी सुखदायक माता । दुष्टदलन जग में विख्याता...

#

श्रीराम चालीसा का प्रतिदिन करें पाठ, खुश होंगे हनुमान जी

| | श्री राम चालीसा | | श्री रघुबीर भक्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी। निशि दिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहीं होई।। ध्यान धरें शिवजी मन मांही। ब्रह्मा, इन्द्र पार नहीं पाहीं।। दूत तुम्हार...

#

षटतिला एकादशी: भगवान विष्णु की कृपा का अद्भुत व्रत

षटतिला एकादशी एक हिन्दू पर्व है जो हिन्दी पंचांग के अनुसार माघ महीने के कृष्ण पक्ष (वड़ी) में मनाया जाता है। इस एकादशी का विशेष महत्व है, और इसका आयोजन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के साथ किया जाता...

#

गुरुवार व्रत की कथा और आरती

गुरूवार व्रत की कथा प्राचीन समय की बात है. किसी राज्य में एक बड़ा प्रतापी तथा दानी राजा राज्य करता था. वह प्रत्येक गुरूवार को व्रत रखता एवं भूखे और गरीबों को दान देकर पुण्य प्राप्त करता था परन्तु...

#

शनिवार को शनिवार व्रत करें साढ़े साती से मिलेगी मुक्ति

शनिवार को शनिवार व्रत करें साढ़े साती से मिलेगी मुक्ति शनि देव की पूजा विधि - इस व्रत को रखने के लिए सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले स्नान कर लें - इसके बाद साफ कपड़े पहनकर पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं...

#

छठ पूजा 2023

छठ पूजा की महत्वपूर्ण तिथियां छठ पूजा भारत के सबसे पुराने त्योहारों में से एक है। “छठ” शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द “षष्ठी” से हुई है, जिसका अर्थ छठा दिन है, जो दर्शाता है कि यह त्योहार दिवाली...

#

देवउठनी एकादशी की पूजा का शुभ मुहूर्त

सनातन परंपरा में जिस कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की देवोत्थान या फिर कहें देवउठनी एकादशी पर श्रीहरि अपनी योगनिद्रा से जागते हैं और उसमें शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है, उसकी तारीख,...

#

रविवार व्रत कथा, पूजा विधि, आरती, मंत्र और महत्व,

रविवार व्रत कथा प्राचीन काल की बात किसी नगर में एक बुढ़िया रहती थी। वह हर रविवार को नियमित रूप से व्रत करती थी। इसके लिए रविवार के दिन वह सूर्योदय से पहले जागती और स्नानादि से निवृत्त होकर आंगन की...

#

भगवान गणेश की आरती और चालीसा

श्री गणेश जी की चालीसा दोहा जय गणपति सदगुणसदन, कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥ चौपाई जय जय जय गणपति गणराजू। मंगल भरण करण शुभ काजू॥ जय गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक...

#

भगवान शिव की कृपा: मासिक शिवरात्रि के पर्व का आध्यात्मिक दृष्टिकोण

मासिक शिवरात्रि, हिन्दू धर्म में हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली एक विशेष शिवरात्रि है। इसे मासिक शिवरात्रि कहा जाता है, क्योंकि इसे हर माह मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की...

#

मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कन्यापूजन की विधि और आरती

मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि इस दिन मां की पूजा अर्चना करने के लिए विशेष हवन किया जाता है. यह नवरात्रि का आखिरी दिन है तो इस दिन मां की पूजा अर्चना करने के बाद अन्य देवताओं की भी पूजा की जाती है....

#

सोमवती अमावस्या

13 नवंबर को सोमवती अमावस्या है। सोमवती अमावस्या के दिन स्नान दान और पूजा पाठ का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान के बाद दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती 13 नवंबर...

#

मौन श्रद्धा: मौनी अमावस्या परंपराएँ

मौनी अमावस्या अपने आध्यात्मिक महत्व के लिए मनाई जाती है और विभिन्न धार्मिक मान्यताओं और प्रथाओं से जुड़ी है। मौनी अमावस्या का उत्सव हिंदू परंपराओं में निहित है, और यह दिन कई कारणों से मनाया जाता...

#

श्री गणेश जी की आरती, पूजा और स्तुति मंत्र

श्री गणेश जी की आरती जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥ एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥ जय गणेश,...

#

शनिवार व्रत कथा, पूजा विधि, आरती और मंत्र

शनिवार व्रत कथा, पूजा विधि, आरती शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित है। शनि को कर्मफलदाता माना गया है जो लोगों को उनके अच्छे बुरे दोनों कर्मों का फल देते हैं। अगर जातक की कुंडली में...

#

मंगल भवन अमंगल हरि

हो, मंगल भवन, अमंगल हारी द्रबहु सु दसरथ, अजिर बिहारी आ, राम भगत हित नर्तन धारी सहे संकट किये साधो सुखारी सिया राम जय-जय (राम सिया राम, सिया राम जय-जय राम) हो, होइहैं सोई जो, राम रचि राखा को करि तरक, बढ़ावई...

#

छोटी दिवाली/ नरक चतुर्दशी

दीवाली से एक दिन पहले और धनतेरस एक दिन बाद नरक चौदस या नरक चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाता है. इसी दिन छोटी दिवाली भी मनाई जाती है. यह हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर पड़ती है....

#

दिवाली 2023

दिवाली, रोशनी का हिंदू त्योहार, भारत का सबसे प्रतीक्षित और सभी त्योहारों में सबसे उज्ज्वल है। दिवाली मूल शब्द "दीपावली" का संक्षिप्त रूप है, जो "दीपा" शब्द से बना है, जो दीपक या लालटेन को दर्शाता है,...

#

महाभारत में यक्ष द्वारा पूछे प्रश्न और उनके उत्तर

यक्ष प्रश्न महाभारत की प्रसिद्ध घटना है। यह अरण्य पर्व में पाया जाता है। यक्ष के प्रश्न का उत्तर देने में विफल रहने पर, नकुल, सहदेव, अर्जुन और भीम मारे जाते हैं, लेकिन जब युधिष्ठिर प्रश्नों का सही...

#

द लेजेंड ऑफ पंडित श्रीधर

वैष्णो देवी से जुड़ी और भी कई किंवदंतियां हैं। उनमें से एक का संबंध है कि पांडवों ने पवित्र गुफा का दौरा किया और वहां एक मंदिर का निर्माण किया। उसके बाद, भयानक राक्षस राजा हिरण्यकशिपु के पुत्र...

#

रघुनंदन दीनदयाल हो तुम श्रीराम तुम्हारी जय होवे

रघुनन्दन दीनदयाल हो श्री राम तुम्हारी जय होवे राजा राम तुम्हारी जय होवे दीनानाथ तुम्हारी जय होवे रघुनाथ तुम्हारी जय होवे सिया राम तुम्हारी जय होवे रघुनन्दन दीनदयाल हो श्री राम तुम्हारी...

#

बिल्व या बेल पत्र का महत्व

बिल्व पत्र का भगवान शंकर को प्रिय है। बिल्व पत्र का महत्व बिल्व तथा श्रीफल नाम से प्रसिद्ध यह फल बहुत ही काम का है। यह जिस पेड़ पर लगता है वह शिवद्रुम भी कहलाता है। बिल्व का पेड़ संपन्नता का प्रतीक,...

#

पांडव निर्जला एकादशी की कथा

पांडव निर्जला एकादशी की कथा दिशानिर्देश और नियामक एक बार महाराजा युधिष्ठिर के छोटे भाई भीमसेन ने पांडवों के दादा, महान ऋषि श्री व्यासदेव से पूछा कि क्या एकादशी व्रत के सभी नियमों और विनियमों...

#

मकर संक्रांति दीप्तिमान आनंदोत्सव 2024

संक्रांति का अर्थ प्रत्येक महीने के अंतिम दिन को संक्रांति के रूप में जाना जाता है जो एक महीने के बढ़ने या ख़त्म होने और दूसरे की शुरुआत का प्रतीक है। यह सूर्य-देवता की पूजा है जो पृथ्वी पर जीवन...

#

उत्पन्ना एकादशी

उत्पन्ना एकादशी उत्पन्ना एकादशी या 'उत्तरपट्टी एकादशी' जैसा कि इसे भी जाना जाता है, हिंदू कैलेंडर के 'मार्गशीर्ष' महीने के दौरान कृष्ण पक्ष (चंद्रमा के घटते चरण) के 'एकादशी' (11वें दिन) को मनाई जाती...

#

सभी कष्टों एवं दुखो के निवारण हेतु सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड पाठ

सुन्दर काण्ड श्लोक : * शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्‌। रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं वन्देऽहं करुणाकरं...

#

मार्गशीर्ष अमावस्या 2023

मार्गशीर्ष अमावस्या 2023: तिथियां और समय इस वर्ष की अमावस्या तिथि 12 दिसंबर, 2023 को 06:26:15 बजे शुरू होती है। और 13 दिसंबर, 2023 को 05:03:23 बजे समाप्त होती है। इस दौरान, ज्योतिषियों का मानना है कि ब्रह्मांड की ऊर्जा...

#

हनुमान चालीसा के सभी दोहों और चौपाइयों का अर्थ हिंदी में ?

दोहा श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि । बरनउ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार । बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार॥ अर्थ : इन पंक्तियों...

#

जया पार्वती व्रत का महत्व, अनुष्ठान और अन्य तथ्य

जया पार्वती व्रत का महत्व, अनुष्ठान और अन्य तथ्य जया-पार्वती व्रत आषाढ़ माह में मनाया जाने वाला पांच दिवसीय अनुष्ठान है। भारत के पश्चिमी भाग, विशेषकर गुजरात की अधिकांश महिलाएँ इसे बड़ी श्रद्धा...