छठ पूजा 2023
छठ पूजा की महत्वपूर्ण तिथियां
छठ पूजा भारत के सबसे पुराने त्योहारों में से एक है। “छठ” शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द “षष्ठी” से हुई है, जिसका अर्थ छठा दिन है, जो दर्शाता है कि यह त्योहार दिवाली के बाद चंद्र माह के छठे दिन मनाया जाता है। इस दिन, भक्त डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसके लिए पूरा परिवार नदियों, तालाबों और घर में बने जलाशयों के किनारे एकत्रित होते है। चलिए जानते है चार दिवसीय छठ पर्व कब है (छठ पूजा कब है)।
17 नवंबर 2023 शुक्रवार नहाय खाय
18 नवंबर 2023 शनिवार खरना
19 नवंबर 2023 रविवार संध्या अर्घ्य
20 नवंबर 2023 सोमवार ऊषा अर्घ्य
यह पर्व चार दिनों का है। भैयादूज के तीसरे दिन से यह आरम्भ होता है। पहले दिन सेन्धा नमक, घी से बना हुआ अरवा चावल और कद्दू की सब्जी प्रसाद के रूप में ली जाती है। अगले दिन से उपवास आरम्भ होता है। व्रति दिनभर अन्न-जल त्याग कर शाम करीब ७ बजे से खीर बनाकर, पूजा करने के उपरान्त प्रसाद ग्रहण करते हैं, जिसे खरना कहते हैं। तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य यानी दूध अर्पण करते हैं। अंतिम दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य चढ़ाते हैं। पूजा में पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है; लहसून, प्याज वर्जित होता है। जिन घरों में यह पूजा होती है, वहाँ भक्तिगीत गाये जाते हैं।अंत में लोगो को पूजा का प्रसाद दिया जाता हैं।
उत्सव का स्वरूप
छठ पूजा चार दिवसीय उत्सव है। इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को तथा समाप्ति कार्तिक शुक्ल सप्तमी को होती है। इस दौरान व्रतधारी लगातार 36 घंटे का व्रत रखते हैं। इस दौरान वे पानी भी ग्रहण नहीं करते।
नहाय खाय: (17th Nov. 2023, Friday) छठ पर्व के पहले दिन को नहाय खाय कहा जाता है। इस दिन, सात्विक रूप से कद्दू-भात तैयार किया जाता है और प्रसाद स्वरुप खाया जाता है।
खरना: (18th Nov. 2023, Saturday) छठ पर्व के दूसरे दिन को खरना कहा जाता है। इस दिन घर में खीर-पूरी का प्रसाद बनता है। शाम को खरना प्रसाद खाकर व्रती सख्त उपवास रखते हैं, 36 घंटो का निर्जला व्रत शुरू करती है व्रती।
संध्या अर्घ्य: (19th Nov. 2023, Sunday) :छठ पर्व के सबसे महत्वपूर्ण है तीसरा दिन। इस दिन पुरे परिवार और व्रती सूर्य अस्त के पहले नदी तट पर एकत्रित होते हैं और अस्तचलगामी सूर्य को ‘अर्घ्य’ अर्पण करते हैं।
ऊषा अर्घ्य: (20th Nov. 2023, Monday) छठ पर्व के चौथा और आखिरी दिन है उषा अर्घ्य। इस दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पण की परंपरा है। उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद छठ व्रत संपन्न हो जाता है, और इसके बाद पारण किया जाता है।
नहाय खाय
छठ पूजा की शुरुआत नहाय खाय के साथ होती है। इस दिन व्रती स्नान ध्यान के बाद सर्वप्रथम सूर्य देव को जल अर्पित करती हैं। इसके पश्चात विधि विधान से पूजा करती हैं। पूजा समापन के पश्चात सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं। इस दिन लौकी की सब्जी खाना अनिवार्य है। अतः व्रती चावल-दाल के साथ लौकी की सब्जी जरूर खाती हैं।
खरना
छठ पूजा के दूसरे दिन को खरना मनाया जाता है। इस दिन व्रती ब्रह्म बेला में उठती हैं और सूर्य देव को प्रणाम कर दिन की शुरुआत करती हैं। नित्य कर्मों से निवृत होने के पश्चात गंगाजल युक्त पानी से स्नान करती हैं। सुविधा रहने पर नदी और सरोवर में आस्था की डुबकी लगाती हैं। इसके पश्चात विधि विधान से पूजा कर व्रत करती हैं। दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं। रात में कुल देवी-देवता के समक्ष छठ मैया की पूजा कर भोजन ग्रहण करती हैं। पूजा में खीर पूड़ी का प्रसाद भोग लगाया जाता है। व्रती खीर खाकर अगले 36 घंटे तक निर्जला उपवास करती हैं। खरना की रात्रि में छठ पूजा का प्रसाद बनाया जाता है।
डूबते सूर्य को अर्घ्य
कार्तिक शुक्ल षष्ठी को छठी मैया और सूर्य देव की पूजा-उपासना होती है। इस दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
उगते सूर्य को अर्घ्य
छठ पूजा का समापन चौथे दिन होता है। इस दिन सूर्योदय के समय उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
व्रत
छठ उत्सव के केंद्र में छठ व्रत है जो एक कठिन तपस्या की तरह है। यह छठ व्रत अधिकतर महिलाओं द्वारा किया जाता है कुछ पुरुष भी इस व्रत रखते हैं। व्रत रखने वाली महिलाओं को परवैतिन कहा जाता है। चार दिनों के इस व्रत में व्रति को लगातार उपवास करना होता है। भोजन के साथ ही सुखद शैय्या का भी त्याग किया जाता है। पर्व के लिए बनाये गये कमरे में व्रति फर्श पर एक कम्बल या चादर के सहारे ही रात बिताती हैं। इस उत्सव में शामिल होने वाले लोग नये कपड़े पहनते हैं। जिनमें किसी प्रकार की सिलाई नहीं की गयी होती है व्रति को ऐसे कपड़े पहनना अनिवार्य होता है। महिलाएँ साड़ी और पुरुष धोती पहनकर छठ करते हैं। ‘छठ पर्व को शुरू करने के बाद सालों साल तब तक करना होता है, जब तक कि अगली पीढ़ी की किसी विवाहित महिला इसके लिए तैयार न हो जाए। घर में किसी की मृत्यु हो जाने पर यह पर्व नहीं मनाया जाता है।’
ऐसी मान्यता है कि छठ पर्व पर व्रत करने वाली महिलाओं को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। पुत्र की चाहत रखने वाली और पुत्र की कुशलता के लिए सामान्य तौर पर महिलाएँ यह व्रत रखती हैं। पुरुष भी पूरी निष्ठा से अपने मनोवांछित कार्य को सफल होने के लिए व्रत रखते हैं।
छठ पूजा, भारत में सबसे प्राचीन त्योहारों में से एक है, यह त्योहार उषा, प्रकृति, जल, वायु और सूर्यदेव की बहन षष्ठी माता को समर्पित है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्र में मुख्या रूप से मनाया जाता है छठ। छठ पर्व चार दिनों का होता है।
छठ महापर्व का महत्व
सूर्य देव की पूजा: छठ पूजा में सूर्य देव की पूजा किया जाता है। भक्त अपने परिवार की सुख समृद्धि के लिए सूर्य देव से आशीर्वाद मांगने के लिए उनकी पूजा करते हैं।
फसल उत्सव:छठ पूजा का फसल उत्सव के रूप में भी महत्व है। यह फसल के बाद के मौसम के दौरान मनाया जाता है जब किसान भरपूर फसल के लिए सूर्य का आभार व्यक्त करते हैं और अपनी भूमि की उर्वरता के लिए प्रार्थना करते हैं।
आध्यात्मिक महत्व: छठ पूजा को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करने वाला त्योहार माना जाता है। भक्त कठोर उपवास रखते हैं और सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य को प्रार्थना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे मन और शरीर शुद्ध होता है और समृद्धि आती है।
सामुदायिक जुड़ाव: छठ पूजा एक समुदाय-संचालित त्योहार है, जो एकता और सामाजिक जुड़ाव पर जोर देता है। परिवार और पड़ोस अनुष्ठान करने और सामूहिक प्रार्थना करने के लिए एक साथ आते हैं।
छठ पूजा हिंदू धर्म का सबसे कठिन व्रत है। इसमें व्रती पूरे 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखते हैं। परिवार में सुख समृद्धि, रोग-ब्याधि नाश, संतान प्राप्ति, नौकरी-ब्यबसायिक उन्नति, स्वस्थ जीवन के लिए यह व्रत रखा जाता है। भक्ति और श्रद्धा के साथ छठ व्रत करने से सूर्य देव और छठी मईया की आशीर्वाद से परिवार में खुशहाली रहता है।
पौराणिक और लोक कथाएँ
छठ पूजा की परम्परा और उसके महत्त्व का प्रतिपादन करने वाली अनेक पौराणिक और लोक कथाएँ प्रचलित हैं।
रामायण से
एक मान्यता के अनुसार लंका विजय के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और माता सीता ने उपवास किया और सूर्यदेव की आराधना की। सप्तमी को सूर्योदय के समय पुनः अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था।
महाभारत से
एक अन्य मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्यदेव की पूजा शुरू की। कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे। वह प्रतिदिन घण्टों कमर तक पानी में ख़ड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य देते थे। सूर्यदेव की कृपा से ही वे महान योद्धा बने थे। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही पद्धति प्रचलित है।
कुछ कथाओं में पांडवों की पत्नी द्रौपदी द्वारा भी सूर्य की पूजा करने का उल्लेख है। वे अपने परिजनों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना और लम्बी उम्र के लिए नियमित सूर्य पूजा करती थीं।
पुराणों से
एक कथा के अनुसार राजा प्रियवद को कोई संतान नहीं थी, तब महर्षि कश्यप ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराकर उनकी पत्नी मालिनी को यज्ञाहुति के लिए बनायी गयी खीर दी। इसके प्रभाव से उन्हें पुत्र हुआ परन्तु वह मृत पैदा हुआ। प्रियवद पुत्र को लेकर श्मशान गये और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे। उसी वक्त ब्रह्माजी की मानस कन्या देवसेना प्रकट हुई और कहा कि सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न होने के कारण मैं षष्ठी कहलाती हूँ। हे! राजन् आप मेरी पूजा करें तथा लोगों को भी पूजा के प्रति प्रेरित करें। राजा ने पुत्र इच्छा से देवी षष्ठी का व्रत किया और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। यह पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को हुई थी।
छठ शुभकामना सन्देश
छठ क आज हैं पावन त्यौहार
सूरज की लाली, माँ का हैं उपवास
जल्दी से आओ अब करो न विचार
छठ पूजा का खाने तुम प्रसाद
छठ पूजा की शुभकामनाएँ
दीपावली के छठे दिन से शुरू होने वाला छठ का पर्व चार दिनों तक चलता है। इन चारों दिन श्रद्धालु भगवान सूर्य की आराधना करके वर्षभर सुखी, स्वस्थ और निरोगी होने की कामना करते हैं। चार दिनों के इस पर्व के पहले दिन घर की साफ-सफाई की जाती है।
अन्य संबंधित पोस्ट और लेख
दीपावली उत्सव
दिवाली रोशनी का त्योहार है. दिवाली के दिन सभी लोग अपने घरों में दीपक जलाते हैं। लोग अपने घरों को फूलों, दीयों, रंगोली और रोशनी से सजाते हैं। दिवाली एक त्यौहार है जिसे भारत में हिंदू मनाते हैं। यह...
निर्जला एकादशी
निर्जला एकादशी बुधवार, 31 मई 2023 एकादशी तिथि प्रारंभ : 30 मई 2023 को दोपहर 01:07 बजे एकादशी तिथि समाप्त : 31 मई 2023 को दोपहर 01 बजकर 45 मिनट पर एकादशी का व्रत हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ज्येष्ठ मास...
षटतिला एकादशी: भगवान विष्णु की कृपा का अद्भुत व्रत
षटतिला एकादशी एक हिन्दू पर्व है जो हिन्दी पंचांग के अनुसार माघ महीने के कृष्ण पक्ष (वड़ी) में मनाया जाता है। इस एकादशी का विशेष महत्व है, और इसका आयोजन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के साथ किया जाता...
रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र और अर्थ
जटा टवी गलज्जलप्रवाह पावितस्थले गलेऽव लम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंग मालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं चकारचण्डताण्डवं तनोतु नः शिव: शिवम् ॥१॥ उनके बालों से बहने वाले जल से उनका...
आइये जाने हिन्दू संवत्सर के बारे में
क्या होता है संवत्सर ? संवत्सर मूल रूप से वर्ष ही है भारतीय प्रणाली में वर्ष को संवत्सर कहा जाता है हिंदू धर्म बौद्ध धर्म और जैन धर्म के अनुसार कई प्रकार के संवत्सर प्रचलित हैं जैसे विक्रमी संवत...
शुक्राचार्य द्वारा भगवान शंकर के १०८ नामों का जप
शुक्राचार्य द्वारा भगवान शंकर के १०८ नामों का जप ॐ १. जो देवताओं के स्वामी, २. सुर-असुर द्वारा वन्दित, ३. भूत और भविष्य के महान देवता, ४. हरे और पीले नेत्रों से युक्त, ५. महाबली, ६. बुद्धिस्वरूप, ७....
जानिए कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत का महत्व और भूलकर भी न करें ये गलतियां।
कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत का महत्व कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत का महत्व हिन्दू धर्म में बहुत उच्च माना जाता है, और इसके कई महत्वपूर्ण कारण हैं: भगवान शिव की पूजा: प्रदोष व्रत का मुख्य उद्देश्य भगवान...
मार्गशीर्ष अमावस्या 2023
मार्गशीर्ष अमावस्या 2023: तिथियां और समय इस वर्ष की अमावस्या तिथि 12 दिसंबर, 2023 को 06:26:15 बजे शुरू होती है। और 13 दिसंबर, 2023 को 05:03:23 बजे समाप्त होती है। इस दौरान, ज्योतिषियों का मानना है कि ब्रह्मांड की ऊर्जा...
मेरे मालिक के दरबार में लिरिक्स
मेरे मालिक के दरबार में, सब का खाता, जो कोई जैसी करनी करता, वैसा ही फल पाता, क्या साधू क्या संत गृहस्थी, क्या राजा क्या रानी, प्रभू की पुस्तक में लिक्खी है, सबकी कर्म कहानी, अन्तर्यामी अन्दर...
सावन का महीना शिवजी की अराधना के लिए समर्पित
से शुरू हो रहा है सावन 2023 इस बार सावन का महीना करीब 2 महीने का होने वाला है। इस बार सावन महीने की शुरुआत 4 जुलाई 2023 से हो रही है और 31 अगस्त 2023 को इसका समापन होगा। यानी इस बार भक्तों को भगवान शिव की उपासना...
वीर हनुमाना अति बलवाना राम नाम रसियो रे,प्रभु मन बसियो रे भजन हिंदी लिरिक्स
वीर हनुमाना अति बलवाना राम नाम रसियो रे,प्रभु मन बसियो रे भजन हिंदी लिरिक्स भक्ति भजन गीत विवरण गीत: - वीर हनुमान अति बलवाना, गायक: - नरिश नरशी, गीत: - नरिश नरशी वीर हनुमाना अति बलवाना, राम नाम रसियो...
द लेजेंड ऑफ पंडित श्रीधर
वैष्णो देवी से जुड़ी और भी कई किंवदंतियां हैं। उनमें से एक का संबंध है कि पांडवों ने पवित्र गुफा का दौरा किया और वहां एक मंदिर का निर्माण किया। उसके बाद, भयानक राक्षस राजा हिरण्यकशिपु के पुत्र...
जय जय जय हनुमान गोसाई
बेगी हरो हनुमान महाप्रभु जो कछु संकट होय हमारो कौन सो संकट मोर गरीब को जो तुम से नहीं जात है टारो । जय जय जय हनुमान गोसाई कृपा करो महाराज । जय जय जय हनुमान गोसाई कृपा करो महाराज । तन में तुम्हरे...
मौनी अमावस्या की पौराणिक व्रत कथा एवं पूजा विधि:
मौनी अमावस्या के साथ कोई विशिष्ट "मौनी व्रत" नहीं जुड़ा है, लेकिन व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक प्रथाओं के हिस्से के रूप में इस दिन उपवास करना या कुछ पूजा विधियों में शामिल होना चुन सकते हैं। यदि आप मौनी...
सोमवती अमावस्या
13 नवंबर को सोमवती अमावस्या है। सोमवती अमावस्या के दिन स्नान दान और पूजा पाठ का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान के बाद दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती 13 नवंबर...
भाई दूज 2023
भाई दूज दिवाली के बाद दूसरे दिन मनाया जाता है। भाई दूज का अर्थ नाम में ही दर्शाया गया है, क्योंकि यह एक भाई और एक बहन के बीच प्यार के रिश्ते को दर्शाता है। इस दिन एक बहन अपने भाई की सफलता और समृद्धि...
पांडव निर्जला एकादशी की कथा
पांडव निर्जला एकादशी की कथा दिशानिर्देश और नियामक एक बार महाराजा युधिष्ठिर के छोटे भाई भीमसेन ने पांडवों के दादा, महान ऋषि श्री व्यासदेव से पूछा कि क्या एकादशी व्रत के सभी नियमों और विनियमों...
सभी कष्टों एवं दुखो के निवारण हेतु सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड पाठ
सुन्दर काण्ड श्लोक : * शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्। रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं वन्देऽहं करुणाकरं...
मासिक शिवरात्रि नियम, क्या नहीं करनी चाहिए, क्या करना चाहिए और लाभ
मासिक शिवरात्रि नियम मासिक शिवरात्रि के दिन व्रत रखने के लिए कुछ नियम और आचार्य किए जाते हैं। ये नियम भक्तों को शिव पूजा के दौरान और व्रत के दिनों में अनुसरण करने के लिए होते हैं। निम्नलिखित कुछ...
सत्यनारायण व्रत कथा
सत्यनारायण व्रत कथा का पहला अध्याय एक समय की बात है नैषिरण्य तीर्थ में शौनिकादि, 88,000 ऋषियों ने श्री सूतजी से पूछा हे प्रभु! इस कलियुग में वेद विद्या रहित मनुष्यों को प्रभु भक्ति किस प्रकार मिल सकती...
गोवर्धन पूजा
पुरे भारत देश में सभी त्योहारों को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। वेदो के अनुसार गोवर्धन पूजा का हिन्दू धर्म में काफी महत्व है। यह त्यौहार कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया...
महालक्ष्मी व्रत: व्रत उद्यापन और पूजा विधि
महालक्ष्मी व्रत: व्रत उद्यापन और पूजा विधि महालक्ष्मी व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को शुरू होता है और आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को समाप्त होता है। यह व्रत कुल 16 दिनों तक चलता...
श्री मन नारायण नारायण नारायण। भजन
श्री मन नारायण नारायण नारायण। भजन भजमन नारायण नारायण नारायण।। श्री मन नारायण नारायण नारायण ,ॐ नारायण नारायण नारायण। लक्ष्मी नारायण नारायण नारायण,ॐ नारायण नारायण नारायण।। गज और...
रवि प्रदोष व्रत
दिसंबर माह में भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रदोष व्रत रखा जाता है दोनों प्रदोष व्रत रविवार को होने के कारण रवि प्रदोष व्रत होंगे दिसंबर को पहला प्रदोष व्रत 10 दिसंबर, रविवार और दूसरा...
पशुपति व्रत, विधि, नियम, कथा, पूजन सामग्री, मंत्र, उद्यापन और फायदे
पशुपति व्रत कैसे करते हैं ,विधि? यदि आप पशुपति व्रत का पालन करने का इरादा रखते हैं, तो ऐसा करने का उचित तरीका जानना महत्वपूर्ण है। आपकी सहायता के लिए यहां कुछ दिशानिर्देश दिए गए हैं। पशुपति का...
परिणय सूत्र में बंधे थे श्री राम-जानकी, विवाह पंचमी 2023
2023: हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार विवाह पंचमी 2023 के शुभ अवसर पर भगवान श्री राम तथा माता सीता का विवाह हुआ था| विवाह पंचमी 2023 का त्यौहार मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता...
दिवाली 2023
दिवाली, रोशनी का हिंदू त्योहार, भारत का सबसे प्रतीक्षित और सभी त्योहारों में सबसे उज्ज्वल है। दिवाली मूल शब्द "दीपावली" का संक्षिप्त रूप है, जो "दीपा" शब्द से बना है, जो दीपक या लालटेन को दर्शाता है,...
हरे कृष्ण गोविन्द मोहन मुरारी भजन लिरिक्स
हरे कृष्ण गोविन्द मोहन मुरारी भजन लिरिक्स जो किस्मत जगत की बनावे हैं सारे तो क्यू ना चले हम उन्ही को पुकारे यही मंत्र जपते हैं ऋषि सन्त सारे यही मंत्र जपते हैं ऋषि सन्त सारे हरे कृष्ण गोविन्द...
गणेश चतुर्थी संपूर्ण व्रत कथा
एक समय की बात है कि प्रसेनजित उस मणि को पहने हुए ही कृष्णजी के साथ वन में आखेट के लिए गए। अशुचिता के कारण अश्वारूढ़ प्रसेनजित को एक शेर ने मार डाला। उस सिंह को रत्न लेकर जाते देखकर जाम्बवान ने मार...
माँ काली चालीसा
॥दोहा॥ जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार । महिष मर्दिनी कालिका, देहु अभय अपार ॥ ॥ चौपाई ॥ अरि मद मान मिटावन हारी । मुण्डमाल गल सोहत प्यारी ॥ अष्टभुजी सुखदायक माता । दुष्टदलन जग में विख्याता...
सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कहानी
सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कहानी सूर्यवंशी कुल के राजा हरिश्चंद्र अयोध्या नगरी के एक प्रतापी राजा थे. राजा हरिश्चंद्र का जीवनकाल सतयुग से सम्बन्धित था. राजा हरिश्चंद्र की पत्नी रानी तारामती...
कार्तिक मास की कथा
कार्तिक मास की कथा एक नगर में एक ब्राह्मण और ब्राह्मणी रहते थे। वे रोजाना सात कोस दूर गंगा,यमुना स्नान करने जाते थे। इतनी दूर आने-जाने से ब्राह्मणी थक जाती थी तब ब्राह्मणी कहती थी कि हमारे एक बेटा...
नवदुर्गा: माँ दुर्गा के 9 रूप ।
। । या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: । । देवी माँ या निर्मल चेतना स्वयं को सभी रूपों में प्रत्यक्ष करती है,और सभी नाम ग्रहण करती है। माँ दुर्गा के...
भगवान शिव की कृपा: मासिक शिवरात्रि के पर्व का आध्यात्मिक दृष्टिकोण
मासिक शिवरात्रि, हिन्दू धर्म में हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली एक विशेष शिवरात्रि है। इसे मासिक शिवरात्रि कहा जाता है, क्योंकि इसे हर माह मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की...
गुरु पूर्णिमा का इतिहास, तिथिऔर लोग गुरु पूर्णिमा कैसे मनाते हैं?
गुरु पूर्णिमा एक राष्ट्रीय व्यापी पर्व है जो इस संसार में गुरु के प्रति समर्पित है। गुरु शब्द का प्रयोग उस शिक्षक के लिए किया जाता है जो विद्यार्थी को कुछ भी सिखाता है। यदि हम इसे प्राचीन काल से...
श्रीराम चालीसा का प्रतिदिन करें पाठ, खुश होंगे हनुमान जी
| | श्री राम चालीसा | | श्री रघुबीर भक्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी। निशि दिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहीं होई।। ध्यान धरें शिवजी मन मांही। ब्रह्मा, इन्द्र पार नहीं पाहीं।। दूत तुम्हार...
तुलसी विवाह :2023
तुलसी विवाह :2023 हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को तुलसी विवाह मनाया जाता है। तुलसी को एक पवित्र पौधे के रूप में जाना जाता है। इस वर्ष तुलसी विवाह 23 नवंबर को किया जाएगा। तुलसी को...
शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा, व्रत विधि और उद्यापन आरती
कथा एक बुढ़िया थी जिसके सात बेटे थे। उनमे से छह कमाते थे और एक न कमाने वाला था। वह बुढ़िया उन छ: को अच्छी रसोई बनाकर बड़े प्रेम से खिलाती पर सातवें को बचा-खुचा झूठन खिलाती थी। परन्तु वह भोला...
देव दिवाली 2023
देव दिवाली देव दिवाली राक्षस त्रिपुरासुर पर भगवान शिव की जीत के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन त्रिपुरासुर को हराया था। इस जीत का...
रवि पुष्य नक्षत्र
रवि पुष्य नक्षत्र वैदिक ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है जो समृद्धि और सौभाग्य चाहने वाले व्यक्तियों के लिए अत्यधिक महत्व रखती है। आइए रवि पुष्य नक्षत्र की गहराई में उतरें और इसके लाभों,...
कैलाश पर्वत एक अनसुलझा रहस्य, कैलाश पर्वत के इन रहस्यों से नासा भी हो चुका है हैरान!
कैलाश पर्वत, यह एतिहासिक पर्वत को आज तक हम सनातनी भारतीय लोग 'शिव का निवास स्थान' मानते हैं। शास्त्रों में भी यही लिखा है कि कैलाश पर शिव का वास है। किन्तु वही नासा जैसी वैज्ञानिक संस्था के लिए कैलाश...
दुर्गा सप्तमी - मां कालरात्रि
शुक्रवार, 8 अप्रैल, चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन है। दुर्गा सप्तमी नवरात्रि पर्व का सातवां दिन है। इस दिन मां कालरात्रि की पूजन का विधान है । धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कालरात्रि दुष्टों...
शुक्ल प्रदोष व्रत: भगवान शिव को समर्पित महत्वपूर्ण हिन्दू व्रत
शुक्ल प्रदोष व्रत, हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण एक व्रत है जो भगवान शिव को समर्पित है। इस व्रत को शुक्ल पक्ष के प्रदोष तिथि को मनाया जाता है, जो हिन्दू पंचांग के अनुसार हर मास के दूसरे तिथि होता है।...
मौन श्रद्धा: मौनी अमावस्या परंपराएँ
मौनी अमावस्या अपने आध्यात्मिक महत्व के लिए मनाई जाती है और विभिन्न धार्मिक मान्यताओं और प्रथाओं से जुड़ी है। मौनी अमावस्या का उत्सव हिंदू परंपराओं में निहित है, और यह दिन कई कारणों से मनाया जाता...
बजरंग बाण
दोहा-निश्चय प्रेम प्रतीति ते बिनय करै सनमान तेहि के कारज सकल शुभ सिद्ध करै हनुमान जय हनुमन्त सन्त हितकारी सुनि लीजै प्रभु विनय हमारी जन के काज विलम्ब न कीजै आतुर दौरि महा सुख दीजै जैसे कूदि...
शनिवार व्रत कथा, पूजा विधि, आरती और मंत्र
शनिवार व्रत कथा, पूजा विधि, आरती शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित है। शनि को कर्मफलदाता माना गया है जो लोगों को उनके अच्छे बुरे दोनों कर्मों का फल देते हैं। अगर जातक की कुंडली में...
उत्पन्ना एकादशी
उत्पन्ना एकादशी उत्पन्ना एकादशी या 'उत्तरपट्टी एकादशी' जैसा कि इसे भी जाना जाता है, हिंदू कैलेंडर के 'मार्गशीर्ष' महीने के दौरान कृष्ण पक्ष (चंद्रमा के घटते चरण) के 'एकादशी' (11वें दिन) को मनाई जाती...
मकर संक्रांति दीप्तिमान आनंदोत्सव 2024
संक्रांति का अर्थ प्रत्येक महीने के अंतिम दिन को संक्रांति के रूप में जाना जाता है जो एक महीने के बढ़ने या ख़त्म होने और दूसरे की शुरुआत का प्रतीक है। यह सूर्य-देवता की पूजा है जो पृथ्वी पर जीवन...
कौवे की गरूड़ से दोस्ती
कौवे की गरुड़ से दोस्ती कहानी महाभारत (महाभारत) और भागवत गीता (भागवत गीता) की है। कई लोक कथाओं में भी इस कहानी (कहानी) का उल्लेख मिलता है। एक कौवे की गरुड़ से दोस्ती हो गई। दोनों काफी समय तक साथ रहे।...
बड़े मंगल की तिथियां , महत्व और पूजा विधि
मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित है। ज्येष्ठ माह में सभी मंगलवार को 'बड़ा मंगल' के रूप में जाना जाता है और हम इस दिन भगवान हनुमान की पूजा करते हैं।इस माह के सभी मंगलो में प्रत्येक मंगलवार...
