कार्तिक मास की कथा
कार्तिक मास की कथा
एक नगर में एक ब्राह्मण और ब्राह्मणी रहते थे। वे रोजाना सात कोस दूर गंगा,यमुना स्नान करने जाते थे। इतनी दूर आने-जाने से ब्राह्मणी थक जाती थी तब ब्राह्मणी कहती थी कि हमारे एक बेटा होता तो कितना अच्छा रहता। बेटे के बहू आती तो हमे घर वापस जाने पर खाना बना हुआ मिलता और बहू घर का काम भी कर देती।
ब्राह्मणी की बात सुनकर ब्राह्मण ने कहा कि तूने बात तो सही कही है, चल मैं तेरे लिए बहू ला ही देता हूं। ब्राह्मण ने कहा कि एक पोटली में आटा डाल कर कुछ मोहरे रख दे। ब्राह्मण के कहे अनुसार ब्राह्मणी ने पोटली बांध कर दे दी पोटली लेकर ब्राह्मण चला गया।
ब्राह्मण अभी कुछ दूर गया ही था कि उसे यमुना के किनारे बहुत ही सुंदर लड़कियां दिखाई दी। वे रेत में घर बना कर खेल रही थी। उनमें से एक लड़की ने कहा कि मैं अपना घर नहीं बिगाडूंगी मुझे तो रहने के लिए ये घर चाहिए। लड़की की बात सुनकर ब्राह्मण मन ही मन सोचने लगा की बहू बनाने के लिए यही लड़की सही रहेगी। जब वह लड़की जाने लगी तो ब्राह्मण भी उसके पीछे पीछे उसके घर तक चला गया। वहां जाकर ब्राह्मण ने कहा बेटी, अभी कार्तिक मास चल रहा है इसलिए मैं किसी के घर खाना नहीं खाता। मैं आटा लेकर आया हूं तुम अपनी मां से पूछो कि क्या वह मेरे लिए आटा छानकर चार रोटी बना देगी? यदि वह मेरा आटा छान कर रोटी बनाएगी तो ही मैं रोटी खाऊंगा।
लड़की ने जाकर अपनी मां से सारी बात कह दी। मां ने कहा – ठीक है, जाकर बाबा से कह दे कि वह अपना आटा दे दे मैं रोटी बना दूंगी। जब वह आटा छानने लगी तो आटे में से मोहरे निकली। वह सोचने लगी कि जिस के आटे में इतनी मोहरे है उसके घर में कितनी मोहरे होंगी। जब ब्राह्मण खाना खाने बैठा तो लड़की की मां ने कहा – बाबा आप अपने लड़के की सगाई करने जा रहे हो।
तब ब्राह्मण ने कहा कि मेरा बेटा तो काशी में पढ़ने गया हुआ है लेकिन यदि तुम कहो तो खांड कटोरे से विवाह करके तेरी बेटी को अपने साथ ले जाऊं। लड़की की मां ने कहा – ठीक है बाबा और खांड कटोरे से शादी करके ब्राह्मण के साथ भेज दिया। ब्राह्मण ने घर आकर कहा रामू की मां दरवाजा खोलकर देख मैं तेरे लिए बहू लेकर आया हूं।
ब्राह्मणी बोली दुनिया ताने मारती थी अब आप भी मारने लगे। हमारे तो सात जन्म तक कोई बेटा बेटी नहीं है तो बहू कहां से आएगी। ब्राह्मण ने कहा कि तू दरवाजा खोल कर तो देख। जब ब्राह्मणी ने दरवाजा खोला तो सामने बहू को खड़ी देखा। उसने बहु का स्वागत किया और आदर सत्कार से अंदर ले गई।
अब ब्राह्मण और ब्राह्मण स्नान करने जाते तो बहू घर का सारा काम करके और खाना बना कर रखती। वह उनके कपड़े धोती और रात को पैर भी दबाती। इस तरह काफी समय बीत गया। ब्राह्मणी ने अपनी बहू से कहा कि बहू कभी भी चूल्हे की आग मत बुझने देना और मटके का पानी खत्म मत होने देना। 1 दिन चूल्हे की आग बुझ गई।
तब बहु भागी-भागी अपनी पड़ोसन के पास गई और कहां कि मेरे चूल्हे की आग बुझ गई है मुझे थोड़ी आग चाहिए। मेरे साथ ससुर सुबह चार बजे से गए हुए हैं वह थके, हारे आएंगे इसलिए मुझे उनके लिए खाना बनाना है। तब पड़ोसन ने कहा कि तू तो बावली है, तुझे यह दोनों मिलकर पागल बना रहे हैं, इनके कोई बेटा नहीं है।बहू ने कहा – नहीं, ऐसा मत बोलो, इनका बेटा तो बनारस काशी में पढ़ने गया हुआ है।
तब पड़ोसन ने कहा कि यह तुझे झूठ बोल कर लाऐ है इनके कोई बेटा नहीं है। अब बहू पड़ोसन की बातों में आ गई और कहने लगी कि अब आप ही बताओ मैं क्या करूं। पड़ोसन ने कहा कि करना क्या है, जब तुम्हारे सास ससुर आए तो जली-फुँकी रोटियां बना कर देना और बिना नमक की दाल बना कर देना। खीर की कड़छी दाल में और दाल की कड़छी खीर में डाल देना।
वह पड़ोसन की सारी सीख लेकर घर आ गई जब उसके साथ ससुर घर आए तो उसने ना तो उनका आदर सत्कार किया ना ही उनके कपड़े धोए। जब उसने सास-ससुर को खाना दिया तो सास बोली बहू आज यह रोटियां जली-फुँकी क्यों है और दाल भी अलुनी है। तब बहू ने पलट कर जवाब दिया कि एक दिन ऐसा खाना खा लोगे तो कुछ बिगड़ नहीं जाएगा तुम्हारा।
सास ससुर को खरी-खोटी सुनाकर वह फिर से पड़ोसन के पास गई और बोला कि अब आगे क्या करना है। पड़ोसन ने कहा कि अब तुम सातों कोठों की चाबी मांग लेना। अगले दिन जब भी स्नान करने के लिए जाने लगे तो बहू अड़ गई कि मुझे तो सातों कोठों की चाबी चाहिए। तब ससुर ने कहा कि इसे चाबी दे दो आज नहीं तो कल इसे ही देनी है। तब सास ने बहू को चाबी दे दी।
सास ससुर के जाने के बाद जब बहू ने दरवाजे खोले तो देखा कि किसी में अन्न भरा है किसी में धन भरा है और किसी कोठे मे बर्तन पडे है। जब उसने सबसे ऊपर का सातवा कोठा खोला तो देखा कि शिव जी, पार्वती माता, गणेश जी, लक्ष्मी माता जी, पीपल पथवारी, कार्तिक के ठाकुर, राई दामोदर, तुलसा जी का बिड़वा, गंगा यमुना, व 33 कोटी देवी देवता विराजमान है। वहीं पर एक लड़का चंदन की चौकी पर बैठा माला जप रहा है।
यह सब देख कर उसने लड़के से पूछा कि तू कौन है। तब लड़का बोला कि मैं तेरा पति हूं अभी दरवाजा बंद कर दे जब मेरे माता-पिता आएंगे तब दरवाजा खोलना। यह सब देखकर बहू बहुत खुश हुई और सोलह श्रंगार कर सुंदर वस्त्र पहन कर अपने सास-ससुर का इंतजार करने लगी। उसने अपने सास-ससुर के लिए अच्छे-अच्छे पकवान बनाए।
जब उसके साथ ससुर घर पर आए तो उसने उनका आदर सत्कार किया और प्रेम पूर्वक खाना खिलाया और पैर पैर दबाने लगी पैर दबाते दबाते बहू ने कहा कि मां आप इतनी दूर गंगा यमुना स्नान करने के लिए जाती हो तो आप थक जाती हो इसलिए आप घर पर ही स्नान क्यों नहीं करती हो। यह सुन सास कहने लगी कि बेटी गंगा यमुना घर पर तो नहीं बहती है। तब उसने कहा हां मां जी बहती है चलो मैं आपको दिखाती हूं।
जब बहू ने सातवां कोठा खोल कर दिखाया तो उसमें शिव जी, पार्वती जी, गणेश जी, लक्ष्मी जी, पीपल पथवारी, कार्तिक के ठाकुर, राई दामोदर, तुलसा जी का बिड़वा, गंगा यमुना बह रही है और, 33 कोटी देवी देवता विराजमान है। वही चौकी पर बैठा एक लड़का माला जप रहा है। मां ने कहा कि बेटा तू कौन है। लड़का बोला – मां मैं तेरा बेटा हूं। तब ब्राह्मणी ने पूछा कि तू कहां से आया है।
लड़के ने जवाब दिया कि मुझे कार्तिक देवता ने भेजा है। बुढ़िया ने कहा कि बेटा यह दुनिया कैसे मानेगी कि तू मेरा बेटा है। बुढ़िया ने कुछ विद्वान पंडितों से मदद मांगी। पंडितों ने कहा कि इस पार बहू-बेटा खड़ा हो जाए और उस पार बुढ़िया खड़ी हो जाए।बुढ़िया ने चमडे की अंगिया पहनी हो और छाती में से दूध की धार निकल कर बेटे की दाढ़ी मूछ भीगे और पवन पानी से गठजोड़ा बंधे तब माने कि यह बुढ़िया का ही बेटा है।
उसने ऐसा ही किया चमड़े की अंगिया फट गई और छाती में से दूध की धार निकल कर बेटे की दाढ़ी मूछ भीग गई, पवन पानी से बहू बेटे का गठजोड़ बंध गया। यह सब देखकर ब्राह्मण और ब्राह्मणी की खुशी का ठिकाना ना रहा। हे कार्तिक के ठाकुर, जैसे ब्राह्मण ब्राह्मणी को बहू-बेटा दिया वैसे सबको देना। कार्तिक मास की कथा कहने, सुनने और हुंकारा भरने वाले सब पर कृपा करना।
यह थी कार्तिक मास की कथा, हम आशा करते हैं कि आपको कार्तिक मास की कथा पसंद आई होगी धन्यवाद।
अन्य संबंधित पोस्ट और लेख
शनिवार को शनिवार व्रत करें साढ़े साती से मिलेगी मुक्ति
शनिवार को शनिवार व्रत करें साढ़े साती से मिलेगी मुक्ति शनि देव की पूजा विधि - इस व्रत को रखने के लिए सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले स्नान कर लें - इसके बाद साफ कपड़े पहनकर पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं...
शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा, व्रत विधि और उद्यापन आरती
कथा एक बुढ़िया थी जिसके सात बेटे थे। उनमे से छह कमाते थे और एक न कमाने वाला था। वह बुढ़िया उन छ: को अच्छी रसोई बनाकर बड़े प्रेम से खिलाती पर सातवें को बचा-खुचा झूठन खिलाती थी। परन्तु वह भोला...
भाई दूज 2023
भाई दूज दिवाली के बाद दूसरे दिन मनाया जाता है। भाई दूज का अर्थ नाम में ही दर्शाया गया है, क्योंकि यह एक भाई और एक बहन के बीच प्यार के रिश्ते को दर्शाता है। इस दिन एक बहन अपने भाई की सफलता और समृद्धि...
माँ काली चालीसा
॥दोहा॥ जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार । महिष मर्दिनी कालिका, देहु अभय अपार ॥ ॥ चौपाई ॥ अरि मद मान मिटावन हारी । मुण्डमाल गल सोहत प्यारी ॥ अष्टभुजी सुखदायक माता । दुष्टदलन जग में विख्याता...
गणेश चतुर्थी संपूर्ण व्रत कथा
एक समय की बात है कि प्रसेनजित उस मणि को पहने हुए ही कृष्णजी के साथ वन में आखेट के लिए गए। अशुचिता के कारण अश्वारूढ़ प्रसेनजित को एक शेर ने मार डाला। उस सिंह को रत्न लेकर जाते देखकर जाम्बवान ने मार...
दिवाली 2023
दिवाली, रोशनी का हिंदू त्योहार, भारत का सबसे प्रतीक्षित और सभी त्योहारों में सबसे उज्ज्वल है। दिवाली मूल शब्द "दीपावली" का संक्षिप्त रूप है, जो "दीपा" शब्द से बना है, जो दीपक या लालटेन को दर्शाता है,...
जया एकादशी: भगवान विष्णु की कृपा के साथ अपने मन को शुद्ध करें
जया एकादशी, हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण एकादशी व्रत है जो फाल्गुण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस व्रत का मुख्य उद्देश्य भगवान विष्णु की पूजा करना है और भक्ति में लगकर मोक्ष...
धनतेरस का पर्व
धनतेरस से दीपावली के त्योहार का आरंभ माना जाता है। दिवाली या दीपावली रोशनी का त्योहार है। यह हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। हर किसी को इस महापर्व का साल भर इंतजार रहता है। दीपोत्सव...
भगवान शिव की कृपा: मासिक शिवरात्रि के पर्व का आध्यात्मिक दृष्टिकोण
मासिक शिवरात्रि, हिन्दू धर्म में हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली एक विशेष शिवरात्रि है। इसे मासिक शिवरात्रि कहा जाता है, क्योंकि इसे हर माह मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की...
छठ पूजा 2023
छठ पूजा की महत्वपूर्ण तिथियां छठ पूजा भारत के सबसे पुराने त्योहारों में से एक है। “छठ” शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द “षष्ठी” से हुई है, जिसका अर्थ छठा दिन है, जो दर्शाता है कि यह त्योहार दिवाली...
मंगल भवन अमंगल हरि
हो, मंगल भवन, अमंगल हारी द्रबहु सु दसरथ, अजिर बिहारी आ, राम भगत हित नर्तन धारी सहे संकट किये साधो सुखारी सिया राम जय-जय (राम सिया राम, सिया राम जय-जय राम) हो, होइहैं सोई जो, राम रचि राखा को करि तरक, बढ़ावई...
गुरु पूर्णिमा का इतिहास, तिथिऔर लोग गुरु पूर्णिमा कैसे मनाते हैं?
गुरु पूर्णिमा एक राष्ट्रीय व्यापी पर्व है जो इस संसार में गुरु के प्रति समर्पित है। गुरु शब्द का प्रयोग उस शिक्षक के लिए किया जाता है जो विद्यार्थी को कुछ भी सिखाता है। यदि हम इसे प्राचीन काल से...
सोमवती अमावस्या
13 नवंबर को सोमवती अमावस्या है। सोमवती अमावस्या के दिन स्नान दान और पूजा पाठ का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान के बाद दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती 13 नवंबर...
मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कन्यापूजन की विधि और आरती
मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि इस दिन मां की पूजा अर्चना करने के लिए विशेष हवन किया जाता है. यह नवरात्रि का आखिरी दिन है तो इस दिन मां की पूजा अर्चना करने के बाद अन्य देवताओं की भी पूजा की जाती है....
गणेश चतुर्थी 2023: विनायक चतुर्दशी पूजा की तिथि, समय और मुहूर्त
गणेश चतुर्थी 2023: विनायक चतुर्दशी की तिथि, समय और मुहूर्त हिंदू कैलेंडर के अनुसार, विनायक चतुर्दशी 2023 सोमवार, 18 सितंबर को दोपहर 12:39 बजे शुरू होगी और मंगलवार, 19 सितंबर को रात 8:43 बजे समाप्त होगी। इसके अलावा,...
मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार को करें ये सिद्ध वैभव लक्ष्मी व्रत, धन- दौलत में होगी अपार बढ़ोतरी
मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार को करें ये सिद्ध वैभव लक्ष्मी व्रत, धन- दौलत में होगी अपार बढ़ोतरी वैभव लक्ष्मी के व्रत का पालन करने के नियम [1] व्रत प्रक्रिया का पालन करने वाली विवाहित...
जानिए वसंत पंचमी पर कैसे करें मां सरस्वती को प्रसन्न और पाएं ये लाभ
मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए उपाय मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए आप निम्नलिखित उपायों का अनुसरण कर सकते हैं: श्रद्धापूर्वक पूजा करें: सरस्वती पूजा को श्रद्धापूर्वक और भक्तिभाव से...
मेरे मालिक के दरबार में लिरिक्स
मेरे मालिक के दरबार में, सब का खाता, जो कोई जैसी करनी करता, वैसा ही फल पाता, क्या साधू क्या संत गृहस्थी, क्या राजा क्या रानी, प्रभू की पुस्तक में लिक्खी है, सबकी कर्म कहानी, अन्तर्यामी अन्दर...
आध्यात्मिक साक्षात्कार: कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत
कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है जो भगवान शिव को समर्पित है। प्रदोष व्रत का आयोजन कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी तिथि को किया जाता है, जो चंद्रमा के ग्रहण के समय का होता है।...
षटतिला एकादशी: भगवान विष्णु की कृपा का अद्भुत व्रत
षटतिला एकादशी एक हिन्दू पर्व है जो हिन्दी पंचांग के अनुसार माघ महीने के कृष्ण पक्ष (वड़ी) में मनाया जाता है। इस एकादशी का विशेष महत्व है, और इसका आयोजन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के साथ किया जाता...
बिल्व या बेल पत्र का महत्व
बिल्व पत्र का भगवान शंकर को प्रिय है। बिल्व पत्र का महत्व बिल्व तथा श्रीफल नाम से प्रसिद्ध यह फल बहुत ही काम का है। यह जिस पेड़ पर लगता है वह शिवद्रुम भी कहलाता है। बिल्व का पेड़ संपन्नता का प्रतीक,...
सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कहानी
सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कहानी सूर्यवंशी कुल के राजा हरिश्चंद्र अयोध्या नगरी के एक प्रतापी राजा थे. राजा हरिश्चंद्र का जीवनकाल सतयुग से सम्बन्धित था. राजा हरिश्चंद्र की पत्नी रानी तारामती...
दुर्गा सप्तमी - मां कालरात्रि
शुक्रवार, 8 अप्रैल, चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन है। दुर्गा सप्तमी नवरात्रि पर्व का सातवां दिन है। इस दिन मां कालरात्रि की पूजन का विधान है । धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कालरात्रि दुष्टों...
सभी कष्टों एवं दुखो के निवारण हेतु सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड पाठ
सुन्दर काण्ड श्लोक : * शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्। रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं वन्देऽहं करुणाकरं...
वीर हनुमाना अति बलवाना राम नाम रसियो रे,प्रभु मन बसियो रे भजन हिंदी लिरिक्स
वीर हनुमाना अति बलवाना राम नाम रसियो रे,प्रभु मन बसियो रे भजन हिंदी लिरिक्स भक्ति भजन गीत विवरण गीत: - वीर हनुमान अति बलवाना, गायक: - नरिश नरशी, गीत: - नरिश नरशी वीर हनुमाना अति बलवाना, राम नाम रसियो...
बजरंग बाण
दोहा-निश्चय प्रेम प्रतीति ते बिनय करै सनमान तेहि के कारज सकल शुभ सिद्ध करै हनुमान जय हनुमन्त सन्त हितकारी सुनि लीजै प्रभु विनय हमारी जन के काज विलम्ब न कीजै आतुर दौरि महा सुख दीजै जैसे कूदि...
देवउठनी एकादशी की पूजा का शुभ मुहूर्त
सनातन परंपरा में जिस कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की देवोत्थान या फिर कहें देवउठनी एकादशी पर श्रीहरि अपनी योगनिद्रा से जागते हैं और उसमें शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है, उसकी तारीख,...
मौनी अमावस्या की पौराणिक व्रत कथा एवं पूजा विधि:
मौनी अमावस्या के साथ कोई विशिष्ट "मौनी व्रत" नहीं जुड़ा है, लेकिन व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक प्रथाओं के हिस्से के रूप में इस दिन उपवास करना या कुछ पूजा विधियों में शामिल होना चुन सकते हैं। यदि आप मौनी...
हरे कृष्ण गोविन्द मोहन मुरारी भजन लिरिक्स
हरे कृष्ण गोविन्द मोहन मुरारी भजन लिरिक्स जो किस्मत जगत की बनावे हैं सारे तो क्यू ना चले हम उन्ही को पुकारे यही मंत्र जपते हैं ऋषि सन्त सारे यही मंत्र जपते हैं ऋषि सन्त सारे हरे कृष्ण गोविन्द...
मकर संक्रांति दीप्तिमान आनंदोत्सव 2024
संक्रांति का अर्थ प्रत्येक महीने के अंतिम दिन को संक्रांति के रूप में जाना जाता है जो एक महीने के बढ़ने या ख़त्म होने और दूसरे की शुरुआत का प्रतीक है। यह सूर्य-देवता की पूजा है जो पृथ्वी पर जीवन...
रविवार व्रत कथा, पूजा विधि, आरती, मंत्र और महत्व,
रविवार व्रत कथा प्राचीन काल की बात किसी नगर में एक बुढ़िया रहती थी। वह हर रविवार को नियमित रूप से व्रत करती थी। इसके लिए रविवार के दिन वह सूर्योदय से पहले जागती और स्नानादि से निवृत्त होकर आंगन की...
कौवे की गरूड़ से दोस्ती
कौवे की गरुड़ से दोस्ती कहानी महाभारत (महाभारत) और भागवत गीता (भागवत गीता) की है। कई लोक कथाओं में भी इस कहानी (कहानी) का उल्लेख मिलता है। एक कौवे की गरुड़ से दोस्ती हो गई। दोनों काफी समय तक साथ रहे।...
निर्जला एकादशी
निर्जला एकादशी बुधवार, 31 मई 2023 एकादशी तिथि प्रारंभ : 30 मई 2023 को दोपहर 01:07 बजे एकादशी तिथि समाप्त : 31 मई 2023 को दोपहर 01 बजकर 45 मिनट पर एकादशी का व्रत हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ज्येष्ठ मास...
मां कालरात्रि के पूजन मुहूर्त, मंत्र, पूजा विधि और आरती
शारदीय नवरात्रि का 21 अक्टूबर 2023, शनिवार को सातवां दिन है। यह दिन मां कालरात्रि को समर्पित है। मां कालरात्रि का शरीर अंधकार की तरह काला है। मां की श्वास से आग निकलती है। मां के बाल बड़े और बिखरे हुए...
परिणय सूत्र में बंधे थे श्री राम-जानकी, विवाह पंचमी 2023
2023: हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार विवाह पंचमी 2023 के शुभ अवसर पर भगवान श्री राम तथा माता सीता का विवाह हुआ था| विवाह पंचमी 2023 का त्यौहार मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता...
महालक्ष्मी व्रत: व्रत उद्यापन और पूजा विधि
महालक्ष्मी व्रत: व्रत उद्यापन और पूजा विधि महालक्ष्मी व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को शुरू होता है और आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को समाप्त होता है। यह व्रत कुल 16 दिनों तक चलता...
माघ पूर्णिमा : आत्मा की प्रकाश की पूर्णिमा या धार्मिक समर्पण की पूर्णिमा
माघ पूर्णिमा व्रत एक हिन्दू धार्मिक व्रत है जो माघ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत हिन्दू परम्परा में महत्वपूर्ण माना जाता है और इसे संगीत, ध्यान, धर्मिक कार्यों, और दान-धर्म के रूप...
श्री गणेश जी की आरती, पूजा और स्तुति मंत्र
श्री गणेश जी की आरती जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥ एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥ जय गणेश,...
जानिए क्यों ? गोस्वामी तुलसीदास ने कारावास में 'लिखी हनुमान चालीसा' !
एक बार अकबर ने गोस्वामी जी को अपने दरबार में बुलाया और उनसे कहा कि मुझे भगवान श्रीराम से मिलवाओ। तब तुलसीदास जी ने कहा कि भगवान श्री राम सिर्फ अपने भक्तों को ही दर्शन देते हैं। यह सुनते ही अकबर ने...
आइये जाने हिन्दू संवत्सर के बारे में
क्या होता है संवत्सर ? संवत्सर मूल रूप से वर्ष ही है भारतीय प्रणाली में वर्ष को संवत्सर कहा जाता है हिंदू धर्म बौद्ध धर्म और जैन धर्म के अनुसार कई प्रकार के संवत्सर प्रचलित हैं जैसे विक्रमी संवत...
छोटी दिवाली/ नरक चतुर्दशी
दीवाली से एक दिन पहले और धनतेरस एक दिन बाद नरक चौदस या नरक चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाता है. इसी दिन छोटी दिवाली भी मनाई जाती है. यह हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर पड़ती है....
जानिए कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत का महत्व और भूलकर भी न करें ये गलतियां।
कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत का महत्व कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत का महत्व हिन्दू धर्म में बहुत उच्च माना जाता है, और इसके कई महत्वपूर्ण कारण हैं: भगवान शिव की पूजा: प्रदोष व्रत का मुख्य उद्देश्य भगवान...
गोवर्धन पूजा
पुरे भारत देश में सभी त्योहारों को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। वेदो के अनुसार गोवर्धन पूजा का हिन्दू धर्म में काफी महत्व है। यह त्यौहार कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया...
शुक्राचार्य द्वारा भगवान शंकर के १०८ नामों का जप
शुक्राचार्य द्वारा भगवान शंकर के १०८ नामों का जप ॐ १. जो देवताओं के स्वामी, २. सुर-असुर द्वारा वन्दित, ३. भूत और भविष्य के महान देवता, ४. हरे और पीले नेत्रों से युक्त, ५. महाबली, ६. बुद्धिस्वरूप, ७....
सावन का महीना शिवजी की अराधना के लिए समर्पित
से शुरू हो रहा है सावन 2023 इस बार सावन का महीना करीब 2 महीने का होने वाला है। इस बार सावन महीने की शुरुआत 4 जुलाई 2023 से हो रही है और 31 अगस्त 2023 को इसका समापन होगा। यानी इस बार भक्तों को भगवान शिव की उपासना...
तुलसी विवाह :2023
तुलसी विवाह :2023 हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को तुलसी विवाह मनाया जाता है। तुलसी को एक पवित्र पौधे के रूप में जाना जाता है। इस वर्ष तुलसी विवाह 23 नवंबर को किया जाएगा। तुलसी को...
कैलाश पर्वत एक अनसुलझा रहस्य, कैलाश पर्वत के इन रहस्यों से नासा भी हो चुका है हैरान!
कैलाश पर्वत, यह एतिहासिक पर्वत को आज तक हम सनातनी भारतीय लोग 'शिव का निवास स्थान' मानते हैं। शास्त्रों में भी यही लिखा है कि कैलाश पर शिव का वास है। किन्तु वही नासा जैसी वैज्ञानिक संस्था के लिए कैलाश...
सत्यनारायण व्रत कथा
सत्यनारायण व्रत कथा का पहला अध्याय एक समय की बात है नैषिरण्य तीर्थ में शौनिकादि, 88,000 ऋषियों ने श्री सूतजी से पूछा हे प्रभु! इस कलियुग में वेद विद्या रहित मनुष्यों को प्रभु भक्ति किस प्रकार मिल सकती...
रवि प्रदोष व्रत
दिसंबर माह में भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रदोष व्रत रखा जाता है दोनों प्रदोष व्रत रविवार को होने के कारण रवि प्रदोष व्रत होंगे दिसंबर को पहला प्रदोष व्रत 10 दिसंबर, रविवार और दूसरा...
मासिक शिवरात्रि नियम, क्या नहीं करनी चाहिए, क्या करना चाहिए और लाभ
मासिक शिवरात्रि नियम मासिक शिवरात्रि के दिन व्रत रखने के लिए कुछ नियम और आचार्य किए जाते हैं। ये नियम भक्तों को शिव पूजा के दौरान और व्रत के दिनों में अनुसरण करने के लिए होते हैं। निम्नलिखित कुछ...
