रवि प्रदोष व्रत
दिसंबर माह में भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रदोष व्रत रखा जाता है दोनों प्रदोष व्रत रविवार को होने के कारण रवि प्रदोष व्रत होंगे दिसंबर को पहला प्रदोष व्रत 10 दिसंबर, रविवार और दूसरा व्रत 24 दिसंबर, रविवार को रखा जाएगा रवि प्रदोष व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त
पहला रवि प्रदोष व्रत
दिसंबर माह का पहला रवि प्रदोष व्रत 10 दिसंबर, रविवार को रखा जाएगा दिन भर व्रत रखने के बाद प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा होगी पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 10 दिसंबर को सुबह 7 बजकर 13 मिनट से शुरू होकर 11 दिसंबर को सुबह 7 बजकर 10 मिनट तक रहेगी प्रदोष काल में शाम 5 बजकर 24 मिनट से 8 बजकर 8 मिनट तक पूजा का मुहूर्त है
दूसरा रवि प्रदोष व्रत
दिसंबर माह का दूसरा रवि प्रदोष व्रत साल का अंतिम प्रदोष व्रत होगा और 24 दिसंबर रविवार को रखा जाएगा पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 24 दिसंबर को सुबह 6 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 25 दिसंबर को सुबह 5 बजकर 54 मिनट तक रहेगी शाम 5 बजकर 30 मिनट से रात 8 बजकर 14 मिनट तक पूजा का मुहूर्त है
प्रदोष व्रत का महत्व
इस व्रत को करने से मनुष्यों को उसके सभी दोषों से मुक्ति मिलती है और उसके सब कष्टों का निवारण होता है। शिव परिवार की उपासना करने वालों को सुयोग्य संतान मिलती है।दक्षिण भारत में प्रदोष व्रत को प्रदोषम के नाम से जाना जाता है और इस व्रत को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है।हर प्रदोष व्रत का अलग महत्व है, उसी तरह रवि प्रदोष व्रत से उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु मिलती है। इस दिन शिव शक्ति की पूजा से दांपत्य सुख मिलता है। यह मनोकामना पूरी करता है, परिवार निरोगी बनता है और यह प्रदोष व्रत दोषों को दूर करता है। इस दिन भगवान सूर्य को भी अर्घ्य देना चाहिए।
शुक्ल पक्ष प्रदोष व्रत, रवि प्रदोष व्रत (दिसंबर महीने का अखिरी प्रदोष व्रत)
- साल 2023 का अखिरी प्रदोष व्रत कब?- इस बार मार्गी शीर्ष महीने का अखिरी प्रदोष व्रत रविवार, 24 दिसंबर 2023 को पड़ रहा है। - दिसंबर महीने का अखिरी का प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त- 24 दिसंबर 2023 सुबह 06:24 बजे से 25 दिसंबर 2023 सुबह 05:55 बजे तक
रवि प्रदोष व्रत का पूजा विधि
- रवि प्रदोष के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- इसके बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान का स्मरण करें और व्रत और पूजा का संकल्प लें।
- शाम की पूजा के दौरान भोलेनाथ को बेलपत्र, भांग, फूल, धतूरा, गंगाजल, धूप, दीप, गंध आदि चढ़ाएं।
- ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें और निराहार व्रत रखें।
- प्रदोषकाल में भगवान शिव को पंचामृत से स्नान कराएं।
- खीर और फल भगवान को अर्पित करें।
- पंचाक्षरी स्त्रोत का पाठ करें।
- अब प्रदोष की कथा पढ़ें और भगवान शिव की आरती करें।
- पूजा के दौरान शिवलिंग को गंगाजल और गाय के दूध से स्नान करांए।
- अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करके व्रत समाप्त करें।
अलग-अलग वार (सप्ताह का दिन) के लाभ
- रविवार के दिन व्रत रखने से अच्छी सेहत एवं उम्र लम्बी होती है।
- सोमवार के दिन व्रत रखने से सभी मनोकामनाऐं पूर्ण होती है।
- मंगलवार के दिन व्रत रखने से बीमारीयों से राहत मिलती है।
- बुधवार के दिन प्रदोष व्रत रखने से सभी मनोकामनाऐं एवं इच्छाऐं पूर्ण होती है।
- वृहस्पतिवार को व्रत रखने से दुश्मनों का नाश होता है।
- शुक्रवार को व्रत रखने से शादीशुदा जिंदगी एवं भाग्य अच्छा होता है।
- शनिवार को व्रत रखने से संतान प्राप्त होती है।
प्रदोष व्रत कथा -
पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी। उसके पति का स्वर्गवास हो गया था। उसका अब कोई सहारा नहीं था। इसलिए वह सुबह होते ही वह अपने पुत्र के साथ भीख मांगने निकल पड़ती थी। वह खुद का और अपने पुत्र का पेट पालती थी। एक दिन ब्राह्मणी घर लौट रही थी तो उसे एक लड़का घायल अवस्था में कराहता हुआ मिला। ब्राह्मणी दयावश उसे अपने घर ले आयी। वह लड़का विदर्भ का राजकुमार था। शत्रु सैनिकों ने उसके राज्य पर आक्रमण कर उसके पिता को बंदी बना लिया था और राज्य पर नियंत्रण कर लिया था इसलिए वह मारा-मारा फिर रहा था। राजकुमार ब्राह्मण-पुत्र के साथ ब्राह्मणी के घर रहने लगा।
एक दिन अंशुमति नामक एक गंधर्व कन्या ने राजकुमार को देखा तो वह उस पर मोहित हो गई। अगले दिन अंशुमति अपने माता-पिता को राजकुमार से मिलाने लाई। उन्हें भी राजकुमार पसंद आ गया। कुछ दिनों बाद अंशुमति के माता-पिता को शंकर भगवान ने स्वप्न में आदेश दिया कि राजकुमार और अंशुमति का विवाह कर दिया जाए। वैसा ही किया गया। ब्राह्मणी प्रदोष व्रत करने के साथ ही भगवान शंकर की पूजा-पाठ किया करती थी। प्रदोष व्रत के प्रभाव और गंधर्वराज की सेना की सहायता से राजकुमार ने विदर्भ से शत्रुओं को खदेड़ दिया और पिता के साथ फिर से सुखपूर्वक रहने लगा। राजकुमार ने ब्राह्मण-पुत्र को अपना प्रधानमंत्री बनाया। मान्यता है कि जैसे ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत के प्रभाव से दिन बदले, वैसे ही भगवान शंकर अपने भक्तों के दिन फेरते हैं।
रवि प्रदोष व्रत कथा, जिसके बिना अधूरी है पूजा
बहुत समय पहले की बात है एक गांव में एक ब्राम्हणी रहती थी, जो पति की मृत्यु के बाद अपना पालन-पोषण भिक्षा मांगकर करती थी। एक दिन जब वह भिक्षा मांग कर लौट रही थी, तो उसे रास्ते में दो बालक दिखे, जिन्हें वह अपने घर ले आई। जब वे दोनों बालक बड़े हो गए तो ब्राह्मणी दोनों बालक को लेकर ऋषि शांडिल्य के आश्रम चली गई। आश्रम पहुंचने पर ब्राह्मणी को पता चलता है कि ये दोनों बालक विदर्भ राज के राजकुमार हैं, जिनसे गंदर्भ नरेश के आक्रमण के बाद इनका राज-पाट छीन लिया गया है। जिसके बाद ऋषि शांडिल्य उन्हें उनके राज को वापस पाने के लिए प्रदोष व्रत करने को कहते हैं, और पूरी विधि बताते हैं।
जिसके बाद ब्राह्मणी और राजकुमारों ने विधि-विधान से प्रदोष व्रत किया। फिर एक दिन बड़े राजकुमार की मुलाकात अंशुमती से हुई, दोनों एक-दूसरे को चाहने लगे। तब अंशुमती के पिता ने राजकुमार की सहमति से दोनों की शादी कर दी। फिर दोनों राजकुमार ने गंदर्भ पर हमला किया और उनकी जीत हुई। बता दें कि इस युद्ध में अंशुमती के पिता ने राजकुमारों की मदद की थी। दोनों राजकुमारों को अपना सिंहासन वापस मिल गया और गरीब ब्राम्हणी को भी एक खास स्थान दिया गया, जिससे उनके सारे दुख खत्म हो गए। राज-पाट वापस मिलने का कारण प्रदोष व्रत था, जिससे उन्हें संपत्ति मिली और जीवन में खुशहाली आई।
||शिव आरती||
जय शिव ओंकाराॐ जय शिवओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिवअर्द्धांगी धारा ॥ॐ जय शिव...॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जयशिव...॥
दो भुज चारचतुर्भुज दस भुजअति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जनमोहे ॥ ॐ जय शिव...॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भालेशशिधारी ॥ ॐजय शिव...॥
श्वेताम्बरपीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जयशिव...॥
कर के मध्यकमंडलु चक्र त्रिशूलधर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ॐ जय शिव...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानतअविवेका ।
प्रणवाक्षरमध्ये ये तीनोंएका ॥ ॐ जय शिव...॥
काशी में विश्वनाथविराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोगलगावत महिमा अतिभारी ॥ ॐ जय शिव...॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जोकोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछितफल पावे ॥ॐ जय शिव...॥
शिव जी के मंत्र
1- ॐ तत्पुरुषाय विद्महे
महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!
2- ॐ नमः शिवाय
3- ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः
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