भगवान शिव की कृपा: मासिक शिवरात्रि के पर्व का आध्यात्मिक दृष्टिकोण
मासिक शिवरात्रि, हिन्दू धर्म में हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली एक विशेष शिवरात्रि है। इसे मासिक शिवरात्रि कहा जाता है, क्योंकि इसे हर माह मनाया जाता है।
इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है और भक्तगण शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। शिवरात्रि का अर्थ होता है 'शिव की रात्रि' और इसे मासिक रूप से मनाने से व्यक्ति को मानव जीवन में शांति, सुख, और मोक्ष की प्राप्ति होने की कामना की जाती है।
मासिक शिवरात्रि के दिन विशेष रूप से नीति, शिवपूजा, व्रत, ध्यान, और अच्छे कर्मों की प्रवृत्ति करने का महत्व होता है। भगवान शिव की कृपा से व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति का अहसास होता है और उसे अच्छे मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
हर माह की मासिक शिवरात्रि को विशेष माना जाता है, लेकिन महाशिवरात्रि, जो फाल्गुण मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को पड़ती है, वह बहुत अधिक पुण्य दिन के रूप में मानी जाती है और इसे विशेष रूप से मनाया जाता है।
चतुर्दशी प्रारम्भ - 9 जनवरी 2024 - रात्रि 10:24 बजे तक
चतुरदास
चतुर्दशी समाप्त - 10 जनवरी 2024 - रात्रि 08:10 बजे
मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि
मासिक शिवरात्रि की पूजा का आयोजन विशेष रूप से शिव भक्तों द्वारा किया जाता है। यहां आपको मासिक शिवरात्रि की पूजा के लिए एक सामान्य विधि दी जा रही है:
सामग्री:
शिवलिंग
बेल पत्र
धूप
दीपक और मैच
गंगाजल या पानी
रोली, चावल, कुमकुम
फूल, फल, नैवेद्य (प्रसाद)
पंचामृत: दही, शहद, दूध, घी, गूंथा गुड़
गणेश मूर्ति (पूजा की शुरुआत गणेश जी की पूजा से होती है)
पूजा विधि:
स्नान:
पूजा की शुरुआत में श्राद्ध से शुद्धि के लिए स्नान करें।
आसन स्थापना:
शिवलिंग के सामने आसन स्थापित करें।
शिवलिंग अभिषेक:
शिवलिंग को गंगाजल या पानी से स्नान कराएं।
फिर पंचामृत से अभिषेक करें।
तिलक और चंदन:
शिवलिंग पर रोली, चावल और कुमकुम से तिलक लगाएं।
चंदन का भी तिलक करें।
धूप और दीप:
शिवलिंग के सामने धूप और दीपक जलाएं।
बेल पत्र और फूल:
बेल पत्र का अर्पण करें और फूल चढ़ाएं।
नैवेद्य:
प्रसाद के रूप में फल, फूल, और अन्य नैवेद्य शिवलिंग को अर्पित करें।
आरती:
शिव जी की आरती गाएं।
मन्त्र जाप:
ॐ नमः शिवाय"
मासिक शिवरात्रि का महत्व हिन्दू धर्म में विशेष रूप से माना जाता है, और इसका आयोजन हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को किया जाता है। यहां कुछ मुख्य कारण और महत्वपूर्ण तत्व दिए जा रहे हैं:
शिव पूजा का महत्व: मासिक शिवरात्रि का आयोजन शिव भक्तों द्वारा भगवान शिव की पूजा करने के लिए होता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जो भक्तों को मानव जीवन में शांति, सुख, और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है।
साधना और समर्पण: मासिक शिवरात्रि का आयोजन भक्ति और समर्पण की भावना को बढ़ाता है। इस दिन भक्तगण शिवलिंग के सामने आत्मा की समर्पणा भावना के साथ पूजा अर्पित करते हैं और अपने जीवन को दिव्यता की दिशा में मोड़ते हैं।
कल्याण और शुभ कार्यों के लिए: मासिक शिवरात्रि का आयोजन कल्याण, सुख, और शुभ कार्यों के लिए किया जाता है। इस दिन भक्तगण अच्छे कर्मों की प्रवृत्ति करते हैं और अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का प्रयास करते हैं।
सांसारिक सुख और समृद्धि: मासिक शिवरात्रि का आयोजन संसारिक सुख, समृद्धि, और परिवार के हर सदस्य के लिए कल्याण की कामना के साथ किया जाता है।
पवित्र मास: शिवरात्रि का मास भी पवित्र माना जाता है, और इस मास में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
कारगर ब्रत: मासिक शिवरात्रि का आयोजन एक कारगर व्रत माना जाता है, जिससे भक्तगण अच्छे नैतिक और धार्मिक गुणों की प्राप्ति के लिए संकल्पित होते हैं।
इस प्रकार, मासिक शिवरात्रि का आयोजन एक धार्मिक और आध्यात्मिक पर्व के रूप में होता है जो भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति और मानवता के लिए शांति की कामना के साथ जोड़ता है।
अन्य संबंधित पोस्ट और लेख
वीर हनुमाना अति बलवाना राम नाम रसियो रे,प्रभु मन बसियो रे भजन हिंदी लिरिक्स
वीर हनुमाना अति बलवाना राम नाम रसियो रे,प्रभु मन बसियो रे भजन हिंदी लिरिक्स भक्ति भजन गीत विवरण गीत: - वीर हनुमान अति बलवाना, गायक: - नरिश नरशी, गीत: - नरिश नरशी वीर हनुमाना अति बलवाना, राम नाम रसियो...
कौवे की गरूड़ से दोस्ती
कौवे की गरुड़ से दोस्ती कहानी महाभारत (महाभारत) और भागवत गीता (भागवत गीता) की है। कई लोक कथाओं में भी इस कहानी (कहानी) का उल्लेख मिलता है। एक कौवे की गरुड़ से दोस्ती हो गई। दोनों काफी समय तक साथ रहे।...
रघुनंदन दीनदयाल हो तुम श्रीराम तुम्हारी जय होवे
रघुनन्दन दीनदयाल हो श्री राम तुम्हारी जय होवे राजा राम तुम्हारी जय होवे दीनानाथ तुम्हारी जय होवे रघुनाथ तुम्हारी जय होवे सिया राम तुम्हारी जय होवे रघुनन्दन दीनदयाल हो श्री राम तुम्हारी...
महालक्ष्मी व्रत: व्रत उद्यापन और पूजा विधि
महालक्ष्मी व्रत: व्रत उद्यापन और पूजा विधि महालक्ष्मी व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को शुरू होता है और आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को समाप्त होता है। यह व्रत कुल 16 दिनों तक चलता...
गुरुवार व्रत की कथा और आरती
गुरूवार व्रत की कथा प्राचीन समय की बात है. किसी राज्य में एक बड़ा प्रतापी तथा दानी राजा राज्य करता था. वह प्रत्येक गुरूवार को व्रत रखता एवं भूखे और गरीबों को दान देकर पुण्य प्राप्त करता था परन्तु...
बुधवार के उपाय
बुधवार के उपाय धार्मिक मान्यता के मुताबिक बुधवार के दिन खास तौर पर शिवजी और माता पार्वती के पुत्र भगवान गणेश जी की पूजा-अर्चना का विधान है। श्री गणेशजी को विघ्नहर्ता कहा जाता है। मान्यता है कि...
धनतेरस का पर्व
धनतेरस से दीपावली के त्योहार का आरंभ माना जाता है। दिवाली या दीपावली रोशनी का त्योहार है। यह हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। हर किसी को इस महापर्व का साल भर इंतजार रहता है। दीपोत्सव...
हनुमान चालीसा के सभी दोहों और चौपाइयों का अर्थ हिंदी में ?
दोहा श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि । बरनउ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार । बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार॥ अर्थ : इन पंक्तियों...
श्री मन नारायण नारायण नारायण। भजन
श्री मन नारायण नारायण नारायण। भजन भजमन नारायण नारायण नारायण।। श्री मन नारायण नारायण नारायण ,ॐ नारायण नारायण नारायण। लक्ष्मी नारायण नारायण नारायण,ॐ नारायण नारायण नारायण।। गज और...
शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा, व्रत विधि और उद्यापन आरती
कथा एक बुढ़िया थी जिसके सात बेटे थे। उनमे से छह कमाते थे और एक न कमाने वाला था। वह बुढ़िया उन छ: को अच्छी रसोई बनाकर बड़े प्रेम से खिलाती पर सातवें को बचा-खुचा झूठन खिलाती थी। परन्तु वह भोला...
बिल्व या बेल पत्र का महत्व
बिल्व पत्र का भगवान शंकर को प्रिय है। बिल्व पत्र का महत्व बिल्व तथा श्रीफल नाम से प्रसिद्ध यह फल बहुत ही काम का है। यह जिस पेड़ पर लगता है वह शिवद्रुम भी कहलाता है। बिल्व का पेड़ संपन्नता का प्रतीक,...
मंगल भवन अमंगल हरि
हो, मंगल भवन, अमंगल हारी द्रबहु सु दसरथ, अजिर बिहारी आ, राम भगत हित नर्तन धारी सहे संकट किये साधो सुखारी सिया राम जय-जय (राम सिया राम, सिया राम जय-जय राम) हो, होइहैं सोई जो, राम रचि राखा को करि तरक, बढ़ावई...
सावन का महीना शिवजी की अराधना के लिए समर्पित
से शुरू हो रहा है सावन 2023 इस बार सावन का महीना करीब 2 महीने का होने वाला है। इस बार सावन महीने की शुरुआत 4 जुलाई 2023 से हो रही है और 31 अगस्त 2023 को इसका समापन होगा। यानी इस बार भक्तों को भगवान शिव की उपासना...
दीपावली उत्सव
दिवाली रोशनी का त्योहार है. दिवाली के दिन सभी लोग अपने घरों में दीपक जलाते हैं। लोग अपने घरों को फूलों, दीयों, रंगोली और रोशनी से सजाते हैं। दिवाली एक त्यौहार है जिसे भारत में हिंदू मनाते हैं। यह...
दिवाली 2023
दिवाली, रोशनी का हिंदू त्योहार, भारत का सबसे प्रतीक्षित और सभी त्योहारों में सबसे उज्ज्वल है। दिवाली मूल शब्द "दीपावली" का संक्षिप्त रूप है, जो "दीपा" शब्द से बना है, जो दीपक या लालटेन को दर्शाता है,...
देवउठनी एकादशी की पूजा का शुभ मुहूर्त
सनातन परंपरा में जिस कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की देवोत्थान या फिर कहें देवउठनी एकादशी पर श्रीहरि अपनी योगनिद्रा से जागते हैं और उसमें शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है, उसकी तारीख,...
निर्जला एकादशी
निर्जला एकादशी बुधवार, 31 मई 2023 एकादशी तिथि प्रारंभ : 30 मई 2023 को दोपहर 01:07 बजे एकादशी तिथि समाप्त : 31 मई 2023 को दोपहर 01 बजकर 45 मिनट पर एकादशी का व्रत हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ज्येष्ठ मास...
गोवर्धन पूजा
पुरे भारत देश में सभी त्योहारों को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। वेदो के अनुसार गोवर्धन पूजा का हिन्दू धर्म में काफी महत्व है। यह त्यौहार कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया...
माघ पूर्णिमा : आत्मा की प्रकाश की पूर्णिमा या धार्मिक समर्पण की पूर्णिमा
माघ पूर्णिमा व्रत एक हिन्दू धार्मिक व्रत है जो माघ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत हिन्दू परम्परा में महत्वपूर्ण माना जाता है और इसे संगीत, ध्यान, धर्मिक कार्यों, और दान-धर्म के रूप...
संकटमोचन हनुमान अष्टक
बाल समय रवि भक्षी लियो तब तीनहुं लोक भयो अंधियारों ताहि सों त्रास भयो जग को यह संकट काहु सों जात न टारो देवन आनि करी बिनती तब छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम...
बजरंग बाण
दोहा-निश्चय प्रेम प्रतीति ते बिनय करै सनमान तेहि के कारज सकल शुभ सिद्ध करै हनुमान जय हनुमन्त सन्त हितकारी सुनि लीजै प्रभु विनय हमारी जन के काज विलम्ब न कीजै आतुर दौरि महा सुख दीजै जैसे कूदि...
परिणय सूत्र में बंधे थे श्री राम-जानकी, विवाह पंचमी 2023
2023: हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार विवाह पंचमी 2023 के शुभ अवसर पर भगवान श्री राम तथा माता सीता का विवाह हुआ था| विवाह पंचमी 2023 का त्यौहार मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता...
मेरे मालिक के दरबार में लिरिक्स
मेरे मालिक के दरबार में, सब का खाता, जो कोई जैसी करनी करता, वैसा ही फल पाता, क्या साधू क्या संत गृहस्थी, क्या राजा क्या रानी, प्रभू की पुस्तक में लिक्खी है, सबकी कर्म कहानी, अन्तर्यामी अन्दर...
गुरु पूर्णिमा का इतिहास, तिथिऔर लोग गुरु पूर्णिमा कैसे मनाते हैं?
गुरु पूर्णिमा एक राष्ट्रीय व्यापी पर्व है जो इस संसार में गुरु के प्रति समर्पित है। गुरु शब्द का प्रयोग उस शिक्षक के लिए किया जाता है जो विद्यार्थी को कुछ भी सिखाता है। यदि हम इसे प्राचीन काल से...
श्रीराम चालीसा का प्रतिदिन करें पाठ, खुश होंगे हनुमान जी
| | श्री राम चालीसा | | श्री रघुबीर भक्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी। निशि दिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहीं होई।। ध्यान धरें शिवजी मन मांही। ब्रह्मा, इन्द्र पार नहीं पाहीं।। दूत तुम्हार...
महागौरी की कथा, मंत्र, ध्यान मंत्र, बीज मंत्र, स्तोत्र और आरती
शिवपुराण के अनुसार, महागौरी को आठ साल की उम्र में ही अपने पूर्व जन्म की घटनाओं का आभास होने लग गया था। उन्होंने इसी उम्र से ही भगवान शिव को अपना पति मान लिया था और शिव को पति रूप में पाने के लिए तपस्या...
काल भैरव जयंती 2023
मार्गशीर्ष माह 28 नवंबर 2023 से शुरू हो रहा है. शिव भक्तों के लिए काल भैरव जयंती बहुत खास होती है, क्योंकि इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप कालभैरव की पूजा की जाती है. ऐसी मान्यता है कि काल भैरव की पूजा करने...
रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र और अर्थ
जटा टवी गलज्जलप्रवाह पावितस्थले गलेऽव लम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंग मालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं चकारचण्डताण्डवं तनोतु नः शिव: शिवम् ॥१॥ उनके बालों से बहने वाले जल से उनका...
शनिवार को शनिवार व्रत करें साढ़े साती से मिलेगी मुक्ति
शनिवार को शनिवार व्रत करें साढ़े साती से मिलेगी मुक्ति शनि देव की पूजा विधि - इस व्रत को रखने के लिए सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले स्नान कर लें - इसके बाद साफ कपड़े पहनकर पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं...
आइये जाने हिन्दू संवत्सर के बारे में
क्या होता है संवत्सर ? संवत्सर मूल रूप से वर्ष ही है भारतीय प्रणाली में वर्ष को संवत्सर कहा जाता है हिंदू धर्म बौद्ध धर्म और जैन धर्म के अनुसार कई प्रकार के संवत्सर प्रचलित हैं जैसे विक्रमी संवत...
गौरी तपो व्रत
गौरी तपो व्रत हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी पार्वती ने सबसे पहले भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए यह व्रत रखा था। वर्षों की 'तपो' के बाद अंततः उसे उसकी इच्छाएँ पूरी हुईं। तब से, उनके...
देव दिवाली 2023
देव दिवाली देव दिवाली राक्षस त्रिपुरासुर पर भगवान शिव की जीत के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन त्रिपुरासुर को हराया था। इस जीत का...
महाभारत में यक्ष द्वारा पूछे प्रश्न और उनके उत्तर
यक्ष प्रश्न महाभारत की प्रसिद्ध घटना है। यह अरण्य पर्व में पाया जाता है। यक्ष के प्रश्न का उत्तर देने में विफल रहने पर, नकुल, सहदेव, अर्जुन और भीम मारे जाते हैं, लेकिन जब युधिष्ठिर प्रश्नों का सही...
हरे कृष्ण गोविन्द मोहन मुरारी भजन लिरिक्स
हरे कृष्ण गोविन्द मोहन मुरारी भजन लिरिक्स जो किस्मत जगत की बनावे हैं सारे तो क्यू ना चले हम उन्ही को पुकारे यही मंत्र जपते हैं ऋषि सन्त सारे यही मंत्र जपते हैं ऋषि सन्त सारे हरे कृष्ण गोविन्द...
मकर संक्रांति दीप्तिमान आनंदोत्सव 2024
संक्रांति का अर्थ प्रत्येक महीने के अंतिम दिन को संक्रांति के रूप में जाना जाता है जो एक महीने के बढ़ने या ख़त्म होने और दूसरे की शुरुआत का प्रतीक है। यह सूर्य-देवता की पूजा है जो पृथ्वी पर जीवन...
शुक्राचार्य द्वारा भगवान शंकर के १०८ नामों का जप
शुक्राचार्य द्वारा भगवान शंकर के १०८ नामों का जप ॐ १. जो देवताओं के स्वामी, २. सुर-असुर द्वारा वन्दित, ३. भूत और भविष्य के महान देवता, ४. हरे और पीले नेत्रों से युक्त, ५. महाबली, ६. बुद्धिस्वरूप, ७....
मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कन्यापूजन की विधि और आरती
मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि इस दिन मां की पूजा अर्चना करने के लिए विशेष हवन किया जाता है. यह नवरात्रि का आखिरी दिन है तो इस दिन मां की पूजा अर्चना करने के बाद अन्य देवताओं की भी पूजा की जाती है....
दुर्गा सप्तमी - मां कालरात्रि
शुक्रवार, 8 अप्रैल, चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन है। दुर्गा सप्तमी नवरात्रि पर्व का सातवां दिन है। इस दिन मां कालरात्रि की पूजन का विधान है । धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कालरात्रि दुष्टों...
सभी कष्टों एवं दुखो के निवारण हेतु सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड पाठ
सुन्दर काण्ड श्लोक : * शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्। रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं वन्देऽहं करुणाकरं...
रविवार व्रत कथा, पूजा विधि, आरती, मंत्र और महत्व,
रविवार व्रत कथा प्राचीन काल की बात किसी नगर में एक बुढ़िया रहती थी। वह हर रविवार को नियमित रूप से व्रत करती थी। इसके लिए रविवार के दिन वह सूर्योदय से पहले जागती और स्नानादि से निवृत्त होकर आंगन की...
बड़े मंगल की तिथियां , महत्व और पूजा विधि
मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित है। ज्येष्ठ माह में सभी मंगलवार को 'बड़ा मंगल' के रूप में जाना जाता है और हम इस दिन भगवान हनुमान की पूजा करते हैं।इस माह के सभी मंगलो में प्रत्येक मंगलवार...
मार्गशीर्ष अमावस्या 2023
मार्गशीर्ष अमावस्या 2023: तिथियां और समय इस वर्ष की अमावस्या तिथि 12 दिसंबर, 2023 को 06:26:15 बजे शुरू होती है। और 13 दिसंबर, 2023 को 05:03:23 बजे समाप्त होती है। इस दौरान, ज्योतिषियों का मानना है कि ब्रह्मांड की ऊर्जा...
सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कहानी
सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कहानी सूर्यवंशी कुल के राजा हरिश्चंद्र अयोध्या नगरी के एक प्रतापी राजा थे. राजा हरिश्चंद्र का जीवनकाल सतयुग से सम्बन्धित था. राजा हरिश्चंद्र की पत्नी रानी तारामती...
भाई दूज 2023
भाई दूज दिवाली के बाद दूसरे दिन मनाया जाता है। भाई दूज का अर्थ नाम में ही दर्शाया गया है, क्योंकि यह एक भाई और एक बहन के बीच प्यार के रिश्ते को दर्शाता है। इस दिन एक बहन अपने भाई की सफलता और समृद्धि...
शनिवार व्रत कथा, पूजा विधि, आरती और मंत्र
शनिवार व्रत कथा, पूजा विधि, आरती शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित है। शनि को कर्मफलदाता माना गया है जो लोगों को उनके अच्छे बुरे दोनों कर्मों का फल देते हैं। अगर जातक की कुंडली में...
छोटी दिवाली/ नरक चतुर्दशी
दीवाली से एक दिन पहले और धनतेरस एक दिन बाद नरक चौदस या नरक चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाता है. इसी दिन छोटी दिवाली भी मनाई जाती है. यह हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर पड़ती है....
गणेश चतुर्थी संपूर्ण व्रत कथा
एक समय की बात है कि प्रसेनजित उस मणि को पहने हुए ही कृष्णजी के साथ वन में आखेट के लिए गए। अशुचिता के कारण अश्वारूढ़ प्रसेनजित को एक शेर ने मार डाला। उस सिंह को रत्न लेकर जाते देखकर जाम्बवान ने मार...
जानिए वसंत पंचमी पर कैसे करें मां सरस्वती को प्रसन्न और पाएं ये लाभ
मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए उपाय मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए आप निम्नलिखित उपायों का अनुसरण कर सकते हैं: श्रद्धापूर्वक पूजा करें: सरस्वती पूजा को श्रद्धापूर्वक और भक्तिभाव से...
गणेश चतुर्थी 2023: विनायक चतुर्दशी पूजा की तिथि, समय और मुहूर्त
गणेश चतुर्थी 2023: विनायक चतुर्दशी की तिथि, समय और मुहूर्त हिंदू कैलेंडर के अनुसार, विनायक चतुर्दशी 2023 सोमवार, 18 सितंबर को दोपहर 12:39 बजे शुरू होगी और मंगलवार, 19 सितंबर को रात 8:43 बजे समाप्त होगी। इसके अलावा,...
जया पार्वती व्रत का महत्व, अनुष्ठान और अन्य तथ्य
जया पार्वती व्रत का महत्व, अनुष्ठान और अन्य तथ्य जया-पार्वती व्रत आषाढ़ माह में मनाया जाने वाला पांच दिवसीय अनुष्ठान है। भारत के पश्चिमी भाग, विशेषकर गुजरात की अधिकांश महिलाएँ इसे बड़ी श्रद्धा...
