मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कन्यापूजन की विधि और आरती

मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि,  शुभ मुहूर्त, कन्यापूजन की विधि और  आरती

मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि

इस दिन मां की पूजा अर्चना करने के लिए विशेष हवन किया जाता है. यह नवरात्रि का आखिरी दिन है तो इस दिन मां की पूजा अर्चना करने के बाद अन्य देवताओं की भी पूजा की जाती है. इस दिन भी बाकी दिनों की तरह सबसे पहले लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उसपर मां की मूर्ति रखकर आरती, और हवन करें. हवन करते वक्त सभी देवी देवताओं के नाम से आहुति दें. इसके बाद मां के नाम से आहुति दें. बता दें कि दुर्गा सप्तशती के सभी श्लोक के साथ मां की आहुति दी जाती है. देवी ते बीज मंत्र “ऊं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमो नम: का 108 बार जप करके आहुति दें.

मां सिद्धीदात्री का पसंदीदा रंग

मां सिद्धिदात्री का पसंदीदा रंग गुलाबी है , जो प्रेम, करुणा और ताजगी का प्रतीक है

मां सिद्धीदात्री के लिए भोग और मंत्र

दुर्गा नवमी पर भक्त मां सिद्धिदात्री को नारियल, खीर, पुआ और पंचामृत का भोग लगाते हैं. इस दिन भक्त कन्या भोज या कन्या पूजा भी करते हैं , और देवी को प्रसाद के रूप में पूरी, हलवा चढ़ाते हैं.

मां सिद्धिदात्री की पूजा का शुभ मुहूर्त

उदया तिथि मान्य होने के कारण 23 अक्टूबर 2023, सोमवार को नवमी तिथि मनाई जाएगी। नवमी के कन्या पूजन मुहूर्त: नवमी के कन्या पूजन मुहूर्त 06:27 ए एम से 07:51 ए एम तक रहेगा।

कन्यापूजन की विधि

अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्यापूजन करने के लिए सबसे पहले सुबह उठकर स्नान पश्चात् स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं. यदि भक्त व्रत रख रहे हैं तो वे व्रत का संकल्प लेते हैं.
अब घर में रोज की ही तरह पूजा की जाती है और देवी मां को भोग लगाया जाता है.
इसके बाद घर में कन्याएं बुलाई जाती हैं.
कन्याओं के पैर धुलवाए जाते हैं और चटाई बिछाकर उन्हें बिठाते हैं.
हाथ में कलावा बांधा जाता है और माथे पर तिलक लगाते हैं.
प्रसाद में हलवा, चना, पूरी, नारियल और बताशे आदि परोसतें हैं.
कन्याओं को साथ ही कोई उपहार, श्रृंगार की वस्तु, एक रुपए या श्रृद्धा से कोई भी राशि दी जाती है.
इसके बाद कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद लिया जाता है और उन्हें घर भेजते हैं.
इस दिन गाय को पूड़ी खिलाना भी बेहद शुभ माना जाता है.

मां सिद्धीदात्री की आरती

महा गौरी दया कीजे, जग जननी दया कीजे
उमा, रमा ब्राह्मणी, अपनी शरण लीजे
गौर वर्ण अति सोहे, वृषभ की असवारी,
श्वेत वस्त्रों में मैय्या, लागे छवि प्यारी
महा गौरी दया कीजे
सृष्टि रूप तुम्ही हो, शिव अंगी माता
भक्त तुम्हारे अंगिन, नित प्रतिगुण गाता
महा गौरी दया कीजे
दक्ष के घर जन्मी तुम ले अवतार सती
प्रगति हिमाचल के घर बन शिव पार्वती
महा गौरी दया कीजे
नव दुर्गण के मैय्या, आठवां तेरा स्वरूप
शिव भी मोहित हो गए, देखे तेरा रूप
महा गौरी दया कीजे
आठवे नवरात्रे को जो व्रत तेरा करे
पता प्यार तुम्हारा भव सिंधु वो तारे
महा गौरी दया कीजे
वेद पुराण में महिमा तेरी मां अपरंपरा
हम अग्यानी कैसे पाए तुम्हारा प्यार
महा गौरी दया कीजे
महागौरी महामाया, आरती तेरी गाते
करुणामयी दया कीजे निशिदिन तुझे ध्याते
महा गौरी दया कीजे
शिव शक्ति महागौरी, चरण शरण लीजे
बालक जान के अपना, हमपे दया कीजे
महा गौरी दया कीजे.

मां दुर्गा का मंत्र

सर्व मंगला मंगल्ये, शिव सर्वार्थ साधिका
शरण्ये त्रयम्बके गौरी, नारायणी नमोस्तुते
* ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा ।।
* वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम् । कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम् ।।
* या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता ।
या देवी सर्व भूतेषु शक्ति रूपेण संस्थितः
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही 8 सिद्धियों को प्राप्त किया था. इन सिद्धियों में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व शामिल हैं. इन्हीं माता की वजह से भगवान शिव को अर्द्धनारीश्वर नाम मिला, क्योंकि सिद्धिदात्री के कारण ही शिव जी का आधा शरीर देवी का बना. हिमाचल का नंदा पर्वत इनका प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है. मान्यता है कि जिस प्रकार इस देवी की कृपा से भगवान शिव को आठ सिद्धियों की प्राप्ति हुई ठीक उसी तरह इनकी उपासना करने से अष्ट सिद्धि और नव निधि, बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है.
नवरात्रि की नवमी को मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं और भक्तों को यश, बल और धन भी प्रदान करती हैं।

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