भगवान विष्णु
वैदिक समय से ही विष्णु सम्पूर्ण विश्व की सर्वोच्च शक्ति तथा नियन्ता के रूप में मान्य रहे हैं। विष्णु पुराण १/२२/३६ अनुसार भगवान विष्णु निराकार परब्रह्म जिनको वेदों में ईश्वर कहा है चतुर्भुज विष्णु को सबसे निकटतम मूर्त एवं मूर्त ब्रह्म कहा गया है। विष्णु को सर्वाधिक भागवत एवं विष्णु पुराण में वर्णन है और सभी पुराणों में भागवत पुराण को सर्वाधिक मान्य माना गया है जिसके कारण विष्णु का महत्व अन्य त्रिदेवों के तुलना में अधिक हो जाता है ।गीता अध्याय ११ में विश्वस्वरूप विराट स्वरूप के अतिरिक्त चतुर्भुज स्वरूप के दर्शन देना सिद्ध करता है परमेश्वर का चतुर्भुज स्वरूप सुगम है।
भगवान विष्णु से संबंधित प्रमुख प्रश्न
Read All Questions- वैष्णो देवी पर्वत का क्या नाम है ?
- शेषनाग या आदिशेष के माता-पिता क्या का नाम था?
- नारद को वीणा किसने दी थी?
- प्रहलाद का गोत्र क्या था?
- गरुड़ की उत्पत्ति कहाँ से हुई है?
- षटतिला एकादशी के व्रत की सही विधि क्या है?
- विष्णु पुराण में प्रह्लाद की कथा क्या है?
- क्या दिवाली और धनतेरस एक ही है?
- मोहिनी और शिव का पुत्र कौन था?
- अयप्पा के लिए कौन सा दिन अच्छा है?
- क्या तुलसी कृष्ण की पत्नी हैं?
- क्या भगवान राम वैष्णो देवी से मिले थे?
- कुल कितनी एकादशी होती हैं?
- अत्रि ऋषि की पत्नी का क्या नाम था?
- सत्यभामा कौन थी ?
- गजेंद्र मोक्ष का पाठ करने से क्या फायदा होता है?
- भगवान विष्णु का निवासस्थान क्या है?
- अयप्पा के भगवान कौन हैं?
- सत्यभामा को किस बात का घमंड था ?
- एकादशी के पीछे की कहानी क्या है?
भगवान विष्णु से संबंधित प्रमुख कहानियाँ
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अर्जुन का अहंकार
एक बार अर्जुन को अहंकार हो गया कि वही भगवान के सबसे बड़े भक्त हैं। उनकी इस भावना को श्रीकृष्ण ने समझ लिया। एक दिन वह अर्जुन को अपने साथ घुमाने ले गए। रास्ते में उनकी मुलाकात एक गरीब ब्राह्मण से हुई।...
शरीर त्यागने के बाद कहाँ जाती है आत्मा
गरूड़ पुराण जो मरने के पश्चात आत्मा के साथ होने वाले व्यवहार की व्याख्या करता है उसके अनुसार जब आत्मा शरीर छोड़ती है तो उसे दो यमदूत लेने आते हैं ! मानव अपने जीवन में जो कर्म करता है यमदूत उसे उसके...
प्रह्लाद की कहानी
हिरण्यकशिपु दैत्यों का राजा था। दैत्य, यद्यपि देवों या देवताओं के समान कुल में पैदा हुए थे, फिर भी वे हमेशा देवताओं के साथ युद्ध में रहते थे। दैत्यों की मानव जाति के यज्ञों और अर्पणों में, या दुनिया...
नरसिंह अवतार
नरसिंह अवतार हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु के दस अवतारों में से चतुर्थ अवतार हैं जो वैशाख में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अवतरित हुए। पृथ्वी के उद्धार के समय भगवान ने वाराह अवतार...
पुत्रदा एकादशी: पौष मास के कृष्ण पक्ष की विशेष व्रत कथा और आरती
पौष पुत्रदा एकादशी, जिसे दुर्मुखी एकादशी भी कहा जाता है, हिन्दू कैलेंडर के मास 'पौष' में आने वाली एकादशी है। इस तिथि को विशेष रूप से विष्णु भगवान की पूजा की जाती है और भक्तों के लिए यह एक महत्वपूर्ण...
जया एकादशी व्रत कथा: भगवान विष्णु के भक्त का उपासना और कृपा
जया एकादशी व्रत सनातन धर्म में एकादशी का व्रत बहुत ही शुभ माना जाता है। इस व्रत को करने से प्राणी के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। इनमें से जया एकादशी इस जन्म और पूर्व...
मत्स्य अवतार
मत्स्य अवतार भगवान विष्णु का प्रथम अवतार है। मछली के रूप में अवतार लेकर भगवान विष्णु ने एक ऋषि को सब प्रकार के जीव-जन्तु एकत्रित करने के लिये कहा और पृथ्वी जब जल में डूब रही थी, तब मत्स्य अवतार...
गजेंद्र और ग्राह मुक्ति कथा
दक्षिण भारत के ही तमिल में "गजेन्द्र मोक्ष" से तीर्थ गजेन्द्र वर्धा पेरूमल मंदिर भी है। इस मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है कि एक बार हनुमान जी ने यहां भगवान विष्णु की पूजा करने के लिए "गजेन्द्र...
भगवान शंकर का पूर्ण रुप काल भैरव
एक बार सुमेरु पर्वत पर बैठे हुए ब्रम्हाजी के पास जाकर देवताओं ने उनसे अविनाशी तत्व बताने का अनुरोध किया | शिवजी की माया से मोहित ब्रह्माजी उस तत्व को न जानते हुए भी इस प्रकार कहने लगे - मैं ही इस संसार...
भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा
भगवान विष्णु के वामन रूपी अवतार की कहानी बड़ी ही रोचक है क्योंकि इस पौराणिक कथा में देवों और दैत्यों के बीच हुए युद्ध में जीत और हार के साथ ही अपने वचन निभाने की कसौटी का बड़ी ही ख़ूबसूरती से वर्णन...
श्रीकृष्ण जन्म
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रात के बारह बजे मथुरा के राजा कंस की जेल मे वासुदेव जी की पत्नि देवी देवकी के गर्भ से सोलह कलाओ से युक्त भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था । इस तिथि को रोहिणी नक्षत्र...
कच्छप अवतार
कूर्म अवतार को कच्छप अवतार (कछुआ अवतार) भी कहते हैं।कूर्म अवतार में भगवान विष्णु ने क्षीरसागर के समुद्रमंथन के समय मंदर पर्वत को अपने कवच पर संभाला था। इस प्रकार भगवान विष्णु, मंदर पर्वत और वासुकि...
द्रौपदी का चीर हरण
महाभारत में युधिष्ठिर सब कुछ हार ने के बाद उन्होंने द्रौपदी को दाँव पर लगा दिया और दुर्योधन की ओर से मामा शकुनि ने द्रोपदी को जीत लिया। उस समय दुशासन द्रौपदी को बालों को पकड़कर घसीटते हुए सभा में...
कालिया दमन
कृष्ण और कालिया नाग नाग की कहानी भगवान विष्णु का आठवां अवतार कृष्णा भगवान विष्णु के आठवें अवतार थे, और वे द्वापर युग के दौरान वृंदावन में रहते थे। गाँव के निवासी उसके और उसकी मनमोहक हरकतों के...
सती अनुसुइया ने ब्रह्मा,विष्णु,महेश को शिशु बनाया
सती अनुसुइया ने ब्रह्मा,विष्णु,महेश को शिशु बनाया सती अनुसुइया महर्षि अत्रि की पत्नी थीं। अत्रि ऋषि ब्रह्मा जी के मानस पुत्र और सप्तऋषियों में से एक थे। अनुसुइया का स्थान भारतवर्ष की सती-साध्वी...
श्रीकृष्ण दौड़े चले आए
अर्जुन ने अपने-आपको श्रीकृष्ण को समर्पित कर दिया था| अर्जुन होता हुआ भी, नहीं था, इसलिए कि उसने जो कुछ किया, अर्जुन के रूप में नहीं, श्रीकृष्ण के सेवक के रूप में किया| सेवक की चिंता स्वामी की चिंता...
भगवान राम और लक्ष्मण की मृत्यु
महाकाल का श्रीराम के पास आना जब श्रीराम के इस धरती पर सभी कर्तव्य पूरे हो गए तब उन्हें सूचना देने स्वयं महाकाल एक तपस्वी के रूप में श्रीराम दरबार में पहुंचे। द्वार पर उनकी भेंट लक्ष्मण से हुई तथा...
गरुड़ और नागों की उत्पत्ति और कैसे बने गरुड़ विष्णु के वाहन
आज हम आपको एक पौराणिक कथा बता रहे है जिसका वर्णन महाभारत के आदि पर्व में मिलता है। यह कथा बताती है की इस धरती पर गरुड़ और नागों की उत्पत्ति कैसे हुई, क्यों गरुड़ नाग के दुशमन हुए, क्यों नागो की जीभ...
ध्रुव तारे की कथा
राजा उत्तानपाद ब्रह्माजी के मानस पुत्र स्वयंभू मनु के पुत्र थे। उनकी सनीति एवं सुरुचि नामक दो पत्नियाँ थीं। उन्हें सुनीति से ध्रुव एवं सुरुचि से उत्तम नामक पुत्र प्राप्त हुए। वे दोनों राजकुमारों...
रामायण और महाभारत में परशुराम से सम्बंधित कथाएं
ब्रह्मवैवर्त पुराण में कथानक मिलता है कि कैलाश स्थित भगवान शंकर के अन्त:पुर में प्रवेश करते समय गणेश जी द्वारा रोके जाने पर परशुराम ने बलपूर्वक अन्दर जाने की चेष्ठा की। तब गणपति ने उन्हें स्तम्भित...
