रामायण और महाभारत में परशुराम से सम्बंधित कथाएं

रामायण और महाभारत में परशुराम से सम्बंधित कथाएं

ब्रह्मवैवर्त पुराण में कथानक मिलता है कि कैलाश स्थित भगवान शंकर के अन्त:पुर में प्रवेश करते समय गणेश जी द्वारा रोके जाने पर परशुराम ने बलपूर्वक अन्दर जाने की चेष्ठा की। तब गणपति ने उन्हें स्तम्भित कर अपनी सूँड में लपेटकर समस्त लोकों का भ्रमण कराते हुए गोलोक में भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन कराके भूतल पर पटक दिया। चेतनावस्था में आने पर कुपित परशुरामजी द्वारा किए गए फरसे के प्रहार से गणेश जी का एक दाँत टूट गया, जिससे वे एकदन्त कहलाये।

रामायण काल

उन्होंने त्रेतायुग में रामावतार के समय शिवजी का धनुष भंग होने पर आकाश-मार्ग द्वारा मिथिलापुरी पहुँच कर प्रथम तो स्वयं को "विश्व-विदित क्षत्रिय कुल द्रोही" बताते हुए "बहुत भाँति तिन्ह आँख दिखाये" और क्रोधान्ध हो "सुनहु राम जेहि शिवधनु तोरा, सहसबाहु सम सो रिपु मोरा" तक कह डाला। तदुपरान्त अपनी शक्ति का संशय मिटते ही वैष्णव धनुष श्रीराम को सौंप दिया और क्षमा याचना करते हुए "अनुचित बहुत कहेउ अज्ञाता, क्षमहु क्षमामन्दिर दोउ भ्राता" तपस्या के निमित्त वन को लौट गये। 

रामचरित मानस की ये पंक्तियाँ साक्षी हैं- "कह जय जय जय रघुकुलकेतू, भृगुपति गये वनहिं तप हेतू"। वाल्मीकि रामायण में वर्णित कथा के अनुसार दशरथनन्दन श्रीराम ने जमदग्नि कुमार परशुराम का पूजन किया और परशुराम ने रामचन्द्र की परिक्रमा कर आश्रम की ओर प्रस्थान किया।

जाते जाते भी उन्होंने श्रीराम से उनके भक्तों का सतत सान्निध्य एवं चरणारविन्दों के प्रति सुदृढ भक्ति की ही याचना की थी।

महाभारत काल

भीष्म द्वारा स्वीकार न किये जाने के कारण अंबा प्रतिशोध वश सहायता माँगने के लिये परशुराम के पास आयी। तब सहायता का आश्वासन देते हुए उन्होंने भीष्म को युद्ध के लिये ललकारा। उन दोनों के बीच २३ दिनों तक घमासान युद्ध चला। किन्तु अपने पिता द्वारा इच्छा मृत्यु के वरदान स्वरुप परशुराम उन्हें हरा न सके।

परशुराम अपने जीवन भर की कमाई ब्राह्मणों को दान कर रहे थे, तब द्रोणाचार्य उनके पास पहुँचे। किन्तु दुर्भाग्यवश वे तब तक सब कुछ दान कर चुके थे। तब परशुराम ने दयाभाव से द्रोणचार्य से कोई भी अस्त्र-शस्त्र चुनने के लिये कहा। तब चतुर द्रोणाचार्य ने कहा कि मैं आपके सभी अस्त्र शस्त्र उनके मन्त्रों सहित चाहता हूँ ताकि जब भी उनकी आवश्यकता हो, प्रयोग किया जा सके। परशुरामजी ने कहा-"एवमस्तु!" अर्थात् ऐसा ही हो। इससे द्रोणाचार्य शस्त्र विद्या में निपुण हो गये।

परशुराम कर्ण के भी गुरु थे। उन्होने कर्ण को भी विभिन्न प्रकार कि अस्त्र शिक्षा दी थी और ब्रह्मास्त्र चलाना भी सिखाया था। लेकिन कर्ण एक सूत का पुत्र था, फिर भी यह जानते हुए कि परशुराम केवल ब्राह्मणों को ही अपनी विधा दान करते हैं, कर्ण ने छल करके परशुराम से विधा लेने का प्रयास किया। परशुराम ने उसे ब्राह्मण समझ कर बहुत सी विद्यायें सिखायीं, लेकिन एक दिन जब परशुराम एक वृक्ष के नीचे कर्ण की गोदी में सर रखके सो रहे थे, तब एक भौंरा आकर कर्ण के पैर पर काटने लगा, अपने गुरुजी की नींद में कोई अवरोध न आये इसलिये कर्ण भौंरे को सेहता रहा, भौंरा कर्ण के पैर को बुरी तरह काटे जा रहा था, भौरे के काटने के कारण कर्ण का खून बहने लगा। 

वो खून बहता हुआ परशुराम के पैरों तक जा पहुँचा। परशुराम की नींद खुल गयी और वे इस खून को तुरन्त पहचान गये कि यह खून तो किसी क्षत्रिय का ही हो सकता है जो इतनी देर तक बगैर उफ़ किये बहता रहा। इस घटना के कारण कर्ण को अपनी अस्त्र विद्या का लाभ नहीं मिल पाया।

एक अन्य कथा के अनुसार एक बार गुरु परशुराम कर्ण की एक जंघा पर सिर रखकर सो रहे थे। तभी एक बिच्छू कहीं से आया और कर्ण की जंघा पर घाव बनाने लगा। किन्तु गुरु का विश्राम भंग ना हो, इसलिये कर्ण बिच्छू के दंश को सहता रहा। अचानक परशुराम की निद्रा टूटी और ये जानकर की एक ब्राम्हण पुत्र में इतनी सहनशीलता नहीं हो सकती कि वो बिच्छू के दंश को सहन कर ले। कर्ण के मिथ्याभाषण पर उन्होंने उसे ये श्राप दे दिया कि जब उसे अपनी विद्या की सर्वाधिक आवश्यकता होगी, तब वह उसके काम नहीं आयेगी।

अन्य संबंधित कहानियां और कथाएं

#

पौष माह का दूसरा प्रदोष व्रत :शुक्ल प्रदोष व्रत

शुक्ल प्रदोष व्रत, जिसे प्रदोषम भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में भगवान शिव को समर्पित एक शुभ दिन है। प्रदोष व्रत प्रत्येक चंद्र पखवाड़े के 13वें दिन पड़ता है, चंद्रमा के बढ़ने (शुक्ल पक्ष) और घटने (कृष्ण...

#

क्यों पीपल के वृक्ष के साथ ही शनिदेव के पूजन की परंपरा है ?

त्रेतायुग में एक बार बारिश के अभाव से अकाल पड़ा। तब कौशिक मुनि परिवार के लालन-पालन के लिए अपना गृहस्थान छोड़कर अन्यत्र जाने के लिए अपनी पत्नी और पुत्रों के साथ चल दिए। फिर भी परिवार का भरण-पोषण...

#

जया एकादशी व्रत कथा: भगवान विष्णु के भक्त का उपासना और कृपा

जया एकादशी व्रत सनातन धर्म में एकादशी का व्रत बहुत ही शुभ माना जाता है। इस व्रत को करने से प्राणी के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। इनमें से जया एकादशी इस जन्म और पूर्व...

#

बसंत पंचमी की कथा

सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खास तौर पर मनुष्य योनि की रचना की। अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों आ॓र...

#

सती अनुसुइया ने ब्रह्मा,विष्णु,महेश को शिशु बनाया

सती अनुसुइया ने ब्रह्मा,विष्णु,महेश को शिशु बनाया सती अनुसुइया महर्षि अत्रि की पत्नी थीं। अत्रि ऋषि ब्रह्मा जी के मानस पुत्र और सप्तऋषियों में से एक थे। अनुसुइया का स्थान भारतवर्ष की सती-साध्वी...

#

चन्द्रमा को शाप से मुक्ति

चंद्रमा की सुंदरता पर राजा दक्ष की सत्ताइस पुत्रियां मोहित हो गईं ! वे सभी चंद्रमा से विवाह करना चाहती थीं ! दक्ष ने समझाया सगी बहनों का एक ही पति होने से दांपत्य जीवन में बाधा आएगी लेकिन चंद्रमा...

#

अगस्त्य - महासागर का जल

कृत युग में, जिसे सत्य युग के रूप में भी जाना जाता है, कालकेय नामक शक्तिशाली राक्षसों का एक झुंड था जो बहुत क्रूर थे और हमेशा देवताओं के साथ युद्ध छेड़ने की ताक में रहते थे। वृत्रासुर इनका प्रधान...

#

देवयानी की कहानी

शुक्राचार्य की पुत्री : देवयानी असुरों के पुरोहित शुक्राचार्य ने भी असुर नरेश वृषपर्वा को पढ़ाया था। एक दिन शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी और वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा अपनी अन्य सखियों के...

#

भगवान अयप्पा - विष्णु और शिव के पुत्र

भगवान अयप्पा का जन्म केरल में सबरीमाला, दुनिया में सबसे प्रसिद्ध अयप्पा मंदिर का स्थान है और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से उनकी जाति, पंथ और धर्म की परवाह किए बिना हर साल 50 मिलियन से अधिक भक्तों...

#

खरमास माह से जुड़ी जानकारी: खराब दिनों में क्यों करते हैं इनकी गिनती

हिंदू धर्म में खरमास का विशेष महत्व बताया गया है। इसे मलमास भी कहा जाता है और इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है क्योंकि खरमास की अवधि को अशुभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस साल...

#

जब माता लक्ष्मी ने बेटी बनकर माधव का कल्याण किया

एक बार भगवान विष्णु जी शेषनाग पर बेठे बेठे बोर हो गये, ओर उन्होने धरती पर घुमने का विचार मन में किया, वेसे भी कई साल बीत गये थे धरती पर आये, ओर वह अपनी यात्रा की तयारी मे लग गये, स्वामी को तेयार होता...

#

जब हनुमान जी ने तोडा भीम का अहंकार

भीम को यह अभिमान हो गया था कि संसार में मुझसे अधिक बलवान कोई और नहीं है| सौ हाथियों का बल है उसमें, उसे कोई परास्त नहीं कर सकता... और भगवान अपने सेवक में किसी भी प्रकार का अभिमान रहने नहीं देते| इसलिए...

#

शिव ने दिया विष्णु को अजेय सुदर्शन चक्र

भगवान विष्णु के हर चित्र व मूर्ति में उन्हें सुदर्शन चक्र धारण किए दिखाया जाता है। यह सुदर्शन चक्र भगवान शंकर ने ही जगत कल्याण के लिए भगवान विष्णु को दिया था। इस संबंध में शिवमहापुराण के कोटिरुद्रसंहिता...

#

जब भगवान राम और भोलेनाथ के बीच हुआ युद्ध

बात उन दिनों कि है जब श्रीराम का अश्वमेघ यज्ञ चल रहा था ! श्रीराम के अनुज शत्रुघ्न के नेतृत्व में असंख्य वीरों की सेना सारे प्रदेश को विजित करती जा रही थी ! यज्ञ का अश्व प्रदेश प्रदेश जा रहा था ! इस...

#

भगवान शनि देव का जन्म, विशेषता और मंत्र

संपूर्ण सौरमंडल के अधिपति-भगवान सूर्य भगवान सूर्य इस संपूर्ण सौरमंडल के अधिपति हैं। उनका विवाह भगवान विश्वकर्मा की पुत्री स्वर्णा से हुआ था। अपनी गर्मी सहन करने में असमर्थ, स्वर्णा ने एक बार...

#

कुरु का जन्म

कुरुवंश के प्रथम पुरुष का नाम कुरु था| कुरु बड़े प्रतापी और बड़े तेजस्वी थे| उन्हीं के नाम पर कुरुवंश की शाखाएं निकलीं और विकसित हुईं| एक से एक प्रतापी और तेजस्वी वीर कुरुवंश में पैदा हो चुके हैं|...

#

आध्यात्मिक अनुशासन से सफलता प्राप्त करना : सफला एकादशी

सफला एकादशी एक हिंदू धार्मिक अनुष्ठान है जो मार्गशीर्ष के चंद्र माह के शुक्ल पक्ष (शुक्ल पक्ष) के ग्यारहवें दिन (एकादशी) को पड़ता है। यह ग्रेगोरियन कैलेंडर में दिसंबर या जनवरी से मेल खाता है। "सफला"...

#

गणेश का जन्म

गणेश का जन्म एक दिन माता पार्वती घर में कैलाश पर्वत पर स्नान करने की तैयारी कर रही थीं। जैसा कि वह परेशान नहीं होना चाहती थी, उसने अपने पति शिव के बैल नंदी से दरवाजे की रक्षा करने और किसी को भी पास...

#

भस्मासुर की कहानी

भारतीय पौराणिक कथा मूर्ख भस्मासुर एक असुर या दानव के बारे में है जो सबसे शक्तिशाली बनना चाहता था। भस्मासुर की कहानी राक्षस भस्मासुर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो घोर तपस्या के माध्यम से भगवान शिव...

#

लक्ष्मी जी की अंगूठी

एक निर्धन व्यक्ति था। वह नित्य भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करता। एक बार दीपावली के दिन भगवती लक्ष्मी की श्रद्धा-भक्ति से पूजा-अर्चना की। कहते हैं उसकी आराधना से लक्ष्मी प्रसन्न हुईं। वह उसके...

#

जगन्नाथ रथ यात्रा: भक्ति और एकता की यात्रा

जगन्नाथ रथयात्रा हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो पुरी, उड़ीसा में हर साल होता है। इस त्योहार में, भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की मूर्तियाँ उनकी मंदिर से निकालकर उनके विशाल...

#

जब ठगे गए गणेश जी

गणेश जी विघ्न विनाशक व शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं। अगर कोई सच्चे मन से गणेश जी की वंदना करता है, तो गौरी नंदन तुरंत प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद प्रदान करते हैं। वैसे भी गणेश जी जिस स्थान पर...

#

नागमाता मनसा देवी

मनसा माता भगवान शिव की पुत्री हैं। उन्होंने तपस्या के द्वारा अपना शरीर सुखा दिया जिसकी वजह से उनका नाम जरत्कारु पड़ा। पिता शिव से उन्हें नागलोक का साम्राज्य मिला। मनसा देवी नागों की माता हैं।...

#

गजानन गणपति : एकदंत

गजानन गणपति : एकदंत किसी भी पूजन कार्य में सबसे पहले गणपति की पूजा की जाती है। भगवान गणेश को गजानन, एकाक्षर, विघ्नहर्ता, एकदंत और कई अन्य नामों से बुलाया जाता है। इन दिनों गणेश उत्सव का त्योहार बड़ी...

#

षटतिला एकादशी: व्रत कथा और आरती

षटतिला एकादशी की कथा इसकी कथा भगवान विष्णु के तपस्या की घटना पर आधारित है. इसका विवरण विभिन्न पुराणों और कथा-संहिताओं में मिलता है, लेकिन एक सामान्य संस्कृत कथा निम्नलिखित है: कहानी एक समय की...

#

मोक्षदा एकादशी और परम मुक्ति का मार्ग

मोक्षदा एकादशी, जिसे गीता जयंती के नाम से भी जाना जाता है, यह भगवान कृष्ण और भगवद गीता को समर्पित एक शुभ दिन माना जाता है। भगवद गीता, जिसे अक्सर गीता भी कहा जाता है, एक पवित्र हिंदू धर्मग्रंथ है...

#

सकट चौथ व्रत कथा

प्रत्येक माह की चतुर्थी श्रीगणेशजी की पूजा-अर्चना के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। अपनी संतान की मंगलकामना के लिए महिलाएं माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को व्रत रखती है। इसे संकष्टी चतुर्थी,...

#

जब वरुण ने अपने पुत्र की परीक्षा ली

एक बार वरुण के पुत्र भृगु के मन में परमात्मा को जानने की अभिलाषा जाग्रत हुई। उनके पिता वरुण ब्रम्ह निष्ठ योगी थे। अत: भृगु ने पिता से ही अपनी जिज्ञासा शांत करने का विचार किया। वे अपने पिता के पास...

#

यमराज और डाकू

एक साधु व डाकू यमलोक पहुंचे। डाकू ने यमराज से दंड मांगा और साधु ने स्वर्ग की सुख-सुविधाएं। यमराज ने डाकू को साधु की सेवा करने का दंड दिया। साधु तैयार नहीं हुआ। यम ने साधु से कहा- तुम्हारा तप अभी अधूरा...

#

पौष पूर्णिमा: व्रत विधि, व्रत कथा, व्रत आरती, नियम और महत्वपूर्ण

पौष पूर्णिमा हिंदू कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण पूर्णिमा का दिन है, और यह आमतौर पर पारंपरिक हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार पौष (दिसंबर-जनवरी) के महीने में आता है। यह दिन धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व...

#

दैवीय शक्ति का अनावरण: बड़ा मंगल की तिथियां, महत्व और पूजा विधि

देशभर में हनुमान भक्त ज्येष्ठ माह के बड़ा मंगल को धूमधाम से मनाते हैं। खासकर उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में इसकी अनोखी खूबसूरती देखने को मिलती है। क्योंकि बड़ा मंगल को त्योहार के रूप में मनाने की...

#

धनतेरस की कहानी

भारत त्यौहारों का देश है। विभिन्न त्यौहारों पर अलग-अलग पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं ! इसी प्रकार धनतेरस पर भी यमराज की एक कथा बहुत प्रचलित है। कथा कुछ इस प्रकार है।पुराने जमाने में एक राजा हुए थे...

#

गणेश जी की पौराणिक कथा

एक समय जब माता पार्वती मानसरोवर में स्नान कर रही थी तब उन्होंने स्नान स्थल पर कोई आ न सके इस हेतु अपनी माया से गणेश को जन्म देकर 'बाल गणेश' को पहरा देने के लिए नियुक्त कर दिया।इसी दौरान भगवान शिव उधर...

#

गणेश जी का विवाह किस से और कैसे हुआ?

गणेश जी भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र गणेश जी की पूजा सभी भगवानों से पहले की जाती है | प्रत्येक शुभ कार्य करने से पहले इन्हे ही पूजा जाता है| गणेश जी को गणपति के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि...

#

लौहजंघ की कथा

इस पृथ्वी पर भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा नगरी है| वहां रूपणिका नाम की एक वेश्या रहती थी| उसकी मां मकरदंष्ट्रा बड़ी ही कुरूप और कुबड़ी थी| वह कुटनी का कार्य भी करती थी| रूपणिका के पास आने वाले...

#

ब्रह्मांड के भगवान को नापसंद करने का कारण

ब्रह्मांड का भगवान नापसंद करने का कारण विदुर ने पूछा, “शिव इस सृष्टि में सभी सजीव और निर्जीव वस्तुओं के पिता हैं। ऐसा कोई नहीं है जिसे वह नापसंद करता हो। वह शांतिपूर्ण स्वभाव का है और पूरी तरह से...

#

कन्नप्प की भक्ति

भील कुमार कन्नप्प वन में भटकते-भटकते एक मंदिर के समीप पहुंचा। मंदिर में भगवान शंकर की मूर्ति देख उसने सोचा- भगवान इस वन में अकेले हैं। कहीं कोई पशु इन्हें कष्ट न दे। शाम हो गई थी। कण्णप्प धनुष पर...

#

भगवान् विष्णु का स्वप्न

एक बार भगवान नारायण वैकुण्ठलोक में सोये हुए थे। उन्होंने स्वप्न में देखा कि करोड़ों चन्द्रमाओं की कांतिवाले, त्रिशूल-डमरू-धारी, स्वर्णाभरण-भूषित, सुरेन्द्र-वन्दित, सिद्धिसेवित त्रिलोचन भगवान...

#

विषपान करते भगवान शिव की कथा

भगवान शिव हलाहल (जहर) पीकर ब्रह्मांड को बचाते हैं दैत्यों और देवताओं के बीच एक युद्ध में, देवताओं ने अपना सारा ऐश्वर्य और पद खो दिया। देवताओं ने तब भगवान ब्रह्मा से संपर्क किया, जो उन्हें भगवान...

#

भगवान गणेश और कार्तिकेय के बीच बुद्धिमता का परिचय

कार्तिकेय बनाम गणेश हमारे परिवारों में सहोदर प्रतिद्वंद्विता काफी आम है, जो साहित्य हम पढ़ते हैं और फिल्में जो हमारा मनोरंजन करती हैं। यहाँ तक कि सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान देवता भी इससे प्रतिरक्षित...

#

श्री लक्ष्मी जी की कथा

एक बार भगवान शंकर के अंशभूत महर्षि दुर्वासा पृथ्वी पर विचर रहे थे। घूमत-घूमते वे एक मनोहर वन में गए। वहाँ एक विद्याधर सुंदरी हाथ में पारिजात पुष्पों की माला लिए खड़ी थी, वह माला दिव्य पुष्पों की...

#

गणेश जी की जन्म की रोचक कहानी

रोचक कहानी उन्हें दक्षिण भारत में कार्तिकेय स्वामी के बड़े भाई के रूप में जाना जाता है। एक बार जब देवी पार्वती स्नान करने गईं तो उन्होंने हल्दी का लेप लिया और उससे एक मानव रूप बनाया। उसने फिर इस...

#

श्रावण मास:तिथिया, पूजा विधि और महत्व

सावन सोमवार का अर्थ होता है कि वह सोमवार जो सावन महीने में आता है। सावन महीना हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है और इस महीने में सोमवार का विशेष महत्व है। इस महीने में लोग भगवान शिव की...

#

रक्षाबंधन की कहानी

रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर बलि राजा के अभिमान को इसी दिन चकानाचूर किया था। इसलिए यह त्योहार 'बलेव' नाम से भी प्रसिद्ध है। महाराष्ट्र...

#

हनुमान ने तोड़ा था सत्यभामा,सुदर्शन चक्र और गरुड़ तीनो का घमंड

हनुमान ने तोड़ा था सत्यभामा,सुदर्शन चक्र और गरुड़ तीनो का घमंड श्रीकृष्ण भगवान द्वारका में रानी सत्यभामा के साथ सिंहासन पर विराजमान थे। निकट ही गरूड़ और सुदर्शन चक्र भी बैठे हुए थे। तीनों के...

#

लक्ष्मी जी का वास

एक बार की बात है, राजा बलि समय बिताने के लिए एकान्त स्थान पर गधे के रूप में छिपे हुए थे। देवराज इन्द्र उनसे मिलने के लिए उन्हें ढूँढ रहे थे। एक दिन इन्द्र ने उन्हें खोज निकाला और उनके छिपने का कारण...

#

भगवान ब्रह्मा का कुल

ब्रह्मा हिन्दू धर्म में एक प्रमुख देवता हैं। वे हिन्दुओं के तीन प्रमुख देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) में से एक हैं। ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता कहा जाता है। सृष्टि का रचयिता से आशय सिर्फ जीवों...

#

वैशाख पूर्णिमा: महत्व, उत्सव और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि

वैशाख पूर्णिमा को हिंदी में "वैशाख पूर्णिमा" या "बुद्ध पूर्णिमा" कहा जाता है। यह हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार है जो वैशाख माह के पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म, महापरिनिर्वाण,...

#

शुक्ल प्रदोष व्रत: भगवान शिव को समर्पित महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान

शुक्ल प्रदोष व्रत की पूजा विधि शुक्ल प्रदोष व्रत की पूजा विधि को सम्पन्न करने के लिए निम्नलिखित कदमों का पालन किया जा सकता है: स्नान और शुद्धिकरण: पूजा के लिए प्रस्तावित होने से पहले, व्रतधारी...

#

राजा विक्रमादित्य पर शनिदेव की साढ़े-साती

एक समय स्वर्गलोक में सबसे बड़ा कौन के प्रश्न को लेकर सभी देवताओं में वाद-विवाद प्रारम्भ हुआ और फिर परस्पर भयंकर युद्ध की स्थिति बन गई। सभी देवता देवराज इंद्र के पास पहुंचे और बोले, हे देवराज! आपको...