छठी मइया की व्रत कथा, इतिहास
छठ पूजा का तीसरा दिन है, जिसे बड़ी छठ भी कहते हैं. आज शाम के समय में जब सूर्य देव अस्त होते हैं तो व्रती पानी में खड़े होकर उनको अर्घ्य देते हैं और अपने मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं. इसके बाद रात्रि के समय में जागरण किया जाता है. छठी मइया की कथा सुनते हैं, गीत गाए जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छठी मइया की कथा सुनने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं
छठी मइया की कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, छठी मइया को सूर्य देव की बहन और ब्रह्म देव की मानस पुत्री माना जाता है. इनका नाम षष्ठी मैया है, जिन्हें आम बोलचाल की भाषा में छठी मइया या छठी मैय्या कहते हैं. छठ पूजा में सूर्य देव के साथ इस देवी का पूजन करते हैं. एक प्रकार से सूर्य देव और छठी मैय्या भाई बहन हुए
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की तो उन्होंने अपने शरीर से के दो हिस्से किए. दायां भाग पुरुष और बायां भाग प्रकृति. प्रकृति के छठे भाग से षष्ठी देवी की उत्पत्ति हुई है, इनको देवसेना भी कहा जाता है. जो व्यक्ति षष्ठी देवी की पूजा करता है, उसके मन की मुराद अवश्य पूरी होती है.
छठ पूजा व्रत कथा
एक समय की बात है. एक राजा प्रियंवद थे, जिनकी पत्नी का नाम मालिनी था. विवाह के काफी वर्ष बीतने के बाद भी उनको कोई संतान नहीं हुई. तब उन्होंने कश्यप ऋषि से इसका समाधान पूछा तो उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कराने का सुझाव दिया. कश्यप ऋषि ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ किया और राजा की पत्नी मालिनी को प्रसाद स्वरूप खीर खाने को दिया.
उसके प्रभाव से रानी गर्भवती हो गईं, जिससे राजा प्रियंवद बड़े खुश हुए. कुछ समय बाद रानी ने एक पुत्र को जन्म दिया, लेकिन वह भी मृत पैदा हुआ. यह खबर सुनकर राजा बहुत दुखी हो गए. वे पुत्र के शव को लेकर श्मशान गए और इस दुख के कारण अपना भी प्राण त्यागने का निश्चय कर लिया
जब वे अपना प्राण त्यागने जा रहे थे, तभी देवी देवसेना प्रकट हुईं. उन्होंने राजा प्रियंवद से कहा कि उनका नाम षष्ठी है. हे राजन! तुम मेरी पूजा करो और दूसरों लोगों को भी मेरी पूजा करने को कहो. लोगों को इसके लिए प्रेरित करो. देवी देवसेना की आज्ञानुसार राजा प्रियंवद ने कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा की. उन्होंने यह पूजा पुत्र प्राप्ति का कामना से की थी. छठी मैय्या के शुभ आशीर्वाद से राजा प्रियंवद को पुत्र की प्राप्ति हुई. तब से हर साल कार्तिक शुक्ल षष्ठी को छठ पूजा की जाने लगी जो व्यक्ति जिस मनोकामना के साथ छठ पूजा का व्रत रखता है और उसे विधि विधान से पूरा करता है, छठी मैय्या के आशीष से उसकी मनोकामना अवश्य ही पूर्ण होती है. लोग पुत्र प्राप्ति और संतान के सुख जीवन के लिए यह व्रत रखते हैं
छठ पूजा का इतिहास
मान्यताओं के अनुसार, वेद और शास्त्रों के लिखे जाने से पहले से ही इस पूजा मनाया जाता था प्राचीन काल में ऋषि मुनि भगवान सूर्य की पूजा के द्वारा छठ पूजा की शुरुआत करते थे हालांकि छठ पूजा का इतिहास भगवान श्रीराम से जुड़ा हुआ है लोक कथा के अनुसार सीता और राम दोनों ही शुभ देव की उपासना करते थे जब श्रीराम 14 वर्षों के वनवास के बाद और जा में आए तो उन्होंने सबसे पहले सरयू नदी जाकर भगवान सूर्य देव की पूजा की उसके बाद से छठ पूजा मनाने की परंपरा शुरू हो गई जो आज तक कायम है
छठ पूजा कथा के बारे में अगर हम चर्चा करें तो इसके संबंध में कई प्रकार की मान्यता और परंपरा प्रचलित है सबसे पहला प्रथा इसके बारे में यह प्रचलित है कि जब पांडव का राजपाट जुए में हारने के बाद चला गया था तो द्रौपदी ने छठ पूजा करने का प्रण लिया था और उन्होंने कहा था कि अगर दोबारा से राजपाट की प्राप्ति होती है तो वह माता छठ मैया की पूजा हर्षोल्लास के साथ करेंगे और महाभारत के युद्ध में पांडवों की जीत के बाद द्रौपदी.ने माता छठ मैया की पूजा काफी विधि विधान के साथ पूरा किया तभी से छठ पूजा मनाने की परंपरा शुरू हुई पूजा का सामान भगवान श्रीराम से भी है
जब भगवान श्री राम 14 वर्षों के वनवास के बाद अपनी नगर वापस आए तो अपनी पत्नी सीता के साथ सरयू नदी पर जाकर भगवान सूर्य देव को जल अर्पित किया और उनकी पूजा भी की इसके बाद से छठ पूजा मनाने का प्रथा शुरू हुआ क्योंकि भगवान सूर्य माता छठ मैया के भाई थे और दोनों के बीच में काफी प्यार है I दानवीर कर्ण के बारे में आप लोगों ने सुना ही होगा दानवीर कर्ण भी भगवान सूर्य के उपासक थे वह नियमित रूप से उन को जल अर्पित करते थे उसके वजह से भी छठ पूजा मनाई जाती है क्योंकि छठ पूजा में भगवान सूर्य की पूजा भी की जाती है I छठ पूजा के संबंध में एक और भी कहानी प्रचलित है ऐसा कहा जाता है कि प्रियंवद और मालिनी राजा और रानी हुआ करते थे उनकी कोई संतान नहीं थी
उन्होंने कहा कि कड़ी तपस्या के बाद एक संतान की प्राप्ति के लेकिन जब संतान का जन्म हुआ तो उसकी मृत्यु तत्काल में हो गई इसके बाद राजा उसको वियोग में अपने प्राण त्यागने के लिए श्मशान घाट चले गए तभी भगवान की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुईं उन्होंने राजा से कहा कि वह मेरी पूजा विधि विधान के साथ करें अगर वह ऐसा करते हैं तो उनकी संतान जीवित हो जाएगी इसके बाद राजा ने काफी हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ देवी देवसेना की पूजा की और जिसके फलस्वरूप उन्हें पुत्र प्राप्त हुआ और तब से ही छठ पूजा मनाने की परंपरा शुरू हो शुरू हो गई क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि छठ पूजा करने पर पुत्र की उम्र लंबी होती है
छठ माता की कहानी के बारे में अगर हम चर्चा करें तो या काफी पुरानी और थोड़ा रीत है ऐसा कहा जाता है कि जब पांडव अपना सब राजपाट जुए में हार गए तब उनकी पत्नी द्रोपदी ने छठ मां की पूजा करने का प्रण लिया और उन्हें कहा कि अगर सभी राज्यपाल उन्हें वापस मिल जाएंगे तो वह छठ माता की पूजा करेंगे उसके बाद युद्ध में जब पांडवों ने कौरवों को हराकर राजपाट हासिल कर लिया तो उसके बाद द्रोपति ने माता छठ की पूजा की तभी से छठ पूजा मनाने की परंपरा शुरू हो गई इसके अलावा रावण वध के बाद श्रीराम 14 साल बाद अयोध्या लौटे थे और अयोध्या में दिवाली के छठे दिन सरयू नदी के तट पर अपनी पत्नी सीता के साथ षष्ठी व्रत रखकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया था। इसके अगले दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद उन्होंने राज पाठ का कार्यभार संभाला तभी से छठ पूजा मनाने की प्रथा शुरू हुई
पूजा के अगर हम संपूर्ण कहानी के बारे में बात करें तो छठ पूजा के संबंध में चार प्रकार की कहानियां काफी प्रचलित है और उनके अनुसार ही छठ पूजा का पर अब पूरे हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जाता है I पूजा का सामान पांडव भगवान श्री राम और प्रियंवद और मालिनी की कहानी और दानवीर कर्ण से संबंधित है और उनके द्वारा ही छठ पूजा उत्सव का शुभारंभ हुआ था जो आज तक कायम है और आने वाले भविष्य में भी कायम रहेगा
अन्य संबंधित कहानियां और कथाएं
दुस्यंत शकुंतला की कथा
एक बार हस्तिनापुर नरेश दुष्यंत आखेट खेलने वन में गये। जिस वन में वे शिकार के लिये गये थे उसी वन में कण्व ऋषि का आश्रम था। कण्व ऋषि के दर्शन करने के लिये महाराज दुष्यंत उनके आश्रम पहुँच गये। पुकार...
गजानन गणपति : एकदंत
गजानन गणपति : एकदंत किसी भी पूजन कार्य में सबसे पहले गणपति की पूजा की जाती है। भगवान गणेश को गजानन, एकाक्षर, विघ्नहर्ता, एकदंत और कई अन्य नामों से बुलाया जाता है। इन दिनों गणेश उत्सव का त्योहार बड़ी...
विजया एकादशी की कथा: महाधन और भगवान की माया
विजया एकादशी, हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है। यह एकादशी फागुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी होती है, जो भारतीय हिन्दू पंचांग के अनुसार फरवरी-मार्च के महीने में पड़ता है। यह एकादशी...
दैवीय शक्ति का अनावरण: बड़ा मंगल की तिथियां, महत्व और पूजा विधि
देशभर में हनुमान भक्त ज्येष्ठ माह के बड़ा मंगल को धूमधाम से मनाते हैं। खासकर उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में इसकी अनोखी खूबसूरती देखने को मिलती है। क्योंकि बड़ा मंगल को त्योहार के रूप में मनाने की...
मौनी अमावस्या 2024
मौना अमावस्या मौनी अमावस्या, जिसे मौना अमावस्या भी कहा जाता है, हिंदू कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण दिन है। यह माघ महीने (आमतौर पर जनवरी या फरवरी) के अंधेरे पखवाड़े (अमावस्या) के 15वें दिन पड़ता है। "मौनी"...
दुर्गा और महिषासुर की कहानी
महिषासुर एक शक्तिशाली राक्षस महिषासुर एक शक्तिशाली भैंसा राक्षस था। बचपन में भी महिषासुर समस्त सृष्टि में सबसे शक्तिशाली बनना चाहता था। उसने देवों के प्रति घृणा का पोषण किया और उन्हें हराना...
जगरनाथ की कटहल कथा
रघु ने भगवान जगन्नाथ के प्रति मैत्रीपूर्ण प्रेम एक समय रघु दास नाम के भगवान रामचन्द्र के एक महान भक्त थे। वह पुरी में जगन्नाथ मंदिर के सिंह द्वार के पास एक बड़ी छतरी के नीचे रहते थे। एक बार जब वह...
गणेश जी की जन्म की रोचक कहानी
रोचक कहानी उन्हें दक्षिण भारत में कार्तिकेय स्वामी के बड़े भाई के रूप में जाना जाता है। एक बार जब देवी पार्वती स्नान करने गईं तो उन्होंने हल्दी का लेप लिया और उससे एक मानव रूप बनाया। उसने फिर इस...
शिव और देवी गंगा की कहानी
शिव और देवी गंगा की कहानी देवी गंगा को अपने जटाओं में धरती पर लाते हुए भगवान शिव की कांस्य प्रतिमा भगवान शिव की अधिकांश छवियां और मूर्तियां उनके जटाओं से बहती गंगा नदी को दर्शाती हैं। हिंदू आइकनोग्राफी...
भस्मासुर की कहानी
भारतीय पौराणिक कथा मूर्ख भस्मासुर एक असुर या दानव के बारे में है जो सबसे शक्तिशाली बनना चाहता था। भस्मासुर की कहानी राक्षस भस्मासुर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो घोर तपस्या के माध्यम से भगवान शिव...
नलकुबेर ने रावण को श्राप दिया
"यह कैलाश पर था, सूर्य अस्ताचल रेंज के पीछे वापस आ गया था, कि दशग्रीव, जोश से भरे हुए थे, उन्होंने सेना को छावनी देने के लिए चुना। “जब निर्मल चन्द्रमा अपने समान तेज के साथ पर्वत पर उदित हुआ, तो विविध...
राजा विक्रमादित्य पर शनिदेव की साढ़े-साती
एक समय स्वर्गलोक में सबसे बड़ा कौन के प्रश्न को लेकर सभी देवताओं में वाद-विवाद प्रारम्भ हुआ और फिर परस्पर भयंकर युद्ध की स्थिति बन गई। सभी देवता देवराज इंद्र के पास पहुंचे और बोले, हे देवराज! आपको...
पुत्रदा एकादशी: पौष मास के कृष्ण पक्ष की विशेष व्रत कथा और आरती
पौष पुत्रदा एकादशी, जिसे दुर्मुखी एकादशी भी कहा जाता है, हिन्दू कैलेंडर के मास 'पौष' में आने वाली एकादशी है। इस तिथि को विशेष रूप से विष्णु भगवान की पूजा की जाती है और भक्तों के लिए यह एक महत्वपूर्ण...
ध्रुव तारे की कथा
राजा उत्तानपाद ब्रह्माजी के मानस पुत्र स्वयंभू मनु के पुत्र थे। उनकी सनीति एवं सुरुचि नामक दो पत्नियाँ थीं। उन्हें सुनीति से ध्रुव एवं सुरुचि से उत्तम नामक पुत्र प्राप्त हुए। वे दोनों राजकुमारों...
श्रीकृष्ण दौड़े चले आए
अर्जुन ने अपने-आपको श्रीकृष्ण को समर्पित कर दिया था| अर्जुन होता हुआ भी, नहीं था, इसलिए कि उसने जो कुछ किया, अर्जुन के रूप में नहीं, श्रीकृष्ण के सेवक के रूप में किया| सेवक की चिंता स्वामी की चिंता...
लक्ष्मी जी की अंगूठी
एक निर्धन व्यक्ति था। वह नित्य भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करता। एक बार दीपावली के दिन भगवती लक्ष्मी की श्रद्धा-भक्ति से पूजा-अर्चना की। कहते हैं उसकी आराधना से लक्ष्मी प्रसन्न हुईं। वह उसके...
नवरात्र की कथा
प्राचीन समय में राजा सुरथ नाम के राजा थे, राजा प्रजा की रक्षा में उदासीन रहने लगे थे,परिणाम स्वरूप पड़ोसी राजा ने उस पर चढाई कर दी,सुरथ की सेना भी शत्रु से मिल गयी थी,परिणामस्वरूप राजा सुरथ की हार...
अगस्त्य - महासागर का जल
कृत युग में, जिसे सत्य युग के रूप में भी जाना जाता है, कालकेय नामक शक्तिशाली राक्षसों का एक झुंड था जो बहुत क्रूर थे और हमेशा देवताओं के साथ युद्ध छेड़ने की ताक में रहते थे। वृत्रासुर इनका प्रधान...
प्रदोष व्रत कथा: भगवान शिव की कृपा से मुक्ति की प्राप्ति
कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत की कथा भगवान शिव के श्रद्धालु भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां इस व्रत की कुछ मुख्य कथाएं हैं: कथा 1: राजा मंदता और मृत्यु का वरदान कहानी यहां से शुरू होती है कि...
श्री लक्ष्मी जी की कथा
एक बार भगवान शंकर के अंशभूत महर्षि दुर्वासा पृथ्वी पर विचर रहे थे। घूमत-घूमते वे एक मनोहर वन में गए। वहाँ एक विद्याधर सुंदरी हाथ में पारिजात पुष्पों की माला लिए खड़ी थी, वह माला दिव्य पुष्पों की...
कुबेर का अहंकार चूर-चूर हो गया
कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनी थे। एक दिन उन्होंने सोचा कि हमारे पास इतनी संपत्ति है, लेकिन कम ही लोगों को इसकी जानकारी है। इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति का प्रदर्शन करने के लिए एक भव्य भोज का आयोजन...
कुबेर का घमंड
पौराणिक कथा यह एक पौराणिक कथा है। कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनी थे। एक दिन उन्होंने सोचा कि हमारे पास इतनी संपत्ति है, लेकिन कम ही लोगों को इसकी जानकारी है। इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति का प्रदर्शन...
चन्द्रमा को शाप से मुक्ति
चंद्रमा की सुंदरता पर राजा दक्ष की सत्ताइस पुत्रियां मोहित हो गईं ! वे सभी चंद्रमा से विवाह करना चाहती थीं ! दक्ष ने समझाया सगी बहनों का एक ही पति होने से दांपत्य जीवन में बाधा आएगी लेकिन चंद्रमा...
माता संतोषी केजन्म की कहानी
संतोषी माता एक देवी संतोषी माता को धर्म में एक देवी हैं जो भगवान शंकर की पत्नी ऋद्धि , सिद्धि की पुत्री , कार्तिकेय , अशोकसुन्दरी , अय्यापा , ज्योति और मनसा की भतीजी और शुभ , लाभ की बहन तथा संतोष की...
विषपान करते भगवान शिव की कथा
भगवान शिव हलाहल (जहर) पीकर ब्रह्मांड को बचाते हैं दैत्यों और देवताओं के बीच एक युद्ध में, देवताओं ने अपना सारा ऐश्वर्य और पद खो दिया। देवताओं ने तब भगवान ब्रह्मा से संपर्क किया, जो उन्हें भगवान...
समुद्र मंथन कथा
एक बार की बात है शिवजी के दर्शनों के लिए दुर्वासा ऋषि अपने शिष्यों के साथ कैलाश जा रहे थे। मार्ग में उन्हें देवराज इन्द्र मिले। इन्द्र ने दुर्वासा ऋषि और उनके शिष्यों को भक्तिपूर्वक प्रणाम किया।...
भगवान ब्रह्मा का कुल
ब्रह्मा हिन्दू धर्म में एक प्रमुख देवता हैं। वे हिन्दुओं के तीन प्रमुख देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) में से एक हैं। ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता कहा जाता है। सृष्टि का रचयिता से आशय सिर्फ जीवों...
कुरु का जन्म
कुरुवंश के प्रथम पुरुष का नाम कुरु था| कुरु बड़े प्रतापी और बड़े तेजस्वी थे| उन्हीं के नाम पर कुरुवंश की शाखाएं निकलीं और विकसित हुईं| एक से एक प्रतापी और तेजस्वी वीर कुरुवंश में पैदा हो चुके हैं|...
जब भगवान राम और भोलेनाथ के बीच हुआ युद्ध
बात उन दिनों कि है जब श्रीराम का अश्वमेघ यज्ञ चल रहा था ! श्रीराम के अनुज शत्रुघ्न के नेतृत्व में असंख्य वीरों की सेना सारे प्रदेश को विजित करती जा रही थी ! यज्ञ का अश्व प्रदेश प्रदेश जा रहा था ! इस...
भगवान विष्णु और नारद जी
एक बार नारद मुनि जी ने भगवान विष्णु जी से पूछा, हे भगवन! आप का इस समय सब से प्रिय भक्त कौन है?, अब विष्णु तो भगवान है, सो झट से समझ गये अपने भक्त नारद मुनि की बात, ओर मुस्कुरा कर बोले! मेरा सब से प्रिय...
आध्यात्मिक अनुशासन से सफलता प्राप्त करना : सफला एकादशी
सफला एकादशी एक हिंदू धार्मिक अनुष्ठान है जो मार्गशीर्ष के चंद्र माह के शुक्ल पक्ष (शुक्ल पक्ष) के ग्यारहवें दिन (एकादशी) को पड़ता है। यह ग्रेगोरियन कैलेंडर में दिसंबर या जनवरी से मेल खाता है। "सफला"...
राधा - कृष्ण
सतयुग और त्रेता युग बीतने के बाद जब द्वापर युग आया तो पृथ्वी पर झूठ, अन्याय, असत्य, अनाचार और अत्याचार होने लगे और फिर प्रतिदिन उनकी अधिकता में वृद्धि होती चली गई| अधर्म के भार से पृथ्वी दुखित हो...
गणेश का जन्म
गणेश का जन्म एक दिन माता पार्वती घर में कैलाश पर्वत पर स्नान करने की तैयारी कर रही थीं। जैसा कि वह परेशान नहीं होना चाहती थी, उसने अपने पति शिव के बैल नंदी से दरवाजे की रक्षा करने और किसी को भी पास...
गणेश जी का विवाह किस से और कैसे हुआ?
गणेश जी भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र गणेश जी की पूजा सभी भगवानों से पहले की जाती है | प्रत्येक शुभ कार्य करने से पहले इन्हे ही पूजा जाता है| गणेश जी को गणपति के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि...
हनुमान की जन्म कथा
हनुमान की जन्म कथा यह केसरी और अंजना के पुत्र पवनपुत्र हनुमान की जन्म कथा है। वह भगवान राम के प्रति अपनी अतुलनीय भक्ति के लिए प्रसिद्ध थे। अपनी निस्वार्थ सेवा और भक्ति से, हनुमान ने भगवान राम और...
षटतिला एकादशी: व्रत कथा और आरती
षटतिला एकादशी की कथा इसकी कथा भगवान विष्णु के तपस्या की घटना पर आधारित है. इसका विवरण विभिन्न पुराणों और कथा-संहिताओं में मिलता है, लेकिन एक सामान्य संस्कृत कथा निम्नलिखित है: कहानी एक समय की...
श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह
विदर्भ देश के राजा भीष्मक के पांच पुत्र और एक पुत्री थी| पुत्री का नाम रुक्मिणी था जो समकालीन राजकुमारियों में सर्वाधिक सुंदर और सुशील थी| उससे विवाह करने के लिए अनेक राजा और राजकुमार आए दिन विदर्भ...
जब माता लक्ष्मी ने बेटी बनकर माधव का कल्याण किया
एक बार भगवान विष्णु जी शेषनाग पर बेठे बेठे बोर हो गये, ओर उन्होने धरती पर घुमने का विचार मन में किया, वेसे भी कई साल बीत गये थे धरती पर आये, ओर वह अपनी यात्रा की तयारी मे लग गये, स्वामी को तेयार होता...
हनुमान ने तोड़ा था सत्यभामा,सुदर्शन चक्र और गरुड़ तीनो का घमंड
हनुमान ने तोड़ा था सत्यभामा,सुदर्शन चक्र और गरुड़ तीनो का घमंड श्रीकृष्ण भगवान द्वारका में रानी सत्यभामा के साथ सिंहासन पर विराजमान थे। निकट ही गरूड़ और सुदर्शन चक्र भी बैठे हुए थे। तीनों के...
उत्सव ऊर्जा का: मकर संक्रांति का रंगीन महत्व
मकर संक्रांति एक हिंदू त्योहार है जो भारत और नेपाल के विभिन्न हिस्सों में मनाया जाता है। यह सूर्य के मकर राशि में संक्रमण का प्रतीक है और शीतकालीन संक्रांति के अंत का प्रतीक है। यह त्यौहार आमतौर...
जब हनुमान ने सूर्य को खाया
सूर्य को खाने वाले हनुमान की कहानी बच्चों के बीच बहुत लोकप्रिय है। यह हिंदू शास्त्रों में भी एक महत्वपूर्ण घटना है जिसके परिणामस्वरूप हनुमान को कई वरदान प्राप्त हुए। तो क्या सच में हनुमान ने...
ब्रह्मांड के भगवान को नापसंद करने का कारण
ब्रह्मांड का भगवान नापसंद करने का कारण विदुर ने पूछा, “शिव इस सृष्टि में सभी सजीव और निर्जीव वस्तुओं के पिता हैं। ऐसा कोई नहीं है जिसे वह नापसंद करता हो। वह शांतिपूर्ण स्वभाव का है और पूरी तरह से...
जया एकादशी व्रत कथा: भगवान विष्णु के भक्त का उपासना और कृपा
जया एकादशी व्रत सनातन धर्म में एकादशी का व्रत बहुत ही शुभ माना जाता है। इस व्रत को करने से प्राणी के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। इनमें से जया एकादशी इस जन्म और पूर्व...
सांस्कृतिक पर्व:बसंत पंचमी 2024
बसंत पंचमी एक हिन्दी पर्व है जो वसंत ऋतु के आगमन को मनाने के लिए मनाया जाता है, और इसे सरस्वती पूजा के रूप में भी जाना जाता है। यह पर्व हिन्दू कैलेंडर के माघ मास के पंचमी तिथि को मनाया जाता है, जो वसंत...
भगवती तुलसी की कथा
तुलसी से जुड़ी एक कथा बहुत प्रचलित है। श्रीमद देवी भागवत पुराण में इनके अवतरण की दिव्य लीला कथा भी बनाई गई है। एक बार शिव ने अपने तेज को समुद्र में फैंक दिया था। उससे एक महातेजस्वी बालक ने जन्म लिया।...
जब वरुण ने अपने पुत्र की परीक्षा ली
एक बार वरुण के पुत्र भृगु के मन में परमात्मा को जानने की अभिलाषा जाग्रत हुई। उनके पिता वरुण ब्रम्ह निष्ठ योगी थे। अत: भृगु ने पिता से ही अपनी जिज्ञासा शांत करने का विचार किया। वे अपने पिता के पास...
आस्था और पवित्रता का त्योहार-सकट चतुर्थी: भक्ति से बाधाओं को दूर करना
"सकट चतुर्थी", जिसे "संकष्टी चतुर्थी" भी कहा जाता है, भगवान गणेश को समर्पित एक हिंदू त्योहार है। यह प्रत्येक चंद्र माह में कृष्ण पक्ष (चंद्रमा के घटते चरण) के चौथे दिन (चतुर्थी) को मनाया जाता है। हालाँकि,...
गणेश-और-कावेरी
पवित्र नदी कावेरी भारत की प्रमुख नदियों में से एक है और सात सबसे पवित्र नदियों में से एक है। दक्षिण भारत में उन्हें गंगा से भी पवित्र माना जाता है! वह तालकावेरी में कूर्ग के सुरम्य परिवेश के बीच,...
गंगा जन्म की कथा
ऋषि विश्वामित्र ने इस प्रकार कथा सुनाना आरम्भ किया, "पर्वतराज हिमालय की अत्यंत रूपवती, लावण्यमयी एवं सर्वगुण सम्पन्न दो कन्याएँ थीं। सुमेरु पर्वत की पुत्री मैना इन कन्याओं की माता थीं। हिमालय...
नवरात्रि का कलश स्थापना: प्राचीन परंपरा और धार्मिक उत्सव
नवरात्रि:- भारतीय हिंदू कैलेंडर के अनुसार वर्षभर मनाया जाने वाला एक प्रमुख धार्मिक उत्सव है। इस उत्सव का अर्थ होता है "नौ रातें"। नवरात्रि नौ दिनों तक चलती है, जिसमें देवी दुर्गा के नौ रूपों की...
