ध्रुव तारे की कथा

ध्रुव तारे की कथा

राजा उत्तानपाद ब्रह्माजी के मानस पुत्र स्वयंभू मनु के पुत्र थे। उनकी सनीति एवं सुरुचि नामक दो पत्नियाँ थीं। उन्हें सुनीति से ध्रुव एवं सुरुचि से उत्तम नामक पुत्र प्राप्त हुए। वे दोनों राजकुमारों से समान प्रेम करते थे।

यद्यपि सुनीति ध्रुव के साथ-साथ उत्तम को भी अपना पुत्र मानती थीं, तथापि रानी सुरुचि ध्रुव और सुनीति से ईर्ष्या और घृणा करती थीं। वह सदा उन्हें नीचा दिखाने के अवसर ढूँढ़ती रहती थी।

एक बार उत्तानपाद उत्तम को गोद में लिए प्यार कर रहे थे। तभी ध्रुव भी वहाँ आ गया। उत्तम को पिता की गोद में बैठा देखकर वह भी उनकी गोद में जा बैठा। यह बात सुरुचि को नहीं जँची। उसने ध्रुव को पिता की गोद से नीचे खींचकर कटु वचन सुनाए। ध्रुव रोते हुए माता सुनीति के पास गया और सब कुछ बता दिया।

वह उसे समझाते हुए बोली-“वत्स! भले ही कोई तुम्हारा अपमान करें, किंतु तुम अपने मन में दूसरों के लिए अमंगल की इच्छा कभी मत करना। जो मनुष्य दूसरों को दुःख देता है, उसे स्वयं ही उसका फल भोगना पड़ता है। पुत्र! यदि तुम पिता की गोद में बैठना चाहते हो तो भगवान विष्णु की आराधना कर उन्हें प्रसन्न करो। उनकी कृपा से ही तुम्हारे पितामह स्वयंभू मनु को दुर्लभ लौकिक और अलौकिक सुख भोगने के बाद मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। इसलिए पुत्र! तुम भी उनकी आराधना में लग जाओ। केवल वे ही तुम्हारे दुःखों को दूर कर सकते हैं।”

सुनीति की बात सुनकर ध्रुव के मन में श्रीविष्णु के प्रति भक्ति और श्रद्धा के भाव उत्पन्न हो गए। वह घर त्यागकर वन की ओर चल पड़ा। भगवान विष्णु की कृपा से वन में उसे देवर्षि नारद दिखाई दिए। उन्होंने ध्रुव को श्रीविष्णु की पूजा-आराधना की विधि बताई।

ध्रुव ने यमुना के जल में स्नान किया और निराहार रहकर एकाग्र मन से श्रीविष्णु की आराधना करने लगा। पाँच महीने बीतने के बाद वह पैर के एक अँगूठे पर स्थिर होकर तपस्या करने लगा।

धीरे-धीरे उसका तेज बढ़ता गया। उसके तप से तीनों लोक कंपायमान हो उठे। जब उसके अँगूठे के भार से पृथ्वी दबने लगी, तब भगवान विष्णु भक्त ध्रुव के समक्ष प्रकट हुए और उसकी इच्छा पूछी।

ध्रुव भाव-विभोर होकर बोला-“भगवन! जब मेरी माता सुरुचि ने अपमानजनक शब्द कहकर मुझे पिता की गोद से उतार दिया था, तब माता सुनीति के कहने पर मैंने मन-ही-मन यह निश्चय किया था कि जो परब्रह्म भगवान श्रीविष्णु इस सम्पूर्ण जगत के पिता हैं, जिनके लिए सभी जीव एक समान हैं, अब मैं केवल उनकी गोद में बैठूँगा। इसलिए यदि आप प्रसन्न होकर मुझे वर देना चाहते हैं तो मुझे अपनी गोद में स्थान प्रदान करें, जिससे कि मुझे उस स्थान से कोई भी उतार न सके। मेरी केवल इतनी-सी अभिलाषा है।”

श्रीविष्णु बोले-“वत्स! तुमने केवल मेरा स्नेह प्राप्त करने के लिए इतना कठोर तप किया है। इसलिए तुम्हारी निःस्वार्थ भक्ति से प्रसन्न होकर मैं तुम्हें ऐसा स्थान प्रदान करूँगा, जिसे आज तक कोई प्राप्त नहीं कर सका। यह ब्रह्मांड मेरा अंश और आकाश मेरी गोद है। मैं तुम्हें अपनी गोद में स्थान प्रदान करता हूँ। आज से तुम ध्रुव नामक तारे के रूप में स्थापित होकर ब्रह्मांड को प्रकाशमान करोगे।”

इसके आगे श्री विष्णु ने कहा, “तुम्हारा पद सप्तर्षियों से भी बड़ा होगा और वे सदा तुम्हारी परिक्रमा करेंगे। जब तक यह ब्रह्मांड रहेगा, कोई भी तुम्हें इस स्थान से नहीं हटा सकेगा। वत्स! अब तुम घर लौट जाओ। कुछ समय के बाद तुम्हारे पिता तुम्हें राज्य सौंपकर वन में चले जाएँगे। पृथ्वी पर छत्तीस हज़ार वर्षों तक धर्मपूर्वक राज्य भोगकर अंत में तुम मेरे पास आओगे।”

इतना कहकर भगवान विष्णु अंतर्धान हो गए। इस प्रकार अपनी भक्ति से भगवान विष्णु को प्रसन्न कर बालक ध्रुव संसार में अमर हो गया।

अन्य संबंधित कहानियां और कथाएं

#

शिव ने दिया विष्णु को अजेय सुदर्शन चक्र

भगवान विष्णु के हर चित्र व मूर्ति में उन्हें सुदर्शन चक्र धारण किए दिखाया जाता है। यह सुदर्शन चक्र भगवान शंकर ने ही जगत कल्याण के लिए भगवान विष्णु को दिया था। इस संबंध में शिवमहापुराण के कोटिरुद्रसंहिता...

#

जब हनुमान जी ने तोडा भीम का अहंकार

भीम को यह अभिमान हो गया था कि संसार में मुझसे अधिक बलवान कोई और नहीं है| सौ हाथियों का बल है उसमें, उसे कोई परास्त नहीं कर सकता... और भगवान अपने सेवक में किसी भी प्रकार का अभिमान रहने नहीं देते| इसलिए...

#

भगवान गणेश की सवारी चूहा

गणेश और चूहा गजमुखासुर :एक दैत्य बहुत समय पहले गजमुखासुर नाम का एक दैत्य था। असुर का अर्थ होता है राक्षस या दुष्ट आत्मा। वह सुपर पावरफुल बनकर ब्रह्मांड पर राज करना चाहता था। वह भगवान शिव से प्रार्थना...

#

नागमाता मनसा देवी

मनसा माता भगवान शिव की पुत्री हैं। उन्होंने तपस्या के द्वारा अपना शरीर सुखा दिया जिसकी वजह से उनका नाम जरत्कारु पड़ा। पिता शिव से उन्हें नागलोक का साम्राज्य मिला। मनसा देवी नागों की माता हैं।...

#

गणेश का जन्म

गणेश का जन्म एक दिन माता पार्वती घर में कैलाश पर्वत पर स्नान करने की तैयारी कर रही थीं। जैसा कि वह परेशान नहीं होना चाहती थी, उसने अपने पति शिव के बैल नंदी से दरवाजे की रक्षा करने और किसी को भी पास...

#

कन्नप्प की भक्ति

भील कुमार कन्नप्प वन में भटकते-भटकते एक मंदिर के समीप पहुंचा। मंदिर में भगवान शंकर की मूर्ति देख उसने सोचा- भगवान इस वन में अकेले हैं। कहीं कोई पशु इन्हें कष्ट न दे। शाम हो गई थी। कण्णप्प धनुष पर...

#

भगवान शनि देव का जन्म, विशेषता और मंत्र

संपूर्ण सौरमंडल के अधिपति-भगवान सूर्य भगवान सूर्य इस संपूर्ण सौरमंडल के अधिपति हैं। उनका विवाह भगवान विश्वकर्मा की पुत्री स्वर्णा से हुआ था। अपनी गर्मी सहन करने में असमर्थ, स्वर्णा ने एक बार...

#

खरमास माह से जुड़ी जानकारी: खराब दिनों में क्यों करते हैं इनकी गिनती

हिंदू धर्म में खरमास का विशेष महत्व बताया गया है। इसे मलमास भी कहा जाता है और इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है क्योंकि खरमास की अवधि को अशुभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस साल...

#

भस्मासुर की कहानी

भारतीय पौराणिक कथा मूर्ख भस्मासुर एक असुर या दानव के बारे में है जो सबसे शक्तिशाली बनना चाहता था। भस्मासुर की कहानी राक्षस भस्मासुर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो घोर तपस्या के माध्यम से भगवान शिव...

#

वैशाख पूर्णिमा: महत्व, उत्सव और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि

वैशाख पूर्णिमा को हिंदी में "वैशाख पूर्णिमा" या "बुद्ध पूर्णिमा" कहा जाता है। यह हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार है जो वैशाख माह के पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म, महापरिनिर्वाण,...

#

व्रत और आत्म-समर्पण: मासिक शिवरात्रि का साकारात्मक अनुभव

मासिक शिवरात्रि व्रत मासिक शिवरात्रि व्रत को विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा और उनके समर्पण में किया जाता है। यह व्रत चार चौबीस घंटे की सख्ती के साथ मनाया जाता है, जिसमें भक्त नीतिगत नियमों का पालन...

#

दैवीय शक्ति का अनावरण: बड़ा मंगल की तिथियां, महत्व और पूजा विधि

देशभर में हनुमान भक्त ज्येष्ठ माह के बड़ा मंगल को धूमधाम से मनाते हैं। खासकर उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में इसकी अनोखी खूबसूरती देखने को मिलती है। क्योंकि बड़ा मंगल को त्योहार के रूप में मनाने की...

#

यमराज और डाकू

एक साधु व डाकू यमलोक पहुंचे। डाकू ने यमराज से दंड मांगा और साधु ने स्वर्ग की सुख-सुविधाएं। यमराज ने डाकू को साधु की सेवा करने का दंड दिया। साधु तैयार नहीं हुआ। यम ने साधु से कहा- तुम्हारा तप अभी अधूरा...

#

पुत्रदा एकादशी: पौष मास के कृष्ण पक्ष की विशेष व्रत कथा और आरती

पौष पुत्रदा एकादशी, जिसे दुर्मुखी एकादशी भी कहा जाता है, हिन्दू कैलेंडर के मास 'पौष' में आने वाली एकादशी है। इस तिथि को विशेष रूप से विष्णु भगवान की पूजा की जाती है और भक्तों के लिए यह एक महत्वपूर्ण...

#

नवरात्रि का कलश स्थापना: प्राचीन परंपरा और धार्मिक उत्सव

नवरात्रि:- भारतीय हिंदू कैलेंडर के अनुसार वर्षभर मनाया जाने वाला एक प्रमुख धार्मिक उत्सव है। इस उत्सव का अर्थ होता है "नौ रातें"। नवरात्रि नौ दिनों तक चलती है, जिसमें देवी दुर्गा के नौ रूपों की...

#

होलिका का पूजन क्यों?

लोगों के मन में एक प्रश्न रहता है कि जिस होलिका ने प्रहलाद जैसे प्रभु भक्त को जलाने का प्रयत्न किया, उसका हजारों वर्षों से हम पूजन किसलिए करते हैं? होलिका-पूजन के पीछे एक बात है। जिस दिन होलिका प्रहलाद...

#

कुबेर का घमंड

पौराणिक कथा यह एक पौराणिक कथा है। कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनी थे। एक दिन उन्होंने सोचा कि हमारे पास इतनी संपत्ति है, लेकिन कम ही लोगों को इसकी जानकारी है। इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति का प्रदर्शन...

#

गणेश-और-कावेरी

पवित्र नदी कावेरी भारत की प्रमुख नदियों में से एक है और सात सबसे पवित्र नदियों में से एक है। दक्षिण भारत में उन्हें गंगा से भी पवित्र माना जाता है! वह तालकावेरी में कूर्ग के सुरम्य परिवेश के बीच,...

#

गजानन गणपति : एकदंत

गजानन गणपति : एकदंत किसी भी पूजन कार्य में सबसे पहले गणपति की पूजा की जाती है। भगवान गणेश को गजानन, एकाक्षर, विघ्नहर्ता, एकदंत और कई अन्य नामों से बुलाया जाता है। इन दिनों गणेश उत्सव का त्योहार बड़ी...

#

छठी मइया की व्रत कथा, इतिहास

छठ पूजा का तीसरा दिन है, जिसे बड़ी छठ भी कहते हैं. आज शाम के समय में जब सूर्य देव अस्त होते हैं तो व्रती पानी में खड़े होकर उनको अर्घ्य देते हैं और अपने मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं....

#

जगरनाथ की कटहल कथा

रघु ने भगवान जगन्नाथ के प्रति मैत्रीपूर्ण प्रेम एक समय रघु दास नाम के भगवान रामचन्द्र के एक महान भक्त थे। वह पुरी में जगन्नाथ मंदिर के सिंह द्वार के पास एक बड़ी छतरी के नीचे रहते थे। एक बार जब वह...

#

षटतिला एकादशी: व्रत कथा और आरती

षटतिला एकादशी की कथा इसकी कथा भगवान विष्णु के तपस्या की घटना पर आधारित है. इसका विवरण विभिन्न पुराणों और कथा-संहिताओं में मिलता है, लेकिन एक सामान्य संस्कृत कथा निम्नलिखित है: कहानी एक समय की...

#

कृष्ण रुक्मिणी विवाह कथा

विदर्भ के राजा भीष्मक की कन्या रूक्मिणी थी, रूक्मिणी के भाई थे रूक्म। रूक्म अपनी बहन की शादी शिशुपाल से करना चाहता था परंतु देवी रूक्मणी अपने मन में श्री कृष्ण को पति मान चुकी थी। अत: देवी रूक्मणी...

#

राधा - कृष्ण

सतयुग और त्रेता युग बीतने के बाद जब द्वापर युग आया तो पृथ्वी पर झूठ, अन्याय, असत्य, अनाचार और अत्याचार होने लगे और फिर प्रतिदिन उनकी अधिकता में वृद्धि होती चली गई| अधर्म के भार से पृथ्वी दुखित हो...

#

भगवान ब्रह्मा का कुल

ब्रह्मा हिन्दू धर्म में एक प्रमुख देवता हैं। वे हिन्दुओं के तीन प्रमुख देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) में से एक हैं। ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता कहा जाता है। सृष्टि का रचयिता से आशय सिर्फ जीवों...

#

लक्ष्मी जी की अंगूठी

एक निर्धन व्यक्ति था। वह नित्य भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करता। एक बार दीपावली के दिन भगवती लक्ष्मी की श्रद्धा-भक्ति से पूजा-अर्चना की। कहते हैं उसकी आराधना से लक्ष्मी प्रसन्न हुईं। वह उसके...

#

सकट चौथ व्रत कथा

प्रत्येक माह की चतुर्थी श्रीगणेशजी की पूजा-अर्चना के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। अपनी संतान की मंगलकामना के लिए महिलाएं माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को व्रत रखती है। इसे संकष्टी चतुर्थी,...

#

देवी काली और राक्षस रक्तबीज की कहानी

मंदिर विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में काली पूजा बहुत ऊर्जा के साथ मनाई जाती है। अद्वितीय और चकाचौंध रोशनी वाले भव्य पंडाल बनाए जाते हैं मिट्टी की मूर्तियाँ और मूर्तियाँ हस्तनिर्मित होती...

#

शिव विवाह

सती के विरह में शंकरजी की दयनीय दशा हो गई। वे हर पल सती का ही ध्यान करते रहते और उन्हीं की चर्चा में व्यस्त रहते। उधर सती ने भी शरीर का त्याग करते समय संकल्प किया था कि मैं राजा हिमालय के यहाँ जन्म...

#

बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा व्रत, कथा, मंत्र और इतिहास

बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा व्रत :- बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा व्रत अपने आप में एक पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। यह व्रत मां सरस्वती की पूजा और उनकी कृपा के लिए किया जाता है ताकि विद्या, बुद्धि,...

#

श्रावण मास:तिथिया, पूजा विधि और महत्व

सावन सोमवार का अर्थ होता है कि वह सोमवार जो सावन महीने में आता है। सावन महीना हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है और इस महीने में सोमवार का विशेष महत्व है। इस महीने में लोग भगवान शिव की...

#

सती अनुसुइया ने ब्रह्मा,विष्णु,महेश को शिशु बनाया

सती अनुसुइया ने ब्रह्मा,विष्णु,महेश को शिशु बनाया सती अनुसुइया महर्षि अत्रि की पत्नी थीं। अत्रि ऋषि ब्रह्मा जी के मानस पुत्र और सप्तऋषियों में से एक थे। अनुसुइया का स्थान भारतवर्ष की सती-साध्वी...

#

श्रीकृष्ण दौड़े चले आए

अर्जुन ने अपने-आपको श्रीकृष्ण को समर्पित कर दिया था| अर्जुन होता हुआ भी, नहीं था, इसलिए कि उसने जो कुछ किया, अर्जुन के रूप में नहीं, श्रीकृष्ण के सेवक के रूप में किया| सेवक की चिंता स्वामी की चिंता...

#

जगन्नाथ रथ यात्रा: भक्ति और एकता की यात्रा

जगन्नाथ रथयात्रा हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो पुरी, उड़ीसा में हर साल होता है। इस त्योहार में, भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की मूर्तियाँ उनकी मंदिर से निकालकर उनके विशाल...

#

प्रदोष व्रत कथा: भगवान शिव की कृपा से मुक्ति की प्राप्ति

कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत की कथा भगवान शिव के श्रद्धालु भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां इस व्रत की कुछ मुख्य कथाएं हैं: कथा 1: राजा मंदता और मृत्यु का वरदान कहानी यहां से शुरू होती है कि...

#

कुबेर का अहंकार चूर-चूर हो गया

कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनी थे। एक दिन उन्होंने सोचा कि हमारे पास इतनी संपत्ति है, लेकिन कम ही लोगों को इसकी जानकारी है। इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति का प्रदर्शन करने के लिए एक भव्य भोज का आयोजन...

#

भगवान कृष्ण के जन्म की कहानी

पौराणिक प्रासंगिकता के अलावा, भगवान कृष्ण की जन्म कहानी बच्चों को तलाशने और समझने के लिए प्यार, दिव्यता, दु: ख और शरारत जैसी विभिन्न भावनाओं को जोड़ती है। एक समय था जब राजाओं या राक्षसों द्वारा...

#

कन्नप्पा नयनार की कहानी

थिन्नन :प्रतिष्ठित तीरंदाज नागान पोथापी के जंगल क्षेत्र में एक आदिवासी प्रमुख थे। उनके और उनकी पत्नी थथथाई के बहुत लंबे समय से बच्चे नहीं थे और वे भगवान कार्तिकेय (शिव के पुत्र) से प्रार्थना कर...

#

जब ठगे गए गणेश जी

गणेश जी विघ्न विनाशक व शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं। अगर कोई सच्चे मन से गणेश जी की वंदना करता है, तो गौरी नंदन तुरंत प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद प्रदान करते हैं। वैसे भी गणेश जी जिस स्थान पर...

#

गंगा जन्म की कथा

ऋषि विश्वामित्र ने इस प्रकार कथा सुनाना आरम्भ किया, "पर्वतराज हिमालय की अत्यंत रूपवती, लावण्यमयी एवं सर्वगुण सम्पन्न दो कन्याएँ थीं। सुमेरु पर्वत की पुत्री मैना इन कन्याओं की माता थीं। हिमालय...

#

बसंत पंचमी की कथा

सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खास तौर पर मनुष्य योनि की रचना की। अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों आ॓र...

#

सृष्टि का निर्माण

उत्तराखंड में प्रचलित पौराणिक गाथा के अनुसार पृथ्वी में सर्वप्रथम निरंकार विद्यमान था। उनके द्वारा सोनी और जंबू गरुड़ की उत्पत्ति के पश्चात ही सृष्टि की रचना मानी गयी है। आइए जाने उत्तराखंड...

#

कुरु का जन्म

कुरुवंश के प्रथम पुरुष का नाम कुरु था| कुरु बड़े प्रतापी और बड़े तेजस्वी थे| उन्हीं के नाम पर कुरुवंश की शाखाएं निकलीं और विकसित हुईं| एक से एक प्रतापी और तेजस्वी वीर कुरुवंश में पैदा हो चुके हैं|...

#

श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह

विदर्भ देश के राजा भीष्मक के पांच पुत्र और एक पुत्री थी| पुत्री का नाम रुक्मिणी था जो समकालीन राजकुमारियों में सर्वाधिक सुंदर और सुशील थी| उससे विवाह करने के लिए अनेक राजा और राजकुमार आए दिन विदर्भ...

#

क्यों पीपल के वृक्ष के साथ ही शनिदेव के पूजन की परंपरा है ?

त्रेतायुग में एक बार बारिश के अभाव से अकाल पड़ा। तब कौशिक मुनि परिवार के लालन-पालन के लिए अपना गृहस्थान छोड़कर अन्यत्र जाने के लिए अपनी पत्नी और पुत्रों के साथ चल दिए। फिर भी परिवार का भरण-पोषण...

#

समुद्र मंथन कथा

एक बार की बात है शिवजी के दर्शनों के लिए दुर्वासा ऋषि अपने शिष्यों के साथ कैलाश जा रहे थे। मार्ग में उन्हें देवराज इन्द्र मिले। इन्द्र ने दुर्वासा ऋषि और उनके शिष्यों को भक्तिपूर्वक प्रणाम किया।...

#

मौनी अमावस्या 2024

मौना अमावस्या मौनी अमावस्या, जिसे मौना अमावस्या भी कहा जाता है, हिंदू कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण दिन है। यह माघ महीने (आमतौर पर जनवरी या फरवरी) के अंधेरे पखवाड़े (अमावस्या) के 15वें दिन पड़ता है। "मौनी"...

#

लक्ष्मी जी का वास

एक बार की बात है, राजा बलि समय बिताने के लिए एकान्त स्थान पर गधे के रूप में छिपे हुए थे। देवराज इन्द्र उनसे मिलने के लिए उन्हें ढूँढ रहे थे। एक दिन इन्द्र ने उन्हें खोज निकाला और उनके छिपने का कारण...

#

देवउठनी एकादशी व्रत कथा

कार्तिक मास भगवान विष्णु का सबसे प्रिय महीना है। इस महीने में देवउठनी एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है और व्रत कथा का पाठ किया जाता है। देवउठनी एकादशी...

#

विषपान करते भगवान शिव की कथा

भगवान शिव हलाहल (जहर) पीकर ब्रह्मांड को बचाते हैं दैत्यों और देवताओं के बीच एक युद्ध में, देवताओं ने अपना सारा ऐश्वर्य और पद खो दिया। देवताओं ने तब भगवान ब्रह्मा से संपर्क किया, जो उन्हें भगवान...