देवउठनी एकादशी व्रत कथा

देवउठनी एकादशी व्रत कथा

कार्तिक मास भगवान विष्णु का सबसे प्रिय महीना है। इस महीने में देवउठनी एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है और व्रत कथा का पाठ किया जाता है। देवउठनी एकादशी के दिन से सभी मांगलिक कार्य पुनः शुरू हो जाते हैं। हिंदू शास्त्रों में भी इस दिन को बहुत ही महत्वपूर्ण बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा के साथ-साथ व्रत कथा का भी पाठ किया जाता है। आइए जानते हैं देवउठनी एकादशी व्रत कथा जिसका पाठ करने से यह व्रत सफल हो जाता है।

देवउठनी एकादशी व्रत कथा

पौराणिक काल में एक राजा के राज्य में सभी लोग एकादशी व्रत करते थे। इस दिन राज्य के किसी भी व्यक्ति को नहीं दिया जाता था। एक रोज दूसरे नगर से एक व्यक्ति नौकरी मांगने के लिए राजा के दरबार में आया। उसने राजा से नौकरी की प्रार्थना की। उसकी बातें सुनकर राजा ने कहा 'मैं नौकरी तो तुम्हें दे दूंगा, लेकिन एकादशी के दिन तुम्हें अन्न नहीं दिया जाएगा।' यह बात सुनकर नौकर खुशी से झूमने लगा और हंसी-खुशी उसने शर्त मान ली।

लेकिन जब एकादशी व्रत का समय आया, राज्य के सभी लोगों ने व्रत रखा। लेकिन वह नौकर राजा के पास अन्न मांगने के लिए आया। राजा ने उसे फलाहार का सामान दिया। लेकिन वह गिड़गिड़ाया कि इससे उसकी भूख नहीं मिटेगी और वह भूखा ही मर जाएगा। राजा ने उसे अपनी शर्त दोहराई। वह व्यक्ति बोला कि उसके लिए अन्न बहुत जरूरी है। राजा ने उसकी दशा देखकर उसे भोजन के लिए आटा, दाल, चावल दे दिया। वह नियमित रूप से एक नदी के किनारे गया और उसने भोजन पकाया। भोजन पकाने के बाद उसने भगवान को निमंत्रण दिया और कहा हे भगवन! अपना भोजन कर लीजिए।

भक्त की पुकार सुन प्रकट हुए भगवान

अपने भक्त की पुकार सुनकर भगवान विष्णु चतुर्भुज रूप में प्रकट हुए और भोजन करने लगे। भोजन के बाद वह वैकुंठ लोक चले गए। इसके बाद वह नौकर भी अपने काम पर चला गया। जब दूसरे मास में एकादशी तिथि आई। तब उस नौकर ने राजा से दोगुना अनाज मांगा। जब राजा ने इसका कारण पूछा तो उसने साफ-साफ बता दिया कि पिछली बार उसका सारा खाना भगवान कर गए थे। जिस वजह से वह भूखा रह गया था। यह बात सुनकर राजा को विश्वास नहीं हो और उसने उस नौकर को अन्न देने से मना कर दिया।

तब नौकर ने उस राजा को अपने साथ चलने का निमंत्रण दिया और कहा कि वह खुद ही यह देख ले। उसके बाद नौकर के साथ राजा नदी के किनारे गया और एक पेड़ के पीछे छिप गया। वह पीछे छिपकर पूरे घटनाक्रम को देखता रहा। इस बार भी नौकर ने भोजन पकाया और भगवान को निमंत्रण दिया। लेकिन इस बार भगवान प्रकट नहीं हुए। शाम तक वह भगवान का इंतजार करता रहा और उन्हें पुकारता रहा। अंत में उसने कहा कि 'हे भगवन! यदि आप भोजन करने नहीं आएंगे तो मैं नदी में कूदकर अपने प्राण त्याग दूंगा।

सुंदरी के भेष में श्रीहरि ने राजा के सामने रखी ऐसी शर्त

सुंदरी ने राजा की बात स्वीकार ली लेकिन एक शर्त रखी कि राजा को पूरे राज्य का अधिकार उसे सौंपना होगा और जो वह बोलेगी, खाने में जो बनाएगी उसे मानना होगा. राजा ने शर्त मान ली. अगले दिन एकादशी पर सुंदरी ने बाजारों में बाकी दिनों की तरह अन्न बेचने का आदेश दिया. मांसाहार भोजन बनाकर राजा को खाने पर मजबूर करने लगी. राजा ने कहा कि आज एकादशी के व्रत में मैं तो सिर्फ फलाहार ग्रहण करता हूं. रानी ने शर्त याद दिलाते हुए राजा को कहा कि अगर यह तामसिक भोजन नहीं खाया तो मैं बड़े राजकुमार का सिर काट दूंगी.

विष्णु की परीक्षा में पास हुए राजा को हुआ ज्ञान

वह नौकर जैसे ही नदी की ओर बढ़ने लगा तभी भगवान विष्णु प्रकट हो गए और उन्होंने अपने भक्त के द्वारा बनाया गया भोजन ग्रहण किया। भोजन करने के बाद वह उस नौकर को अपने साथ अपने धाम ले गए। राजा को यह आभास हुआ कि वह भगवान की भक्ति नहीं बल्कि आडंबर कर रहा था। सच्ची भावना से ही भगवान प्रसन्न होते हैं और दर्शन प्रदान करते हैं।

राजा ने अपनी स्थिति बड़ी रानी को बताई. बड़ी महारानी ने राजा से धर्म का पालन करने की बात कही और अपने बेटे का सिर काट देने को मंजूर हो गई. राजकुमार ने भी पिता को धर्म न छोड़ने को कहा और खुशी खुशी अपने सिर की बलि देने के लिए राजी हो गए. राजा हताश थे और सुंदरी की बात न मानने पर राजकुमार का सिर देने को तैयार हो गए. तभी सुंदरी के रूप से भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और कहा कि ये तुम्हारी परीक्षा थी और तुम इसमे पास हो गए. श्रीहरि ने राजा से वर मांगने को कहा. राजा ने इस जीवन के लिए प्रभू का धन्यवाद किया कहा कि अब मेरा उद्धार कीजिए. राजा की प्रार्थना श्रीहरि ने स्वीकार की और वह मृत्यु के बाद बैंकुठ की प्राप्ति हुई

अन्य संबंधित कहानियां और कथाएं

#

छठी मइया की व्रत कथा, इतिहास

छठ पूजा का तीसरा दिन है, जिसे बड़ी छठ भी कहते हैं. आज शाम के समय में जब सूर्य देव अस्त होते हैं तो व्रती पानी में खड़े होकर उनको अर्घ्य देते हैं और अपने मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं....

#

माँ वैष्णो देवी

आपने जम्मू की वैष्णो माता का नाम अवश्य सुना होगा। आज हम आपको इन्हीं की कहानी सुना रहे हैं, जो बरसों से जम्मू-कश्मीर में सुनी व सुनाई जाती है। कटरा के करीब हन्साली ग्राम में माता के परम भक्त श्रीधर...

#

आध्यात्मिक अनुशासन से सफलता प्राप्त करना : सफला एकादशी

सफला एकादशी एक हिंदू धार्मिक अनुष्ठान है जो मार्गशीर्ष के चंद्र माह के शुक्ल पक्ष (शुक्ल पक्ष) के ग्यारहवें दिन (एकादशी) को पड़ता है। यह ग्रेगोरियन कैलेंडर में दिसंबर या जनवरी से मेल खाता है। "सफला"...

#

समुद्र मंथन कथा

एक बार की बात है शिवजी के दर्शनों के लिए दुर्वासा ऋषि अपने शिष्यों के साथ कैलाश जा रहे थे। मार्ग में उन्हें देवराज इन्द्र मिले। इन्द्र ने दुर्वासा ऋषि और उनके शिष्यों को भक्तिपूर्वक प्रणाम किया।...

#

हनुमान: बालपन, शिक्षा एवं शाप

हनुमान जी के धर्म पिता वायु थे, इसी कारण उन्हे पवन पुत्र के नाम से भी जाना जाता है। बचपन से ही दिव्य होने के साथ साथ उनके अन्दर असीमित शक्तियों का भण्डार था।बालपन में एक बार सूर्य को पका हुआ फ़ल समझकर...

#

कुरु का जन्म

कुरुवंश के प्रथम पुरुष का नाम कुरु था| कुरु बड़े प्रतापी और बड़े तेजस्वी थे| उन्हीं के नाम पर कुरुवंश की शाखाएं निकलीं और विकसित हुईं| एक से एक प्रतापी और तेजस्वी वीर कुरुवंश में पैदा हो चुके हैं|...

#

दैवीय शक्ति का अनावरण: बड़ा मंगल की तिथियां, महत्व और पूजा विधि

देशभर में हनुमान भक्त ज्येष्ठ माह के बड़ा मंगल को धूमधाम से मनाते हैं। खासकर उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में इसकी अनोखी खूबसूरती देखने को मिलती है। क्योंकि बड़ा मंगल को त्योहार के रूप में मनाने की...

#

श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह

विदर्भ देश के राजा भीष्मक के पांच पुत्र और एक पुत्री थी| पुत्री का नाम रुक्मिणी था जो समकालीन राजकुमारियों में सर्वाधिक सुंदर और सुशील थी| उससे विवाह करने के लिए अनेक राजा और राजकुमार आए दिन विदर्भ...

#

षटतिला एकादशी: व्रत कथा और आरती

षटतिला एकादशी की कथा इसकी कथा भगवान विष्णु के तपस्या की घटना पर आधारित है. इसका विवरण विभिन्न पुराणों और कथा-संहिताओं में मिलता है, लेकिन एक सामान्य संस्कृत कथा निम्नलिखित है: कहानी एक समय की...

#

श्रावण मास:तिथिया, पूजा विधि और महत्व

सावन सोमवार का अर्थ होता है कि वह सोमवार जो सावन महीने में आता है। सावन महीना हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है और इस महीने में सोमवार का विशेष महत्व है। इस महीने में लोग भगवान शिव की...

#

बसंत पंचमी की कथा

सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खास तौर पर मनुष्य योनि की रचना की। अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों आ॓र...

#

अगस्त्य - महासागर का जल

कृत युग में, जिसे सत्य युग के रूप में भी जाना जाता है, कालकेय नामक शक्तिशाली राक्षसों का एक झुंड था जो बहुत क्रूर थे और हमेशा देवताओं के साथ युद्ध छेड़ने की ताक में रहते थे। वृत्रासुर इनका प्रधान...

#

पुत्रदा एकादशी: पौष मास के कृष्ण पक्ष की विशेष व्रत कथा और आरती

पौष पुत्रदा एकादशी, जिसे दुर्मुखी एकादशी भी कहा जाता है, हिन्दू कैलेंडर के मास 'पौष' में आने वाली एकादशी है। इस तिथि को विशेष रूप से विष्णु भगवान की पूजा की जाती है और भक्तों के लिए यह एक महत्वपूर्ण...

#

खरमास माह से जुड़ी जानकारी: खराब दिनों में क्यों करते हैं इनकी गिनती

हिंदू धर्म में खरमास का विशेष महत्व बताया गया है। इसे मलमास भी कहा जाता है और इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है क्योंकि खरमास की अवधि को अशुभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस साल...

#

श्रीकृष्ण दौड़े चले आए

अर्जुन ने अपने-आपको श्रीकृष्ण को समर्पित कर दिया था| अर्जुन होता हुआ भी, नहीं था, इसलिए कि उसने जो कुछ किया, अर्जुन के रूप में नहीं, श्रीकृष्ण के सेवक के रूप में किया| सेवक की चिंता स्वामी की चिंता...

#

सकट चौथ व्रत कथा

प्रत्येक माह की चतुर्थी श्रीगणेशजी की पूजा-अर्चना के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। अपनी संतान की मंगलकामना के लिए महिलाएं माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को व्रत रखती है। इसे संकष्टी चतुर्थी,...

#

होलिका का पूजन क्यों?

लोगों के मन में एक प्रश्न रहता है कि जिस होलिका ने प्रहलाद जैसे प्रभु भक्त को जलाने का प्रयत्न किया, उसका हजारों वर्षों से हम पूजन किसलिए करते हैं? होलिका-पूजन के पीछे एक बात है। जिस दिन होलिका प्रहलाद...

#

शिव विवाह

सती के विरह में शंकरजी की दयनीय दशा हो गई। वे हर पल सती का ही ध्यान करते रहते और उन्हीं की चर्चा में व्यस्त रहते। उधर सती ने भी शरीर का त्याग करते समय संकल्प किया था कि मैं राजा हिमालय के यहाँ जन्म...

#

जब भगवान राम और भोलेनाथ के बीच हुआ युद्ध

बात उन दिनों कि है जब श्रीराम का अश्वमेघ यज्ञ चल रहा था ! श्रीराम के अनुज शत्रुघ्न के नेतृत्व में असंख्य वीरों की सेना सारे प्रदेश को विजित करती जा रही थी ! यज्ञ का अश्व प्रदेश प्रदेश जा रहा था ! इस...

#

लौहजंघ की कथा

इस पृथ्वी पर भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा नगरी है| वहां रूपणिका नाम की एक वेश्या रहती थी| उसकी मां मकरदंष्ट्रा बड़ी ही कुरूप और कुबड़ी थी| वह कुटनी का कार्य भी करती थी| रूपणिका के पास आने वाले...

#

विषपान करते भगवान शिव की कथा

भगवान शिव हलाहल (जहर) पीकर ब्रह्मांड को बचाते हैं दैत्यों और देवताओं के बीच एक युद्ध में, देवताओं ने अपना सारा ऐश्वर्य और पद खो दिया। देवताओं ने तब भगवान ब्रह्मा से संपर्क किया, जो उन्हें भगवान...

#

भस्मासुर की कहानी

भारतीय पौराणिक कथा मूर्ख भस्मासुर एक असुर या दानव के बारे में है जो सबसे शक्तिशाली बनना चाहता था। भस्मासुर की कहानी राक्षस भस्मासुर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो घोर तपस्या के माध्यम से भगवान शिव...

#

वैशाख पूर्णिमा: महत्व, उत्सव और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि

वैशाख पूर्णिमा को हिंदी में "वैशाख पूर्णिमा" या "बुद्ध पूर्णिमा" कहा जाता है। यह हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार है जो वैशाख माह के पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म, महापरिनिर्वाण,...

#

धनतेरस

प्राचीन काल में एक राजा थे। उनके कोई संतान नहीं थी। अत्याधिक पूजा-अर्चना व मन्नतों के पश्चात दैव योग से उन्हें पुत्र प्राप्ति हुई। ज्योंतिषियों ने बालक की कुण्डली बनाते समय भविष्यवाणी की कि इस...

#

व्रत और आत्म-समर्पण: मासिक शिवरात्रि का साकारात्मक अनुभव

मासिक शिवरात्रि व्रत मासिक शिवरात्रि व्रत को विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा और उनके समर्पण में किया जाता है। यह व्रत चार चौबीस घंटे की सख्ती के साथ मनाया जाता है, जिसमें भक्त नीतिगत नियमों का पालन...

#

भगवान विष्णु और नारद जी

एक बार नारद मुनि जी ने भगवान विष्णु जी से पूछा, हे भगवन!  आप का इस समय सब से प्रिय भक्त कौन है?, अब विष्णु तो भगवान है, सो झट से समझ गये अपने भक्त नारद मुनि की बात, ओर मुस्कुरा कर बोले! मेरा सब से प्रिय...

#

कुबेर का अहंकार चूर-चूर हो गया

कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनी थे। एक दिन उन्होंने सोचा कि हमारे पास इतनी संपत्ति है, लेकिन कम ही लोगों को इसकी जानकारी है। इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति का प्रदर्शन करने के लिए एक भव्य भोज का आयोजन...

#

गणेश जी का विवाह किस से और कैसे हुआ?

गणेश जी भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र गणेश जी की पूजा सभी भगवानों से पहले की जाती है | प्रत्येक शुभ कार्य करने से पहले इन्हे ही पूजा जाता है| गणेश जी को गणपति के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि...

#

नवरात्र की कथा

प्राचीन समय में राजा सुरथ नाम के राजा थे, राजा प्रजा की रक्षा में उदासीन रहने लगे थे,परिणाम स्वरूप पड़ोसी राजा ने उस पर चढाई कर दी,सुरथ की सेना भी शत्रु से मिल गयी थी,परिणामस्वरूप राजा सुरथ की हार...

#

देवी काली और राक्षस रक्तबीज की कहानी

मंदिर विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में काली पूजा बहुत ऊर्जा के साथ मनाई जाती है। अद्वितीय और चकाचौंध रोशनी वाले भव्य पंडाल बनाए जाते हैं मिट्टी की मूर्तियाँ और मूर्तियाँ हस्तनिर्मित होती...

#

त्रिपुरासुर का वध

भयंकर असुर: त्रिपुरासुर असुर बाली की कृपा से त्रिपुरासुर एक भयंकर असुर बन गया था। त्रिपुरासुर के वध की कहानी महाभारत के कर्णपर्व में व्यापक रूप से वर्णित है। भगवान कार्तिकेय द्वारा तारकासुर...

#

कुबेर का घमंड

पौराणिक कथा यह एक पौराणिक कथा है। कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनी थे। एक दिन उन्होंने सोचा कि हमारे पास इतनी संपत्ति है, लेकिन कम ही लोगों को इसकी जानकारी है। इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति का प्रदर्शन...

#

विष्णु के कम ज्ञात अवतार: मत्स्य

विष्णु के कम ज्ञात अवतार: मत्स्य दैत्य हयग्रीव एक बार ब्रह्मा जी के पास से वेदों को एक बहुत बड़े दैत्य हयग्रीव ने चुरा लिया। चारों ओर अज्ञानता का अंधकार फैल गया और पाप तथा अधर्म का बोल-बाला हो गया।...

#

पौष पूर्णिमा: व्रत विधि, व्रत कथा, व्रत आरती, नियम और महत्वपूर्ण

पौष पूर्णिमा हिंदू कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण पूर्णिमा का दिन है, और यह आमतौर पर पारंपरिक हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार पौष (दिसंबर-जनवरी) के महीने में आता है। यह दिन धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व...

#

राजा विक्रमादित्य पर शनिदेव की साढ़े-साती

एक समय स्वर्गलोक में सबसे बड़ा कौन के प्रश्न को लेकर सभी देवताओं में वाद-विवाद प्रारम्भ हुआ और फिर परस्पर भयंकर युद्ध की स्थिति बन गई। सभी देवता देवराज इंद्र के पास पहुंचे और बोले, हे देवराज! आपको...

#

उत्सव ऊर्जा का: मकर संक्रांति का रंगीन महत्व

मकर संक्रांति एक हिंदू त्योहार है जो भारत और नेपाल के विभिन्न हिस्सों में मनाया जाता है। यह सूर्य के मकर राशि में संक्रमण का प्रतीक है और शीतकालीन संक्रांति के अंत का प्रतीक है। यह त्यौहार आमतौर...

#

कन्नप्प की भक्ति

भील कुमार कन्नप्प वन में भटकते-भटकते एक मंदिर के समीप पहुंचा। मंदिर में भगवान शंकर की मूर्ति देख उसने सोचा- भगवान इस वन में अकेले हैं। कहीं कोई पशु इन्हें कष्ट न दे। शाम हो गई थी। कण्णप्प धनुष पर...

#

काशी का वाराणसी के रूप में पुनर्जन्म - कथा

यह कथा द्वापरयुग की है जब भगवान श्री कृष्ण के सुदर्शन चक्र ने काशी को जलाकर राख कर दिया था। बाद में यह वाराणसी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यह कथा इस प्रकार हैः-मगध का राजा जरासंध बहुत शक्तिशाली और...

#

सती अनुसुइया ने ब्रह्मा,विष्णु,महेश को शिशु बनाया

सती अनुसुइया ने ब्रह्मा,विष्णु,महेश को शिशु बनाया सती अनुसुइया महर्षि अत्रि की पत्नी थीं। अत्रि ऋषि ब्रह्मा जी के मानस पुत्र और सप्तऋषियों में से एक थे। अनुसुइया का स्थान भारतवर्ष की सती-साध्वी...

#

ध्रुव तारे की कथा

राजा उत्तानपाद ब्रह्माजी के मानस पुत्र स्वयंभू मनु के पुत्र थे। उनकी सनीति एवं सुरुचि नामक दो पत्नियाँ थीं। उन्हें सुनीति से ध्रुव एवं सुरुचि से उत्तम नामक पुत्र प्राप्त हुए। वे दोनों राजकुमारों...

#

मौनी अमावस्या 2024

मौना अमावस्या मौनी अमावस्या, जिसे मौना अमावस्या भी कहा जाता है, हिंदू कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण दिन है। यह माघ महीने (आमतौर पर जनवरी या फरवरी) के अंधेरे पखवाड़े (अमावस्या) के 15वें दिन पड़ता है। "मौनी"...

#

जगरनाथ की कटहल कथा

रघु ने भगवान जगन्नाथ के प्रति मैत्रीपूर्ण प्रेम एक समय रघु दास नाम के भगवान रामचन्द्र के एक महान भक्त थे। वह पुरी में जगन्नाथ मंदिर के सिंह द्वार के पास एक बड़ी छतरी के नीचे रहते थे। एक बार जब वह...

#

श्री लक्ष्मी जी की कथा

एक बार भगवान शंकर के अंशभूत महर्षि दुर्वासा पृथ्वी पर विचर रहे थे। घूमत-घूमते वे एक मनोहर वन में गए। वहाँ एक विद्याधर सुंदरी हाथ में पारिजात पुष्पों की माला लिए खड़ी थी, वह माला दिव्य पुष्पों की...

#

गजानन गणपति : एकदंत

गजानन गणपति : एकदंत किसी भी पूजन कार्य में सबसे पहले गणपति की पूजा की जाती है। भगवान गणेश को गजानन, एकाक्षर, विघ्नहर्ता, एकदंत और कई अन्य नामों से बुलाया जाता है। इन दिनों गणेश उत्सव का त्योहार बड़ी...

#

दुर्गा और महिषासुर की कहानी

महिषासुर एक शक्तिशाली राक्षस महिषासुर एक शक्तिशाली भैंसा राक्षस था। बचपन में भी महिषासुर समस्त सृष्टि में सबसे शक्तिशाली बनना चाहता था। उसने देवों के प्रति घृणा का पोषण किया और उन्हें हराना...

#

जब माता लक्ष्मी ने बेटी बनकर माधव का कल्याण किया

एक बार भगवान विष्णु जी शेषनाग पर बेठे बेठे बोर हो गये, ओर उन्होने धरती पर घुमने का विचार मन में किया, वेसे भी कई साल बीत गये थे धरती पर आये, ओर वह अपनी यात्रा की तयारी मे लग गये, स्वामी को तेयार होता...

#

चन्द्रमा को शाप से मुक्ति

चंद्रमा की सुंदरता पर राजा दक्ष की सत्ताइस पुत्रियां मोहित हो गईं ! वे सभी चंद्रमा से विवाह करना चाहती थीं ! दक्ष ने समझाया सगी बहनों का एक ही पति होने से दांपत्य जीवन में बाधा आएगी लेकिन चंद्रमा...

#

प्रदोष व्रत कथा: भगवान शिव की कृपा से मुक्ति की प्राप्ति

कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत की कथा भगवान शिव के श्रद्धालु भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां इस व्रत की कुछ मुख्य कथाएं हैं: कथा 1: राजा मंदता और मृत्यु का वरदान कहानी यहां से शुरू होती है कि...

#

भाई-दूज कथा

भगवान सूर्यदेव की पत्नी का नाम छाया था । उसकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ । यमुना अपने भाई यमराज से बडा स्नेह करती थी । वह उससे बराबर निवेदन करती है वह उसके घर आकर भोजन करें । लेकिन यमराज अपने...

#

बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा व्रत, कथा, मंत्र और इतिहास

बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा व्रत :- बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा व्रत अपने आप में एक पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। यह व्रत मां सरस्वती की पूजा और उनकी कृपा के लिए किया जाता है ताकि विद्या, बुद्धि,...