जब हनुमान जी ने तोडा भीम का अहंकार
भीम को यह अभिमान हो गया था कि संसार में मुझसे अधिक बलवान कोई और नहीं है| सौ हाथियों का बल है उसमें, उसे कोई परास्त नहीं कर सकता... और भगवान अपने सेवक में किसी भी प्रकार का अभिमान रहने नहीं देते| इसलिए श्रीकृष्ण ने भीम के कल्याण के लिए एक लीला रच दी|
द्रौपदी ने भीम से कहा, "आप श्रेष्ठ गदाधारी हैं, बलवान हैं, आप गंधमादन पर्वत से दिव्य वृक्ष के दिव्य पुष्प लाकर दें... मैंने अपनी वेणी में सजाने हैं, आप समर्थ हैं, ला सकते हैं| लाकर देंगे न दिव्य कमल पुष्प|"
भीम द्रौपदी के आग्रह को टाल नहीं सके| गदा उठाई और गंधमादन पर्वत की ओर चल पड़े मदमस्त हाथी की तरह| किसी तनाव से मुक्त, निडर... भीम कभी गदा को एक कंधे पर रखते, कभी दूसरे पर रखते| बेफिक्री से गंधमादन पर्वत की ओर जा रहे थे... सोच रहे थे, अब पहुंचा कि तब पहुंचा, दिव्य पुष्प लाकर द्रौपदी को दूंगा, वह प्रसन्न हो जाएगी|
लेकिन अचानक उनके बढ़ते कदम रुक गए... देखा, एक वृद्ध लाचार और कमजोर वानर मार्ग के एक बड़े पत्थर पर बैठा है| उसने अपनी पूंछ आगे के उस पत्थर तक बिछा रखी है जिससे रास्ता रुक गया है| पूंछ हटाए बिना, आगे नहीं बढ़ा जा सकता... अर्थात उस वानर से अपनी पूंछ से मार्ग रोक रखा था और कोई भी बलवान व्यक्ति किसी को लांघकर मार्ग नहीं बनाता, बल्कि मार्ग की बाधा को हटाकर आगे बढ़ता है| बलवान व्यक्ति बाधा सहन नहीं कर सकता... या तो व बाधा स्वयं हटाता है, या उस बाधा को ही मिटा देता है| इसलिए भीम भी रुक गए|
जब मद, अहंकार और शक्ति बढ़ जाती है तो आदमी अपने आपको आकाश को छूता हुआ समझता है| वह किसी को खातिर में नहीं लाता... और अत्यधिक निरंकुश शक्ति ही व्यक्ति के विनाश का कारण बनती है... लेकिन श्रीकृष्ण तो भीम का कल्याण करना चाहते थे... भीम का विनाश नहीं सुधार चाहते थे|
भीम ने कहा, "ऐ वानर ! अपने पूंछ को हटाओ, मैंने आगे बढ़ना है|"
वानर ने देखा एक बलिष्ठ व्यक्ति गदा उठाए, राजसी वस्त्र पहने, मुकुट धारण किए बड़े रोब के साथ उसे पूंछ हटाने को कह रहा है| हैरान हुआ, पहचान भी गया.. लेकिन चूंकि वह श्रीकृष्ण की लीला थी, इसलिए चुप हो गया| भीम के सवाल का जवाब नहीं दिया|
भीम ने फिर कहा, "वानर, मैंने कहा न कि पूंछ हटाओ, मैंने आगे जाना है, तुम वृद्ध हो, इसलिए कुछ नहीं कह रहा|"
वानर गंभीर हो गया| मन ही मन हंस दिया| कहा, "तुम देख रहे हो, मैं वृद्ध हूं, कमजोर हूं... उठ नहीं सकता| मुझमें इतनी ताकत नहीं कि मैं स्वयं ही अपनी पूंछ हटा लूं... तुम ही कष्ट करो, मेरी पूंछ थोड़ी इधर सरका दो, और आगे निकल जाओ|"
भीम के तेवर कसे... गदा कंधे से हटाई... नीचे रखी| इस वानर ने मेरे बल को ललकारा है, आखिर है तो एक पूंछ ही, वह भी वृद्ध वानर की| कहा, "यह मामूली सी पूंछ हटाना भी कोई मुश्किल है, यह तुमने क्या कह दिया? मैंने बहुत बलवानों को परास्त किया है, धूल चटाई है, सौ हाथियों का बल है मुझमें...|"
इतना कह कर भीम ने अपने बाएं हाथ से पूंछ को यों पकड़ा, जैसे एक तिनके को पकड़ रहा है कि उठाया, हवा में उड़ा दिया... लेकिन भीम से वह पूंछ हिल भी नहीं सकी| हैरान हुआ... फिर उसने दाएं हाथ से पूंछ को हटाना चाहा... लेकिन दाएं हाथ से भी पूंछ तिलमात्र नहीं हिली... भीम ने वानर की तरफ देखा... वानर मुस्करा रहा था|
भीम को गुस्सा आ गया| भीम ने दोनों हाथों से भरपूर जोर लगाया... एक पांव को पत्थर पर रखकर, आसरा लेकर फिर जोर लगाया... दो-तीन बार... लेकिन हर बार भीम हताश हुआ... जिस पूंछ को भीम ने मामूली और कमजोर वानर की पूंछ समझा था... उसने उसके पसीने छुड़वा दिए थे... और भीम थककर, निढाल होकर एक तरफ खड़ा हो गया| सोचने लगा... यह कोई मामूली वृद्ध वानर नहीं है... यह दिव्य व्यक्ति है और इसकी असीम शक्ति का मैं सामना नहीं कर पाऊंगा... विनम्र और झुका हुआ व्यक्ति ही कुछ पाता है, अकड़ उसे ले डूबती है, ताकत काफूर हो जाती है और भीम वाकई वृद्ध वानर के सामने कमजोर लगने लगा... मद और अहंकार काफूर हो गया... और जब मद और अहंकार मिटता है... तभी भगवान की कृपा होती है|
भीम ने कहा, "मैं आपको पहचान नहीं सका... जिसकी पूंछ को मैं उठा नहीं सका वह कोई मामूली वानर नहीं हो सकता... मुझे क्षमा करें, कृपया अपना परिचय दें|"
वानर उठ खड़ा हुआ... आगे बढ़ा और भीम को गले लगा लिया, कहा, "भीम, मैं तुम्हें पहचान गया था| तुम वायु पुत्र हो... मैं पवन पुत्र हनुमान हूं, श्रीराम का सेवक... श्रीराम का सेवक होने के सिवा मेरी कोई पहचान नहीं और उन्हीं के आदेश पर मैं इस मार्ग पर लेटा हूं... ताकि तुम्हें, तुम्हारी असलियत बता दूं... रिश्ते से मैं तुम्हारा बड़ा भाई हूं और इसीलिए बड़े भाई का कर्तव्य निभाते हुए प्रभु के आशीर्वाद से तुम्हें याद दिला रहा हूं... शक्ति का, ताकत का अभिमान न करो... क्योंकि यह ताकत और बल तुम्हारा नहीं| भगवान ने ही इसे दिया है... यह शरीर भी तो परमात्मा ने दिया है... और जो चीज परमात्मा की है, वह किसी और की कैसे हो सकती है| इसलिए जो जिसने दिया है, उसके लिए उसी का धन्यवाद करना चाहिए| परमात्मा की शक्ति के अलावा किसी की क्या शक्ति हो सकती |"
भीम की आंखें खुलीं... त्रेता युग की श्रीराम और हनुमान जी की वीर गाथाएं याद आ गईं... प्रेम से, श्रद्धा से भीम की आंखें भी खुल गईं और भावों के इसी प्रवाह में, भीम ने हनुमान जी को समुद्र लांघने के समय पर धारण किए गए विशाल रूप का दर्शन कराने का अनुरोध कर दिया और हुनमान जी ने श्रीराम की कृपा से अपना आकार, वैसा ही बढ़ाया जैसा उन्होंने सौ योजन समुद्र लांघने के समय धारण किया था| यह देख भीम हैरान रह गया| वह कभी हनुमान जी के चरणों में देखता और कभी उनके आकाश छूते मस्तक को... जिसे वह देख ही नहीं पा रहा था|
हनुमान जी ने कहा, "भीम, मेरे इस रूप को तुम देख नहीं पा रहे... लेकिन मैं श्रीराम की कृपा से, इससे भी बड़ा रूप धारण कर सकता हूं|"
भीम ने हाथ जोड़कर सिर झटक दिया और हनुमान जी के चरणों में गिर पड़ा|
भौतिक पद, प्रतिष्ठा और धन का अभिमान कैसा? ये तो कभी भी नष्ट हो सकते हैं| भौतिक पदार्थ, भौतिक सुख ही देते हैं... लेकिन परमात्मा की कृपा तो शाश्वत होती है... जिसे कोई छीन नहीं सकता| चोर चुरा नहीं सकता| आदमी को उसी दायरे में रहना चाहिए, जिसमें परमात्मा रखे... परमात्मा की इच्छा के बिना तो पत्ता भी नहीं हिल सकता| इंसान की जिंदगी का क्या भरोसा... किसी भी मोड़ पर, चार कदम की दूरी पर, खत्म हो सकती है|
अन्य संबंधित कहानियां और कथाएं
दुर्गा और महिषासुर की कहानी
महिषासुर एक शक्तिशाली राक्षस महिषासुर एक शक्तिशाली भैंसा राक्षस था। बचपन में भी महिषासुर समस्त सृष्टि में सबसे शक्तिशाली बनना चाहता था। उसने देवों के प्रति घृणा का पोषण किया और उन्हें हराना...
माता संतोषी केजन्म की कहानी
संतोषी माता एक देवी संतोषी माता को धर्म में एक देवी हैं जो भगवान शंकर की पत्नी ऋद्धि , सिद्धि की पुत्री , कार्तिकेय , अशोकसुन्दरी , अय्यापा , ज्योति और मनसा की भतीजी और शुभ , लाभ की बहन तथा संतोष की...
सकट चौथ व्रत कथा
प्रत्येक माह की चतुर्थी श्रीगणेशजी की पूजा-अर्चना के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। अपनी संतान की मंगलकामना के लिए महिलाएं माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को व्रत रखती है। इसे संकष्टी चतुर्थी,...
भाई-दूज कथा
भगवान सूर्यदेव की पत्नी का नाम छाया था । उसकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ । यमुना अपने भाई यमराज से बडा स्नेह करती थी । वह उससे बराबर निवेदन करती है वह उसके घर आकर भोजन करें । लेकिन यमराज अपने...
गणेश-और-कावेरी
पवित्र नदी कावेरी भारत की प्रमुख नदियों में से एक है और सात सबसे पवित्र नदियों में से एक है। दक्षिण भारत में उन्हें गंगा से भी पवित्र माना जाता है! वह तालकावेरी में कूर्ग के सुरम्य परिवेश के बीच,...
महर्षि भृगु ने भगवान विष्णु को क्यों त्रिदेवों में सर्वश्रेष्ठ माना ?
महर्षि भृगु ब्रह्माजी के मानस पुत्र थे। उनकी पत्नी का नाम ख्याति था जो दक्ष की पुत्री थी। महर्षि भृगु सप्तर्षिमंडल के एक ऋषि हैं। सावन और भाद्रपद में वे भगवान सूर्य के रथ पर सवार रहते हैं।एक बार...
देवयानी की कहानी
शुक्राचार्य की पुत्री : देवयानी असुरों के पुरोहित शुक्राचार्य ने भी असुर नरेश वृषपर्वा को पढ़ाया था। एक दिन शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी और वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा अपनी अन्य सखियों के...
गजानन गणपति : एकदंत
गजानन गणपति : एकदंत किसी भी पूजन कार्य में सबसे पहले गणपति की पूजा की जाती है। भगवान गणेश को गजानन, एकाक्षर, विघ्नहर्ता, एकदंत और कई अन्य नामों से बुलाया जाता है। इन दिनों गणेश उत्सव का त्योहार बड़ी...
राजा विक्रमादित्य पर शनिदेव की साढ़े-साती
एक समय स्वर्गलोक में सबसे बड़ा कौन के प्रश्न को लेकर सभी देवताओं में वाद-विवाद प्रारम्भ हुआ और फिर परस्पर भयंकर युद्ध की स्थिति बन गई। सभी देवता देवराज इंद्र के पास पहुंचे और बोले, हे देवराज! आपको...
रक्षाबंधन की कहानी
रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर बलि राजा के अभिमान को इसी दिन चकानाचूर किया था। इसलिए यह त्योहार 'बलेव' नाम से भी प्रसिद्ध है। महाराष्ट्र...
भगवती तुलसी की कथा
तुलसी से जुड़ी एक कथा बहुत प्रचलित है। श्रीमद देवी भागवत पुराण में इनके अवतरण की दिव्य लीला कथा भी बनाई गई है। एक बार शिव ने अपने तेज को समुद्र में फैंक दिया था। उससे एक महातेजस्वी बालक ने जन्म लिया।...
मां पार्वती की युक्ति
एक बार शिवजी और मां पार्वती भ्रमण पर निकले। उस काल में पृथ्वी पर घोर सूखा पड़ा था। चारों ओर हाहाकार मचा हुआ था। पीने को पानी तक जुटाने में लोगों को कड़ी मेहनत करना पड़ रही थी। ऐसे में शिव-पार्वती...
गंगा जन्म की कथा
ऋषि विश्वामित्र ने इस प्रकार कथा सुनाना आरम्भ किया, "पर्वतराज हिमालय की अत्यंत रूपवती, लावण्यमयी एवं सर्वगुण सम्पन्न दो कन्याएँ थीं। सुमेरु पर्वत की पुत्री मैना इन कन्याओं की माता थीं। हिमालय...
काशी का वाराणसी के रूप में पुनर्जन्म - कथा
यह कथा द्वापरयुग की है जब भगवान श्री कृष्ण के सुदर्शन चक्र ने काशी को जलाकर राख कर दिया था। बाद में यह वाराणसी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यह कथा इस प्रकार हैः-मगध का राजा जरासंध बहुत शक्तिशाली और...
जगरनाथ की कटहल कथा
रघु ने भगवान जगन्नाथ के प्रति मैत्रीपूर्ण प्रेम एक समय रघु दास नाम के भगवान रामचन्द्र के एक महान भक्त थे। वह पुरी में जगन्नाथ मंदिर के सिंह द्वार के पास एक बड़ी छतरी के नीचे रहते थे। एक बार जब वह...
कृष्ण रुक्मिणी विवाह कथा
विदर्भ के राजा भीष्मक की कन्या रूक्मिणी थी, रूक्मिणी के भाई थे रूक्म। रूक्म अपनी बहन की शादी शिशुपाल से करना चाहता था परंतु देवी रूक्मणी अपने मन में श्री कृष्ण को पति मान चुकी थी। अत: देवी रूक्मणी...
जब वरुण ने अपने पुत्र की परीक्षा ली
एक बार वरुण के पुत्र भृगु के मन में परमात्मा को जानने की अभिलाषा जाग्रत हुई। उनके पिता वरुण ब्रम्ह निष्ठ योगी थे। अत: भृगु ने पिता से ही अपनी जिज्ञासा शांत करने का विचार किया। वे अपने पिता के पास...
बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा व्रत, कथा, मंत्र और इतिहास
बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा व्रत :- बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा व्रत अपने आप में एक पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। यह व्रत मां सरस्वती की पूजा और उनकी कृपा के लिए किया जाता है ताकि विद्या, बुद्धि,...
भगवान अयप्पा - विष्णु और शिव के पुत्र
भगवान अयप्पा का जन्म केरल में सबरीमाला, दुनिया में सबसे प्रसिद्ध अयप्पा मंदिर का स्थान है और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से उनकी जाति, पंथ और धर्म की परवाह किए बिना हर साल 50 मिलियन से अधिक भक्तों...
सती अनुसुइया ने ब्रह्मा,विष्णु,महेश को शिशु बनाया
सती अनुसुइया ने ब्रह्मा,विष्णु,महेश को शिशु बनाया सती अनुसुइया महर्षि अत्रि की पत्नी थीं। अत्रि ऋषि ब्रह्मा जी के मानस पुत्र और सप्तऋषियों में से एक थे। अनुसुइया का स्थान भारतवर्ष की सती-साध्वी...
गणेश जी की पौराणिक कथा
एक समय जब माता पार्वती मानसरोवर में स्नान कर रही थी तब उन्होंने स्नान स्थल पर कोई आ न सके इस हेतु अपनी माया से गणेश को जन्म देकर 'बाल गणेश' को पहरा देने के लिए नियुक्त कर दिया।इसी दौरान भगवान शिव उधर...
देवी काली और राक्षस रक्तबीज की कहानी
मंदिर विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में काली पूजा बहुत ऊर्जा के साथ मनाई जाती है। अद्वितीय और चकाचौंध रोशनी वाले भव्य पंडाल बनाए जाते हैं मिट्टी की मूर्तियाँ और मूर्तियाँ हस्तनिर्मित होती...
ब्रह्मांड के भगवान को नापसंद करने का कारण
ब्रह्मांड का भगवान नापसंद करने का कारण विदुर ने पूछा, “शिव इस सृष्टि में सभी सजीव और निर्जीव वस्तुओं के पिता हैं। ऐसा कोई नहीं है जिसे वह नापसंद करता हो। वह शांतिपूर्ण स्वभाव का है और पूरी तरह से...
भगवान गणेश की सवारी चूहा
गणेश और चूहा गजमुखासुर :एक दैत्य बहुत समय पहले गजमुखासुर नाम का एक दैत्य था। असुर का अर्थ होता है राक्षस या दुष्ट आत्मा। वह सुपर पावरफुल बनकर ब्रह्मांड पर राज करना चाहता था। वह भगवान शिव से प्रार्थना...
धनतेरस की कहानी
भारत त्यौहारों का देश है। विभिन्न त्यौहारों पर अलग-अलग पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं ! इसी प्रकार धनतेरस पर भी यमराज की एक कथा बहुत प्रचलित है। कथा कुछ इस प्रकार है।पुराने जमाने में एक राजा हुए थे...
जब भगवान राम और भोलेनाथ के बीच हुआ युद्ध
बात उन दिनों कि है जब श्रीराम का अश्वमेघ यज्ञ चल रहा था ! श्रीराम के अनुज शत्रुघ्न के नेतृत्व में असंख्य वीरों की सेना सारे प्रदेश को विजित करती जा रही थी ! यज्ञ का अश्व प्रदेश प्रदेश जा रहा था ! इस...
कुरु का जन्म
कुरुवंश के प्रथम पुरुष का नाम कुरु था| कुरु बड़े प्रतापी और बड़े तेजस्वी थे| उन्हीं के नाम पर कुरुवंश की शाखाएं निकलीं और विकसित हुईं| एक से एक प्रतापी और तेजस्वी वीर कुरुवंश में पैदा हो चुके हैं|...
कुबेर का घमंड
पौराणिक कथा यह एक पौराणिक कथा है। कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनी थे। एक दिन उन्होंने सोचा कि हमारे पास इतनी संपत्ति है, लेकिन कम ही लोगों को इसकी जानकारी है। इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति का प्रदर्शन...
कुबेर का अहंकार चूर-चूर हो गया
कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनी थे। एक दिन उन्होंने सोचा कि हमारे पास इतनी संपत्ति है, लेकिन कम ही लोगों को इसकी जानकारी है। इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति का प्रदर्शन करने के लिए एक भव्य भोज का आयोजन...
श्रीकृष्ण दौड़े चले आए
अर्जुन ने अपने-आपको श्रीकृष्ण को समर्पित कर दिया था| अर्जुन होता हुआ भी, नहीं था, इसलिए कि उसने जो कुछ किया, अर्जुन के रूप में नहीं, श्रीकृष्ण के सेवक के रूप में किया| सेवक की चिंता स्वामी की चिंता...
क्यों पीपल के वृक्ष के साथ ही शनिदेव के पूजन की परंपरा है ?
त्रेतायुग में एक बार बारिश के अभाव से अकाल पड़ा। तब कौशिक मुनि परिवार के लालन-पालन के लिए अपना गृहस्थान छोड़कर अन्यत्र जाने के लिए अपनी पत्नी और पुत्रों के साथ चल दिए। फिर भी परिवार का भरण-पोषण...
बसंत पंचमी की कथा
सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खास तौर पर मनुष्य योनि की रचना की। अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों आ॓र...
लौहजंघ की कथा
इस पृथ्वी पर भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा नगरी है| वहां रूपणिका नाम की एक वेश्या रहती थी| उसकी मां मकरदंष्ट्रा बड़ी ही कुरूप और कुबड़ी थी| वह कुटनी का कार्य भी करती थी| रूपणिका के पास आने वाले...
श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह
विदर्भ देश के राजा भीष्मक के पांच पुत्र और एक पुत्री थी| पुत्री का नाम रुक्मिणी था जो समकालीन राजकुमारियों में सर्वाधिक सुंदर और सुशील थी| उससे विवाह करने के लिए अनेक राजा और राजकुमार आए दिन विदर्भ...
लक्ष्मी जी का वास
एक बार की बात है, राजा बलि समय बिताने के लिए एकान्त स्थान पर गधे के रूप में छिपे हुए थे। देवराज इन्द्र उनसे मिलने के लिए उन्हें ढूँढ रहे थे। एक दिन इन्द्र ने उन्हें खोज निकाला और उनके छिपने का कारण...
पौष माह का दूसरा प्रदोष व्रत :शुक्ल प्रदोष व्रत
शुक्ल प्रदोष व्रत, जिसे प्रदोषम भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में भगवान शिव को समर्पित एक शुभ दिन है। प्रदोष व्रत प्रत्येक चंद्र पखवाड़े के 13वें दिन पड़ता है, चंद्रमा के बढ़ने (शुक्ल पक्ष) और घटने (कृष्ण...
दुस्यंत शकुंतला की कथा
एक बार हस्तिनापुर नरेश दुष्यंत आखेट खेलने वन में गये। जिस वन में वे शिकार के लिये गये थे उसी वन में कण्व ऋषि का आश्रम था। कण्व ऋषि के दर्शन करने के लिये महाराज दुष्यंत उनके आश्रम पहुँच गये। पुकार...
श्रावण मास:तिथिया, पूजा विधि और महत्व
सावन सोमवार का अर्थ होता है कि वह सोमवार जो सावन महीने में आता है। सावन महीना हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है और इस महीने में सोमवार का विशेष महत्व है। इस महीने में लोग भगवान शिव की...
भस्मासुर की कहानी
भारतीय पौराणिक कथा मूर्ख भस्मासुर एक असुर या दानव के बारे में है जो सबसे शक्तिशाली बनना चाहता था। भस्मासुर की कहानी राक्षस भस्मासुर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो घोर तपस्या के माध्यम से भगवान शिव...
देवउठनी एकादशी व्रत कथा
कार्तिक मास भगवान विष्णु का सबसे प्रिय महीना है। इस महीने में देवउठनी एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है और व्रत कथा का पाठ किया जाता है। देवउठनी एकादशी...
विषपान करते भगवान शिव की कथा
भगवान शिव हलाहल (जहर) पीकर ब्रह्मांड को बचाते हैं दैत्यों और देवताओं के बीच एक युद्ध में, देवताओं ने अपना सारा ऐश्वर्य और पद खो दिया। देवताओं ने तब भगवान ब्रह्मा से संपर्क किया, जो उन्हें भगवान...
भगवान गणेश और कार्तिकेय के बीच बुद्धिमता का परिचय
कार्तिकेय बनाम गणेश हमारे परिवारों में सहोदर प्रतिद्वंद्विता काफी आम है, जो साहित्य हम पढ़ते हैं और फिल्में जो हमारा मनोरंजन करती हैं। यहाँ तक कि सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान देवता भी इससे प्रतिरक्षित...
आस्था और पवित्रता का त्योहार-सकट चतुर्थी: भक्ति से बाधाओं को दूर करना
"सकट चतुर्थी", जिसे "संकष्टी चतुर्थी" भी कहा जाता है, भगवान गणेश को समर्पित एक हिंदू त्योहार है। यह प्रत्येक चंद्र माह में कृष्ण पक्ष (चंद्रमा के घटते चरण) के चौथे दिन (चतुर्थी) को मनाया जाता है। हालाँकि,...
धनतेरस
प्राचीन काल में एक राजा थे। उनके कोई संतान नहीं थी। अत्याधिक पूजा-अर्चना व मन्नतों के पश्चात दैव योग से उन्हें पुत्र प्राप्ति हुई। ज्योंतिषियों ने बालक की कुण्डली बनाते समय भविष्यवाणी की कि इस...
भगवान ब्रह्मा का कुल
ब्रह्मा हिन्दू धर्म में एक प्रमुख देवता हैं। वे हिन्दुओं के तीन प्रमुख देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) में से एक हैं। ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता कहा जाता है। सृष्टि का रचयिता से आशय सिर्फ जीवों...
नवरात्र की कथा
प्राचीन समय में राजा सुरथ नाम के राजा थे, राजा प्रजा की रक्षा में उदासीन रहने लगे थे,परिणाम स्वरूप पड़ोसी राजा ने उस पर चढाई कर दी,सुरथ की सेना भी शत्रु से मिल गयी थी,परिणामस्वरूप राजा सुरथ की हार...
वेद व्यास जी का जन्म
राजा उपरिचर एक महान प्रतापी राजा था | वह बड़ा धर्मात्मा और बड़ा सत्यव्रती था| उसने अपने तप से देवराज इंद्र को प्रसन्न करके एक विमान और न सूखने वाली सुंदर माला प्राप्त की थी | वह माला धारण करके, विमान...
मोक्षदा एकादशी और परम मुक्ति का मार्ग
मोक्षदा एकादशी, जिसे गीता जयंती के नाम से भी जाना जाता है, यह भगवान कृष्ण और भगवद गीता को समर्पित एक शुभ दिन माना जाता है। भगवद गीता, जिसे अक्सर गीता भी कहा जाता है, एक पवित्र हिंदू धर्मग्रंथ है...
भगवान विष्णु और नारद जी
एक बार नारद मुनि जी ने भगवान विष्णु जी से पूछा, हे भगवन! आप का इस समय सब से प्रिय भक्त कौन है?, अब विष्णु तो भगवान है, सो झट से समझ गये अपने भक्त नारद मुनि की बात, ओर मुस्कुरा कर बोले! मेरा सब से प्रिय...
दैवीय शक्ति का अनावरण: बड़ा मंगल की तिथियां, महत्व और पूजा विधि
देशभर में हनुमान भक्त ज्येष्ठ माह के बड़ा मंगल को धूमधाम से मनाते हैं। खासकर उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में इसकी अनोखी खूबसूरती देखने को मिलती है। क्योंकि बड़ा मंगल को त्योहार के रूप में मनाने की...
