नवरात्रि का कलश स्थापना: प्राचीन परंपरा और धार्मिक उत्सव

नवरात्रि का कलश स्थापना: प्राचीन परंपरा और धार्मिक उत्सव

नवरात्रि:-

भारतीय हिंदू कैलेंडर के अनुसार वर्षभर मनाया जाने वाला एक प्रमुख धार्मिक उत्सव है। इस उत्सव का अर्थ होता है "नौ रातें"। नवरात्रि नौ दिनों तक चलती है, जिसमें देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है।

नवरात्रि के दौरान, लोग धार्मिक उपासना, पूजा, और भक्ति करते हैं। प्रत्येक दिन को एक विशेष देवी के रूप में समर्पित किया जाता है, जैसे कि शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, और सिद्धिदात्री।
नवरात्रि के दौरान, लोग व्रत रखते हैं, पूजा और आराधना करते हैं, और माता की आरती और भजन गाते हैं। इसके अलावा, रास गरबा और दंडिया रास जैसे लोकनृत्य भी मनाए जाते हैं, जो लोगों को आनंदित करने का माध्यम प्रदान करते हैं।
नवरात्रि का पर्व धर्म, संस्कृति, और समाज के लिए महत्वपूर्ण है और इसे विभिन्न परंपराओं में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह उत्सव भारतीय समाज में सामाजिक एकता, धार्मिक अनुष्ठान, और परंपरागत मूल्यों की अवगाहना का माध्यम भी है।

चैत्र नवरात्रि:-

हिंदी पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के आधारित होती है और चैत्र नवरात्रि के रूप में भी जानी जाती है। यह नवरात्रि वसंत ऋतु में मनाई जाती है, जब प्रकृति नवीनता और प्राचीनता की ऊर्जा से परिपूर्ण होती है।
चैत्र नवरात्रि के दौरान भी मां दुर्गा की उपासना और पूजा की जाती है, लेकिन इसका महत्व और प्रभाव अन्य नवरात्रियों से कम हो सकता है। चैत्र नवरात्रि का पर्व भारत के उत्तरी भागों में विशेष रूप से मनाया जाता है, जैसे कि चैत्र नवरात्रि का आयोजन मैथिल लोगों के बड़े ही धूमधाम से होता है। इसके दौरान विभिन्न आयोजन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है और लोग मां दुर्गा की आराधना और पूजा में लगे रहते हैं।
चैत्र नवरात्रि के दौरान लोग विशेष रूप से नवदुर्गा के नौ रूपों की पूजा और आराधना करते हैं, जो कि नवदुर्गा की नौ रूपों को संदर्भित करते हैं और उनकी शक्तियों की आराधना करते हैं। इस नवरात्रि के अवसर पर लोग व्रत रखते हैं और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं।

नवरात्रि में कलश रखने का शुभ मुहूर्त :-

इस बार 9 अप्रैल 2024 से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है, जो कि 17 अप्रैल तक रहेगी। नवरात्रि के नौ दिन बहुत ही पावन माने जाते हैं। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, लेकिन इस बार नवरात्रि में मां दुर्गा के आगमन की सवारी अनहोनी की ओर इशारा कर रही है। चैत्र नवरात्रि की शुरुआत चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। साल 2024 में यह तिथि मंगलवार 9 अप्रैल 2024 को पड़ रही है। इसी दिन घट स्थापना होगी और मां दुर्गा की 9 दिवसीय पूजा शुरू होगी। इस साल घटस्थापना मुहूर्त की अवधि 4 घंटे 11 मिनट की है और सुबह 6.05 बजे से 10.16 बजे के बीच कलश स्थापना की जा सकेगी।

नवरात्रि कलश घर में कैसे रखें:-

कलश को जल से भरें और कलश में अंत में 5 4 आम के पत्ते लगाकर फैला दें। कलश के ऊपर नारियल रखें और नारियल को लाल कपड़े के ताजे टुकड़े से लपेट दें। इस नारियल पर एक माला इस प्रकार रखें कि वह फिसले नहीं। - अब कलश को लकड़ी के तख्ते पर रखे तवे पर रखें.

कलश स्थापना मंत्र

ओम आ जिघ्र कलशं मह्या त्वा विशन्त्विन्दव:। पुनरूर्जा नि वर्तस्व सा नः सहस्रं धुक्ष्वोरुधारा पयस्वती पुनर्मा विशतादयिः।। ओम वरुणस्योत्तम्भनमसि वरुणस्य स्काभसर्जनी स्थो वरुणस्य ऋतसदन्यसि वरुणस्य ऋतसदनमसि वरुणस्य ऋतसदनमा सीद।।

कलश स्थापना की प्रक्रिया :-

कलश की तैयारी: सबसे पहले एक कलश तैयार किया जाता है। यह एक पात्र होता है जिसे पूर्णतया साफ किया जाता है।
पूजा स्थल की तैयारी: पूजा स्थल को सजाने के लिए एक विशेष स्थान चुना जाता है। इसके बाद, उस स्थान को सजाने के लिए सजावटी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।
कलश के भरना: कलश को जल से भरा जाता है। इसके बाद, उसमें नरियल, मोली, चौकी, सुपारी, अदरक, लावंग, अखरोट, बेतेलनट, सुपारी, सिक्का, नींबू, इलायची, करवा चौथ का बर्तन, सिन्दूर, रोली, अपनी चूड़ी आदि रखे जाते हैं।
कलश को स्थापित करना: कलश को पूजा स्थल पर स्थापित किया जाता है। इसके बाद, पूजा की अनुष्ठान किया जाता है जिसमें मंत्रों का उच्चारण, आरती, और प्रार्थनाएँ शामिल होती हैं।
कलश का पूजन: कलश को समर्पित करने के बाद, उसकी पूजा की जाती है। इस पूजा में विभिन्न धार्मिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।
कलश का विसर्जन: नवरात्रि के अंत में, कलश का विसर्जन किया जाता है। इसका अर्थ होता है कि ईश्वरीय शक्तियों का आशीर्वाद स्थायी है और हमेशा हमारे साथ है
नवरात्रि के कलश स्थापना में कुछ गलतियों से बचने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
पात्र की चयन: कलश स्थापना के लिए पात्र का चयन करते समय एक पवित्र और शुद्ध पात्र का चयन करें। उसे पहले से ही साफ करें और उसमें पानी डालें।
पूजा सामग्री की सावधानी: कलश में डालने वाली सभी पूजनीय सामग्री को ध्यानपूर्वक चयन करें और उसे उचित रूप से डालें। यह सुनिश्चित करेगा कि पूजा में कोई गलती न हो।
स्थान का चयन: कलश को स्थापित करने के लिए एक उचित और शुद्ध स्थान का चयन करें। यहाँ पर विशेष ध्यान दें कि स्थान साफ और पवित्र हो, जो पूजा के लिए उपयुक्त हो।
व्रत और उपासना का पालन: कलश स्थापना के बाद, आपको नवरात्रि के दौरान व्रत और उपासना का पालन करना चाहिए। इससे आप मां दुर्गा की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
कलश का विसर्जन: नवरात्रि के अंत में, कलश का विसर्जन करने से पहले ध्यानपूर्वक इसे अद्यतन करें और फिर विसर्जित करें। यह सुनिश्चित करेगा कि पूरे उत्सव का अच्छी तरह से निष्पन्न हो।
ध्यान दें कि नवरात्रि के दौरान किए जाने वाले कार्यों को श्रद्धा और प्रेम से किया जाना चाहिए। इससे आपके कार्य में सफलता मिलेगी और आपकी पूजा स्वीकार्य होगी।

अन्य संबंधित कहानियां और कथाएं

#

गणेश जी का विवाह किस से और कैसे हुआ?

गणेश जी भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र गणेश जी की पूजा सभी भगवानों से पहले की जाती है | प्रत्येक शुभ कार्य करने से पहले इन्हे ही पूजा जाता है| गणेश जी को गणपति के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि...

#

माँ वैष्णो देवी

आपने जम्मू की वैष्णो माता का नाम अवश्य सुना होगा। आज हम आपको इन्हीं की कहानी सुना रहे हैं, जो बरसों से जम्मू-कश्मीर में सुनी व सुनाई जाती है। कटरा के करीब हन्साली ग्राम में माता के परम भक्त श्रीधर...

#

नागमाता मनसा देवी

मनसा माता भगवान शिव की पुत्री हैं। उन्होंने तपस्या के द्वारा अपना शरीर सुखा दिया जिसकी वजह से उनका नाम जरत्कारु पड़ा। पिता शिव से उन्हें नागलोक का साम्राज्य मिला। मनसा देवी नागों की माता हैं।...

#

श्रावण मास:तिथिया, पूजा विधि और महत्व

सावन सोमवार का अर्थ होता है कि वह सोमवार जो सावन महीने में आता है। सावन महीना हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है और इस महीने में सोमवार का विशेष महत्व है। इस महीने में लोग भगवान शिव की...

#

जगन्नाथ रथ यात्रा: भक्ति और एकता की यात्रा

जगन्नाथ रथयात्रा हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो पुरी, उड़ीसा में हर साल होता है। इस त्योहार में, भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की मूर्तियाँ उनकी मंदिर से निकालकर उनके विशाल...

#

रामायण और महाभारत में परशुराम से सम्बंधित कथाएं

ब्रह्मवैवर्त पुराण में कथानक मिलता है कि कैलाश स्थित भगवान शंकर के अन्त:पुर में प्रवेश करते समय गणेश जी द्वारा रोके जाने पर परशुराम ने बलपूर्वक अन्दर जाने की चेष्ठा की। तब गणपति ने उन्हें स्तम्भित...

#

धनतेरस की कहानी

भारत त्यौहारों का देश है। विभिन्न त्यौहारों पर अलग-अलग पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं ! इसी प्रकार धनतेरस पर भी यमराज की एक कथा बहुत प्रचलित है। कथा कुछ इस प्रकार है।पुराने जमाने में एक राजा हुए थे...

#

हनुमान ने तोड़ा था सत्यभामा,सुदर्शन चक्र और गरुड़ तीनो का घमंड

हनुमान ने तोड़ा था सत्यभामा,सुदर्शन चक्र और गरुड़ तीनो का घमंड श्रीकृष्ण भगवान द्वारका में रानी सत्यभामा के साथ सिंहासन पर विराजमान थे। निकट ही गरूड़ और सुदर्शन चक्र भी बैठे हुए थे। तीनों के...

#

दैवीय शक्ति का अनावरण: बड़ा मंगल की तिथियां, महत्व और पूजा विधि

देशभर में हनुमान भक्त ज्येष्ठ माह के बड़ा मंगल को धूमधाम से मनाते हैं। खासकर उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में इसकी अनोखी खूबसूरती देखने को मिलती है। क्योंकि बड़ा मंगल को त्योहार के रूप में मनाने की...

#

श्रीकृष्ण दौड़े चले आए

अर्जुन ने अपने-आपको श्रीकृष्ण को समर्पित कर दिया था| अर्जुन होता हुआ भी, नहीं था, इसलिए कि उसने जो कुछ किया, अर्जुन के रूप में नहीं, श्रीकृष्ण के सेवक के रूप में किया| सेवक की चिंता स्वामी की चिंता...

#

गणेश जी की जन्म की रोचक कहानी

रोचक कहानी उन्हें दक्षिण भारत में कार्तिकेय स्वामी के बड़े भाई के रूप में जाना जाता है। एक बार जब देवी पार्वती स्नान करने गईं तो उन्होंने हल्दी का लेप लिया और उससे एक मानव रूप बनाया। उसने फिर इस...

#

कुबेर का घमंड

पौराणिक कथा यह एक पौराणिक कथा है। कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनी थे। एक दिन उन्होंने सोचा कि हमारे पास इतनी संपत्ति है, लेकिन कम ही लोगों को इसकी जानकारी है। इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति का प्रदर्शन...

#

त्रिपुरासुर का वध

भयंकर असुर: त्रिपुरासुर असुर बाली की कृपा से त्रिपुरासुर एक भयंकर असुर बन गया था। त्रिपुरासुर के वध की कहानी महाभारत के कर्णपर्व में व्यापक रूप से वर्णित है। भगवान कार्तिकेय द्वारा तारकासुर...

#

माता संतोषी केजन्म की कहानी

संतोषी माता एक देवी संतोषी माता को धर्म में एक देवी हैं जो भगवान शंकर की पत्नी ऋद्धि , सिद्धि की पुत्री , कार्तिकेय , अशोकसुन्दरी , अय्यापा , ज्योति और मनसा की भतीजी और शुभ , लाभ की बहन तथा संतोष की...

#

उत्सव ऊर्जा का: मकर संक्रांति का रंगीन महत्व

मकर संक्रांति एक हिंदू त्योहार है जो भारत और नेपाल के विभिन्न हिस्सों में मनाया जाता है। यह सूर्य के मकर राशि में संक्रमण का प्रतीक है और शीतकालीन संक्रांति के अंत का प्रतीक है। यह त्यौहार आमतौर...

#

वैशाख पूर्णिमा: महत्व, उत्सव और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि

वैशाख पूर्णिमा को हिंदी में "वैशाख पूर्णिमा" या "बुद्ध पूर्णिमा" कहा जाता है। यह हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार है जो वैशाख माह के पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म, महापरिनिर्वाण,...

#

रक्षाबंधन की कहानी

रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर बलि राजा के अभिमान को इसी दिन चकानाचूर किया था। इसलिए यह त्योहार 'बलेव' नाम से भी प्रसिद्ध है। महाराष्ट्र...

#

मोक्षदा एकादशी और परम मुक्ति का मार्ग

मोक्षदा एकादशी, जिसे गीता जयंती के नाम से भी जाना जाता है, यह भगवान कृष्ण और भगवद गीता को समर्पित एक शुभ दिन माना जाता है। भगवद गीता, जिसे अक्सर गीता भी कहा जाता है, एक पवित्र हिंदू धर्मग्रंथ है...

#

विषपान करते भगवान शिव की कथा

भगवान शिव हलाहल (जहर) पीकर ब्रह्मांड को बचाते हैं दैत्यों और देवताओं के बीच एक युद्ध में, देवताओं ने अपना सारा ऐश्वर्य और पद खो दिया। देवताओं ने तब भगवान ब्रह्मा से संपर्क किया, जो उन्हें भगवान...

#

विजया एकादशी की कथा: महाधन और भगवान की माया

विजया एकादशी, हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है। यह एकादशी फागुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी होती है, जो भारतीय हिन्दू पंचांग के अनुसार फरवरी-मार्च के महीने में पड़ता है। यह एकादशी...

#

दुर्गा और महिषासुर की कहानी

महिषासुर एक शक्तिशाली राक्षस महिषासुर एक शक्तिशाली भैंसा राक्षस था। बचपन में भी महिषासुर समस्त सृष्टि में सबसे शक्तिशाली बनना चाहता था। उसने देवों के प्रति घृणा का पोषण किया और उन्हें हराना...

#

जब हनुमान ने सूर्य को खाया

सूर्य को खाने वाले हनुमान की कहानी बच्चों के बीच बहुत लोकप्रिय है। यह हिंदू शास्त्रों में भी एक महत्वपूर्ण घटना है जिसके परिणामस्वरूप हनुमान को कई वरदान प्राप्त हुए। तो क्या सच में हनुमान ने...

#

ब्रह्मांड के भगवान को नापसंद करने का कारण

ब्रह्मांड का भगवान नापसंद करने का कारण विदुर ने पूछा, “शिव इस सृष्टि में सभी सजीव और निर्जीव वस्तुओं के पिता हैं। ऐसा कोई नहीं है जिसे वह नापसंद करता हो। वह शांतिपूर्ण स्वभाव का है और पूरी तरह से...

#

भस्मासुर की कहानी

भारतीय पौराणिक कथा मूर्ख भस्मासुर एक असुर या दानव के बारे में है जो सबसे शक्तिशाली बनना चाहता था। भस्मासुर की कहानी राक्षस भस्मासुर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो घोर तपस्या के माध्यम से भगवान शिव...

#

भाई-दूज कथा

भगवान सूर्यदेव की पत्नी का नाम छाया था । उसकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ । यमुना अपने भाई यमराज से बडा स्नेह करती थी । वह उससे बराबर निवेदन करती है वह उसके घर आकर भोजन करें । लेकिन यमराज अपने...

#

कन्नप्पा नयनार की कहानी

थिन्नन :प्रतिष्ठित तीरंदाज नागान पोथापी के जंगल क्षेत्र में एक आदिवासी प्रमुख थे। उनके और उनकी पत्नी थथथाई के बहुत लंबे समय से बच्चे नहीं थे और वे भगवान कार्तिकेय (शिव के पुत्र) से प्रार्थना कर...

#

लौहजंघ की कथा

इस पृथ्वी पर भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा नगरी है| वहां रूपणिका नाम की एक वेश्या रहती थी| उसकी मां मकरदंष्ट्रा बड़ी ही कुरूप और कुबड़ी थी| वह कुटनी का कार्य भी करती थी| रूपणिका के पास आने वाले...

#

चन्द्रमा को शाप से मुक्ति

चंद्रमा की सुंदरता पर राजा दक्ष की सत्ताइस पुत्रियां मोहित हो गईं ! वे सभी चंद्रमा से विवाह करना चाहती थीं ! दक्ष ने समझाया सगी बहनों का एक ही पति होने से दांपत्य जीवन में बाधा आएगी लेकिन चंद्रमा...

#

भगवान गणेश और कार्तिकेय के बीच बुद्धिमता का परिचय

कार्तिकेय बनाम गणेश हमारे परिवारों में सहोदर प्रतिद्वंद्विता काफी आम है, जो साहित्य हम पढ़ते हैं और फिल्में जो हमारा मनोरंजन करती हैं। यहाँ तक कि सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान देवता भी इससे प्रतिरक्षित...

#

नलकुबेर ने रावण को श्राप दिया

"यह कैलाश पर था, सूर्य अस्ताचल रेंज के पीछे वापस आ गया था, कि दशग्रीव, जोश से भरे हुए थे, उन्होंने सेना को छावनी देने के लिए चुना। “जब निर्मल चन्द्रमा अपने समान तेज के साथ पर्वत पर उदित हुआ, तो विविध...

#

जब ठगे गए गणेश जी

गणेश जी विघ्न विनाशक व शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं। अगर कोई सच्चे मन से गणेश जी की वंदना करता है, तो गौरी नंदन तुरंत प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद प्रदान करते हैं। वैसे भी गणेश जी जिस स्थान पर...

#

भगवान् विष्णु का स्वप्न

एक बार भगवान नारायण वैकुण्ठलोक में सोये हुए थे। उन्होंने स्वप्न में देखा कि करोड़ों चन्द्रमाओं की कांतिवाले, त्रिशूल-डमरू-धारी, स्वर्णाभरण-भूषित, सुरेन्द्र-वन्दित, सिद्धिसेवित त्रिलोचन भगवान...

#

गणेश-और-कावेरी

पवित्र नदी कावेरी भारत की प्रमुख नदियों में से एक है और सात सबसे पवित्र नदियों में से एक है। दक्षिण भारत में उन्हें गंगा से भी पवित्र माना जाता है! वह तालकावेरी में कूर्ग के सुरम्य परिवेश के बीच,...

#

भगवान ब्रह्मा का कुल

ब्रह्मा हिन्दू धर्म में एक प्रमुख देवता हैं। वे हिन्दुओं के तीन प्रमुख देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) में से एक हैं। ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता कहा जाता है। सृष्टि का रचयिता से आशय सिर्फ जीवों...

#

दुस्यंत शकुंतला की कथा

एक बार हस्तिनापुर नरेश दुष्यंत आखेट खेलने वन में गये। जिस वन में वे शिकार के लिये गये थे उसी वन में कण्व ऋषि का आश्रम था। कण्व ऋषि के दर्शन करने के लिये महाराज दुष्यंत उनके आश्रम पहुँच गये। पुकार...

#

सांस्कृतिक पर्व:बसंत पंचमी 2024

बसंत पंचमी एक हिन्दी पर्व है जो वसंत ऋतु के आगमन को मनाने के लिए मनाया जाता है, और इसे सरस्वती पूजा के रूप में भी जाना जाता है। यह पर्व हिन्दू कैलेंडर के माघ मास के पंचमी तिथि को मनाया जाता है, जो वसंत...

#

नवरात्र की कथा

प्राचीन समय में राजा सुरथ नाम के राजा थे, राजा प्रजा की रक्षा में उदासीन रहने लगे थे,परिणाम स्वरूप पड़ोसी राजा ने उस पर चढाई कर दी,सुरथ की सेना भी शत्रु से मिल गयी थी,परिणामस्वरूप राजा सुरथ की हार...

#

कुरु का जन्म

कुरुवंश के प्रथम पुरुष का नाम कुरु था| कुरु बड़े प्रतापी और बड़े तेजस्वी थे| उन्हीं के नाम पर कुरुवंश की शाखाएं निकलीं और विकसित हुईं| एक से एक प्रतापी और तेजस्वी वीर कुरुवंश में पैदा हो चुके हैं|...

#

शिव विवाह

सती के विरह में शंकरजी की दयनीय दशा हो गई। वे हर पल सती का ही ध्यान करते रहते और उन्हीं की चर्चा में व्यस्त रहते। उधर सती ने भी शरीर का त्याग करते समय संकल्प किया था कि मैं राजा हिमालय के यहाँ जन्म...

#

खरमास माह से जुड़ी जानकारी: खराब दिनों में क्यों करते हैं इनकी गिनती

हिंदू धर्म में खरमास का विशेष महत्व बताया गया है। इसे मलमास भी कहा जाता है और इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है क्योंकि खरमास की अवधि को अशुभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस साल...

#

पुत्रदा एकादशी: पौष मास के कृष्ण पक्ष की विशेष व्रत कथा और आरती

पौष पुत्रदा एकादशी, जिसे दुर्मुखी एकादशी भी कहा जाता है, हिन्दू कैलेंडर के मास 'पौष' में आने वाली एकादशी है। इस तिथि को विशेष रूप से विष्णु भगवान की पूजा की जाती है और भक्तों के लिए यह एक महत्वपूर्ण...

#

जब हनुमान जी ने तोडा भीम का अहंकार

भीम को यह अभिमान हो गया था कि संसार में मुझसे अधिक बलवान कोई और नहीं है| सौ हाथियों का बल है उसमें, उसे कोई परास्त नहीं कर सकता... और भगवान अपने सेवक में किसी भी प्रकार का अभिमान रहने नहीं देते| इसलिए...

#

गणगौर कथा

एक बार भगवान शंकर पार्वती जी एवं नारदजी के साथ भ्रमण हेतु चल दिए । वे चलते - चलते चैत्र शुक्ल तृतीया को एक गाँव में पहुचे । उनका आना सुनकर ग्राम की निर्धन स्त्रियाँ उनके स्वागत के लिए थालियो में...

#

गणेश का जन्म

गणेश का जन्म एक दिन माता पार्वती घर में कैलाश पर्वत पर स्नान करने की तैयारी कर रही थीं। जैसा कि वह परेशान नहीं होना चाहती थी, उसने अपने पति शिव के बैल नंदी से दरवाजे की रक्षा करने और किसी को भी पास...

#

महर्षि भृगु ने भगवान विष्णु को क्यों त्रिदेवों में सर्वश्रेष्ठ माना ?

महर्षि भृगु ब्रह्माजी के मानस पुत्र थे। उनकी पत्नी का नाम ख्याति था जो दक्ष की पुत्री थी। महर्षि भृगु सप्तर्षिमंडल के एक ऋषि हैं। सावन और भाद्रपद में वे भगवान सूर्य के रथ पर सवार रहते हैं।एक बार...

#

धनतेरस

प्राचीन काल में एक राजा थे। उनके कोई संतान नहीं थी। अत्याधिक पूजा-अर्चना व मन्नतों के पश्चात दैव योग से उन्हें पुत्र प्राप्ति हुई। ज्योंतिषियों ने बालक की कुण्डली बनाते समय भविष्यवाणी की कि इस...

#

भगवान गणेश की सवारी चूहा

गणेश और चूहा गजमुखासुर :एक दैत्य बहुत समय पहले गजमुखासुर नाम का एक दैत्य था। असुर का अर्थ होता है राक्षस या दुष्ट आत्मा। वह सुपर पावरफुल बनकर ब्रह्मांड पर राज करना चाहता था। वह भगवान शिव से प्रार्थना...

#

सकट चौथ व्रत कथा

प्रत्येक माह की चतुर्थी श्रीगणेशजी की पूजा-अर्चना के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। अपनी संतान की मंगलकामना के लिए महिलाएं माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को व्रत रखती है। इसे संकष्टी चतुर्थी,...

#

मां पार्वती की युक्ति

एक बार शिवजी और मां पार्वती भ्रमण पर निकले। उस काल में पृथ्वी पर घोर सूखा पड़ा था। चारों ओर हाहाकार मचा हुआ था। पीने को पानी तक जुटाने में लोगों को कड़ी मेहनत करना पड़ रही थी। ऐसे में शिव-पार्वती...

#

कुबेर का अहंकार चूर-चूर हो गया

कुबेर तीनों लोकों में सबसे धनी थे। एक दिन उन्होंने सोचा कि हमारे पास इतनी संपत्ति है, लेकिन कम ही लोगों को इसकी जानकारी है। इसलिए उन्होंने अपनी संपत्ति का प्रदर्शन करने के लिए एक भव्य भोज का आयोजन...