होलिका का पूजन क्यों?
लोगों के मन में एक प्रश्न रहता है कि जिस होलिका ने प्रहलाद जैसे प्रभु भक्त को जलाने का प्रयत्न किया, उसका हजारों वर्षों से हम पूजन किसलिए करते हैं? होलिका-पूजन के पीछे एक बात है। जिस दिन होलिका प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठने वाली थी, उस दिन नगर के सभी लोगों ने घर-घर में अग्नि प्रज्वलित कर प्रहलाद की रक्षा करने के लिए अग्निदेव से प्रार्थना की थी। लोकहृदय को प्रहलाद ने कैसे जीत लिया था, यह बात इस घटना में प्रतिबिम्बित होती है।
अग्निदेव ने लोगों के अंतःकरण की प्रार्थना को स्वीकार किया और लोगों की इच्छा के अनुसार ही हुआ। होलिका नष्ट हो गई और अग्नि की कसौटी में से पार उतरा हुआ प्रहलाद नरश्रेष्ठ बन गया। प्रहलाद को बचाने की प्रार्थना के रूप में प्रारंभ हुई घर-घर की अग्नि पूजा ने कालक्रमानुसार सामुदायिक पूजा का रूप लिया और उससे ही गली-गली में होलिका की पूजा प्रारंभ हुई।
अन्य संबंधित कहानियां और कथाएं
गणेश-और-कावेरी
पवित्र नदी कावेरी भारत की प्रमुख नदियों में से एक है और सात सबसे पवित्र नदियों में से एक है। दक्षिण भारत में उन्हें गंगा से भी पवित्र माना जाता है! वह तालकावेरी में कूर्ग के सुरम्य परिवेश के बीच,...
जगरनाथ की कटहल कथा
रघु ने भगवान जगन्नाथ के प्रति मैत्रीपूर्ण प्रेम एक समय रघु दास नाम के भगवान रामचन्द्र के एक महान भक्त थे। वह पुरी में जगन्नाथ मंदिर के सिंह द्वार के पास एक बड़ी छतरी के नीचे रहते थे। एक बार जब वह...
देवउठनी एकादशी व्रत कथा
कार्तिक मास भगवान विष्णु का सबसे प्रिय महीना है। इस महीने में देवउठनी एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है और व्रत कथा का पाठ किया जाता है। देवउठनी एकादशी...
गणेश जी की पौराणिक कथा
एक समय जब माता पार्वती मानसरोवर में स्नान कर रही थी तब उन्होंने स्नान स्थल पर कोई आ न सके इस हेतु अपनी माया से गणेश को जन्म देकर 'बाल गणेश' को पहरा देने के लिए नियुक्त कर दिया।इसी दौरान भगवान शिव उधर...
राधा - कृष्ण
सतयुग और त्रेता युग बीतने के बाद जब द्वापर युग आया तो पृथ्वी पर झूठ, अन्याय, असत्य, अनाचार और अत्याचार होने लगे और फिर प्रतिदिन उनकी अधिकता में वृद्धि होती चली गई| अधर्म के भार से पृथ्वी दुखित हो...
गजानन गणपति : एकदंत
गजानन गणपति : एकदंत किसी भी पूजन कार्य में सबसे पहले गणपति की पूजा की जाती है। भगवान गणेश को गजानन, एकाक्षर, विघ्नहर्ता, एकदंत और कई अन्य नामों से बुलाया जाता है। इन दिनों गणेश उत्सव का त्योहार बड़ी...
हनुमान ने तोड़ा था सत्यभामा,सुदर्शन चक्र और गरुड़ तीनो का घमंड
हनुमान ने तोड़ा था सत्यभामा,सुदर्शन चक्र और गरुड़ तीनो का घमंड श्रीकृष्ण भगवान द्वारका में रानी सत्यभामा के साथ सिंहासन पर विराजमान थे। निकट ही गरूड़ और सुदर्शन चक्र भी बैठे हुए थे। तीनों के...
गणगौर कथा
एक बार भगवान शंकर पार्वती जी एवं नारदजी के साथ भ्रमण हेतु चल दिए । वे चलते - चलते चैत्र शुक्ल तृतीया को एक गाँव में पहुचे । उनका आना सुनकर ग्राम की निर्धन स्त्रियाँ उनके स्वागत के लिए थालियो में...
उत्सव ऊर्जा का: मकर संक्रांति का रंगीन महत्व
मकर संक्रांति एक हिंदू त्योहार है जो भारत और नेपाल के विभिन्न हिस्सों में मनाया जाता है। यह सूर्य के मकर राशि में संक्रमण का प्रतीक है और शीतकालीन संक्रांति के अंत का प्रतीक है। यह त्यौहार आमतौर...
शिव और देवी गंगा की कहानी
शिव और देवी गंगा की कहानी देवी गंगा को अपने जटाओं में धरती पर लाते हुए भगवान शिव की कांस्य प्रतिमा भगवान शिव की अधिकांश छवियां और मूर्तियां उनके जटाओं से बहती गंगा नदी को दर्शाती हैं। हिंदू आइकनोग्राफी...
कुरु का जन्म
कुरुवंश के प्रथम पुरुष का नाम कुरु था| कुरु बड़े प्रतापी और बड़े तेजस्वी थे| उन्हीं के नाम पर कुरुवंश की शाखाएं निकलीं और विकसित हुईं| एक से एक प्रतापी और तेजस्वी वीर कुरुवंश में पैदा हो चुके हैं|...
भगवान शनि देव का जन्म, विशेषता और मंत्र
संपूर्ण सौरमंडल के अधिपति-भगवान सूर्य भगवान सूर्य इस संपूर्ण सौरमंडल के अधिपति हैं। उनका विवाह भगवान विश्वकर्मा की पुत्री स्वर्णा से हुआ था। अपनी गर्मी सहन करने में असमर्थ, स्वर्णा ने एक बार...
जब हनुमान ने सूर्य को खाया
सूर्य को खाने वाले हनुमान की कहानी बच्चों के बीच बहुत लोकप्रिय है। यह हिंदू शास्त्रों में भी एक महत्वपूर्ण घटना है जिसके परिणामस्वरूप हनुमान को कई वरदान प्राप्त हुए। तो क्या सच में हनुमान ने...
जगन्नाथ रथ यात्रा: भक्ति और एकता की यात्रा
जगन्नाथ रथयात्रा हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो पुरी, उड़ीसा में हर साल होता है। इस त्योहार में, भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की मूर्तियाँ उनकी मंदिर से निकालकर उनके विशाल...
विजया एकादशी की कथा: महाधन और भगवान की माया
विजया एकादशी, हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है। यह एकादशी फागुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी होती है, जो भारतीय हिन्दू पंचांग के अनुसार फरवरी-मार्च के महीने में पड़ता है। यह एकादशी...
नागमाता मनसा देवी
मनसा माता भगवान शिव की पुत्री हैं। उन्होंने तपस्या के द्वारा अपना शरीर सुखा दिया जिसकी वजह से उनका नाम जरत्कारु पड़ा। पिता शिव से उन्हें नागलोक का साम्राज्य मिला। मनसा देवी नागों की माता हैं।...
सांस्कृतिक पर्व:बसंत पंचमी 2024
बसंत पंचमी एक हिन्दी पर्व है जो वसंत ऋतु के आगमन को मनाने के लिए मनाया जाता है, और इसे सरस्वती पूजा के रूप में भी जाना जाता है। यह पर्व हिन्दू कैलेंडर के माघ मास के पंचमी तिथि को मनाया जाता है, जो वसंत...
समुद्र मंथन कथा
एक बार की बात है शिवजी के दर्शनों के लिए दुर्वासा ऋषि अपने शिष्यों के साथ कैलाश जा रहे थे। मार्ग में उन्हें देवराज इन्द्र मिले। इन्द्र ने दुर्वासा ऋषि और उनके शिष्यों को भक्तिपूर्वक प्रणाम किया।...
भाई-दूज कथा
भगवान सूर्यदेव की पत्नी का नाम छाया था । उसकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ । यमुना अपने भाई यमराज से बडा स्नेह करती थी । वह उससे बराबर निवेदन करती है वह उसके घर आकर भोजन करें । लेकिन यमराज अपने...
दैवीय शक्ति का अनावरण: बड़ा मंगल की तिथियां, महत्व और पूजा विधि
देशभर में हनुमान भक्त ज्येष्ठ माह के बड़ा मंगल को धूमधाम से मनाते हैं। खासकर उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में इसकी अनोखी खूबसूरती देखने को मिलती है। क्योंकि बड़ा मंगल को त्योहार के रूप में मनाने की...
छठी मइया की व्रत कथा, इतिहास
छठ पूजा का तीसरा दिन है, जिसे बड़ी छठ भी कहते हैं. आज शाम के समय में जब सूर्य देव अस्त होते हैं तो व्रती पानी में खड़े होकर उनको अर्घ्य देते हैं और अपने मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं....
विषपान करते भगवान शिव की कथा
भगवान शिव हलाहल (जहर) पीकर ब्रह्मांड को बचाते हैं दैत्यों और देवताओं के बीच एक युद्ध में, देवताओं ने अपना सारा ऐश्वर्य और पद खो दिया। देवताओं ने तब भगवान ब्रह्मा से संपर्क किया, जो उन्हें भगवान...
जब वरुण ने अपने पुत्र की परीक्षा ली
एक बार वरुण के पुत्र भृगु के मन में परमात्मा को जानने की अभिलाषा जाग्रत हुई। उनके पिता वरुण ब्रम्ह निष्ठ योगी थे। अत: भृगु ने पिता से ही अपनी जिज्ञासा शांत करने का विचार किया। वे अपने पिता के पास...
काशी का वाराणसी के रूप में पुनर्जन्म - कथा
यह कथा द्वापरयुग की है जब भगवान श्री कृष्ण के सुदर्शन चक्र ने काशी को जलाकर राख कर दिया था। बाद में यह वाराणसी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यह कथा इस प्रकार हैः-मगध का राजा जरासंध बहुत शक्तिशाली और...
भगवान् विष्णु का स्वप्न
एक बार भगवान नारायण वैकुण्ठलोक में सोये हुए थे। उन्होंने स्वप्न में देखा कि करोड़ों चन्द्रमाओं की कांतिवाले, त्रिशूल-डमरू-धारी, स्वर्णाभरण-भूषित, सुरेन्द्र-वन्दित, सिद्धिसेवित त्रिलोचन भगवान...
ध्रुव तारे की कथा
राजा उत्तानपाद ब्रह्माजी के मानस पुत्र स्वयंभू मनु के पुत्र थे। उनकी सनीति एवं सुरुचि नामक दो पत्नियाँ थीं। उन्हें सुनीति से ध्रुव एवं सुरुचि से उत्तम नामक पुत्र प्राप्त हुए। वे दोनों राजकुमारों...
भगवान विष्णु और नारद जी
एक बार नारद मुनि जी ने भगवान विष्णु जी से पूछा, हे भगवन! आप का इस समय सब से प्रिय भक्त कौन है?, अब विष्णु तो भगवान है, सो झट से समझ गये अपने भक्त नारद मुनि की बात, ओर मुस्कुरा कर बोले! मेरा सब से प्रिय...
मां पार्वती की युक्ति
एक बार शिवजी और मां पार्वती भ्रमण पर निकले। उस काल में पृथ्वी पर घोर सूखा पड़ा था। चारों ओर हाहाकार मचा हुआ था। पीने को पानी तक जुटाने में लोगों को कड़ी मेहनत करना पड़ रही थी। ऐसे में शिव-पार्वती...
भगवान गणेश और कार्तिकेय के बीच बुद्धिमता का परिचय
कार्तिकेय बनाम गणेश हमारे परिवारों में सहोदर प्रतिद्वंद्विता काफी आम है, जो साहित्य हम पढ़ते हैं और फिल्में जो हमारा मनोरंजन करती हैं। यहाँ तक कि सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान देवता भी इससे प्रतिरक्षित...
कृष्ण रुक्मिणी विवाह कथा
विदर्भ के राजा भीष्मक की कन्या रूक्मिणी थी, रूक्मिणी के भाई थे रूक्म। रूक्म अपनी बहन की शादी शिशुपाल से करना चाहता था परंतु देवी रूक्मणी अपने मन में श्री कृष्ण को पति मान चुकी थी। अत: देवी रूक्मणी...
मोक्षदा एकादशी और परम मुक्ति का मार्ग
मोक्षदा एकादशी, जिसे गीता जयंती के नाम से भी जाना जाता है, यह भगवान कृष्ण और भगवद गीता को समर्पित एक शुभ दिन माना जाता है। भगवद गीता, जिसे अक्सर गीता भी कहा जाता है, एक पवित्र हिंदू धर्मग्रंथ है...
शिव विवाह
सती के विरह में शंकरजी की दयनीय दशा हो गई। वे हर पल सती का ही ध्यान करते रहते और उन्हीं की चर्चा में व्यस्त रहते। उधर सती ने भी शरीर का त्याग करते समय संकल्प किया था कि मैं राजा हिमालय के यहाँ जन्म...
यमराज और डाकू
एक साधु व डाकू यमलोक पहुंचे। डाकू ने यमराज से दंड मांगा और साधु ने स्वर्ग की सुख-सुविधाएं। यमराज ने डाकू को साधु की सेवा करने का दंड दिया। साधु तैयार नहीं हुआ। यम ने साधु से कहा- तुम्हारा तप अभी अधूरा...
नवरात्र की कथा
प्राचीन समय में राजा सुरथ नाम के राजा थे, राजा प्रजा की रक्षा में उदासीन रहने लगे थे,परिणाम स्वरूप पड़ोसी राजा ने उस पर चढाई कर दी,सुरथ की सेना भी शत्रु से मिल गयी थी,परिणामस्वरूप राजा सुरथ की हार...
खरमास माह से जुड़ी जानकारी: खराब दिनों में क्यों करते हैं इनकी गिनती
हिंदू धर्म में खरमास का विशेष महत्व बताया गया है। इसे मलमास भी कहा जाता है और इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है क्योंकि खरमास की अवधि को अशुभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस साल...
त्रिपुरासुर का वध
भयंकर असुर: त्रिपुरासुर असुर बाली की कृपा से त्रिपुरासुर एक भयंकर असुर बन गया था। त्रिपुरासुर के वध की कहानी महाभारत के कर्णपर्व में व्यापक रूप से वर्णित है। भगवान कार्तिकेय द्वारा तारकासुर...
मौनी अमावस्या 2024
मौना अमावस्या मौनी अमावस्या, जिसे मौना अमावस्या भी कहा जाता है, हिंदू कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण दिन है। यह माघ महीने (आमतौर पर जनवरी या फरवरी) के अंधेरे पखवाड़े (अमावस्या) के 15वें दिन पड़ता है। "मौनी"...
माता संतोषी केजन्म की कहानी
संतोषी माता एक देवी संतोषी माता को धर्म में एक देवी हैं जो भगवान शंकर की पत्नी ऋद्धि , सिद्धि की पुत्री , कार्तिकेय , अशोकसुन्दरी , अय्यापा , ज्योति और मनसा की भतीजी और शुभ , लाभ की बहन तथा संतोष की...
क्यों पीपल के वृक्ष के साथ ही शनिदेव के पूजन की परंपरा है ?
त्रेतायुग में एक बार बारिश के अभाव से अकाल पड़ा। तब कौशिक मुनि परिवार के लालन-पालन के लिए अपना गृहस्थान छोड़कर अन्यत्र जाने के लिए अपनी पत्नी और पुत्रों के साथ चल दिए। फिर भी परिवार का भरण-पोषण...
देवयानी की कहानी
शुक्राचार्य की पुत्री : देवयानी असुरों के पुरोहित शुक्राचार्य ने भी असुर नरेश वृषपर्वा को पढ़ाया था। एक दिन शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी और वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा अपनी अन्य सखियों के...
हनुमान की जन्म कथा
हनुमान की जन्म कथा यह केसरी और अंजना के पुत्र पवनपुत्र हनुमान की जन्म कथा है। वह भगवान राम के प्रति अपनी अतुलनीय भक्ति के लिए प्रसिद्ध थे। अपनी निस्वार्थ सेवा और भक्ति से, हनुमान ने भगवान राम और...
भस्मासुर की कहानी
भारतीय पौराणिक कथा मूर्ख भस्मासुर एक असुर या दानव के बारे में है जो सबसे शक्तिशाली बनना चाहता था। भस्मासुर की कहानी राक्षस भस्मासुर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो घोर तपस्या के माध्यम से भगवान शिव...
सकट चौथ व्रत कथा
प्रत्येक माह की चतुर्थी श्रीगणेशजी की पूजा-अर्चना के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। अपनी संतान की मंगलकामना के लिए महिलाएं माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को व्रत रखती है। इसे संकष्टी चतुर्थी,...
धनतेरस की कहानी
भारत त्यौहारों का देश है। विभिन्न त्यौहारों पर अलग-अलग पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं ! इसी प्रकार धनतेरस पर भी यमराज की एक कथा बहुत प्रचलित है। कथा कुछ इस प्रकार है।पुराने जमाने में एक राजा हुए थे...
दुर्गा और महिषासुर की कहानी
महिषासुर एक शक्तिशाली राक्षस महिषासुर एक शक्तिशाली भैंसा राक्षस था। बचपन में भी महिषासुर समस्त सृष्टि में सबसे शक्तिशाली बनना चाहता था। उसने देवों के प्रति घृणा का पोषण किया और उन्हें हराना...
भगवान कृष्ण के जन्म की कहानी
पौराणिक प्रासंगिकता के अलावा, भगवान कृष्ण की जन्म कहानी बच्चों को तलाशने और समझने के लिए प्यार, दिव्यता, दु: ख और शरारत जैसी विभिन्न भावनाओं को जोड़ती है। एक समय था जब राजाओं या राक्षसों द्वारा...
विष्णु के कम ज्ञात अवतार: मत्स्य
विष्णु के कम ज्ञात अवतार: मत्स्य दैत्य हयग्रीव एक बार ब्रह्मा जी के पास से वेदों को एक बहुत बड़े दैत्य हयग्रीव ने चुरा लिया। चारों ओर अज्ञानता का अंधकार फैल गया और पाप तथा अधर्म का बोल-बाला हो गया।...
कन्नप्पा नयनार की कहानी
थिन्नन :प्रतिष्ठित तीरंदाज नागान पोथापी के जंगल क्षेत्र में एक आदिवासी प्रमुख थे। उनके और उनकी पत्नी थथथाई के बहुत लंबे समय से बच्चे नहीं थे और वे भगवान कार्तिकेय (शिव के पुत्र) से प्रार्थना कर...
राजा विक्रमादित्य पर शनिदेव की साढ़े-साती
एक समय स्वर्गलोक में सबसे बड़ा कौन के प्रश्न को लेकर सभी देवताओं में वाद-विवाद प्रारम्भ हुआ और फिर परस्पर भयंकर युद्ध की स्थिति बन गई। सभी देवता देवराज इंद्र के पास पहुंचे और बोले, हे देवराज! आपको...
वेद व्यास जी का जन्म
राजा उपरिचर एक महान प्रतापी राजा था | वह बड़ा धर्मात्मा और बड़ा सत्यव्रती था| उसने अपने तप से देवराज इंद्र को प्रसन्न करके एक विमान और न सूखने वाली सुंदर माला प्राप्त की थी | वह माला धारण करके, विमान...
