परशुराम अवतार

परशुराम अवतार

परशुराम राजा प्रसेनजित की पुत्री रेणुका और भृगुवंशीय जमदग्नि के पुत्र, विष्णु के अवतार और शिव के परम भक्त थे। इन्हें शिव से विशेष परशु प्राप्त हुआ था। इनका नाम तो राम था, किन्तु शंकर द्वारा प्रदत्त अमोघ परशु को सदैव धारण किये रहने के कारण ये परशुराम कहलाते थे। 

विष्णु के दस अवतारों में से छठा अवतार, जो वामन एवं रामचन्द्र के मध्य में गिना जाता है। जमदग्नि के पुत्र होने के कारण ये जामदग्न्य भी कहे जाते हैं। 

उनकी माँ जल का कलश लेकर भरने के लिए नदी पर गयीं। वहाँ गंधर्व चित्ररथ अप्सराओं के साथ जलक्रीड़ा कर रहा था। उसे देखने में रेणुका इतनी तन्मय हो गयी कि जल लाने में विलंब हो गया तथा यज्ञ का समय व्यतीत हो गया। उसकी मानसिक स्थिति समझकर परशुराम के पिता जमदग्नि ने क्रोध के आवेश में अपने चारों पुत्रों को उसका वध करने के लिए कहा। परशुराम के अतिरिक्त कोई भी तैयार न हुआ। अतः जमदग्नि ने सबको संज्ञाहीन कर दिया। परशुराम ने पिता की आज्ञा मानकर माता का शीश काट डाला। 

पिता ने प्रसन्न होकर वर माँगने को कहा तो उन्होंने चार वरदान माँगे- 

 1. माँ पुनर्जीवित हो जाएं , 

 2. उन्हें मरने की स्मृति न रहे, 

 3. भाई चेतना-युक्त हो जाएं

 4. मैं परमायु होऊँ। 

 जमदग्नि ने उन्हें चारों वरदान दे दिये। 

दुर्वासा की भाँति परशुराम भी अपने क्रोधी स्वभाव के लिए विख्यात है। एक बार कार्त्तवीर्य ने परशुराम की अनुपस्थिति में आश्रम उजाड़ डाला था, जिससे परशुराम ने क्रोधित हो उसकी सहस्त्र भुजाओं को काट डाला। कार्त्तवीर्य के सम्बन्धियों ने प्रतिशोध की भावना से जमदग्नि का वध कर दिया। इस पर परशुराम ने 21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय-विहीन कर दिया (हर बार हताहत क्षत्रियों की पत्नियाँ जीवित रहीं और नई पीढ़ी को जन्म दिया) और पाँच झीलों को रक्त से भर दिया।   अंत में पितरों की आकाशवाणी सुनकर उन्होंने क्षत्रियों से युद्ध करना छोड़कर तपस्या की ओर ध्यान लगाया। 

रामावतार में रामचन्द्र द्वारा शिव का धनुष तोड़ने पर ये क्रुद्ध होकर आये थे। इन्होंने परीक्षा के लिए उनका धनुष रामचन्द्र को दिया। जब राम ने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा दी तो परशुराम समझ गये कि रामचन्द्र विष्णु के अवतार हैं। इसलिए उनकी वन्दना करके वे तपस्या करने चले गये।

अन्य संबंधित कहानियां और कथाएं

#

नरसिंह अवतार

नरसिंह अवतार हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु के दस अवतारों में से चतुर्थ अवतार हैं जो वैशाख में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अवतरित हुए। पृथ्वी के उद्धार के समय भगवान ने वाराह अवतार...

#

राम अवतार

राम अवतार रामचन्द्र प्राचीन भारत में जन्मे, एक महापुरुष थे। हिन्दू धर्म में, राम, विष्णु के १० अवतारों में से एक हैं। राम, अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के सबसे बड़े पुत्र थे। राम की पत्नी...

#

कल्कि अवतार

इसमें विष्णु जी भविष्य में कलियुग के अन्त में आयेंगे। कल्कि विष्णु का भविष्य में आने वाला अवतार माना जाता है। पुराणकथाओं के अनुसार कलियुग में पाप की सीमा पार होने पर विश्व में दुष्टों के संहार...

#

कच्छप अवतार

कूर्म अवतार को कच्छप अवतार (कछुआ अवतार) भी कहते हैं।कूर्म अवतार में भगवान विष्णु ने क्षीरसागर के समुद्रमंथन के समय मंदर पर्वत को अपने कवच पर संभाला था। इस प्रकार भगवान विष्णु, मंदर पर्वत और वासुकि...

#

विष्णु और लक्ष्मी के बीच विवाह

यमदीपदान ज्योतिषीय गणना के अनुसार, राजा हिमा के सोलह वर्षीय पुत्र की शादी के चौथे दिन सर्पदंश से मृत्यु निश्चित थी। उस विशेष रात में, उनकी युवा पत्नी ने उन्हें सोने नहीं दिया। उसने अपने पति के...

#

भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा

भगवान विष्णु के वामन रूपी अवतार की कहानी बड़ी ही रोचक है क्योंकि इस पौराणिक कथा में देवों और दैत्यों के बीच हुए युद्ध में जीत और हार के साथ ही अपने वचन निभाने की कसौटी का बड़ी ही ख़ूबसूरती से वर्णन...

#

जया और विजया की कहानी

सृष्टि की प्रक्रिया की शुरुआत भगवान ब्रह्मा ने 'चार कुमारों' या 'चतुरसन' की रचना की। जैसा कि चार कुमार ब्रह्मा की इच्छा (मानस) से मन से पैदा हुए थे, उन्हें उनके मानसपुत्र कहा जाता है। उनके नाम हैं:...

#

प्रह्लाद की कहानी

हिरण्यकशिपु दैत्यों का राजा था। दैत्य, यद्यपि देवों या देवताओं के समान कुल में पैदा हुए थे, फिर भी वे हमेशा देवताओं के साथ युद्ध में रहते थे। दैत्यों की मानव जाति के यज्ञों और अर्पणों में, या दुनिया...

#

वराह अवतार

वराह अवतार हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु के दस अवतारों में से तृतीय अवतार हैं जो भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की तृतीया को अवतरित हुए। वराह अवतार की कथाहिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु ने जब...

#

भगवान विष्णु के चार महीने तक सोने का रहस्य

भगवान विष्णु के चार महीने तक सोने का रहस्य यह तो हम सभी जानते हैं और हमारे धर्म ग्रंथो में भी बताया जाता है कि भगवान विष्णु शेषनाग की शैय्या पर सोते हैं। वे इंसानी वर्ष के हिसाब से चार महीने तक सोते...

#

बुद्ध अवतार

इसमें विष्णु जी बुद्ध के रूप में असुरों को वेद की शिक्षा के लिये तैयार करने के लिये प्रकट हुए। गौतम बुद्ध बौद्ध धर्म के प्रवर्तक थे। राजकुमार सिद्धार्थ के रूप में उनका जन्म 563 ई0 पूर्व तथा मृत्यु...

#

श्रीकृष्ण अवतार

भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप मे देवकी और वसुदेव के घर मे जन्म लिया था। उनका लालन पालन यशोदा और नंद ने किया था। इस अवतार का विस्तृत वर्णन श्रीमद्भागवत पुराण मे मिलता है।कृष्ण हिन्दू धर्म में...

#

मधु और कैटभ

दो महापराक्रमी दानव : मधु और कैटभ मधु-कैटभ उत्पत्ति कल्पांत तक सोते हुए विष्णु के कानों की मैल प्राचीन समय की बात है। चारों ओर जल-ही-जल था, केवल भगवान विष्णु शेषनाग की शैय्या पर सोये हुए थे। उनके...

#

वामन अवतार

वामन अवतार हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु के दस अवतारों में से पाँचवें अवतार हैं जो भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की द्वादशी को अवतरित हुए।आचार्य शुक्र ने अपनी संजीवनी विद्या से बलि तथा दूसरे...

#

मत्स्य अवतार

मत्स्य अवतार भगवान विष्णु का  प्रथम अवतार है। मछली के रूप में अवतार लेकर भगवान विष्णु ने एक ऋषि को सब प्रकार के जीव-जन्तु एकत्रित करने के लिये कहा और पृथ्वी जब जल में डूब रही थी, तब मत्स्य अवतार...