होलिका दहन 2022 का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
होलिका दहन, हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें होली के एक दिन पहले यानी पूर्व सन्ध्या को होलिका का सांकेतिक रूप से दहन किया जाता है। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व के रूप में मनाया जाता है।
होलिका दहन से संबंधित पौराणिक कथा
हिरण्यकशिपु का ज्येष्ठ पुत्र प्रह्लाद, भगवान विष्णु का परम भक्त था। पिता के लाख कहने के बावजूद प्रह्लाद विष्णु की भक्ति करता रहा। दैत्य पुत्र होने के बावजूद नारद मुनि की शिक्षा के परिणामस्वरूप प्रह्लाद महान नारायण भक्त बना। असुराधिपति हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को मारने की भी कई बार कोशिश की परन्तु भगवान नारायण स्वयं उसकी रक्षा करते रहे और उसका बाल भी बांका नहीं हुआ। असुर राजा की बहन होलिका को भगवान शंकर से ऐसी चादर मिली थी जिसे ओढ़ने पर अग्नि उसे जला नहीं सकती थी। होलिका उस चादर को ओढ़कर प्रह्लाद को गोद में लेकर चिता पर बैठ गई। दैवयोग से वह चादर उड़कर प्रह्लाद के ऊपर आ गई, जिससे प्रह्लाद की जान बच गई और होलिका जल गई। इस प्रकार हिन्दुओं के कई अन्य पर्वों की भाँति होलिका-दहन भी बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है।
होलिका दहन 2022 शुभ मुहूर्त
होलिका दहन - बृहस्पतिवार, मार्च 17, 2022 को
होली - शुक्रवार, मार्च 18, 2022 को
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - मार्च 17, 2022 को 01:29 पी एम बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त - मार्च 18, 2022 को 12:47 पी एम बजे
होलिका दहन पूजा सामग्री
-एक कटोरी पानी
-गाय को गोबर से बनी माला
-रोली
-अक्षत
-अगरबत्ती और धूप
-फूल
-कच्चा सूती धागा
-हल्दी के टुकड़े
-मूंग की अखंड दाल
-बताशा
-गुलाल पाउडर
-नारियल
-नया अनाज जैसे गेहूँ
होलिका दहन पूजा विधि
- पूजा की सारी सामग्री एक प्लेट में रख लें ! पूजा थाली के साथ पानी का एक छोटा बर्तन रखें ! पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं ! उसके बाद पूजा थाली पर और अपने आप पानी छिड़कें और 'ऊँ पुण्डरीकाक्ष: पुनातु' मंत्र का तीन बार जाप करें !
- अब दाहिने हाथ में जल, चावल, फूल और एक सिक्का लेकर संकल्प लें !
- फिर दाहिने हाथ में फूल और चावल लेकर गणेश जी का स्मरण करें !
- भगवान गणेश की पूजा करने के बाद, देवी अंबिका को याद करें और 'ऊँ अम्बिकायै नम: पंचोपचारार्थे गंधाक्षतपुष्पाणि सर्मपयामि' मंत्र का जाप करें ! मंत्र का जाप करते हुए फूल पर रोली और चावल लगाकर देवी अंबिका को सुगंध सहित अर्पित करें !
- अब भगवान नरसिंह का स्मरण करें. मंत्र का जाप करते हुए फूल पर रोली और चावल लगाकर भगवान नरसिंह को चढ़ाएं !
- अब भक्त प्रह्लाद का स्मरण करें. फूल पर रोली और चावल लगाकर भक्त प्रह्लाद को चढ़ाएं !
-अब होलिका के आगे खड़े हो जाए और हाछ जोड़कर प्रार्थना करें. इसके बाद होलिका में चावल, धूप, फूल, मूंग दाल, हल्दी के टुकड़े, नारियल और सूखे गाय के गोबर से बनी माला जिसे गुलारी और बड़कुला भी कहा जाता है अर्पित करें ! होलिका की परिक्रमा करते हुए उसके चारों ओर कच्चे सूत की तीन, पांच या सात फेरे बांधे जाते हैं ! इसके बाद होलिका के ढेर के सामने पानी के बर्तन को खाली कर दें !
- इसके बाद होलिका दहन किया जाता है ! लोग होलिका के चक्कर लगाते हैं ! जिसके बाद बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है ! लोग होलिका की परिक्रमा करते हैं और अलाव में नई फसल चढ़ाते हैं और भूनते हैं ! भुने हुए अनाज को होलिका प्रसाद के रूप में बांटा जाता है !
होलिका दहन की विधि
होलिका दहन में किसी पेड़ की शाखा को जमीन में गाड़कर उसे चारों तरफ से लकड़ी, कंडे या उपले से ढक दिया जाता है! इन सारी चीजों को शुभ मुहूर्त में जलाया जाता है! इसमें छेद वाले गोबर के उपले, गेंहू की नई बालियां और उबटन डाले जातें है! ऐसी मान्यता है कि इससे साल भर व्यक्ति को आरोग्य कि प्राप्ति हो और सारी बुरी बलाएं इस अग्नि में भस्म हो जाती हैं! होलिका दहन पर लकड़ी की राख को घर में लाकर उससे तिलक करने की परंपरा भी है! होलिका दहन को कई जगह छोटी होली भी कहते हैं!
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