होलिकोत्सव की अद्भुत पौराणिक गाथा
होलिकोत्सव के सूत्र पुराण साहित्य में पुष्कल उपलब्ध हैं । भविष्योत्तर पुराण में एक कथा के अनुसार- युधिष्ठिर के द्वारा फाल्गुन पूर्णिमा को प्रत्येक गाँव व नगर में उत्सव मनाये जाने प्रत्येक घर में बच्चों के क्रीड़ामय हो जाने और होलाका जलाये जाने का कारण और तत्सम्बन्धी कथा के बारे में पूछे जाने पर भगवान श्रीकृष्ण ने उसमें होने वाले देवता की पूजा इस उत्सव का प्रचारकर्ता और इसे अडाडा कहे जाने का कारण बतलाने के लिए एक कथा का सहारा लिया है। यह कथा किञ्चित भेद से विविध पुराणों ,रचनाओं में तथा ग्रंथों में आई है।
कथा के अनुसार सतयुग में दैत्यों के कुलगुरु शुक्राचार्य की कन्या जिसका नाम ढूण्ढिक़ा था बहुत ही कामांध थी । ढूण्ढिक़ा को कहीं- कहीं ढोण्ढा कहीं ढुण्ढा तो कहीं धुंधा भी कहा गया है । ढूण्ढिक़ा की कामवासना इतनी प्रबल थी कि वह हजारों पुरूषों से संबध स्थापित करने के पश्चात भी तृप्त नहीं होती थी । हजारों पुरूषों को उसने अपमानजनक ढंग से यातनाएँ दी क्योंकि वे उसकी कामतृप्ति न करा सके थे । उसकी इस कामपिपासा को देखते हुए पुरूष उससे भयभीत रहने लगे । काम भावना के वशीभूत उसके कृत्यों से सारा समाज लज्जित होने लगा ।
राजा रघु के पास राज्यवासी यह कहने के लिए गये कि राज्य में दैत्यों के कुलगुरु शुक्राचार्य की पुत्री ढूण्ढिक़ा नामक एक राक्षसी है जिसे शिव ने वरदान दिया है कि उसे कोई देव मानव आदि नहीं मार सकते हैं और न वह अस्त्र - शस्त्र या जाड़ा या गर्मी या वर्षा से मर सकती है ! किन्तु शिव ने उसे इतना कह दिया है कि वह क्रीड़ायुक्त बच्चों से भय खा सकती है । वही ढूण्ढिक़ा राक्षसी बालकों व प्रजा को पीडि़त करने लगी है । अडाडा मंत्र का उच्चारण करने पर वह शांत हो जाती है इसीलिए जन उसे अडाडा भी कहते हैं। इस प्रकार भगवान शिव के अभिशाप वश वह ग्रामीण बालकों की शरारत गालियों व चिल्लाने के आगे विवश हो वह भागती है ।
इस पर विद्वान पुरोहितों के निर्देशानुसार होली के दिन ही सभी बालकों ने मिलकर अपनी एकता के बल पर ललकारते हुए आगे बढक़र ढूण्ढिक़ा अर्थात धुंधी को गाँव से बाहर धकेला था। बच्चे ज़ोर.ज़ोर से चिल्लाते हुए चतुराई पूर्वक उसकी ओर आगे बढ़ते ही गये। सभी ने मिल धूम मचाकर उसका ऐसा बहिष्कार किया कि वह हार कर भाग खड़ी हुई और मृत्यु को प्राप्त हो गई । वह दिन फाल्गुन की पूर्णिमा का दिन था और उस दिन को अडाडा या होलिका कहा गया।
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