महाभारत से संबंधित कहानियां और कथाएं

अर्जुन कृष्ण युद्ध

एक बार महर्षि गालव जब प्रात: सूर्यार्घ्य प्रदान कर रहे थे, उनकी अंजलि में आकाश मार्ग में जाते हुए चित्रसेन गंधर्व की थूकी हुई पीक गिर गई| मुनि को इससे बड़ा क्रोध आया| वे उसे शाप देना ही चाहते थे कि...

शांतिदूत श्रीकृष्ण |

विराट की राज सभा में मंत्रणा तेरहवां वर्ष पूरा होने पर पाण्डव विराट की राजधानी छोड़कर एक अन्य नगर उपलव्य में रहने लगे। उपलव्य नगर विराट राज्य में ही था। अज्ञातवास की अवधि पूरी हो चुकी थी, इसलिए...

महाबली भीमसेन

भीमसेन कुंती का दूसरा पुत्र था| इसका जन्म पवन देवता के संयोग से हुआ था, इसी कारण इसमें पवन की-सी शक्ति थी| इसके उदर में वृक नामक तीक्ष्ण अग्नि थी, इसीलिए इसका नाम वृकोदर भी पड़ा| जिस समय इसका जन्म हुआ,...

वनवास के दौरान द्रौपदी के पास महर्षि दुर्वासा के आने की कहानी

पांडवों के वनवास के दौरान आए दिन कोई न कोई ब्राह्मण उनके यहां भोजन करने आया ही करते थे। वन में निवास कर रहे श्रेष्ठ ब्राह्मणों को भोजन की कोई कमी न हो, इसके लिए युधिष्ठिर ने तपस्या करके भगवान सूर्य...

एक श्राप के कारण अंधे जन्मे थे धृतराष्ट्र

महाभारत में धृतराष्ट्र अंधे थे, लेकिन उन्हें यह अंधापन पिछले जन्म में मिले एक श्राप के कारण मिला था। धृतराष्ट्र ने ही गांधारी के परिवार को मरवाया था। लेकिन क्यों मिला था उन्हें अंधें होने का श्राप...

आठ वसुओ का नश्वर पुरुषों के रूप में जन्म लेने का श्राप

मानव रूप में देवी गंगा राजा शांतनु गंगा नदी के किनारे टहल रहे थे जब उन्होंने इस अविश्वसनीय रूप से सुंदर महिला को देखा। वह मानव रूप में देवी गंगा थीं, लेकिन शांतनु को यह पता नहीं था। राजा उसकी सुंदरता...