पांडवों तथा कौरवों का जन्म
एक बार राजा पाण्डु अपनी दोनों पत्नियों - कुन्ती तथा माद्री - के साथ आखेट के लिये वन में गये। वहाँ उन्हें एक मृग का मैथुनरत जोड़ा दृष्टिगत हुआ। पाण्डु ने तत्काल अपने बाण से उस मृग को घायल कर दिया।...
कृष्ण की मृत्यु कैसे हुई?
कृष्ण की मृत्यु कैसे हुई सब कुछ तब शुरू हुआ जब कृष्ण एक दिन जंगल में एक पेड़ पर बैठे और योग समाधि, या ध्यान में प्रवेश किया। एक शिकारी जरा, फिर जंगल में घुस गया। उस शिकारी ने गलती से सोचा कि कृष्ण...
भीष्म प्रतिज्ञा
एक बार हस्तिनापुर के महाराज प्रतीप गंगा के किनारे तपस्या कर रहे थे। उनके रूप-सौन्दर्य से मोहित हो कर देवी गंगा उनकी दाहिनी जाँघ पर आकर बैठ गईं। महाराज यह देख कर आश्चर्य में पड़ गये तब गंगा ने कहा,...
दानवीर कर्ण
कर्ण कुंती का पुत्र था| पाण्डु के साथ कुंती का विवाह होने से पहले ही इसका जन्म हो चुका था| लोक-लज्जा के कारण उसने यह भेद किसी को नहीं बताया और चुपचाप एक पिटारी में रखकर उस शिशु को अश्व नाम की नदी में...
श्री कृष्ण और स्यमंतक मणि
एक बार भगवान श्रीकृष्ण बलरामजी के साथ हस्तिनापुर गए। उनके हस्तिनापुर चले जाने के बाद अक्रूर और कृतवर्मा ने शतधन्वा को स्यमंतक मणि छीनने के लिए उकसाया। शतधन्वा बड़े दुष्ट और पापी स्वभाव का मनुष्य...
सती सावित्री की कहानी
हिंदू पौराणिक कथाओं की पांच सतीयों में, सावित्री एक वफादार और समर्पित पत्नी की छवि को दर्शाती है, जो अपने समर्पण और चतुर सोच के कारण अपने पति को यम (मृत्यु के देवता) से वापस ला सकती थी। सावित्री और...