भागवत पुराण से संबंधित प्रश्न और उत्तर

ऊं देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते । देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:।।

नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की, कहकर भगवान कृष्ण को झूला झुलाकर घी के दीपक और धूपबत्ती से आरती उतारें। अंत में प्रसाद वितरण व ग्रहण करें और रातभर उनके मंगल भजन-कीर्तन करते हुए रतजगा करें।

कब्ज़ा, अधिभोग, धारण, पकड़ (हाथ का), पकड़