श्रीमद्भागवत के अष्टम स्कंध के तीसरे अध्याय में गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र दिया गया है. इसमें कुल तैतीस श्लोक हैं इस स्त्रोत में गजेन्द्र (हाथी) ने ग्राह (मगरमक्ष) के मुख से छूटने के लिए श्री हरि की स्तुति की थी और प्रभु श्री हरि ने गजेन्द्र की पुकार सुनकर उसे ग्राह से मुक्त करवाया...
नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की, कहकर भगवान कृष्ण को झूला झुलाकर घी के दीपक और धूपबत्ती से आरती उतारें। अंत में प्रसाद वितरण व ग्रहण करें और रातभर उनके मंगल भजन-कीर्तन करते हुए रतजगा करें।
इस पाठ के जाप से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं. कहते हैं कि जीवन से सभी दुखों के नाश और मानसिक तनाव को दूर करने के लिए भक्तों को नियमित रूप से इसका जाप करना चाहिए...