परीक्षित के जन्म की कथा
परीक्षित के जन्म की कथा जब द्रौपदी को खबर मिली कि उसके पांच पुत्रों को अश्वत्थामा ने मार डाला है, तो वह अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठ गई और कहा कि वह उपवास तभी तोड़ेगी जब उसे अश्वत्थामा के माथे पर...
धर्मराज की धार्मिकता
महाराज युधिष्ठिर ने जब सुना कि श्रीकृष्ण ने अपनी लीला का संवरण कर लिया है और यादव परस्पर कलह से ही नष्ट हो चुके हैं, तब उन्होंने अर्जुन के पौत्र परीक्षित का राजतिलक कर दिया| स्वयं सब वस्त्र एवं आभूषण...
कृष्ण की मृत्यु कैसे हुई?
कृष्ण की मृत्यु कैसे हुई सब कुछ तब शुरू हुआ जब कृष्ण एक दिन जंगल में एक पेड़ पर बैठे और योग समाधि, या ध्यान में प्रवेश किया। एक शिकारी जरा, फिर जंगल में घुस गया। उस शिकारी ने गलती से सोचा कि कृष्ण...
भीम जब पहुंचे नागलोक में
पाँचों पाण्डव - युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव - पितामह भीष्म तथा विदुर की छत्रछाया में बड़े होने लगे। उन पाँचों में भीम सर्वाधिक शक्तिशाली थे। वे दस-बीस बालकों को सहज में ही गिरा देते थे।...
कृपाचार्य तथा द्रोणाचार्य की कथा
गौतम ऋषि के पुत्र का नाम शरद्वान था। उनका जन्म बाणों के साथ हुआ था। उन्हें वेदाभ्यास में जरा भी रुचि नहीं थी और धनुर्विद्या से उन्हें अत्यधिक लगाव था। वे धनुर्विद्या में इतने निपुण हो गये कि देवराज...
महाबली भीमसेन
भीमसेन कुंती का दूसरा पुत्र था| इसका जन्म पवन देवता के संयोग से हुआ था, इसी कारण इसमें पवन की-सी शक्ति थी| इसके उदर में वृक नामक तीक्ष्ण अग्नि थी, इसीलिए इसका नाम वृकोदर भी पड़ा| जिस समय इसका जन्म हुआ,...