महाभारत से संबंधित कहानियां और कथाएं

कृपाचार्य तथा द्रोणाचार्य की कथा

गौतम ऋषि के पुत्र का नाम शरद्वान था। उनका जन्म बाणों के साथ हुआ था। उन्हें वेदाभ्यास में जरा भी रुचि नहीं थी और धनुर्विद्या से उन्हें अत्यधिक लगाव था। वे धनुर्विद्या में इतने निपुण हो गये कि देवराज...

द्रौपदी का चीर हरण

महाभारत में युधिष्ठिर सब कुछ हार ने के बाद उन्होंने द्रौपदी को दाँव पर लगा दिया और दुर्योधन की ओर से मामा शकुनि ने द्रोपदी को जीत लिया। उस समय दुशासन द्रौपदी को बालों को पकड़कर घसीटते हुए सभा में...

शांतिदूत श्रीकृष्ण |

विराट की राज सभा में मंत्रणा तेरहवां वर्ष पूरा होने पर पाण्डव विराट की राजधानी छोड़कर एक अन्य नगर उपलव्य में रहने लगे। उपलव्य नगर विराट राज्य में ही था। अज्ञातवास की अवधि पूरी हो चुकी थी, इसलिए...

वनवास के दौरान द्रौपदी के पास महर्षि दुर्वासा के आने की कहानी

पांडवों के वनवास के दौरान आए दिन कोई न कोई ब्राह्मण उनके यहां भोजन करने आया ही करते थे। वन में निवास कर रहे श्रेष्ठ ब्राह्मणों को भोजन की कोई कमी न हो, इसके लिए युधिष्ठिर ने तपस्या करके भगवान सूर्य...

धर्मराज की धार्मिकता

महाराज युधिष्ठिर ने जब सुना कि श्रीकृष्ण ने अपनी लीला का संवरण कर लिया है और यादव परस्पर कलह से ही नष्ट हो चुके हैं, तब उन्होंने अर्जुन के पौत्र परीक्षित का राजतिलक कर दिया| स्वयं सब वस्त्र एवं आभूषण...

द्रुपद से द्रोण का प्रतिशोध

जब पाण्डव तथा कौरव राजकुमारों की शिक्षा पूर्ण हो गई तो उन्होंने द्रोणाचार्य को गुरु दक्षिणा देना चाहा। द्रोणाचार्य को द्रुपद के द्वारा किये गये अपने अपमान का स्मरण हो आया और उन्होंने राजकुमारों...