मेघनाद का राम रावण युद्ध में योगदान

मेघनाद का राम रावण युद्ध में योगदान

कुम्भकर्ण के अन्त के बाद रावण के पास अब केवल एक उसका पुत्र इन्द्रजीत ही रह गया था। उसने इन्द्रजीत को आदेश दिया कि वह युद्ध की ओर कूच करे ।

इन्द्रजीत ने अपने पिता के आदेश पर सबसे पहले कुलदेवी माता निकुम्भला का आशीर्वाद लिया और उसके उपरान्त हुआ रणभूमि की ओर चल पड़ा। जैसे ही युद्ध आरम्भ हुआ एक-एक करके सारे योद्धा इन्द्रजीत के हाथों या तो वीरगति को प्राप्त हो गए, या तो भागने लगे, या तो पराजित हो गए। अन्त में लक्ष्मण जी और इन्द्रजीत के बीच द्वन्द होने लगा । जब इन्द्रजीत के सारे अस्त्र विफल हो गए तो उसने अदृश्य होकर पीछे से सारी वानर सेना, भगवान श्री राम और लक्ष्मण जी पर नागपाश का प्रयोग किया। तब ही हनुमान जी को एक युक्ति सूझी कि भगवान गरुण इस नागपाश को काट सकते है अतः हनुमान जी तुरन्त ही गरुड़ जी को ले जाए और गरुड़ जी ने सभी को नागपाश के बन्धन से मुक्त कर दिया।

जब रावण को यह पता चला की सभी वानर सैनिक, भगवान श्री राम और लक्ष्मण जी नागपाश से मुक्त हो गए हैं तो क्रोध में आकर उसने दूसरे दिन एक बार फिर इन्द्रजीत को आदेश दिया कि वह एक बार फिर युद्ध-भूमि की ओर कूच करे ।

एक बार फिर अपने पिता की आज्ञा को शिरोधार्य करके माता निकुम्भला का आशीर्वाद लेकर इन्द्रजीत रणभूमि की ओर निकल पड़ा । इस बार उसने रणभूमि में घोषणा कि आज वह एक भी वानर सैनिक को जीवित नहीं छोड़ेगा और कम से कम दोनों भाइयों में से (अर्थात राम जी और लक्ष्मण जी में से) किसी एक को तो मार ही देगा। इसी उद्घोषणा के साथ वह पहले दिन से भी कहीं अधिक भयंकरता के साथ युद्ध करने लगा। उसकी इस ललकार को सुनकर लक्ष्मण जी भगवान श्रीराम की आज्ञा लेकर उसका सामना करने चल पड़े। 

दोनों के बीच भयंकर द्वन्द छिड़ गया, परन्तु दोनों ही टस से मस होने के लिए तैयार नहीं थे। जब लक्ष्मण जी मेघनाद पर भारी पड़ने लगे, तब मेघनाद को एक युक्ति सूची और वह अदृश्य होकर माया युद्ध करने लगा। इस पर लक्ष्मण जी उस पर ब्रह्मास्त्र चलाने की आज्ञा भगवान श्रीराम से लेने लगे। परन्तु भगवान श्रीराम ने इसे निति-विरुद्ध कहकर रोक दिया और फिर एक बार लक्ष्मण जी भगवान श्रीराम की आज्ञा लेकर दोबारा से मेघनाद के साथ युद्ध करने लगे।

माया युद्ध में भी जब लक्ष्मण जी इन्द्रजीत पर भारी पड़ने लगे और दूसरी ओर वानर-सेना राक्षस-सेना पर भारी पड़ने लगी, तो क्रोध में आकर उसने लक्ष्मण जी पर पीछे से शक्ति अस्त्र का प्रयोग किया और सारी वानर सेना पर ब्रह्मशिरा अस्त्र का प्रयोग किया, जिससे कि कई वानर सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए, जो कि लगभग पूरा का पूरा वानर वंश था (स्रोत श्रीमद् वाल्मीकि रामायण)। 

जब हनुमान जी वानर सेना को बचाने दौड़े तो इन्द्रजीत ने उन पर भी वैष्णव अस्त्र का प्रयोग किया, परन्तु उन्हें भगवान श्रीब्रह्मा जी का वरदान होने के कारण कुछ नहीं हुआ और वे तुरन्त ही सारे वानर सैनिकों और लक्ष्मण जी को बचाने निकल पड़े। इधर दूसरी ओर मेघनाद घायल लक्ष्मण जी उठाने का प्रयत्न करने लगा, परन्तु उन्हें हिला भी नहीं सका। इस पर हनुमान जी ने यह कहा कि वह उन्हें उठाने का प्रयत्न कर रहा है जो साक्षात भगवान शेषनाग अनन्त के अवतार हैं, उस जैसे पापी से नहीं उठेंगे। इतना कहकर उन्होंने मेघनाद पर प्रहार किया और लक्ष्मण जी को बचा कर ले आए । उसके बाद सुषेण वैद्य के कहने पर हनुमान जी संजीवनी बूटी ले आए जिससे लक्ष्मण जी का उपचार हुआ और वे बच गए ।

जब रावण को यह पता चला के लक्ष्मण जी सकुशल है तो इस बार उसने फिर से इन्द्रजीत को यह आदेश दिया कि वह तुरन्त ही माता निकुम्भला का तान्त्रिक यज्ञ करे और उनसे वह दिव्य रथ प्राप्त करें ।

जब गुप्तचरों से इस बात का विभीषण जी को पता चला तो उन्होंने तुरंत ही भगवान श्री राम को सारी सूचना दी । भगवान श्री राम ने विभीषण जी को आदेश दिया कि वह तुरन्त ही उसका यज्ञ भंग कर दें ।

विभीषण जी की सहायता से, एक गुप्त मार्ग से सभी वानर सैनिक उस गुफा में पहुँच गए जहाँ पर इन्द्रजीत यज्ञ कर रहा था। उस गुफा में घुस कर वानर सैनिकों ने उसका यज्ञ भंग कर दिया और उसे बाहर निकलने पर विवश कर दिया ।

क्रोधित इन्द्रजीत ने जब देखा विभीषण जी वानर सेना को लेकर के आए हैं तो क्रोध में आकर उसने विभीषण जी पर यम-अस्त्र का प्रयोग किया। परन्तु यक्षराज कुबेर ने पहले ही लक्ष्मण जी को उसकी काट बता दी थी । लक्ष्मण जी ने उसी का प्रयोग करके यम- अस्त्र को निस्तेज कर दिया । इस पर इन्द्रजीत को बहुत क्रोध आया और उसने एक बहुत ही भयानक युद्ध लक्ष्मण जी से आरम्भ कर दिया, परन्तु उसमें भी जब लक्ष्मण जी इन्द्रजीत पर भारी हो गए तो उसने अंतिम तीन महा अस्त्रों का प्रयोग किया जिन से बढ़कर कोई दूसरा अस्त्र इस सृष्टि में नहीं है।

सबसे पहले उसने ब्रह्माण्ड अस्त्र का प्रयोग किया। इस पर भगवान ब्रह्मा जी ने उसे सावधान किया की यह नीति विरुद्ध है, परन्तु उसने ब्रह्मा जी की बात ना मानकर उसका प्रयोग लक्ष्मण जी पर किया। परिणाम स्वरूप ब्रह्माण्ड अस्त्र लक्ष्मण जी को प्रणाम करके निस्तेज होकर लौट आया। फिर उसने लक्ष्मण जी पर भगवान शिव का पाशुपतास्त्र प्रयोग किया परन्तु वह भी लक्ष्मण जी को प्रणाम करके लुप्त हो गया। फिर उसने भगवान विष्णु का वैष्णव अस्त्र लक्ष्मण जी पर प्रयोग किया परन्तु वह भी उनकी परिक्रमा करके लौट आया।

अब इन्द्रजीत समझ गया लक्ष्मण जी एक साधारण नर नहीं स्वयं भगवान का अवतार है और वह तुरन्त ही अपने पिता के पास पहुँचा और उसने सारी कथा का व्याख्यान दिया । परन्तु रावण तब भी नहीं माना और उसने फिर से इन्द्रजीत का युद्ध भूमि में भेज दिया । इन्द्रजीत ने यह निश्चय किया यदि पराजय ही होनी है भगवान के हाथों वीरगति को प्राप्त होना तो सौभाग्य की बात है। और उसने फिर एक बार फिर एक महासंग्राम आरम्भ किया । बड़ा भयंकर युद्ध हुआ।

भगवान श्रीराम जी ने लक्ष्मण जी को पहले ही समझा दिया था की इन्द्रजीत एकल पत्नी व्रत धर्म का कठोर पालन कर रहा है। इस कारण से उन्हें उसका वध करते समय इस बात का ध्यान रखना होगा की इंद्रजीत का शीश कटकर भूमि पर ना गिरे अन्यथा उसके गिरते ही ऐसा विस्फोट होगा की सारी सेना उस विस्फोट में समा कर नष्ट हो जाएगी। इसीलिए अन्त में लक्ष्मण जी ने भगवान श्रीराम जी का नाम लेकर एक ऐसा बाण छोड़ा जिससे इन्द्रजीत के हाथ और शीश कट गए और उसका शीश कटकर भगवान श्रीराम जी के चरणों में पहुँच गया।

अन्य संबंधित कहानियां और कथाएं

#

जनकपुत्री माता सीता के भाई कौन थे?

देवी सीता मिथिला के राजा जनक की ज्येष्ठ पुत्री थीं इसलिए उन्हें 'जानकी' भी कहा जाता है। कहते हैं कि राजा जनक को माता सीता एक खेत से मिली थी। इसीलिए उन्हें 'धरती पुत्री' भी कहा जाता है। लक्ष्मण, भरत...

#

अयोध्या संदर्भ: सुप्रीम कोर्ट का फैसला

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: बाबरी मस्जिद, उत्तर प्रदेश के अयोध्या में एक मस्जिद, 16 वीं शताब्दी में मुगल सम्राट बाबर के कमांडर मीर बाकी द्वारा बनाई गई थी। मस्जिद उस स्थान पर बनी थी जिसे कुछ हिंदू भगवान...

#

जाम्बवन्त से सम्बंधित पौराणिक कथा

जांबवंत जी का जन्म ब्रह्मा जी से ही हुआ था उनकी पत्नी का नाम जयवंती था। यह जब जवान थे, तब भगवान् त्रिविक्रम वामन जी का अवतार हुआ। तब भगवान्, बलि के पास तीन पग भिक्षा मांगने गए और बलि तैयार भी हो गया,...

#

हनुमान जी की अद्भुत कहानी

जब भगवान राम की सलाह पर माता सीता को करनी पड़ी हनुमान से प्रार्थना खूबसूरत रिश्ता- श्री राम, माता सीता और हनुमान से जुड़ी हुई घटनाएँ हमें सदैव प्रिय हैं। भगवान और भक्त के बीच का रिश्ता कितना खूबसूरत...

#

विश्वामित्र को ब्राह्मणत्व की प्राप्ति

देवताओं के चले जाने के बाद विश्वामित्र भी ब्राह्मण का पद प्राप्त करने के लिये पूर्व दिशा में जाकर कठोर तपस्या करने लगे‌।‌ इस तपस्या को भ़ंग करने के लिए नाना प्रकार के विघ्न उपस्थित हुए किन्तु...

#

राम हनुमान से मिलते हैं।

लोकप्रिय हिंदू महाकाव्य, रामायण सभी भगवान राम और देवी सीता की कहानियों के बारे में है। हर कोई जो रामायण की कहानियों को जानता है, वह अपने भगवान श्री राम की सेवा के लिए भगवान हनुमान की लीला को नहीं...

#

रामायण युद्ध में हनुमान

रामायण के सुन्दर-काण्ड में हनुमान जी के साहस और देवाधीन कर्म का वर्णन किया गया है। हनुमानजी की भेंट रामजी से उनके वनवास के समय तब हुई जब रामजी अपने भ्राता लछ्मन के साथ अपनी पत्नी सीता की खोज कर रहे...

#

अंगद और अक्षय कुमार की कहानी

अंगद और अक्षय कुमार की रोचक कहानी अकसर कई लोगो को यह प्रश्न परेशान करता हैं की जब अंगद भी समुद्र को लांघ सकते थे तो क्यो हनुमान जी सबसे पहले लंका गए? आज इसी प्रश्न के उत्तर मे यह लेख लिख रहा हूँ। अंगद...

#

मेघनाद का हनुमान जी के विरुद्ध युद्ध

जब भगवान श्री राम ने हनुमान जी को माता सीता की खोज में भेजा और हनुमान जी जब लंका में अशोक वाटिका में माता सीता से मिले, उसके उपरान्त हनुमान जी ने अशोक वाटिका को तहस-नहस करना आरम्भ कर दिया। रावण के...

#

अहिल्या की कथा

राम और लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ मिथिलापुरी के वन उपवन आदि देखने के लिये निकले तो उन्होंने एक उपवन में एक निर्जन स्थान देखा। राम बोले, "भगवन्! यह स्थान देखने में तो आश्रम जैसा दिखाई देता है...

#

मंदोदरी-रावण का विवाह

रामायण के समय में, तपस्या के माध्यम से, कोई व्यक्ति वास्तविक जीवन में अपनी अंतर्निहित इच्छाओं को प्राप्त कर सकता था, और ऐसी इच्छाओं को दुनिया में बहुत अधिक महत्व दिया जाता था। मयासुर एक कुशल वास्तुकार ...

#

रावण के जन्म की कथा

जब श्रीराम अयोध्या में राज्य करने लगे तब एक दिन समस्त ऋषि-मुनि श्रीरघुनाथजी का अभिनन्दन करने के लिये अयोध्यापुरी में आये। श्रीरामचन्द्रजी ने उन सबका यथोचित सत्कार किया। वार्तालाप करते हुये...

#

सीता स्वयंवर रामायण कथा

सीता स्वयंवर रामायण कथा सीता मैया राजा जनक की पुत्री थीं। वास्तव में वह पृथ्वी माया से उत्पन्न हुई है, इसलिए उसका एक नाम भूमिजा भी है। सीता मैया का जीवन सरल नहीं था। वे बचपन से ही कई असाधारण कार्य...

#

हनुमान जी की परीक्षा

अयोध्या वापसी श्री राम की अयोध्या वापसी और राजा के रूप में उनकी ताजपोशी के बाद बहुत खुशी और उत्सव मनाया गया। भगवान राम ने उन सभी बंदरों को उपहार बांटे जिन्होंने उनकी सेना में योद्धाओं के रूप में...

#

हनुमान जी की कथा

हनुमान जी का जन्म त्रेता युग मे अंजना(एक नारी वानर) के पुत्र के रूप मे हुआ था। अंजना असल मे पुन्जिकस्थला नाम की एक अप्सरा थीं, मगर एक शाप के कारण उन्हें नारी वानर के रूप मे धरती पे जन्म लेना पडा। उस...

#

परशुराम

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जिनका सादर नमन करते हों, उन शस्त्रधारी और शास्त्रज्ञ भगवान परशुराम की महिमा का वर्णन शब्दों की सीमा में संभव नहीं। वे योग, वेद और नीति में निष्णात थे, तंत्रकर्म तथा...

#

विश्वामित्र का महर्षि वशिष्ठ से प्रतिशोध

सम्पूर्ण धनुर्विद्या का ज्ञान प्राप्त करके विश्वामित्र बदला लेने के लिये वशिष्ठ जी के आश्रम में पहुँचे। उन्हें ललकार कर विश्वामित्र ने अग्निबाण चला दिया। वशिष्ठ जी ने भी अपना धनुष संभाल लिया...

#

हनुमान जी ने उठाया था गोवर्धन पर्वत

गोवर्धन पर्वत गोवर्धन पर्वत को गिरिराज महाराज के नाम से जाना जाता है और इन्हें साक्षात श्री कृष्ण का स्वरूप माना गया है। इसका कारण यह है कि भगवान श्री कष्ण ने कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि को गोर्वधन...

#

रावण और बाली का महाप्रलयंकारी युद्ध

रावण और बाली का महाप्रलयंकारी युद्ध इस कहानी में महाबली बाली और रावण के बीच हुए युद्ध के बारे मे बातएंगे रावण ने जब भूमंडल के अधिकांश राज्यों पर विजय प्राप्त कर ली, तब वह युद्ध के लिए किष्किंधा...

#

हनुमान पुत्र मकरध्वज की कथा

पवनपुत्र हनुमान बाल-ब्रह्मचारी थे। लेकिन मकरध्वज को उनका पुत्र कहा जाता है। यह कथा उसी मकरध्वज की है।वाल्मीकि रामायण के अनुसार, लंका जलाते समय आग की तपिश के कारण हनुमानजी को बहुत पसीना आ रहा था।...

#

कैसे एक गिलहरी ने भगवान राम को पुल बनाने में मदद की

भगवान राम को अपनी पत्नी सीता को बचाने के लिए समुद्र के पार लंका तक एक पुल बनाने की जरूरत थी। भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम (सबसे महान) थे, और सभी के द्वारा पूजनीय थे, और सीता भूमि देवी की बेटी होने...

#

हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने के पीछे का कारण

सिंदूर की कथा एक प्रसिद्ध कथा जिसका वर्णन रामायण में किया गया है, अक्सर ये देखा जाता है किअपने महल में श्रृंगार कर रही थी। तबी वहा ने ब्रह्मचारी हनुमान की इस सीधी-सादी बात पर प्रसन्न होकर कहा, पुत्र!...

#

कैसे हुआ हनुमान जी का जन्म

यूं तो भगवान हनुमान जी को अनेक नामों से पुकारा जाता है, जिसमें से उनका एक नाम वायु पुत्र भी है। जिसका शास्त्रों में सबसे ज्यादा उल्लेख मिलता है। शास्त्रों में इन्हें वातात्मज कहा गया है अर्थात्...

#

त्रिशंकु की स्वर्गयात्रा

त्रिशंकु सशरीर स्वर्ग जाना चाहते थे अतः इसके लिये उन्होंने वशिष्ठ जी अनुरोध किया किन्तु वशिष्ठ जी ने इस कार्य के लिये अपनी असमर्थता जताई। त्रिशंकु ने यही प्रार्थना वशिष्ठ जी के पुत्रों से भी...

#

लंका का राजा-दशमुखा

रावण के दस सिर रावण को 'दस मुख' या यानी 10 सिर वाला भी कहा जाता है और यही कारण है कि उसे 'दशानन' कहा जाता है। शास्त्र ग्रंथों और रामायण में उनके 10 सिर और 20 बंधों के रूप में करार किया गया है। रावण, मुनि विश्वेश्रवा...

#

बालि का बल

ऐसा कहा जाता है कि बालि को उसके पिता इन्द्र से एक स्वर्ण हार प्राप्त हुआ जिसको ब्रह्मा ने मंत्रयुक्त करके यह वरदान दिया था कि इसको पहनकर वह जब भी रणभूमि में अपने दुश्मन का सामना करेगा तो उसके दुश्मन...

#

लंका कथा

श्री लंका, का इतिहास रामायण में भी सुनने को मिलता है परन्तु लंका निर्माण से जुडी भी कथा है। जो हमको उसके निर्माण और कैसे रावण ने उसका अधिकार किया इसकी पूरी जानकारी देती है। रावण, जो कुल से तो ब्राह्मण...

#

रावण के दस सिर क्यों थे

भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए, रावण ने कई वर्षों तक घोर तपस्या (तपस्या) की। एक दिन भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए, उन्होंने अपना सिर काटने का फैसला किया। जब उसने अपना सिर काट दिया, तो...

#

हनुमद रामायण

ऐसा माना जाता है कि प्रभु श्रीराम की रावण के ऊपर विजय प्राप्त करने के पश्चात ईश्वर की आराधना के लिये हनुमान हिमालय पर चले गये थे। वहाँ जाकर उन्होंने पर्वत शिलाओं पर अपने नाखून से रामायण की रचना...

#

सिंहिका राक्षसी जिसने हनुमान की परछाई को पकड़ लिया था

हनुमान के लंका जाने की कहानी का त्वरित परिचय श्लोक प्राचीन पवित्र पुस्तक "रामायण" से लिया गया है। रामायण में भगवान राम के सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 24 साल के वनवास जाने की कहानी को दर्शाया गया है।...

#

भगवान राम और लक्ष्मण की मृत्यु

महाकाल का श्रीराम के पास आना जब श्रीराम के इस धरती पर सभी कर्तव्य पूरे हो गए तब उन्हें सूचना देने स्वयं महाकाल एक तपस्वी के रूप में श्रीराम दरबार में पहुंचे। द्वार पर उनकी भेंट लक्ष्मण से हुई तथा...

#

बालि और सुग्रीव का जन्म

बालि और सुग्रीव का जन्म ऋष्यमूक पर्वत का नाम ऋष्यमूक पर्वत श्रेणियों के अन्तर्गत एक पर्वत पर एक विशाल बानर रहता था, जिसका नाम ऋक्षराज था ।किसी ने उससे पूछा कि इस पर्वत का नाम ऋष्यमूक क्यों पड़ा?...

#

जब हनुमान जी से हारे शनि देव

शनि के नाम से ही हर व्यक्ति डरने लगता है। शनि की दशा एक बार शुरू हो जाए तो साढ़ेसात साल बाद ही पीछा छोड़ती है। लेकिन हनुमान भक्तों को शनि से डरने की तनिक भी जरूरत नहीं। शनि ने हनुमान को भी डराना चाहा...

#

अहिल्या उद्धार

प्रातःकाल जब राम और लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ मिथिलापुरी के वन उपवन आदि देखने के लिये निकले तो उन्होंने एक उपवन में एक निर्जन स्थान देखा। राम बोले, "भगवन्! यह स्थान देखने में तो आश्रम जैसा...

#

क्षत्रिय राजा के रूप में विश्वामित्र

प्रजापति के पुत्र कुश, कुश के पुत्र कुशनाभ और कुशनाभ के पुत्र राजा गाधि थे। विश्वामित्र जी उन्हीं गाधि के पुत्र थे। विश्वामित्र शब्द विश्व और मित्र से बना है जिसका अर्थ है- सबके साथ मैत्री अथवा...

#

राम के साथ युद्ध में कुंभकर्ण

कुंभकर्ण एक राक्षस था और राजा रावण का भाई था। यहां तक कि अपने विशाल आकार और भोजन के लिए महान आग्रह के साथ, उन्हें अच्छे चरित्र का वर्णन किया गया था, हालांकि उन्होंने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने...

#

रामायण कथा: भगवान राम और केवट!

वन पहुंचे, नदी को पार करना जब भगवान श्री रामचंद्र सीता और लक्ष्मण के साथ वन पहुंचे तो उन्हें गंगा नदी को पार करना पड़ा। गुहा ने भगवान राम के निर्वासन के बारे में सुना था और उनकी मदद के लिए दौड़े...

#

जब हनुमान जी ने गरुड़, सुदर्शन चक्र तथा सत्यभामा का घमंड चूर किया

संसार में किसी का कुछ नहीं| ख्वाहमख्वाह अपना समझना मूर्खता है, क्योंकि अपना होता हुआ भी, कुछ भी अपना नहीं होता| इसलिए हैरानी होती है, घमण्ड क्यों? किसलिए? किसका? कुछ रुपये दान करने वाला यदि यह कहे...