एक प्रमुख कथा के अनुसार, गणेश भगवान के प्रेमी और भक्त थे जिन्होंने अपनी माता पार्वती के साथ एक दिन व्रत करने का निर्णय लिया। गणेश जी ने अपनी माता के साथ मिलकर व्रत किया और उन्होंने दिन भर बिना किसी अंतर्यामी को खाने का भ्रम न किया। इसके परिणामस्वरूप, उनकी पूजा का फल बहुतात्त्विक और अद्वितीय हो गया। सकट चतुर्थी को अपने भक्तों के बीच महत्वपूर्ण रूप से मनाने का विशेष कारण है क्योंकि इस दिन गणेश भगवान अपने भक्तों को विभिन्न कष्टों, संघर्षों, और समस्याओं से मुक्ति प्रदान करने के लिए आते हैं। इसलिए, यह तिथि उनकी कृपा और आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए एक शुभ अवसर मानी जाती है।
गणेश किसी भी धार्मिक जुलूस या उत्सव के दौरान पूजा के पहले देवता थे। ऐसा कहा जाता है कि भगवान गणेश की मां, देवी पार्वती ने हल्दी पाउडर से एक लड़के की मूर्ति बनाई और उसमें प्राण फूंक दिए, जबकि उनके पति भगवान शिव को इसकी जानकारी नहीं थी।
भगवान गणेश ने कौए का रूप धारण किया और उस स्थान पर पहुंचे जहां ऋषि अगस्त्य तपस्या कर रहे थे। उन्होंने नीचे की ओर उड़ान भरी और कमंडल को गिरा दिया और कावेरी नदी को छोड़ दिया