हिंदू धर्म में यज्ञ की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। धर्म ग्रंथों में मनोकामना पूर्ति व किसी बुरी घटना को टालने के लिए यज्ञ करने के कई प्रसंग मिलते हैं। रामायण व महाभारत में ऐसे अनेक राजाओं का वर्णन मिलता है, जिन्होंने अनेक महान यज्ञ किए थे। देवताओं को प्रसन्न करने के लिए भी यज्ञ किए जाने की परंपरा है।
दशरथ ने पुत्र कामना हेतु अश्वमेघ तथा पुत्रकामेष्टि यज्ञ किया था इस यज्ञ के माध्यम से वह अपने यजमानी की इच्छा के अनुसार पुत्र प्राप्ति के आशीर्वाद का आश्रय लेने का प्रयास किया था। रामायण में, इस यज्ञ का वर्णन किया गया है, जो बाद में रामायण के कई घटनाओं को प्रेरित करता है। परिणामस्वरूप श्रीराम सहित चार पुत्र जन्मे। राजा दशरथ का यह यज्ञ ऋषि ऋष्यशृंग ने संपन्न करवाया था।
दशरथ के अश्वमेघ तथा पुत्रकामेष्टि यज्ञ को शृंगि ऋषि ने पूर्ण कराया
राजा दशरथ की पत्नियों के कौशल्या, सुमित्रा तथा कैकेयी नाम थे
कौशल्या - वे रामचंद्र भगवान की माता थीं।
कैकेयी - वे भरत के माता थीं।
सुमित्रा - वे लक्ष्मण और शत्रुघ्न की माता थीं।
इन तीनों माताओं के बाद, राजा दशरथ की और भी कई पत्नियाँ थीं जो उनके राजा की परिषद का हिस्सा थीं, परंतु ये तीन माताएं उनकी प्रमुख पत्नियाँ थीं।
कैकेयी चाहती थीं कि उनके पुत्र भरत को अयोध्या के राजा के रूप में ताज पहनाया जाए। वह दशरथ के ज्येष्ठ राम के प्रति समस्त अयोध्या की भावनाओं को जानती थी।
राजा दशरथ अज व इन्दुमती के पुत्र थे। राजा अज हिंदू पौराणिक कथाओं में एक महान राजा थे, और इंदुमती उनकी पत्नी थीं। राजा अज और इंदुमती की कहानी प्राचीन भारतीय महाकाव्य, "महाभारत" में बताई गई है। अजा अपनी बहादुरी और धार्मिकता के लिए जाना जाता था, और उसने अपने राज्य पर ज्ञान और करुणा के साथ शासन किया। इंदुमती अपनी सुंदरता और गुणों के लिए जानी जाती थी। दंपति को विभिन्न परीक्षणों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जिसमें बच्चा पैदा करने की चुनौती भी शामिल थी। उनकी भक्ति और दृढ़ता के माध्यम से, उन्हें राजा दशरथ नामक एक पुत्र का आशीर्वाद मिला, जो बाद में हिंदू महाकाव्य "रामायण" के केंद्रीय पात्र भगवान राम के पिता बने।