ऋष्यशृंग या श्रृंगी ऋषि ऋष्यशृंग या श्रृंगी ऋषि वाल्मीकि रामायण में एक पात्र हैं जिन्होंने राजा दशरथ के पुत्र प्राप्ति के लिए अश्वमेध यज्ञ तथा पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराये थे। वह विभाण्डक ऋषि के पुत्र तथा कश्यप ऋषि के पौत्र बताये जाते हैं। उनके नाम को लेकर यह उल्लेख है कि उनके माथे पर सींग...
कबन्ध एक गन्धर्व था जो कि दुर्वासा ऋषि के शाप के कारण राक्षस बन गया था। राम ने उसका वध करके राक्षस योनि से उसका उद्धार किया। एक अन्य कथा के अनुसार यह "श्री" नामक अप्सरा का पुत्र था और "विश्वावसु "नाम का गंधर्व था | यह अत्यंत सुंदर बलशाली तथा इच्छा के अनुसार रूप धारण करने वाला था एक बार इसने बड़ा...
संत तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में लिखा है कि काकभुशुण्डि (काकभुशंडी) परमज्ञानी रामभक्त हैं।रावण के पुत्र मेघनाथ ने राम से युद्ध करते हुये राम को नागपाश से बाँध दिया था। देवर्षि नारद के कहने पर गरूड़, जो कि सर्पभक्षी थे, ने नागपाश के समस्त नागों को प्रताड़ित कर राम को नागपाश...
कालनेमि रामायण में एक मायावी राक्षस है। कालनेमि का उल्लेख सनातन धर्म से संबंधित रामायण काव्य में आता है जब लंका युद्ध के समय रावण के पुत्र मेघनाद द्वारा छोड़े गए शक्तिबाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गये तो सुषेन वैद्य ने इसका उपचार संजीवनी बूटी बताया जो कि हिमालय पर्वत पर उपलब्ध था। हनुमान ने...
कुम्भकर्ण रामायण के एक प्रमुख पात्र का नाम है। वह ऋषि व्रिश्रवा और दैत्यिनी कैकसी का पुत्र तथा लंका के राजा रावण का छोटा भाई था। कुम्भ अर्थात घड़ा और कर्ण अर्थात कान, बचपन से ही बड़े कान होने के कारण इसका नाम कुम्भकर्ण रखा गया था।यह विभीषण और शूर्पनखा का बड़ा भाई था। बचपन से ही इसके अंदर बहुत...
वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान राम के छोटे पुत्र कुश थे और बड़े पुत्र लव थे | कुश से वर्तमान कछवाहा का वंश चला ।लव व कुश ने राम के अश्वमेघ घोड़े को पकड़ कर राम को युद्ध के लिये चुनौती दे डाली थी।अयोध्या के सभी वीरों को छोटे से बालक ने हराकर यह सिद्ध कर दिया था; शक्ति का गुरूर खतरनाक होता है।लव...
केवट रामायण का एक पात्र है जिसने वनगमन के समय राम, सीता और लक्ष्मण को अपनी नाव में बैठाकर गंगा पार करवाया था। इस कथा का वर्णन रामायण के अयोध्याकाण्ड में किया गया है। केवट हरीवंश कीर समाज का था। केवट श्री रामचन्द्र का अनन्य भक्त था। कहा जाता है कि सृष्टि के आरम्भ में जब सम्पूर्ण जगत जलमग्न था...
हनुमान के पिता का नाम केसरी था जो वानरो के सम्राट थे। अंजना केसरी की पत्नी थी। भगवान हनुमान वानर राज केसरी तथा अंजना के पुत्र थे हनुमान जी की माता अंजना वास्तव मैं स्वर्ग की अप्सरा थी जिन्होंने शाप के कारण मानव योनि में जन्म लिया था हनुमान जी के पिता केसरी देवताओं के गुरु बृहस्पति के पुत्र...
कैकसी असुर नरेश रावण और उनके भाई कुम्भकर्ण , विभीषण , महिरावण और अहिरावण की माता और महर्षि विश्रवा की पत्नी थी। उन्हें निकषा और केशिनी के नाम से भी जाना जाता है।
कौशल्याकौशल्या रामायण की एक प्रमुख पात्र हैं। वे कौशल प्रदेश (छत्तीसगढ़) की राजकुमारी तथा अयोध्या के राजा दशरथ की पत्नी थीं। कौशल्या को राम की माता होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
खर दूषणखर-दूषण महाबलशाली राक्षस थे जो दण्डक वन में निवास करते थे। रामायण के अनुसार खर दूषण रावण के रिश्ते के भाई थे। जब लक्ष्मण ने सूपर्णखा के नाक कान काट दिए थे तो वो रोती हुयी खरदूषण के पास गयी जो वही चित्रकूट के समीप रहते थे। वो दोनों चौदह सहस्त्र सेना लेकर राम लक्ष्मण से युद्ध करने आये...
जटायुजटायु रामायण के एक प्रसिद्ध चील रूपी पात्र है। जब रावण सीता का हरण करके लंका ले जा रहा था तो जटायु ने सीता को रावण से छुड़ाने का प्रयत्न किया था। इससे क्रोधित होकर रावण ने उनके पंख काट दिये थे जिससे वह भूमि पर जा गिरे। जब राम और लक्ष्मण सीता को खोजते-खोजते वहाँ पहुँचे तो जटायुजी से ही सीता...