सच्चा वीर युयुत्सु
धृतराष्ट्र के एक वैश्य वर्ण की पत्नी थी| उसी के गर्भ से युयुत्सु का जन्म हुआ था| युयुत्सु का स्वभाव गांधारी के सभी पुत्रों से बिलकुल अलग था| वह आपसी कलह और विद्वेष का विरोधी था और सदा धर्म और न्याय...
पांडवों तथा कौरवों का जन्म
एक बार राजा पाण्डु अपनी दोनों पत्नियों - कुन्ती तथा माद्री - के साथ आखेट के लिये वन में गये। वहाँ उन्हें एक मृग का मैथुनरत जोड़ा दृष्टिगत हुआ। पाण्डु ने तत्काल अपने बाण से उस मृग को घायल कर दिया।...
ऐसे बचाई द्रौपदी की लाज
युधिष्ठिर जुए में अपना सर्वस्व हार गए थे| छलपूर्वक, शकुनि ने उनका समस्त वैभव जीत लिया था| अपने भाइयों को, अपने को और रानी द्रौपदी को भी बारी-बारी से युधिष्ठिर ने दांव पर रखा| जुआरी की दुराशा उसे बुरी...
अर्जुन का अहंकार
एक बार अर्जुन को अहंकार हो गया कि वही भगवान के सबसे बड़े भक्त हैं। उनकी इस भावना को श्रीकृष्ण ने समझ लिया। एक दिन वह अर्जुन को अपने साथ घुमाने ले गए। रास्ते में उनकी मुलाकात एक गरीब ब्राह्मण से हुई।...
शांतिदूत श्रीकृष्ण |
विराट की राज सभा में मंत्रणा तेरहवां वर्ष पूरा होने पर पाण्डव विराट की राजधानी छोड़कर एक अन्य नगर उपलव्य में रहने लगे। उपलव्य नगर विराट राज्य में ही था। अज्ञातवास की अवधि पूरी हो चुकी थी, इसलिए...
कपटी शकुनि
शकुनि गांधारराज सुबल का पुत्र था | गांधारी इसी की बहन थी | वह गांधारी के स्वभाव से विपरीत स्वभाव वाला था | जहां गांधारी के स्वभाव में उदारता, विनम्रता, स्थिरता और साधना की पवित्रता थी, वहीं शकुनि के...