कुंभकरण से भगवान इंद्र देव काफी ईर्ष्या रखते थे क्योंकि उनको डर था कि कुंभकर्ण भगवान ब्रह्मा से इंद्रासन ना मांग ले. ऐसे में जब कुंभकर्ण ब्रह्म देव से वर मांग रहा था, तब इंद्र देव ने कुंभकरण की मतिभ्रष्ट कर दी. कहा जाता है कि इस वजह से कुंभकरण ने इंद्रासन की जगह निद्रासन मांग लिया