रामचरित मानस में इस बात का उल्लेख है कि भगवान राम और रावण के युद्ध के दौरान अहिरावण वानर का रूप धरकर रामजी की सेना में शामिल हो गया था। रात्रि में वह अपनी जादुई शक्ति से सबको मूर्छित कर श्रीराम एवं लक्ष्मण का अपहरण कर उन्हें पाताल लोक ले गया था।
सुरसा सहमति देती है और समुद्र में हनुमान के मार्ग को बाधित करती है।
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