रामायण (संस्कृत : रामायणम् = राम + आयणम् ; शाब्दिक अर्थ : 'राम की जीवन-यात्रा') रामायण को आदिकाव्य कहा जाता है, क्योंकि इसने वैदिक संस्कृत से भिन्न लौकिक संस्कृत में काव्यधारा का प्रवर्तन किया। इसके रचयिता वाल्मीकि आदिकवि कहे जाते हैं। जिन्होंने राम भगवान के जीवन को लोगो तक पहुंचाया। जबकी तुलसीदास द्वारा रामचरितमानस की रचना करीबन 465 वर्ष पूर्व की थी। वाल्मीकि रामायण को सबसे ज्यादा प्रमाणिक इसलिए भी माना जाता है क्योंकि वाल्मीकि भगवान राम के समकालीन ही थे और सीता ने उनके आश्रम में ही लव-कुश को जन्म दिया था।
किंवदंती है कि मंदोदरी अपने पिछले जन्म में मधुरा नाम की एक दिव्य कन्या थी। उन्होंने देवी पार्वती के श्राप के परिणामस्वरूप पृथ्वी पर एक महिला के रूप में जन्म लिया जिसके कारण वह एक मेंढक बन गईं।
सुषेण वैद्य ने भगवान राम के जीवन संकट के लिए भगवान राम को संजीवनी बूटी के बारे में बताया था। लंका के एक वैद्य सुषेण जी ने लंका के राजा रावण के छोटे भाई विभीषण को कहाँ के बारे में बताया था। तब हनुमान जी लंका गए और विभीषण के कहे अनुसार सुषेण वैद्य को उनके घर सहित ले आएं। जब वैद्य जी आये तो इलाज से मना कर दिया क्योंकि वे राम के भाई थे या श्री राम रावण के शत्रु फिर विभीषण जी के समझने के बाद उनके इलाज के लिए माने फिर वैद्य जी ने बताया की संजीवनी ही एक आखिरी रहता है फिर हनुमान जी जा करके बूटी की जगह पूरा पहाड़ ही ले आये, तब लक्ष्मण जी की जान बच गयी।