अंगद और अक्षकुमार सहपाठी थे,अंगद को श्राप मिला था कि जैसे ही अक्षकुमार से सामना होगा,अंगद के जीवन को खतरा था।, लंका के वैभव विलास के मायाजाल में फँसने का भय। (3) भगवान ने मुद्रिका हनुमान जी को दी थी।
केवट रामायण का एक विशेष पात्र है, जिसने वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम को माता सीता और लक्ष्मण के साथ अपनी नाव में बिठाकर गंगा पार कराया था। रामायण के अयोध्या कांड में निषादराज केवट का वर्णन मिलता है।
माता सीता ने उनको बताया था कि सिन्दूर से अपने स्वामी की दीर्घायु होते है और हमेशा खुश रहते है उस समय से ही हनुमान जी को सिंदूर अति प्रिय है और सिंदूर अर्पित करने वाले पर हनुमान जी प्रसन्न रहते हैं।