माना जाता है कि रावण का महल परिसर श्रीलंका की तत्कालीन राजधानी लंकापुरा के प्राचीन शहर में त्रिकुटा पर्वत की चोटी पर स्थित था।
वानरराज बाली किष्किंधा का राजा था और सुग्रीव का बड़ा भाई था. बालि को वरदान प्राप्त था कि उसके सामने जो भी यद्ध के लिए आएगा, उसका आधा बल बाली को प्राप्त हो जाएगा. उसने इस वरदान के कारण ही लंका के राजा रावण को हराया था और उसको छः माह तक कांख में रखा। उसके घमंड को तोड़ दिया रावण ने बाली से माफ़ी भी मांगी। बड़े राक्षसों को यमलोक पहुंचा दिया था
माता सीता ने उनको बताया था कि सिन्दूर से अपने स्वामी की दीर्घायु होते है और हमेशा खुश रहते है उस समय से ही हनुमान जी को सिंदूर अति प्रिय है और सिंदूर अर्पित करने वाले पर हनुमान जी प्रसन्न रहते हैं।