पौराणिक कथायें से संबंधित प्रश्न और उत्तर

शनि देव पर है शिव की कृपा जब शनि अपनी माता के गर्भ में थे, तब छाया देवी शिव की आराधना कर रही थीं। इसलिए शनि ने भी भगवान शिव के प्रति भक्ति विकसित की। जब शनि का जन्म हुआ और उनके पिता को उनके जन्म पर संदेह हुआ, तो भगवान शिव सूर्य देव के सामने प्रकट हुए और शनि के काले होने का कारण स्पष्ट किया।

इस चरण में जातक उच्च कोटि का अधिकारी, साहसी, सत्यभाषी, धनवान, दृढ़ इच्छाशक्ति वाला, कार्य में कुशल, मुंह में पानी लाने वाला, कम खर्चीला, कलात्मक होता है। गलत संगत का व्यक्ति लीवर में तरल पदार्थ बनने से परेशान रहेगा।

एक प्रमुख कथा के अनुसार, गणेश भगवान के प्रेमी और भक्त थे जिन्होंने अपनी माता पार्वती के साथ एक दिन व्रत करने का निर्णय लिया। गणेश जी ने अपनी माता के साथ मिलकर व्रत किया और उन्होंने दिन भर बिना किसी अंतर्यामी को खाने का भ्रम न किया। इसके परिणामस्वरूप, उनकी पूजा का फल बहुतात्त्विक और अद्वितीय हो गया। सकट चतुर्थी को अपने भक्तों के बीच महत्वपूर्ण रूप से मनाने का विशेष कारण है क्योंकि इस दिन गणेश भगवान अपने भक्तों को विभिन्न कष्टों, संघर्षों, और समस्याओं से मुक्ति प्रदान करने के लिए आते हैं। इसलिए, यह तिथि उनकी कृपा और आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए एक शुभ अवसर मानी जाती है।