गोवर्धन पूजा को अन्नकूट या अन्नकूट (जिसका अर्थ है "भोजन का पहाड़") के रूप में भी जाना जाता है, जिसमें भक्त गोवर्धन पर्वत (एक पहाड़ी) की पूजा करते हैं और कृतज्ञता के प्रतीक के रूप में 56 प्रकार के शाकाहारी भोजन और मिठाइयाँ (छप्पन भोग) चढ़ाते हैं।
अलग-अलग संप्रदायों में खरमास के प्रति विचार अलग हो सकते हैं, क्यों कि ये धार्मिक मान्यताएं, परंपराएं, और स्थलों के अनुरूप बदल सकते हैं। हिंदू धर्म में खरमास को कुछ लोग अशुभ मानते हैं, और इस समय पर शुभ कार्यों का आरंभ नहीं करते हैं। शादी, गृहप्रवेश, या अन्य महत्वपूर्ण पूर्ण कार्यक्रम से बचने का प्रयास किया जाता है। पुरोहित या धार्मिक गुरुओं की सलाह लेकर लोग खरमास के दौरान व्रत, पूजा और आध्यात्मिक क्रियाएं करते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में, जैसे कि उत्तर और दक्षिण भारत, खरमास के प्रति दृष्टि में अंतर हो सकता है। कुछ स्थानों में लोग इस पर अधिक ध्यान देते हैं, जबकी कुछ में ये महत्व काम होता है।
एक प्रमुख कथा के अनुसार, गणेश भगवान के प्रेमी और भक्त थे जिन्होंने अपनी माता पार्वती के साथ एक दिन व्रत करने का निर्णय लिया। गणेश जी ने अपनी माता के साथ मिलकर व्रत किया और उन्होंने दिन भर बिना किसी अंतर्यामी को खाने का भ्रम न किया। इसके परिणामस्वरूप, उनकी पूजा का फल बहुतात्त्विक और अद्वितीय हो गया। सकट चतुर्थी को अपने भक्तों के बीच महत्वपूर्ण रूप से मनाने का विशेष कारण है क्योंकि इस दिन गणेश भगवान अपने भक्तों को विभिन्न कष्टों, संघर्षों, और समस्याओं से मुक्ति प्रदान करने के लिए आते हैं। इसलिए, यह तिथि उनकी कृपा और आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए एक शुभ अवसर मानी जाती है।