शरीर और आत्मा को शुद्ध करने के लिए पवित्र नदियों या जलाशयों में डुबकी लगाना शुभ माना जाता है। कई लोग अमावस्या के दिन अपने पूर्वजों का सम्मान करने के लिए अनुष्ठान करते हैं और प्रार्थना करते हैं। यह अक्सर तर्पण (जल चढ़ाना) और पिंड दान (चावल के गोले चढ़ाना) के माध्यम से किया जाता है। कुछ व्यक्ति तपस्या और आध्यात्मिक अनुशासन के रूप में अमावस्या का व्रत रखना चुनते हैं। अमावस्या के दिन दान के कार्य, जैसे जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े या धन का दान करना पुण्य माना जाता है। अमावस्या पर परमात्मा से जुड़ने के लिए ध्यान, प्रार्थना और आध्यात्मिक अभ्यास में संलग्न होना एक आम बात है। दीपक या दीया जलाना अंधेरे और अज्ञानता को दूर करने, किसी के जीवन में प्रकाश लाने का प्रतीक है। अमावस्या के दिन शारीरिक और मानसिक स्वच्छता बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। इसमें घर की सफाई करना और शुद्ध और सकारात्मक मानसिकता अपनाना शामिल है।
सफला एकादशी का अर्थ सौभाग्य, भाग्य, धन, समृद्धि, सफलता और वृद्धि के द्वार खुलने का प्रतीक है।
षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा का क्रम सुरक्षित करें। इसमें विष्णु के मूर्ति या फोटो की स्थापना, स्नान, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ और अन्य विष्णु स्तुतियाँ शामिल हो सकती हैं।षटतिला एकादशी के दिन नींद और विश्राम के बाद उठकर व्रत का पालन करें। उपवास का पूर्णता से पालन करने के लिए अनाज, दाल, फल, और दूध का सेवन न करें। व्रत के दिन अर्पित किए गए सात्विक आहार का सेवन करें। भगवान की पूजा को श्रद्धाभाव से करें और मन, वचन, और क्रिया से विष्णु भगवान की भक्ति में रत रहें।षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की कथा को सुनना या पढ़ना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे भक्ति और श्रद्धा में वृद्धि होती है। भगवान की पूजा के बाद ध्यान और मनन के लिए समय निकालें। आत्मा के साथ संवाद में रहने के लिए मनन का समय बिताएं।