पौराणिक कथायें से संबंधित प्रश्न और उत्तर

सकट चतुर्थी का महत्व हिन्दू धर्म में बहुतात्त्विक रूप से माना जाता है और इसे भगवान गणेश की पूजा और आराधना के लिए विशेष रूप से मनाया जाता है। इस पर्व का महत्व विभिन्न पौराणिक कथाओं और लोककथाओं से जुड़ा हुआ है, जिनमें भगवान गणेश के भक्तों को उनकी आपाधापी से मुक्ति प्राप्त होती है। सकट चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से भक्तों को उनकी कृपा प्राप्त होती है और वह अपने भक्तों के कष्टों और संघर्षों को दूर करने में मदद करते हैं। इस पर्व का मनाने से लोग आपसी समर्थन, सुख, और समृद्धि की कामना करते हैं। यह एक परिवार और समाज में समृद्धि की प्राप्ति की आशा को दर्शाता है। सकट चतुर्थी का महत्व विघ्न निवारण में है, यानी किसी भी कठिनाई या बाधा को दूर करने में मदद करने में। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, यानी विघ्नों को दूर करने वाला, माना जाता है।

ऐसा माना जाता है कि जिस दिन अब दिवाली के रूप में मनाया जाता है, उस दिन राक्षस नरकासुर का वध करने के बाद, भगवान कृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने गए, जिन्होंने उनके माथे पर तिलक लगाकर उनका स्वागत किया। तभी से यह दिन भाई दूज के रूप में मनाया जाता है।

कार्तिकेय जी का सवारी का नाम मोर है