संस्कृत में - "ॐ प्राँ प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः ॥" अंग्रेजी में - "ओम प्राम प्रीम प्रौम सह शनैश्चराय नमः।" अर्थ - "मैं अपने सभी दुखों को दूर करने और मुझे शांति और संतोष प्रदान करने के लिए शनिदेव का ध्यान करता हूं।"
कुछ लोग खरमास का पालन करते हैं, उनका धार्मिक विश्वास क्यों कहते हैं कि इस समय पर शुभ कार्य नहीं किया जा सकता। वही दूसरे लोग इस पर विशेष ध्यान नहीं देते हैं और अपना कार्य जारी रखते हैं। ये व्यक्ति के व्यक्तित्व विशेषज्ञान और उनके धार्मिक मान्यताओं पर निर्भर करता है। हर व्यक्ति को अपने विचार, धार्मिक मान्यताएं, और क्षेत्र के अनुरूप खुद का फैसला करना चाहिए कि क्या उसको खरमास के नियमों का पालन करना चाहिए या नहीं। यदि किसी व्यक्ति को इस पर विशेष विश्वास नहीं है, तो उसका उपयोग अपने जीवन में आगे बढ़ने में होता है और अपने कार्यों को निश्चित रूप से अंजाम देने में स्वतंत्रता होती है।
सकट चतुर्थी एक हिन्दी हिन्दू पर्व है जो गणेश जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व भारतीय हिन्दू समुदाय में विशेष रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात, ओड़ीशा, चट्टीसगढ़ और मध्य प्रदेश राज्यों में मनाया जाता है। इस पर्व को भगवान गणेश की पूजा और अर्चना के रूप में मनाया जाता है। सकट चतुर्थी को चतुर्थी तिथि को माघ मास के कृष्ण पक्ष में मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश की मूर्ति पूजा जाती है और विशेष प्रकार के भोग उपहार चढ़ाए जाते हैं। पूजा के बाद, व्रती लोग चाँदी के साकट (चाँदी का सिक्का) को पूजा के रूप में दान करते हैं।