एक लाल कपड़ा लें और उस पर कलश स्थापित करें। कलश को चावल, 21 कमल के बीज और 5 साबुत सुपारी से भरें। इसके ऊपर गंगाजल और चीनी से भरा एक छोटा बर्तन रखें। बर्तन पर चांदी के सिक्के रखें और फूलों की माला से सजाएं।
मनोजवं मारुत तुल्यवेगं ,जितेन्द्रियं,बुद्धिमतां वरिष्ठम् ||
वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं, श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ||
आरती
आरती कीजै हनुमान लला की | दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
जाके बल से गिरवर कांपे | रोग दोष जाके निकट ना झांके ॥
अंजनी पुत्र महा बलदाई | संतन के प्रभु सदा सहाई ॥
दे वीरा रघुनाथ पठाये | लंका जाये सिया सुधी लाये ॥
लंका सी कोट संमदर सी खाई | जात पवनसुत बार न लाई ॥
लंका जारि असुर संहारे | सियाराम जी के काज संवारे ॥
लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे | आनि संजिवन प्राण उबारे ॥
पैठि पताल तोरि जम कारे| अहिरावन की भुजा उखारे ॥
बायें भुजा असुर दल मारे | दाहीने भुजा सब संत जन उबारे ॥
सुर नर मुनि जन आरती उतारे | जै जै जै हनुमान उचारे ॥
कंचल थाल कपूर लौ छाई | आरती करत अंजनी माई ॥
जो हनुमान जी की आरती गाये | बसहिं बैकुंठ परम पद पायै ॥
लंका विध्वंस किये रघुराई | तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥
आरती किजे हनुमान लला की | दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
शंख (पाञ्चजन्य),चक्र (सुदर्शन), गदा (कौमोदकी) और पद्म, धनुष (सारंग), तलवार नंदक और फरसा परशू !