शेषनाग का निवास स्थान क्षीर सागर है उनको भगवान विष्णु की शैय्या भी कहते है जिस पर लक्ष्मी नारायण विराजमान रहते है मान्यताओं के अनुसार शेष ने अपने पाश्चात वासुकी और वासुकी ने अपने पश्चात् तक्षक को नागों का राजा बनाया वह सारे ग्रहों को अपनी कुंडली पर धरे हुए हैं। एक बार शेषनाग इस पृथ्वी को अपने फन पर धारण किया था। और तब से आज तक यह पृथ्वी शेषनाग के फन पर ही टिकी है।
शेषनाग, जिसे अक्षय नाग भी कहा जाता है, हिन्दू पौराणिक ग्रंथों में एक महत्वपूर्ण नागराज के रूप में उल्लेख किया गया है। उनका निवास स्थान पाताल लोक कहा जाता है। पाताल लोक भारतीय पौराणिक संस्कृति में दर्शाया गया है कि यह भूमंडल के नीचे स्थित है, जहां नाग और अन्य अद्भुत प्राणियों का निवास है। शेषनाग को भगवान विष्णु के शेषशायी रूप के रूप में भी जाना जाता है, जो भगवान विष्णु के शयनकक्ष (शायनकक्ष) पर शेषनाग के ऊपर शयन करते हैं। इसके साथ ही उन्हें सृष्टि के संरक्षक के रूप में भी माना जाता है।
धर्म ग्रंथो के अनुसार कालिया नाग के 100 सिर (फन) बताये जाते हैं !
पक्षीराज गरुड़ से शत्रुता हो जाने के कारण वह यमुना नदी में रहने लगा था।
लक्ष्मण को हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु के एक अवतार, यानी की शेषनाग का अवतार माना जाता है। और श्री राम के छोटे भाई है। वह भगवान राम के चारों भाइयों में से एक थे और लक्ष्मण को हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु के अवतार राम का भाई माना जाता है। उन्होंने भगवान राम के साथ उनकी पत्नी सीता का अपहरण के बाद वनवास और वनवास के दौरान उनका सहारा दिया था। लक्ष्मण को धर्म, समर्पण, और भक्ति के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। वह रामायण में महत्वपूर्ण पात्र निभाते हैं और उनका संयुक्त चित्रण भारतीय समाज में भक्ति और विश्वास का प्रतीक है। लक्ष्मण ने अपने भाई राम और भाबी सीता के साथ अयोध्या के वनवास के दौरान उनकी सहायता की और उनके साथ वन में रहकर अनेक कठिनाइयों का सामना किया।
ऋषि दुर्वासा के क्रोध से बचाने के लिए श्रीराम ने दिया था लक्ष्मण को इस तरह का दंड। यम देव को दिए वचन से बंधे थे श्रीराम। जानिए क्या है इस घटना की पौराणिक कथा। Shri Ram and Laxman: रामायण में वर्णित है कि श्रीराम ने न चाहते हुए भी प्राण से अधिक प्रिय अपने लघु भ्राता लक्ष्मण को मृत्युदंड दिया था।