धर्म ग्रंथो के अनुसार कालिया नाग के 100 सिर (फन) बताये जाते हैं !
इनका विवाह रेवत की कन्या रेवती के साथ हुआ था। रेवती महाराज रेवतक की पुत्री थीं। इनका जन्म दिव्य अग्नि से हुआ था। रेवती बेहद सुंदर थीं। साथ ही शील गुणों से भी ये परिपूर्ण थीं। जब रेवती बड़ी हुई और विवाह के योग्य हुई तो उसने निश्चय किया कि विवाह करेगी तो उस व्यक्ति से जो दुनिया में सबसे ज्यादा बलशाली होगा। इन्हें बलभद्र, दाऊ सहित अन्य नामों से भी जानते हैं। हाथों में हल व शरीर पर नीला वस्त्र धारण किए भगवान बलराम का रूप देखने को मिलता है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को इनका जन्म हुआ। इनकी जयंती हलछठ के नाम से भी प्रचलित है।
मान्यतानुसार कालिया एक अत्यन्त विषैला नाग था। मान्यता है कि इस पांच फण वाला नाग था। नंदगाँव के वन वृन्दावन में यमुना के अन्दर रहता था। वह कश्यप ऋषि का कद्रू के गर्भ से उत्पन्न पुत्र था।
बलराम के अन्य नाम
संकर्षणसंकर्षण - जब बलराम गर्भ में थे, जब गर्भ का संकर्षण किया गया था, इसीलिए इनका नाम 'संकर्षण' हुआ था।
अनन्त - वेदों में यह कहा गया है कि इनका कभी अंत नहीं होता, इसीलिए ये 'अनन्त' कहे गये हैं।
बलदेव - इनमें बल की अधिकता है। इसीलिए इनको 'बलदेव' कहते हैं।
हली - बलराम हल धारण को धारण करते हैं, इसीलिए इनका एक नाम 'हली' हुआ है।
शितिवासा - नील रंग का वस्त्र धारण करने से इन्हें 'शितिवासा' (नीलाम्बर) कहा गया है।
मुसली - बलराम मूसल को आयुध बनाकर रखते हैं, इसीलिए 'मुसली' कहे गये हैं।
रेवतीरमण - रेवती के साथ इनका विवाह हुआ था, इसीलिए ये साक्षात 'रेवतीरमण' हैं।
रौहिणेय - रोहिणी के गर्भ में वास करने से इन महाबुद्धिमान संकर्षण को 'रौहिणेय' कहा गया है।
बलभद्र- बलबानों में सर्वश्रेष्ठ होने के कारण ही इन्हें 'बलभद्र' कहा जाता है।
पक्षीराज गरुड़ से शत्रुता हो जाने के कारण वह यमुना नदी में रहने लगा था।