बाली और रावण का युद्ध इस प्रकार हुआ की एक बार रावण किष्किंधा पर आक्रमण किया उसको अपनी ताकत पर घमंड था वह बलि को ललकार कर उसको पराजित करना चाहता था और किष्किंधा पर राज करना चाहता था परन्तु बाली ने उसको पराजित करके छः महीने तक आपकी बगल (कांख ) में दबाए रखा।
वानरराज बाली किष्किंधा का राजा था और सुग्रीव का बड़ा भाई था. बालि को वरदान प्राप्त था कि उसके सामने जो भी यद्ध के लिए आएगा, उसका आधा बल बाली को प्राप्त हो जाएगा. उसने इस वरदान के कारण ही लंका के राजा रावण को हराया था और उसको छः माह तक कांख में रखा। उसके घमंड को तोड़ दिया रावण ने बाली से माफ़ी भी मांगी। बड़े राक्षसों को यमलोक पहुंचा दिया था
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि लंका के अहंकारी राजा रावण को भगवान श्रीराम के सामने चार बार हार का सामना करना पड़ा था। रावण सबसे पहले किष्किंधा के राजा बाली से हारा था। बाली को ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त था कि वह जिससे भी लड़ेगा तो उसके दुश्मन या सामने वाले की शक्ति उसमे आ जाएगी। जिस कारण बाली रावण से ज़ादा शक्तिशाली था।