शांतिदूत श्रीकृष्ण |
विराट की राज सभा में मंत्रणा तेरहवां वर्ष पूरा होने पर पाण्डव विराट की राजधानी छोड़कर एक अन्य नगर उपलव्य में रहने लगे। उपलव्य नगर विराट राज्य में ही था। अज्ञातवास की अवधि पूरी हो चुकी थी, इसलिए...
आठ वसुओ का नश्वर पुरुषों के रूप में जन्म लेने का श्राप
मानव रूप में देवी गंगा राजा शांतनु गंगा नदी के किनारे टहल रहे थे जब उन्होंने इस अविश्वसनीय रूप से सुंदर महिला को देखा। वह मानव रूप में देवी गंगा थीं, लेकिन शांतनु को यह पता नहीं था। राजा उसकी सुंदरता...
कृपाचार्य तथा द्रोणाचार्य की कथा
गौतम ऋषि के पुत्र का नाम शरद्वान था। उनका जन्म बाणों के साथ हुआ था। उन्हें वेदाभ्यास में जरा भी रुचि नहीं थी और धनुर्विद्या से उन्हें अत्यधिक लगाव था। वे धनुर्विद्या में इतने निपुण हो गये कि देवराज...
भीष्म प्रतिज्ञा
एक बार हस्तिनापुर के महाराज प्रतीप गंगा के किनारे तपस्या कर रहे थे। उनके रूप-सौन्दर्य से मोहित हो कर देवी गंगा उनकी दाहिनी जाँघ पर आकर बैठ गईं। महाराज यह देख कर आश्चर्य में पड़ गये तब गंगा ने कहा,...
कपटी शकुनि
शकुनि गांधारराज सुबल का पुत्र था | गांधारी इसी की बहन थी | वह गांधारी के स्वभाव से विपरीत स्वभाव वाला था | जहां गांधारी के स्वभाव में उदारता, विनम्रता, स्थिरता और साधना की पवित्रता थी, वहीं शकुनि के...
अर्जुन कृष्ण युद्ध
एक बार महर्षि गालव जब प्रात: सूर्यार्घ्य प्रदान कर रहे थे, उनकी अंजलि में आकाश मार्ग में जाते हुए चित्रसेन गंधर्व की थूकी हुई पीक गिर गई| मुनि को इससे बड़ा क्रोध आया| वे उसे शाप देना ही चाहते थे कि...