धन्वंतरि ने ही आयुर्वेद को दुनिया के सामने प्रकट किया। उन्हें आज चिकित्सा विज्ञान की सभी शाखाओं के संरक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है। उन्होंने व्यवस्थित रूप से आयुर्वेद को आठ प्रभागों (अष्टांगों) में विभाजित किया, जिनमें से प्रत्येक विभाग विशिष्टताओं का प्रतिनिधित्व करता था।