शिव पुराण से संबंधित प्रश्न और उत्तर

असुराचार्य, भृगु ऋषि तथा दिव्या के पुत्र जो शुक्राचार्य के नाम से अधिक विख्यात हैं। इनका जन्म का नाम 'शुक्र उशनस' है। पुराणों के अनुसार यह असुरों ( दैत्य , दानव और राक्षस ) के गुरु तथा पुरोहित थे।

शुक्राचार्य कहते हैं कि व्यक्ति अपने चरित्र (गुण) और कर्म (कर्म) जैसी मौलिक अवधारणाओं के आधार पर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र बन जाता है। पुस्तक आगे राजा को सलाह देती है कि वह अपनी जाति के बावजूद किसी भी पद पर अपने अधीनस्थों को नियुक्त करे।

शुक्राचार्य की बुद्धि बृहस्पति की तुलना में ज्यादा कुशाग्र थी, लेकिन फिर भी बृहस्पति के अंगऋषि ऋषि के पुत्र होने की वजह से उन्हें ज्यादा अच्छी शिक्षा मिलती थी, जिसके चलते एक दिन शुक्राचार्य ईर्ष्यावश उस आश्रम को छोड़ के सनकऋषि और गौतम ऋषि से शिक्षा लेने लगे...