स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, इसी स्थान पर राम ने सीता और लक्ष्मण के साथ निर्वासन के रास्ते में गंगा नदी को पार किया था। श्रृंगवेरपुर प्रयागराज के आसपास घूमने लायक जगह है।
रावण ने अपने पराक्रमी पुत्र अक्षयकुमार को भेजा, हनुमानजी ने उसको भी मार दिया। हनुमानजी ने अपना पराक्रम दिखाते हुए लंका में आग लगा दी। जब विभीषण रावण को छोड़कर श्रीराम की शरण में आए तो सुग्रीव, जामवंत आदि ने कहा कि ये रावण का भाई है।