पौराणिक कथायें से संबंधित प्रश्न और उत्तर

स्कन्द , कुमार , पार्वतीनन्दन , शिवसुत , गौरीपुत्र , षडानन आदि !

खरमास का समय चंद्रमा और तारों की गति पर आधारित है। कई लोग इस समय को अशुभ मानते हैं और इस अवधि के दौरान विवाह, गृहप्रवेश या अन्य महत्व अनुष्ठान जैसे अशुभ कार्यों से बचते हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि खरमास की अवधारणा अलग-अलग स्थानों और संस्कृतियों में भिन्न हो सकती है। कुछ लोग दूसरों को अधिक महत्व देते हैं तो कुछ उन पर विशेष ध्यान नहीं देते। यह एक धार्मिक मान्यता है और यह व्यक्ति के विचारों और धार्मिक समुदाय पर निर्भर करता है।

खरमास का अंतर हर वर्ष बदल सकता है और इसका निर्धारण आमतौर पर हिन्दू पंचांग के अनुसार किया जाता है। खरमास का अंतर शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से लेकर कृष्ण पक्ष की अमावास्या तिथि तक होता है। खरमास वार्षिक रूप से बदलता है, इसलिए इसका अंतर हर वर्ष विभिन्न हो सकता है। आपके स्थान और पंचांग के अनुसार, इसका अंतर बदल सकता है। आप अपने स्थानीय पंचांग या विशेषज्ञ से सहायता प्राप्त करके वर्तमान वर्ष के खरमास के अंतर की निश्चितता प्राप्त कर सकते हैं।