एक बार भगवान शिव की पत्नी पार्वती तपस्वी के जीवन और ठंडे हिमालय में रहने से थक गई। इसलिए, उन्होंने शिव से उनके लिए एक घर बनाने का अनुरोध किया, जहां दंपति एक उचित जीवन जी सकें।
हिंदू धर्म में वैशाख पूर्णिमा भगवान बुद्ध की जयंती से जुड़ी है और इसे आध्यात्मिक गतिविधियां करने के लिए शुभ माना जाता है। बौद्ध धर्म में, यह भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञानोदय और मृत्यु का स्मरण कराता है। जैन धर्म में, यह जैन भिक्षुओं द्वारा किए जाने वाले वर्षी-तप के नाम से जाने जाने वाले तीन महीने के उपवास की अवधि के अंत का प्रतीक है।
खरमास का अंतर हर वर्ष बदल सकता है और इसका निर्धारण आमतौर पर हिन्दू पंचांग के अनुसार किया जाता है। खरमास का अंतर शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से लेकर कृष्ण पक्ष की अमावास्या तिथि तक होता है। खरमास वार्षिक रूप से बदलता है, इसलिए इसका अंतर हर वर्ष विभिन्न हो सकता है। आपके स्थान और पंचांग के अनुसार, इसका अंतर बदल सकता है। आप अपने स्थानीय पंचांग या विशेषज्ञ से सहायता प्राप्त करके वर्तमान वर्ष के खरमास के अंतर की निश्चितता प्राप्त कर सकते हैं।