सुषेण वैद्य ने भगवान राम के जीवन संकट के लिए भगवान राम को संजीवनी बूटी के बारे में बताया था। लंका के एक वैद्य सुषेण जी ने लंका के राजा रावण के छोटे भाई विभीषण को कहाँ के बारे में बताया था। तब हनुमान जी लंका गए और विभीषण के कहे अनुसार सुषेण वैद्य को उनके घर सहित ले आएं। जब वैद्य जी आये तो इलाज से मना कर दिया क्योंकि वे राम के भाई थे या श्री राम रावण के शत्रु फिर विभीषण जी के समझने के बाद उनके इलाज के लिए माने फिर वैद्य जी ने बताया की संजीवनी ही एक आखिरी रहता है फिर हनुमान जी जा करके बूटी की जगह पूरा पहाड़ ही ले आये, तब लक्ष्मण जी की जान बच गयी।