श्रीकृष्ण
और सुदामा बचपन में ऋषि संदीपन के यहां शिक्षा पढ़ते थे तो उनकी मित्रता हुई थी। सुदामा ब्राह्मण परिवार और कृष्ण एक राजपरिवार से थे परंतु दोनों सच्चे और अच्छे मित्र होने की सीख दी है ।
मरते हुए कृष्ण ने जरा से करुण स्वर में कहा: “यह तुम्हारी गलती नहीं है; यह होना तय था। डरो मत और पछताओ मत क्योंकि ये नियति के तरीके हैं। ये धरती पर महापुरुष के अंतिम शब्द थे। क्योंकि, कृष्ण जानते थे कि कर्म का नियम सार्वभौमिक है।
सुदामा की गरीबी एक गहरा रहस्य जिसे सिर्फ श्रीकृष्ण ही जानते थे। इसलिए ही श्रीकृष्ण ने सुदामा की सहायता की और उन्हें धनवान बना दिया। दरअसल सुदामा जी के गरीब होने की वजह उनकी परम मित्रता ही थी।